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Saturday, December 31, 2011

नव वर्ष सौभाग्य प्रदायक –गुह्य रहस्य पद्धति प्रोक्त “आदित्य भैरव सायुज्य श्री सौभाग्य कृत्या प्रयोग”


वह दिन जब हम जीवन का प्रारंभ करते हैं हम सभी के लिए नव वर्ष कहलाता है,मान्यताओं,संस्कारों और तथ्यों के आधार पर एक सामान्य वर्ष में कई बार नव वर्ष मनाया जाता है,जैसे नवरात्री को हिंदू संस्कृति का तो भिन्न भिन्न प्रान्तों के अपने नव वर्ष होते है तो स्वयं का जन्मदिन भी व्यक्ति विशेष के लिए नव वर्ष ही होता है,और मानव चिंतन सदैव इस ओर रहा है की कैसे हम अपने मनोवांछित को प्राप्त कर न्यूनताओं को समाप्त कर सके और सार्थक कर सके अपना नव वर्ष .सदगुरुदेव हमेशा नव वर्ष के अवसर पर साधकों को विलक्षणता प्रदान करने वाले नवीन तथ्यों से परिचित तो करवाते ही थे साथ ही साथ दिव्यपात श्रेणी की विभिन्न दीक्षाओं को भी उन्होंने देना प्रारंभ किया था जिससे साधक सामान्य न होकर अद्भुत हो जाये... परन्तु १९९८ के बाद वे सारे क्रम ही लुप्त हो गए और अन्य कोई उन तथ्यों को समझा पाए ऐसा संभव ही नहीं था. हमारे विभिन्न ज्ञात और लुप्त तंत्र ग्रन्थ प्रमाण हैं उन उच्चस्तरीय साधनाओं के जिनका प्रयोग कर साधक अपनी जीवन शैली में अमूल चूल परिवर्तन कर सकता है और वर्ष भर के लिए श्रेष्ठता तो प्राप्त कर ही सकता है ,ऐसा ही एक ग्रन्थ है “गुह्य रहस्य पद्धति” जो पूरी तरह दिनों ,महीनों  और वर्षों को अनुकूल बनाने और गतिमान वर्ष,माह और दिवस के अधिष्ठाता ग्रह ,देव शक्ति,मातृका और मुंथा को वश में करके स्वयं का भाग्य लेखन करने की गुह्यतम पद्धति पर आधारित है ,पूरा ग्रन्थ ही २२८ प्रयोगों से युक्त है,भिन्न भिन्न दिवसों और माहों के अपने अपने प्रयोग हैं. परन्तु उन सबमे जो सभी के लिए प्रभावकारी पद्धति है उसी का विवेचन में इस लेख में कर रहा हूँ, सदगुरुदेव के सन्यासी और सिद्ध शिष्य स्वामी शिव योगत्रयानंद जी ने मुझे वो ग्रन्थ दिखाया था जो पूरी तरह हस्तलिखित था और उन्होंने उसे मुझे उन क्रियाओं को कैसे किया जाये और कब कब कैसे उनका प्रयोग किया जाता है ये भी समझाया था ,उन्होंने बताया था की इस प्रयोग को दो तरीकों से किया जा सकता है –
१. या तो जब सामूहिक मान्यताओं के आधार पर  नव वर्ष प्रारंभ हो तब
२. या जब साधक का जन्मदिवस हो या उसकी पारिवारिक या धार्मिक मान्यताओं के आधार पर जब नव वर्ष प्रारंभ होता हो.
चाहे आप किसी भी क्रम को मानते हो तब भी आप दो तरीके से इस प्रयोग को कर सकते हो –
१. या तो सूर्योदय के समय का का आश्रय लेकर साधना की जाये
२. या फिर जिस समय साधक का जन्म हुआ हो उस समय पर इसे संपन्न किया जाये ,भले ही आप १ जनवरी को इसका प्रयोग कर रहे हो परन्तु तब भी आप इसे इन दोनों में से कोई समय पर कर सकते हो, अर्थात मान लीजिए की किसी का जन्म २४ अगस्त को रात्री में ९.३५ पर हुआ है तब ऐसे में साधक  १ जनवरी को ही या तो सूर्योदय के समय इस साधना को कर सकता है या फिर रात्री में ९.३५ पर .दोनों ही  समय प्रभावकारी हैं और कोई दोष नहीं है.
आप चाहे आत्मविश्वास की मजबूती चाहते हों या फिर रोजगार की प्राप्ति या वृद्धि,सम्मान चाहते हो या फिर संतान सुख या संतान या परिवार का आरोग्य ,आर्थिक उन्नति चाहते हो या कार्य में सफलता ,जीवन में प्रेम की अभिलाषा हो या फिर विदेश यात्रा का स्वयं के भाग्य में अंकन,ये प्रयोग सभी अभिलाषाओं की पूर्ती करता है. सदगुरुदेव ने १९९१-१९९२ में पहली बार साधकों के सामने नवरात्री में सौभाग्य कृत्या का प्रयोग करवाया था .और नवरात्री चूंकि सनातन नववर्ष का आगमन पर्व होता है अतः उन्होंने उपहार स्वरुप इस क्रिया को सभी साधको को प्रदान किया था ,उसी क्रम में उनके आशीर्वाद से ये “आदित्य भैरव सायुज्य श्री सौभाग्य कृत्या प्रयोग” हमारे लिए प्राप्त हुआ है ,गुरु मंत्र की १६ माला अनिवार्य हैं उन्ही क्षणों में साधकों के द्वारा इस प्रयोग के पहले तभी ये प्रयोग पूर्णता प्रदान करता है.
आप अपनी मान्यताओं के आधार पर जिस भी नव वर्ष के प्रारंभ में इस साधना को करना चाहे ,उस सुबह सूर्योदय के पहले उठकर स्नान कर ले और श्वेत वस्त्र धारण कर भगवान सूर्य को अर्घ्य प्रदान करे .अर्घ्य पात्र में जल भर कर और उसको पहले सामने रखकर २१ -२१ बार निम्न मन्त्रों से अभिमंत्रित कर ले –
ओम आदित्याय नमः
ओम मित्राय नमः
ओम भाष्कराय नमः
ओम रवये नमः
ओम खगाय नमः
ओम पूषाय नमः
ओम ग्रहाधिपत्ये नमः
   इसके बाद ही उस जल से अर्घ्य प्रदान करे.तत्पश्चात साधना कक्ष में स्वयं या परिवार के साथ बैठकर सदगुरुदेव और भगवान गणपति का पूजन करे .आज जिस गुरु ध्यान मंत्र का प्रयोग होता है वो भी इस अवसर विशेष के साथ योगित है और भविष्य में इस ध्यान मंत्र में छिपी उस विशेष साधना को भी आप सभी भाई बहनों के समक्ष रखने का प्रयास करूँगा . सद्गुरु पूजन से पूर्व निन्म ध्यान मंत्र का ७ बार उच्चारण करे –
अज्ञान तिमिरांधस्य ज्ञानांजनशलाकया |
चक्षुरुन्मीलितं एन तस्मै श्री गुरुवे नमः || ”
तत्पश्चात पंचोपचार विधान या सुविधाजनक रूप से सदगुरुदेव और भगवान गणपति का पूजन कर संवत्सर शुभता की प्रार्थना करे और १६ माला गुरु मंत्र की करे इसके बाद उनकी साक्षी में हाथ में जल लेकर उपरोक्त साधना में सफलता की प्रार्थना और संकल्प ले |
यदि आप परिवार के साथ पूजन कर रहे हैं तब भी और यदि आप अकेले पूजन कर रहे हैं तब भी किसी भी पारिवारिक सदस्य या आत्मीय के नाम से संकल्प ले सकते हैं .
जितने सदस्य ये प्रयोग कर रहे हैं उन सभी के लिए एक-एक घृत का दीपक लगेगा . जिस बाजोट पर गुरु यन्त्र या चित्र रखा हो उस बाजोट पर श्वेत वस्त्र बिछाना है और सदगुरुदेव के चित्र के सामने “आदित्य भैरव यन्त्र” का निर्माण अष्टगंध से करना है और जहाँ पर 5  लिखा है वह पर घी का दीपक  जलाना है और उस यन्त्र और दीपक का पंचोपचार पूजन कर खीर का भोग लगाना है ,यदि आप अपने परिवार के अन्य सदस्यों या अपने आत्मीयों को भी इसका प्रभाव देना चाहते हो तो यन्त्र के चारो और १ व्यक्ति के लिए १ दीपक घी का प्रज्वलित कर सकते हैं और  स्वयं की ११ माला की समाप्ति पर प्रत्येक व्यक्ति की तरफ से  ३ -३ माला उनका संकल्प लेकर कर सकते हैं. गुरु रहस्य माला, या स्फटिक, रुद्राक्ष या सफ़ेद हकीक की हो सकती है .अन्य मालाओं में मूंगा या शक्ति माला का चयन भी किया जा सकता है. पूर्ण एकाग्र भाव से निम्न मंत्र की ११ माला जप करना है तत्पश्चात गुरु आरती संपन्न कर उस खीर के भोग को सपरिवार ग्रहण किया जा सकता है .
मंत्र-
ओम ह्रीं श्रीं आदित्य भैरवाय सौभाग्यं प्रसीद प्रसीद ह्रीं ह्रीं कृत्याय श्रीं ह्रीं ओम
OM HEENG SHREEM AADITYA BHAIRVAAY SOUBHAGYAM PRASEED PRASEED HREENG HREENG KRITYAAY SHREEM HREENG OM .
नवीन संवत्सर की उपलब्धियों को आप अपने जीवन में स्वतः ही देखेंगे. इस प्रयोग के द्वारा आप सभी को अपने अभीष्ट की प्राप्ति हो और आपकी अशुभता और दुर्भाग्य की समाप्ति होकर नयून्ताओं का नाश हो,ऐसी ही मैं सदगुरुदेव से प्रार्थना करता हूँ.
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 The day , when we started our life that is known as Nav varsh . on the common belief , the Sanskar and on various facts , in a year , we are /can celebrate many times new year (nav varsh). Like Navratri is considered for hindu culture, in the same way , each states has its own new year(nav varsh) and person’s own birth day is also considered nav varsh for him. And human thinking always oriented on the plane that how can we remove our weakness and get the our desired things. so that nav varsh has fulfill its meaning for us. on this day , Sadgurudev ji used to provide some unmatchable things to the sadhak and also introduced some new horizon of the divine gyan and also stated to give the diksha’s that comes in the category of divyapaat ,. so that a common sadhak should not became a common but became extra ordinary in his life . after 1998 all these things had gone/stopped and no one came forward to teach that divinity and continue that tradition set by him . We have many grantha’s , some are available and some are not (lost ) , that are itself the evidence for those sadhana, that can introduce miracle in sadhaka’s life and able to get that power through that he can accomplish the desired things.
One such a granth is “Guhy Rahasy paddhati “ that is totally based on how to get favor and complete help from days , months , years and not only that but also get favor from deity ( or lord ) of running month , days and dev shakti and muntha so that a person can write his bhagy (luck) as he wants, and various secretive process mentioned are in that and whole granth contains 228 such a processes. Thses are related to various months and related days . but the most effective process among in that , here , I am describing in this articles for you all. Swami yogtryanand ji , who is sanyashi siddh shishy of Sadgurudev ji, has showed me the granth that is hand written and also instructed me to how to do that kriyaye (processes) and when that has to be done . he also said this prayog can be done through two ways.
· When due to belief of the majority , a nav varsh has started .
· Or when sadhak birth day is celebrated or when nav varsh started due their family or religious belief or traditions.
Whether you are believing any one , mentioned above , but you can do this prayog through two ways
1. When sun is rising , than sadhana has to be done .
2. Or on the time when sadhak was born(birth took place). Even you are doing this prayog on 1 st January but you can choose any one time mentioned above , for example .. here is someone , whose birthdays falls on 24 august at 9:35 pm at night. So sadhak can do this sadhana either on sun rising hours or at night 9:35 pm. Both times will provide same effectiveness and there is no dosha .
Either you want improvement in your will power , Or want to get job, or promotion or samman (prestige ) Or for happiness related to children Or want a child Or free from dieses to your complete family. Or success in the work Or want to get love in life. Or want to travel abroad , thses things can be written in your luck by you own . and this prayog fulfill all thses desire.
Sadgurudev ji in 1991-92 gave this “Soubhagy Kritya Prayog” on the time of Navratri to all sadhak’s ,since that day was the nav varsh for sanatan dharm so this prayog was a gift to all sadhakas. In the same series this prayog “ AADITY BHAIRAV SAAYUJJY SHRI SOUBHAGY KRITYA PRAYOG ” is available to us through his blessing . before started this prayog , The guru mantra reciting of 16 round of rosary is a must , only than this prayog became effective.
According to your common belief , when any sadhak want to do this prayog on any nav varsh as per his belief , has to awake early in the morning , take a bathe wear white colored clothes and offer ardhy to Bhagvaan sury /sun. and fill that ardhy patra with water and before doing that chant 21 -21 times thses mantra so that ardhy patra became abhimantrit (energized)
Om aadityay namah
Om mitrayay namah
Om bhaskaray namah
Om ravye namah
Om khagay namah
Om pushaay namah
Om grahadhiptye namah

Only after that offer ardhy offering , than in the pooja room , he can alogwith his member of his family , can start the Sadgurudev poojan and after that Bhagvaan ganpati poojan. And the dhyan mantra used in that prayog is also describing here and in the future , also try to provide the sadhana hidden in that to all our brother and sisters.
Before Sadgurudev poojan do chant 7 times this dhyan mantra.
Agyan timirandhsy gyanajan shalakya |
Chakshurunmilit ev tamsmayi shri guruve namah||
After that you can do poojan as per panchopchar or as per your convenience (Sadgurudev ji and bahgvaan ganpati ji) and pray for good wishes in coming samvtsar , and recite the guru mantra 16 round of rosary . and after that take sankalp through taking water in your hand for success in this sadhana .
Either you are doing this sadhana alone or with all the family member , you can take sankalp on the behalf of any family person and your close one. Light a earthen lamp filled with ghee , one lamp for each member taking part in this sadhana , than on the bajote ( a small wooden table ) place Sadgurudev chitr (photograph) on white color cloth and make a Aadtiy bhairav yantra through asht gandh on that white color cloth in front of Sadgurudev chitr. Light an earthen lamp filled with ghee on the place , where no 5 is written. And do poojan and panchopchar or that Deepak (placed on no 5 ) and offer kheer as a bhog . and if you wish to offer the effect of this prayog to your close one or family member , than you can place one Deepak for one person around this yantra, and when your 11 mala mantra jap has completed than you can do recite 3 - 3 mala (3 round of rosary ) of mantra jap for each person for whom you want to offer the result . Mala can be guru rahsy mala or sphatik or rudraksha or white hakeek would be fine. And if not available than you can use shakti mala or moonga mala .and after that with full concentration and devotion do chant /recite 11 round of mala mantra jap of the mantra mentioned below. And than offer guru aarti and offered kheer can be distributed among the family member .
मंत्र-

  ओम ह्रीं श्रीं आदित्य भैरवाय सौभाग्यं प्रसीद प्रसीद ह्रीं ह्रीं कृत्याय श्रीं ह्रीं ओम
 
OM HEENG SHREEM AADITYA BHAIRVAAY  SOUBHAGYAM PRASEED PRASEED HREENG HREENG KRITYAAY SHREEM HREENG OM .

And you are able to see your self the achievement of yours , in this new samvatsar in your life . through this prayog you all can achieve your desired things and your bad luck can be change d to good one and all your weakness be removed in your life , this is what I am a praying to sadguru dev .


                                                                                               
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Friday, December 30, 2011

NISHCHIT AJIVIKA PRAPTI PRAYOG



आज के  जीवन में    धन   की महत्ता   से   इनकार नहीं किया   जा सकता हैं ,   पर यह   धन का  आगमन  हो कैसे कुछ को    तो  व्यापार    अपने  परिवार  से   मिला  हैं    तो   कुछ   स्वतः     ही   इस   और  आकर्षित  हो जाते हैं पर बहुसंख्यक   वर्ग   तो  एक  नौकरी किसी  तरह  मिल जाए    उसी  पर  ही  निर्भर  करता हैं ..  पर   भले   ही कितनी   रोजगार के  अवसर   मिल   रहे  हो  या  सामने  आ  आरहे   हो पर   एक   रोजगार  मिलना   या  नौकरी मिलना  इतना   भी  आसान  कहाँ ?

                             जब  माता पिता   की  गाढ़ी कमाई के   सहारे  उच्च  शिक्षा   प्राप्त करके  भी   कोई  मार्ग  सामने  दिख  न  रहा  हो    तब  क्या  किया  जाए ..और कितने  इस   मानसिक  स्थिति   में  असामाजिक  रास्ते    पर  भी चल  पड़ते हैं .

                                  पर जब कोई मार्ग  न  दिख  रहा  हो  तो  आप  सभी जानते हैं की  सदगुरुदेव  जी ने  एक  रास्ता   दिखाया   हैं  वह हैं   साधना   का ..  अगर  हम   इस पर  चलना   चाहे  क्योंकि  अपने  प्रयास   तो करके देख  ही  चुके  हैं  और  बुद्धिमान  वही हैं  जो   दूसरों की गलतियों  से  सबक  लेता   हैं न  की  हर  बात  पर  जिद  करके  बैठ जाए  की जब  मुझे    होगा   तभी मैं मानुगा .
                            और जब साधना    की बात   आती हैं तब  उसमे   कोई  संक्रिणता    वाली  बात     ही नही आती की  यह   उस  मार्ग  की  या  इस  मार्ग  की या   इस  धर्म  की  या   उस  धर्म की हैं ...  जब  सबका   रक्त   लाल  हैं जब  सबके  आसूं   एक जैसे  हैं  तब   कम  से  एकं  ज्ञान के  क्षेत्र  में  तो यह   बिभेद हटा  दे .
                         आप  सभी मुस्लिम मंत्रो   के  चमत्कार  से  भली भांति    परिचित हैं  ही  और  हमने   तन्त्र कौमुदी में  अनेको  बार  उच्च  स्तरीय  प्रयोग  आपके  सामने  रखे हैं जो  जीवन  की  दिशा   बदल कर  आपको  एक सामान्य  से    दीन हीन  से   एक साधक   के  स्तर  तक  ला   पाने  में  समर्थ हैं .अगर  हम करना  चाहे   तो ....
                                        सदगुरुदेव   कहते हैं की   पहले   घर  में   आटा   दाल   हो  तब  ही बड़ी बातें   शोभा   देती हैं ,  जब   घर  में  ही अकाल  हो  तब  बड़ी बड़ी बात करने  से  फायदा क्या  हैं ,  और उन्होंने   तो यहाँ तक  कहाँ   की  जब उनका  एक  भी  शिष्य   यदि  भूखा   सोता हैं  तो  सदगुरुदेव  की   आखों में  नीद कहाँ  आ  सकती हैं .
                         उन्होंने   अनेको प्रयोग  हमारे  सामने  रखे हैं   पर  हम या  तो  और  अच्छा …..और सटीक .  और सरल ….. और  प्रभावशाली की राह देखते  रह  जाते हैं   और   जो कर  सकते हैं व  ह भी नहीं करते हैं .पर इस  अवस्था  को  न  आने  दे जो प्रयोग  सामने  हैं वह भी  एक  अति महत्वपूर्ण हैं    अगर  इसे  मन से ...   बिस्वास  से ... और निष्ठा से  करते हैं  तो ....      
                        यह विधान  अनेको  तंत्र ज्ञाताओ   के  द्वारा   परीक्षित हैं  और   बहुत  लोक प्रिय    भी हैं  पर यह तथ्य  तो इसकी   प्रभावकता   को समझाता हैं की यह  आपके लिए  क्या  कर  सकता हैं ...

      रात्रि ६ से  ९  बजे के   बीच    पूर्ण  शुद्धता  के  साथ  एक  आसन (किसी  भी रंग का )  पर  बैठ कर    अपने  इष्ट  को याद करे .फिर   इस मंत्र का  जप  २१  बार  करे .
 मंत्र

 "अल्ल्हुमसल्ले  अला   मुहम्मदिन अला    अल मुहम्मदिन  वबारिक   वसल्लिम "
“Allhumslle  ala muhammden  ala al muhammdin vabarik vasllim”

 जैसे   ही  आप   २१ बार  उच्चारण   कर लेते हैं   इसके  बाद  
आप मंत्र 
   "या गफूरो "
“yaa  gafuroo”
   का  आपको   उच्चारण  करना  हैं     १० माला .  इसके  बाद  पुनः  जो मंत्र   २१ बार किया हैं उसका  २१ बार  उच्चारण  करना  हैं    मतलब  सपुटित   करना  हैं. 

और यह  प्रक्रिया   २१  दिन  आपको  लगातार करना  हैं .

    आवश्यक  निर्देश :

·  मुस्लिम  मंत्रो के जप में  माला  उलटी  फेरना   होती हैं मतलब    माला  का एक  एक दाना  सामने   की   ओर   आता  जायेगा .
·  दूसरी महत्वपूर्ण बात   की यदि   आप  लुंगी पहन कर  करते  हैं  और   सिर पर  मुसलमानी  टोपी  जो की  बाज़ार में  आसानी  से मिल जाती हैं  उसे  धारण कर  के   करे  तो  और भी अच्छा ,  रंग  कोई भी  चलेगा .

·  तीसरी  महत्वपूर्ण बात  की   यदि  आप  वज्रासन की  अवस्था में  मन्त्र  करे   तो   यह   और  भी परिणाम   जल्दी  दे  पायेगा  क्योंकि   जिस  तरह का  मंत्र हैं  उसके   नियम   बहुत जरुरी   तो नहीं  हैं पर   यदि  बताये  गए  हैं  तो निरर्थक  नहीं हैं .

·  और हमेशा  की तरह   सदगुरुदेव  पूजन  और  गुरु मंत्र  जप    साधना के प्रारंभ   और  अंत  में  हमेशा   एक अनिवार्य प्रक्रिया हैं यह  तो  आप जानते हैं   ही .

पूरे  बिस्वास के  साथ करे ,  निश्चय   ही सदगुरुदेव  जी के  आशीर्वाद  से  आपके   जीवन   में  आजीविका  की  कमी   यदि हैं    तो  वह   दूर   होगी . 


  
   

                                                                                               
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Sunday, December 25, 2011

MANAH SHAKTI SADHNA


मन के बारे मे जितना भी लिखा जाए कम है. योग तांत्रिक साधना मे मन का अपना विशेष स्थान है. किसी भी प्रकार की भावभूमि से लेकर किसीभी व्यक्ति के व्यक्तित्व का मुख्य आधार कही न कही मन ही होता है. सदगुरुदेव हमेशा कहते थे की जिसने मन ह्रदय तथा चित को जित लिया वह व्यक्ति साधनाजगत मे अजेय है. मन के भी प्रकार होते है जिसको आज विज्ञान भी स्वीकार करता है. जागृत मन, अर्धजागृत मन, तथा सूक्ष्म मन इत्यादि. मन सतत गतिशील रहता है तथा इसकी गति पर मनुष्य का काबू बहोत ही अल्प मात्रा मे होता है. मन की शक्तियां अनंत है क्यों की यह अनंत ब्रम्हांड से जुड़ा हुआ होता है. जैसे की एक अश्व मे अत्यधिक बल और गति होती है, लेकिन जब तक उसे काबू नहीं किया जाता तब तक वह शक्ति का योग्य उपयोग नहीं किया जा सकता है. मन को गति प्रदान करने वाली जो शक्ति है वही मनःशक्ति कही जाती है. अगर साधना के माध्यम से व्यक्ति मनःशक्ति पर अपना काबू कर ले तो उसके कई लाभ साधक को प्राप्त हो सकते है. यु साधक के लिए तो इस प्रकार की साधना बहोत ही महत्व रखती है, जिससे की साधक आध्यत्म भूमि की वो बारीकियों को आत्मसार कर सकता है जिससे वह साधना मे पूर्ण सफलता प्राप्त कर सकता है.
·        एकाग्रता का विकास
·        अन्तश्चेतना का विकास
·        विचारों पर आधिपत्य
·        चेतना का अनुसरण
·        समर्पण भाव का ज्ञान
आदि सभी प्रक्रियात्मक लाभ व्यक्ति मनःशक्ति की साधना से प्राप्त कर सकता है. इस प्रकार एक साधक के लिए एसी साधना का बहोत महत्व है. वैसे तंत्र ग्रंथो मे मनःशक्ति से सबंधित साधनाए अल्प ही देखि जाती है. लेकिन सदगुरुदेव ने जिन गुप्त साधना रत्नों को दिया है, उनमे से मनःशक्ति से सबंधित एक रत्न आप सब के मध्य रख रहा हू.
इस साधना को साधक गुरुवार को सुबह या शाम के समय शुरू करे. साधक सफ़ेद वस्त्र, सफ़ेद आसन उपयोग मे ले. दिशा उत्तर या पूर्व रहे तथा मंत्र जाप के लिए माला स्फटिक की हो. साधक गुरु पूजन सम्प्पन कर निम्न मंत्र की १६ माला जाप करे
ओम निं गुरुभ्यो नमः
इसके बाद साधक ४ माला गुरु मंत्र की करे
ओम परम्तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः
इसके बाद साधक ५ माला निम्न मंत्र की करे
ओम अष्टात्मने हूं हूं हूं
और फिर गुरुमंत्र की एक माला जाप करे. इसके बाद साधक मन्त्र जाप सदगुरुचरण मे समर्पित करे. इस प्रकार साधक को अगले गुरूवार तक करना चाहिए. साधक खुद ही अनुभव करेगा की साधक के मन मे कितना परिवर्तन आया है.
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 It is always less whatever to be written about Mind. In yog tantric sadhana Mind has very important place. From any base feelings to the personality of the individual, in some or other way mind remains in base. Sadgurudev always used to say that one is not beatable in the sadhana world who own control over Mind Heart and Chit. Mind has its many types which is today modern science even accepts. Active mind, semi active mind, micro mind etc. Mind keep on working all the time and majority of the time very micro part of it remains in our control. Mind has infinite powers as it is directly connected to the universe. For example, an hour has force and power, but till the time it is not controlled, it is not on the required use. The power of the mind is ManahShakti. If person can control this manah shakti through the medium of the sadhana, one may have many benefits through the same. Thus, for sadhak such sadhana contains a big significance, through which sadhak can understand and realise spiritual points which leads to the complete success.

Development in concentration
Development of internal powers
Control over thoughts
Following the inner self
Knowledge of devotional access

Etc all practical benefits could be gain through manah shakti sadhana by anyone. This way for any sadhak, such sadhana is very important. In tantra scriptures sadhana related to manah shakti are found very rare. But the secret gems of sadhana given by sadgurudev, from the same gems, the one related to manah shakti, I am sharing with you all.

This sadhana should be started by sadhak on Thursday morning or evening. Sadhak should use white aasan and cloths for this sadhana. Direction could be north or east and sfaatik rosary should be brought in use for mantra chanting. Sadhak should first complete guru poojan and one should do 16 rosary of the following mantra

Om Nim Gurubhyo Namah

Followed by 4 rosary of the Guru Mantra
Om Param Tatvaay Naaraayanaay Gurubhyo Namah

After that 5 rosary of the mantra given below
Om Ashtaatmane Hoom hoom hoom

Again one should do 1 rosary of guru mantra. After that one should offer mantra jaap in lotus feet of sadgurudev. This way process should be continued till next Thursday. Everyone will be able to experience the amount of the change came in one’s mind.


                                                                                               
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Monday, December 12, 2011

SARV DOSH NASHAK BHAGVATI DURGA PRAYOG


भगवती दुर्गा का रूप अपने आप मे साधको के मध्य हमेशा से ही अत्याधिक प्रचलित रहा है. बुराई पर अच्छाई की जित का प्रतीक है देवी. दुर्गा के कई रूपों की साधना तन्त्र ग्रंथो मे निहित है. देवी नित्य कल्याणमई है तथा अपने साधको पर अपनी अमी द्रष्टि सदैव रखती है. भगवती की साधना करना जीवन का एक अत्यधिक उच्च सोपान है. व्यक्ति अपने कर्म दोषों से जब तक मुक्त नहीं होता तब तक उन्नति की गति मंद रूप से ही चलती है चाहे वह भौतिक क्षेत्र हो या आध्यात्मिक क्षेत्र हो. भौतिक रूप मे चाहे हम कर्मफलो को प्राप्त कर दोषों का निवारण एक बार कर भी ले लेकिन मानसिक दोषों तथा मन मे जो उन दोषों का अंश रह गया है उसका शमन भी उतना ही ज़रुरी है जितना भौतिक दोषों का निवारण. कई बार व्यक्ति अपने अत्यधिक परिश्रमो के बाद भी सफलता को प्राप्त नहीं कर सकता है. या फिर कोई न कोई बाधा व्यक्ति के सामने आ जाती है, या फिर परिवारजनो से अचानक ही अनबन होती रहती है. इन सब के पीछे कही न कही व्यक्ति के वे दोष शामिल होते है जो की पाप कर्मो के आचरण से उन पर हावी हो जाते है. चाहे वह इस जन्म से सबंधित हो या पूर्व जन्म के संदर्भ मे. कर्म की गति न्यारी है लेकिन साधना का भी अपने आप मे एक विशेष महत्व है, साधना के माध्यम से हम अपने दोषों की समाप्ति कर सकते है, निवृति कर सकते है. इस प्रकार की साधनाओ मे भगवती की साधनाए आधार रूप रही है. भगवती की साधना मात्रु स्वरुप मे ही ज्यादातर की जाती है. इस महत्वपूर्ण साधना को सम्प्पन करने पर साधक की भौतिक तथा आध्यात्मिक गति मंद से तीव्र हो जाती है, समस्त बाधाओ का निराकारण होता है तथा व्यक्ति अपने दोषों से मुक्त हो कर निर्मल चित युक्त बन जाता है. आगे के सभी कार्यों मे देवी साधक की सहायता करती है तथा साधक का सतत कल्याण होता रहता है.
इस साधना को करने के लिए साधक के पास शुद्ध पारद दुर्गा विग्रह हो तो ज्यादा अच्छा है, लेकिन यह संभव नहीं हो तो साधक को देवी दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति को अपने सामने स्थापित करना चाहिए. साधक इस साधना को रविवार से शुरू करे. रात्री काल मे ११ बजे के बाद इस साधना को शुरू करना चाहिए. साधक लाल वस्त्र पहन कर लाल आसान पर बैठ कर देवी का पूजन करे तथा उसके बाद निम्न मंत्र की मूंगामाला से २१ माला जाप करे. साधक चाहे तो ५१ माला भी जाप कर सकता है. दिशा उत्तर रहे.
ओम दुं सर्वदोष शमनाय सिंहवासिनि नमः
यह क्रम ११ दिनों तक रहे. संभव हो तो ११ वे दिन साधक को मंत्रजाप के बाद शुद्ध घी की १०८ आहुति यही मन्त्र से अग्नि मे प्रदान करे. साधना काल मे कमल की सुगंध आने लगती है तथा सौभाग्यशाली साधको को देवी बिम्बात्मक रूप से दर्शन भी देती है. साधना के दिनों मे ही उत्तरोत्तर साधक का चित निर्मलता की और अग्रसर होता रहता है जिसे साधक स्पष्ट रूप से अनुभव कर पाएगा.
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The form of goddess Durga has remained very famous among the sadhak. Devi is symbol of victory of truth over negativity. There are many sadhana mentioned in tantra scriptures of various Durga forms. Devi is always favorable and she always keeps on blessing her sadhaka. To perform rituals of bhagawati is one of the big boons of life. Progress of anyone remains slow till the time one does not get free from karmdosha rather it is material field or spiritual field. In material sense we might dissolve our dosha which with the karmaphal but mental dosha and the particles of the same which took the deep roots in the mind are too required to be dissolved same as in physical form dosha. Many time people could not get success with lots of hard work. Or else one or other trouble keeps on arriving, or conflicts occur with family members all of a sudden. After all these things, there remains an effect of the Dosha (karma defects) in one or another form belonging to this or previous births. Karma system is mysterious but sadhana too has its important place, with the medium of the sadhana one can get rid from the dosha and can finish the effect of the same. In such sadhana, sadhana relating Bhagawati has remained in base. Bhagawati sadhana is majority of the time done in mother form. After completion of this important sadhana the progress in material and physical life gets boost. Every trouble gets solutions and person become free from defects gained through karmadosha and becomes pure hearted. In all further works help of the goddess is received and sadhak stays blessed.

To complete this sadhana it is better if sadhak have pure paarad durga vigrah, but if it is not possible one may establish photo or idol of goddess durga in front of them. Sadhak should start this sadhana from Sunday after 11 PM night time. Sadhak should do the poojan of goddess wearing red cloths and sitting on red aasana and after that one should chant 21 rosary of the following mantra. if sadhak wishes one can even do 51 rosary of the mantra. Direction should be north.

Om Dum Sarvdosh Shamanaay Sinhavaasini Namah

This process should be continuing for 11 days. If possible one should offer 108 aahuti in the fire of pure ghee after mantr jaap gets completed on 11th day.  In sadhana duration fragrance of the lotus starts spreading in the room and fortunate can even have glimpses of goddess. Sadhak can feel them self the increased purity of the heart day by day during sadhana period.   

                                                                                               
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Sunday, December 11, 2011

Jwala shatru stambhan prayog



जीवन मे निरंतर पग पग पर समस्या तथा बाधाए आना स्वाभाविक है. आज के युग मे जब चारो तरफ अविश्वास और ढोंग का माहोल छाया हुआ है तब ज्यादातर व्यक्तियो का समस्या से ग्रस्त रहना स्वाभाविक है. और व्यक्ति कई प्रकार के षड्यंत्रो का भोग बनता है. यु एक हस्ते खेलते परिवार का जीवन अत्यधिक दुखी हो जाता है. कई बार व्यक्ति के परिचित ही उसके सबसे बड़े शत्रु बन जाते है और यही कोशिश मे रहते है की किसी न किसी रूप मे इस व्यक्ति का जीवन बर्बाद करना ही है. चाहे इसके लिए स्वयं का भी नुक्सान कितना भी हो जाए. आज के इस अंधे युग मे मानवता जैसे शब्दों को माना नहीं जाता है. और व्यक्ति इसे अपना भाग्य मान कर चुप हो जाता है. अपने सामने ही खुद की तथा परिवार की बर्बादी को देखता ही रहता है और आखिर मे अत्यधिक दारुण परिणाम सामने आते है जो की किसी के भी जीवन को हिलाकर रख देते है. एसी परिस्थिति मे गिडगिडाने के अलावा और कोई उपाय व्यक्ति के पास नहीं रह जाता है. लेकिन हमारे ग्रंथो मे जहा एक और नम्रता को महत्व दिया है तो दूसरी और व्यक्ति की कायरता को बहोत बड़ा बाधक भी माना है. एसी परिस्थितियो मे शत्रु को सबक सिखाना कोई मर्यादाविरुद्ध नहीं है. यह ठीक उसी प्रकार है जिस प्रकार व्यक्ति अपनी और परिवार की आत्मरक्षा के लिए हमलावर को हावी ना होने दे और उस पर खुद ही हावी हो जाए. हमारे तंत्र ग्रंथो मे इस प्रकार के कई महत्वपूर्ण प्रयोग है जिसे योग्य समय पर उपयोग करना हितकारी है. लेकिन मजाक मस्ती मे या फिर किसी को गलत इरादे से व्यर्थ ही परेशान करने के लिए इस प्रकार की साधनाओ का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए वरना इसका भयंकर विपरीत परिणाम भी आ सकता है. शत्रुओ के द्वारा निर्मित षड्यंत्रो का किसीभी प्रकार से कोई असर हम पर ना हो और भविष्य मे वह हमारे विरुद्ध परेशान या नुकसान के इरादे से कोई भी योजना ना बना पाए इस प्रकार से साधक का चिंतन हो तो वह यथायोग्य है. तन्त्र के कई रहस्यपूर्ण और गुप्त विधानों मे से एक विधान है “ ज्वाला शत्रु स्तम्भन ”. यह अत्यधिक महत्वपूर्ण विधान है जिसे पूर्ण सात्विक तरीके से सम्प्पन किया जाता है लेकिन इसका प्रभाव अत्यधिक तीक्ष्ण है. देवी ज्वाला अपने आप मे पूर्ण अग्नि रूप है, और शत्रुओ की गति मति स्तंभित कर के साधक का कल्याण करती है. साधक को इस प्रयोग के लिए कोई विशेष सामग्री की ज़रूरत नहीं है.
इस विधान को साधक किसी भी दिन से शुरू कर सकता है तथा इसे ८ दिन तक करना है, इन ८ दिनों मे साधक को शुद्ध सात्विक भोजन ही करना चाहिए, लहसुन तथा प्याज भी नहीं खाना चाहिए. यह जैन तंत्र साधना है इस लिए इन बातो का ध्यान रखा जाए. इस प्रयोग मे वस्त्र तथा आसान सफ़ेद रहे. दिशा उत्तर रहे. साधक रात्री काल मे १० बजे के देवी ज्वाला को मन ही मन शत्रुओ से मुक्ति के लिए प्रार्थना करे. इसके बाद निम्न मंत्र की १००८ आहुतिय शुद्ध घी से अग्नि मे प्रदान करे.
औम झ्राम् ज्वालामालिनि शत्रु स्तम्भय उच्चाटय फट्
आहुति के बाद साधक फिर से देवी को प्रार्थना करे तथा भूमि पर सो जाए. इस प्रकार ८ दिन नियमित रूप से करने पर साधक के समस्त शत्रु स्तंभित हो जाते है और साधक को किसी भी प्रकार की कोई भी परेशानी नहीं होती. शत्रु के समस्त षडयंत्र उन पर ही भारी पड जाते है.
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It is natural to have obstacles and problems in steps of life. In today’s time when everywhere is mistrust and hypocrisy thus it is obvious to have troubling life for majority of the people. And a person gets trapped in many Conspiracies. This way, happy family turns in sorrowful family. Sometimes familiar people of the person turn in enemy all of a sudden and they remain in try to ruin the life of the person in some or other way, whatever it may result in for them too. In today’s era in such situation there remains no meaning in mind of humanism. And person maintains silence calling this fortune. He watches his self and family’s ruination and in last the heinous results appears which lay the life completely disturbed forever. In such situation there remain no options. But in our scriptures where there is big importance has allotted to sincerity, on other side timidity has been counted as big obstacle in one’s life. In such situation, to teach lessons to enemies in not against dignity.  It is something similar when one does stop some attacker on family for protection and one attack on the attacker. In our tantra scriptures there are several such important rituals which are better to be done at right time. But one should not apply it in just kidding or in a way to just trouble any one with no reason other else opposite results may also be faced. There remains no effect of any trap made by enemies and in future too there should be no such planning of enemies to hurt or damage us the same thinking should be there in sadhak’s mind. Among such secret and mysterious processes of tantra one is “jwala shatru stambhan”. This is very important process as it is done in Satvik method but its effect is very sharp. Goddess Jwala is in the form of fire herself, and by stopping enemy’s thinking and development it blesses sadhak. Sadhak need not special materials for this prayog.
This process could be start on any day and this should be done for 8 days, in these 8 days sadhak should take saatvik food, onion and garlic also be avoided. This is jain tantra sadhana so these things should strictly be followed. In this prayog cloths and aasan should remain white. Direction should be north. After 10 in the night sadhak should pray goddess jwala for the protection from enemies. After that one should do 1008 aahutis with pure ghee in fir with following mantra.
Om zhraam jwaalaamaalini shatru stambhay uchchatay phat
After aahuti (fire offerings) gets over one should sleep on the floor. This way if the process is done for 8 days every enemies of sadhak gets paralyzed in planning any harm and sadhak will not face any further problem. Every Conspiracy prepares by enemies to harm sadhak will reversed to them self.
   


                                                                                               
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Friday, December 9, 2011

तीव्र इच्छा पूर्ति शाबर योगिनी प्रयोग


एक साधक के लिए काल ज्ञान अत्यधिक आवश्यक है क्यों की सिद्ध योगो मे उर्जा का प्रवाह अत्यधिक वेगवान होता है, विशेष काल मे विशेष देवी देवता अपने पूर्ण रूप मे जागृत होते है. तथा ब्रम्हांड मे शक्ति का संचार स्वतः बढ़ जाता है. साधको के लिए इन विशेष काल मे साधना करने से साधना मे सफलता की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती है. इस दिशा मे ग्रहण का समय अपने आप मे साधको के लिए महत्वपूर्ण है. इस काल मे साधक किसी भी मंत्र जाप को करे तो उस मंत्र और प्रक्रिया से सबंधित योग्य परिणाम प्राप्त करना सहज हो जाता है. यु तो इस काल मे कोई भी साधना या मंत्र जाप किया जा सकता है लेकिन कुछ विशेष शाबर साधनाए ग्रहण काल के लिए ही निहित है, जिसे मात्र और मात्र ग्रहण के समय ही किया जाता है. इस क्रम मे ऐसे कई दुर्लभ विधान है जो की साधक को सफलता के द्वार तक ले के जाता है. वस्तुतः हमारा जीवन इच्छाओ के आधीन है, और अगर मनुष्य की इच्छाए ही ना रहे तो फिर जीवन ही ना रहे. क्यों की इच्छा मुख्य त्रिशक्ति मे से एक है, क्रियाज्ञानइच्छा शक्तिः . अपनी इच्छा की पूर्ति करना किसी भी रूप मे अनुचित नहीं है. तंत्र तो श्रृंगार की प्रक्रिया है, जो नहीं प्राप्त किया है उसे प्राप्त करना और जो प्राप्त हुआ है उसे और भी निखारना. यु भी तन्त्र दमन का समर्थन नहीं करता. अपनी योग्य इच्छाओ की साधक पूर्ति करे और अपने आपको पूर्णता के पथ पर आगे बढ़ने के लिए कदम भरता जाए. ग्रहण काल से सबंधित कई दुर्लभ विधानों मे इच्छापूर्ति के लिए भी विधान है. अगर इन विधानों को साधक विधिवत पूर्ण कर ले तब साधक के लिए निश्चित रूप से सफलता मिलती ही है. ऐसे ही विधानों मे से एक विधान हैतीव्र योगिनी इच्छापूर्ति प्रयोग’. जो की आप सब के मध्य इस ग्रहणकाल को ध्यान मे रखते हुए रख रहा हू.
इस साधना के लिए साधक को अपने आसान की ज़मीं को गाय के गोबर से लिप दे. और उस पर आसान लगा कर बैठ जाए. अगर साधक के लिए यह संभव नहीं हो तो वह भूमि पर बैठ जाए. यह साधना निर्वस्त्र हो कर करे, अगर यह संभव नहीं है तो सफ़ेद वस्त्रों को धारण करे. साधना कक्ष मे और कोई व्यक्ति ना हो तो उत्तम है. साधक अपने सामने तेल का बड़ा दीपक लगाए और ६४ योगिनी को मन ही मन प्रणाम करते हुए मिठाई का भोग लगाये. और अपनी इच्छा को साफ साफ बार दुहराए तथा योगोनियो से उसकी पूर्ति के लिए प्रार्थना करे. इसके बाद साधक निम्न मंत्र का जाप प्रारंभ कर दे. इसमें किसी भी प्रकार की माला की ज़रूरत नहीं है फिर भी अगर साधक चाहे तो रुद्राक्ष की माला उपयोग कर सकता है. साधक को यह प्रक्रिया ग्रहण काल शुरू होने से एक घंटे पहले ही शुरू कर देनी चाहिए तथा जितना भी संभव हो जाप करना चाहिए, यु उत्तम तो ये रहता है की साधक ग्रहण समाप्त हो जाने के बाद भी एक घंटे तक जाप करता रहे.
ओम जोगिनी जोगिनी आवो आवो कल्याण धारो इच्छा पूरो आण दुर्गा की गोरखनाथ गुरु को आदेश आदेश आदेश.
मंत्र जाप की समाप्ति पर मिठाई का भोग स्वयं ग्रहण करे तथा स्नान करे. साधक की इच्छा शीघ्र ही निश्चित रूप से पूरी होती है.
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For a sadhak it is essential to have knowledge of Kaal because in special time durations the flow of the energy goes high. In specific time durations specific gods remains active in their complete form. And energy flow in the universe gets to its maximum. For sadhak, percentage to achieve success increases by doing sadhana in that particular time periods. In this direction, time of eclipse is very important for sadhak. In this particular time duration if sadhak does any sadhana or mantra in that condition it is easy to obtain maximum benefit of that mantra and related process. In this particular time duration any sadhana or mantra chanting could be done but there are some specific shabar sadhana reserved for this specific time, which are done in eclipse time only. This way, there are many secret processes which can take sadhak to the door of success. In fact, our life is bunch of wishes. And if wish do not take place in life, life itself loose a place. Because wish / will (ichchaa) is among three major powers, kriyajnanaichchaachashaktih. To fulfill desires is never inappropriate. Tantra is process of adornment, to accomplish which has not been accomplished and to develop whatever has been achieved. Also tantra does not support suppression. Sadhak should fulfill their appropriate desires and keep on taking steps forwards on the path of completeness. In regards of eclipse time, from many secret processes there is existence of processes to fulfill desires also.  If sadhak completes these processes with steps then for sure success could be gain. Among these processes one of them is ‘tivra yonigi ichhapurti prayog’. Which is here by presented for you all on this eclipse. 

For this sadhana, sadhak should apply cow dung on the floor of aasan. And after that one should sit on aasan which is placed on it. If it is not possible for sadhak one can sit on the floor directly without aasan. This sadhana should be done naked body, if that is not possible one should wear white cloths. It is better if sadhak remains alone in the sadhana room. Sadhak should light big oil lamp in front of him and should pray 64 yogini in mind by offering sweets to them. And one should repeat three times a wish or desire to be fulfilled and should again pray to yogini for the fulfillment of the same. After that sadhak should start chanting mantra given below. There is no rosary required for mantra chanting but if one wishes can brought rudraksh rosary in use. Sadhak should start this process one hour before eclipse starts and should do the mantra as much as possible, thus it is always better to keep on chanting the mantra till post one hour of eclipse’s ending time.

Om Jogini Jogini Aavo Aavo Kalyaan Dhaaro Ichchhaa Pooro Aan Durgaaki Gorakhnaath guru Ko aadesh aadesh aadesh.

After mantra chanting gets over one should eat the sweet offered and have bath. The wish of the sadhak for sure gets fulfilled in very short time duration.
   


                                                                                               
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