Karmesh Vidhesh
Suresh Mayam Siddhashram Yogin Saankhy Swayam
Tvam Gyan Mayam Tvam
Tatv Mayam Nikhileshwar Guruvar Paahi Prabho
Trinity of gods (Tri Dev)
combine with their own shaktis and contribute towards dynamics of this universe
so that all three essential procedures of universal go on continuously. These
Tri Devs (Bramha, Vishnu, Shiva) and Tri Shaktis (3 Shaktis of them) have a
lots of types depending upon the work done by them, their respective position
in universe, their form and three Bhaavs. In the first line of this sloka, it
is said about those three forms which do the three karmas of creation,
maintenance and destruction.
Karmesh i.e. Kaarmik Dev or
Paalan (maintenance) Dev here represents Lord Vishnu, Vidhesh means lord of
knowledge i.e. Bramha and Suresh i.e. Dev of devs, in other words Mahadev in
Mahesh form. The signs of these three forms or the sequence of creation,
maintenance and destruction due to powers of these Trinity is evident here in
way that the combined Beej of them i.e. “A” of Bramha,”U” of Vishnu and “M” of
Mahesh becomes “AUM”. Thus, meaning of first line “Karmesh Vidhesh Suresh Mayam”
becomes “AUM”.
Second line Siddhashram Yogin
Saankhy Swayam means which is characteristic of yogis of Siddhashram .In other
words through this line; it is described about Shri Paramhans Nikhileshwaranand
and his basic form. Thus, through this line, it is told about Nikhileshwaranand
beej mantra i.e.”NIM”.So the real meaning of this line is “NIM”.
It is told further that which
includes knowledge and includes elements. Here we will discuss about Gyan
Mayam. As it has been said earlier also that there are many forms of Sadgurudev
and all forms are complete in itself. Sadgurudev’ form which includes knowledge
that is called Gyan Guru. Here this form of Sadgurudev has been mentioned. Beej
of Gyan Guru definitely activates all type of knowledge aspects and activated
Guru Element in the person. This Gyan Beej is “GUM”. And the next word is which
includes element, full of element. From elemental point of view, or based on
elements in terms of spiritual thinking there is one element which is important
base of all elements, upon which all elements work. Since behind every
composition there is definitely something or the other then there is bound to
be one element to be the base for composition of work of elements. That element
is Aakash element. Because Aakash element only provides base to Fire element or
Fire lump, through it when transformation of energy takes palace it gets
transformed and in split form it become Vayu element, in liquid form, it
becomes water element and in solid form it becomes earth element. That’s why
Aakash element has been called basic element or base element. In combined form,
meaning of all elements or in general parlance meaning of element is basic
element only. Here Tatv Mayam means Aakash element only whose beej is “HAM”.
Thus, basic meaning of Tvam Gyan Mayam Tvam Tatv Mayam here is “GUM” and
“HAM” beej. And last line Nikhileshwar Guruvar Paahi Prabho
means Nikhileshwaraay Namah.
In this manner complete mantra
becomes like
OM NIM GUM HAM NIKHILESHWARAAY
NAMAH
After chanting of this manta,
person attains knowledge to establish control over Aakash element and person
gets acquainted with the secrets of creation, maintenance and destruction.
======================================== कर्मेश विधेश सुरेश मयं सिद्धाश्रम योगिन् सांख्य स्वयं
त्वं ज्ञान मयं त्वं तत्व मयं
निखिलेश्वर गुरुवर पाहि प्रभो
सृष्टि
में ३ क्रम सतत क्रियान्वित रहे इस लिए त्रि देव अपनी शक्तियों से सम्मिलित हो
कर ब्रह्माण्ड की गतिशीलता में सतत अपना योगदान देते रहते है. त्रि देव तथा त्रि
शक्तियों के विविध स्वरुप है जो की उनके द्वारा सम्प्पन हो करे कार्य तथा
ब्रह्माण्ड में उनके स्थान तथा स्वरुप और त्रि भाव के कारण अनेक भेद से युक्त है.
इस श्लोक की प्रथम पंक्ति में उनके वही त्रिरूप के बारे में कहा है जो की त्रि
कर्म अर्थात सर्जन, पालन तथा संहार क्रम करते है.
कर्मेश
अर्थात कार्मिक देव या पालन देव का अर्थ यहाँ पर भगवान विष्णु से है, विधेश का
अर्थ ज्ञान के इश्वर अर्थात ब्रह्मा तथा सुरेश अर्थात देवो के देव का अर्थ महेश
रूप में महादेव से है. इन तीनों स्वरुप से परिपूर्ण अर्थात इन त्रिदेव की शक्ति से
परिपूर्ण यानी सर्जन, पालन तथा संहार क्रम के परिपूर्ण होने के संकेत यहाँ पर कुछ
इस प्रकार है की इनके इन स्वरुप का सम्मिलित बीज अर्थात ब्रह्म का ‘अ’ विष्णु का
‘उ’ तथा महेश का ‘म’ बीज. जो की साथ में मिल कर ‘ॐ’ बनता है. अतः इस प्रथम पंक्ति
‘कर्मेश विधेश सुरेश मयं’ का अर्थ यहाँ पर ‘ॐ’ है.
दूसरी
पंक्ति सिद्धाश्रम योगिन् सांख्य स्वयं का अर्थ है जो
सिद्धाश्रम के योगियों में विशेषक है. अर्थात इस पंक्ति के माध्यम से श्री परमहंस
निखिलेश्वरानंदजी के बारे में वर्णन किया गया है तथा उनके मूल स्वरुप के बारे में
उल्लेख है अतः इस पंक्ति के माध्यम से निखिलेश्वरानंद बीज मंत्र अर्थात ‘निं’ के
बारे में बताया गया है. यूँ इस पंक्ति का वास्तविक अर्थ ‘निं’
है.
इसके
आगे कहा है जो ज्ञान सम्मिलित है तथा तत्व सम्मिलित है. यहाँ पर पहले ज्ञानमयं के बारे में चर्चा
करेंगे. जेसा की इससे पहले भी कहा गया है, सदगुरु के कई स्वरुप होते है तथा सभी
स्वरुप अपने आप में पूर्ण है. सदगुरु का ज्ञान सम्मिलित जो स्वरुप है वह ज्ञान
गुरु कहलाता है. यहाँ पर सदगुरुदेव के इसी स्वरुप का उल्लेख हुआ है. ज्ञान गुरु का
बीज निश्चित रूप से सभी प्रकार के ज्ञान पक्ष को जागृत करता है तथा व्यक्ति में
गुरुतत्व को जागृत करता है. यह ज्ञान बीज ‘गुं’ है. और
आगे के शब्द है जो तत्व से सम्मिलित है, तत्व से परिपूर्ण है. तात्विक द्रष्टि से
या तत्वों के आधार पर आध्यात्म के विचार में सर्व तत्वों का मुख्य आधार एक ही तत्व
है, जिस पर सभी तत्व कार्य कर सकते है. क्यों की हर एक संरचना के पीछे कोई न कोई
होता ही है, तो फिर तत्वों के कार्यों की संरचना के आधार स्वरुप भी एक तत्व का
होना निश्चित ही है. वह तत्व आकाश तत्व है. क्यों की आकाश तत्व ही अग्नि पिंड या
अग्नि तत्व को आधार देता है, इसी के
माध्यम से ऊष्मा परिवर्तन होने पर वह रूपान्वित हो जाता है तथा विखंडित रूप में
वायुतत्व, तरल रूप में जल तत्व तथा ठोस रूप में पृथ्वी तत्व बनता है. इस लिए
आकाशतत्व को मूल तत्व या आधार तत्व भी कहा गया है. सम्मिलित रूप से समस्त तत्वों
या फिर सामन्य भाषा में तत्व का अर्थ आधार तत्व ही है. यहाँ पर भी तत्व मयं
का अर्थ आकाश तत्व से ही है. जिसका बीज है ‘हं’. अतः त्वं ज्ञान मयं त्वं तत्व मयं का मूल अर्थ यहाँ पर गुं और हं बीज
है. तथा श्लोक की आखरी पंक्ति निखिलेश्वर गुरुवर पाहि
प्रभो
का अर्थ निखिलेश्वराय नमः है.
इस
प्रकार यह पूर्ण मंत्र कुछ इस प्रकार बनता है.
ॐ निं गुं हं निखिलेश्वराय
नमः
इस
मंत्र के जाप से व्यक्ति आकाशतत्व पे नियंत्रण स्थापन करने का ज्ञान प्राप्त करता
है तथा सर्जन पालन और संहार के रहस्यों से परिचित होता है.
****NPRU****
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