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Wednesday, January 14, 2015

गुरु प्राप्ति प्रयोग





|| गुरु प्राप्ति प्रयोग ||

ॐ त्वमा वह वहै वद वै गुरौर्चन
घरै  सह प्रियन्हर्शेतु ||
हे गुरुदेव ! आप सर्वज्ञ हैं, हम इश्वर को नहीं पहचानते, उन्हें नहीं देखा है, पर आपको देखा है, और आपके द्वारा ही उस प्रभु के दर्शन सहेज, संभव हैं | हम  अपने ह्रदय को समर्पित कर आपका अर्चन पूजन करके पूर्णता प्राप्त करने आकांक्षी हैं | स्नेही स्वजन अंतर,

 विकास के लिए, दिव्यत्व प्राप्ति हेतु परम शिवत्व पाने हेतु हमें मार्गदर्शक की या पूर्ण सत्य के ज्ञाता सद्गुरु कि अत्यंत आवश्यकता होती है | जैसे प्राणों के बिना जीवन संभव नहीं उसी तरह बिना गुरु के ज्ञान संभव नहीं, शक्ति का विकास नहीं, अंधकार का नाश नहीं | गुरु कि आवश्यकता तो धन संपत्ति, कला और संगीत से भी अधिक है | गुरु कि आवश्यकता तो मित्र बंधू – बांधवों पत्नी – पुत्र आदि से भी अधिक है |

संसार में गुरु बहुत होते हैं, हर कोई अपना नया पंत बनाता है, परन्तु प्रत्येक सत्य गुरु का एक हि उद्धेश्य होता है जो शिष्य कि अंतर शक्ति को जागृत कर आप आनंद से परिपूर्ण कर दें | गुरु वह हैं जो शक्ति पात के माध्यम से अंतर शक्ति कि कुंडलिनी जगाता है, जहाँ योग शिक्षा देता है, वहीँ ज्ञान कि मस्ती भी देता है | जहाँ भक्ति का प्रेम देता है वहीँ कर्व में निष्कामता सिखा देता है और वही गुरु परम शिव स्वरुप होते हैं |

भाइयों – बहनों साधारण व्यक्ति को जो भी व्यक्ति चमत्कार दिखाता है वह उसे हि गुरु मान लेता है |  और फिर उससे कई अपेक्षाएं भी जुड़ ही जाती हैं, किन्तु जब उसके अंतर की क्षुधा शांत नहीं होती और जब श्रद्धा भंग होती है तो वह गुरुत्वा को पाखंड समझ लेता है, और ऐसा करने से वह सच्चे गुरु से ही दूर हो जाता है –
किन्तु, यदि हमारा अंतर जागृत हो, और तब हम गुरु से सम्पर्कित हों,  तब ऐसा हो ही नही सकता कि हमें पूर्ण प्राप्त न हों, और पूर्णता तो गुरु प्राप्ति से ही संभव है----- है ना ---J


प्रयोग विधान—

यह प्रयोग किसी भी गुरुवार से संपन्न का सकते हैं | प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में स्नानादि से निवृत्त होकर पीले वस्त्र धारण कर पीले आसन पर बैठें, गणपति और गौरी का पूजन करें फिर, सामने बजोट पर पीले वस्त्र पर सुन्दर  भगवान् शिव का सुन्दर चित्र या शिवलिंग हो वह चाहे नर्मदेश्वर या पारदेश्वर या कोई भी किन्तु पूर्ण चैतन्य और प्राणप्रतिष्ठित हो |

एक बात यद् रखने योग्य है और वह ये कि यदि पूजन विग्रह, यंत्र, माला आदि यदि चैतन्य न हो तो साधना की सफलता में कमी रह जाती है और तब  हमें ऐसा लगता है कि साधना विधान ही गलत तो नही या मन्त्र तो गलत नहीं या हममें क्षमता ही नहीं, किन्तु मूल तथ्य क्या है इस असफलता का, ये हमें पता ही नही होता---- अतः कोई भी साधना करने से पहले पूर्ण तयारी आवश्यक है |

 जी हाँ तब पूर्ण श्रद्धा भाव से शिवजी का पंचोपचार पूजन सम्पन्न करें, तब संकल्प लें, कि ‘मै गुरु प्राप्ति हेतु इस प्रयोग को संपन्न कर रहा/ रही हूँ हे भोले नाथ आप अपने शिवत्व और गुरु तत्व के साथ गुरु रूप में प्रतिष्ठित होकर मझे पूर्णता प्रदान करने की कृपा करें’ 
|     
अब स्फटिक या रुद्राक्ष माला से निम्न मन्त्र की ११ माला जप करें---

मन्त्र

  ‘ॐ शिवरूपाय महत् गुरुदेवाय नमः’  
“Om shivroopaay mahat gurudevay namah”

अब इसके ॐ नमः शिवाय, पंचाक्षरी मन्त्र की पांच माला जप करें |
तथा निम्न प्रार्थना पूर्ण श्रद्धा भाव से करें----

“नमामि महादेवं देवदेवं,  भजामि भक्तोदय  भास्करम तं |
ध्यायामि भूतेश्वर पाद्पंकजम, जपामि शिष्योद्धर नाम रूपं” ||

  इस प्रार्थना को साधना से पहले और बाद में भी यानि कि दो जरुर करें |
प्रिय भाइयो बहनों, इतना  अवश्य है कि चाहे प्रकृति में कितने भी परिवर्तन हो किन्तु गुरु कृपा एक बार होने के बाद कभी व्यर्थ नहीं जाती यह कृपा शिष्य के साथ जन्म-जन्मान्तर तक रहती है, यही वजह है कि सदगुरुदेव निखिल जी महाराज ने कई बार कहा है कि “मै तुम्हारा जन्म-जन्मान्तर का गुरु हूँ तुम मुझे पहचानो या न पहचानों किन्तु मै तुम्हे जानता हूँ” |

  और यही ध्रुव सत्य है ------ तो साधना करें, सदगुरुदेव आपकी पर्त्येक मनोकामना पूर्ण करें इसी अभिलाषा और शुभकामनाओं के साथ------

रजनी निखिल

***NPRU ***





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