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Monday, August 29, 2011

Bhagvaan Aanjaney Sarv Raksha vidhan


                                           "अष्ट  सिद्धि नव   निधिं के दाता
                                             अस  आशीष  दीन्हे  जानकी माता "
                           भगवान्  भोले शंकर  की उदारता   के  कारण  कौन नहीं  होगा  जो उनके आराधना नहि करना चाहता होगा, देव  दानव,  गन्धर्व, मानव, सभी तो भगवान्  आशुतोष की कृपा  के आकांक्षी हैं .उन्ही भगवान के रूद्र स्वरुप  की तेजस्विता   से  तो पूरा विश्व गति मान  हैं ही, साधारणतः  इन रूद्र  के सम्बंधित साधना  ज्यादा प्रकाश  में नहीं आई हैं , पर एकादश  रूद्र  की बात ही  अनोखी हैं,  उनके उपासक ,आराधक  तो  कहाँ  कहाँ नहीं   हैं , हर स्थान पर  उनका  का मंदिर या आराधक  मिल ही जातेहैं ,  जिनका नाम   की कष्टों से निवृति  दिलाने वाला  हैं.
                          यहाँ तक सुना जाता हैं   की विश्व में सर्वोपरि  साधना   तो अघोर साधना  विधान  हैं और  विश्व की हर शक्ति  इस विधान के  सामने  नत मस्तक हैं , पर  केबल मात्र  एक ही देव हैं जिनके  पञ्च मुखी  स्वरुप  की  करोंड़ों सूर्य वत  तेजस्विता  के सामने यह अघोर   विधान भी इनको  प्रणम्य करता ही हैं .(वास्तव में  सूक्षमता  से देखें तो अघोर  विधान भगवान शंकर के दिव्यतम स्वरूप से सम्बंधित हैं और भगवान  महावीर  भी  तो उन्ही भगवान् शंकर  के स्वरुप  ही हैं )
                                             हनुमान साधनाके अनेकों आयाम हमारे सामने  हैं कुछ   तो सामान्य  हैं कुछ तो अति दिव्यतम हैं  इस सन्दर्भ में सदगुरुदेव  भगवान  "हनुमान साधना " एक पूरी पुस्तक और   "हनुमान साधना " नाम  की  cd  भी  उपलब्ध करायी हैं , जिसमे सदगुरुदेव भगवान ने   भगवान्  बजरंग व् ली के  उस दिव्यतम  बीज मंत्र  की वेवेचना की हैं जिसके माध्यम से आप उस  प्रक्रिया  को कर के  पूरे  दिन स्वयं ही भगवान्  मारुती की दिव्य  उर्जा से ओत प्रोत रह सकते हैं , वह पूरा अत्यधिक सरल  विधान जिसे सिद्ध करना  भी जरुरी  भी नहीं हैं आप स्वयं सदगुरुदेव  भगवान् के श्री मुख से सुने और लाभान्वित   हो ,

                                                      सदगुरुदेव भगवान् ने  यदि आप  मंत्र तंत्र यंत्र विज्ञानं पत्रिका में देंखें  तो एक ऐसा विधान दिया हैं  और एक ऐसे साधक का परिचय दिया हैं जो उस समय ८०/८५ वर्ष के  थे और क्रोध आने पर  एक पूरा वृक्ष  भी   जड़  से उखाड  फेंकते थे .

(सच  में सदगुरुदेव   भगवान्  ने क्या क्या  विधान नहीं  दिए हैं अपने सभी आत्मंशो  के लिए  , अब ये तो हम पर हैं की हम  किस  दिशा में चले .. इन साधनाओ   को आलोचना  की दृष्टी से देखे  या  फिर   शिष्यता  तो  बहुत दूर की बात हैं , अच्छे से  जिज्ञासु  ही बने  तो कम से कम एक सीधी तो उप र बढे  या  सीधे  ही अपने आप को शिष्य मान ले ,क्योंकि यह तो बेहद सरल सा  हैं , पर ध्यान  भी  रखे , उन परम हंस स्वामी  निखिलेश्वरानंद   जीकी शिष्यता  के लिए  महा योगी  भी अनेको वर्ष   तपस्या करते रहते हैं  क्या  वह  इतनी सामान्य   सी  वस्तु हो गयी ......   

"को नहीं जानत संकट मोचन  नाम तिहारो " इस  जीवन में मानो संकट  और संकट ही हमारी संपत्ति बन गए हैं , या  ऐसे कहे ही की  विपत्ति  ही हमारी संपत्ति  बन गयी हैं .

अब किस किस समस्या  का सामना करे  कोई एक  हो तो   या  दुसरे ढंग से कहूं तो  की  आज तक तो ठीक चल रहा हैं   कहीं कोई समस्या  न आ जाये , अब इस आकांशा   को कैसे सामना  करे .


भगवान्  आंजनेय  से सम्बंधित या  प्रयोग   इन समस्त विपदा  से आपकी रक्षा करता हैं ही 
  मंत्र :
  हनुमान पहलवान , बारह वरस का जवान |मुख में वीरा हाँथ में कमान | लोहे की लाठ  वज्र  का कीला|जहँ बैठे हनुमान हठीला |बाल रे बाल राखो|सीस रे सीस रखो| आगे जोगिनी  राखो| पाछे  नरसिंह  राखो | इनके पाछे  मुह्मुदा  वीर छल करे , कपट करे ,तिनकी कलक ,बहन बेटी पर परे | दोहाई महावीर स्वामी की |

 सामान्य  नियम :
·  वस्त्र आसन दिशा   का कोई प्रतिबंध   तो नहीं हैं पर आप  चाहे  तो लाल रंग के  उपयोग कर सकते हैं .
·  इस मंत्र  से जप  आप  सुबह करे  तो अच्छा हैं ,
·  रुद्राक्ष माला   का उपयोग  आप जप कार्य के लिए कर सकते हैं .
·  जप संख्या केबल १०८ बार हैं ही , और इसके बाद आप  जितनी आहुति  हो  इस मंत्र   से  हो सके करे .यदि गुगुल का  प्रयोग करे तो  उत्तम होगा .
·  सदगुरुदेव भगवान् से प्रार्थना  करे की भगवान् आंजनेय  कृपा   से आपके उपर  से विपत्ति या  दूर   हो

आज के लिए  बस इतना ही 

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                                       “Asth sidhhi nav nidhi ke data
                                      As aashish  dinhe  janaki mata “
                                    Who do not want to worship  Bhagvaan bhole shaker , whether  they are dev or danav or  manav  every one because generosity of him , everybody want  to gain  the  blessing of Bhagvaan Ashutosh , and   whole world is  moving through tejaswita of  rudra swarup of Bhagvaan Ashutosh . in general,  very less sadhana are available  for theses rudra swarup, but the ekadash rudra  means  the11 th  rudra  has a  very   unique place. Every where  we can find the devotee of him,  in every place , you can  have  his  temple. Even his name  is  problem remover,
                                  We have listen that aghor sadhana is having a very high place in sadhana  jagat ,  and every sect  and every one  salute  to   the  tejaswita of this aghor sadhana  but in front of Bhagvaan Aanjney’s panch mukhi swarup (means  Bhagvaan hanuman with five head) even the aghor sadhana  salute  to him,  such is the radiance of  Bhagvaan  this forms .(if  we see little deeper ,we find that aghor sadhana is nothing but  the most divine form of Bhagvaan shiva  and Bhagvaan Aanjney  is also the form of him).
                                 There are many dimension of hanuman sadhana, some of  very simple but many of   the  highly divine one. In this relation Sadgurudev Bhagvaan  has written a book named “Hanuman sadhana” and a special  cd has been made  with the same name , in that , he has  given one  such  powerful procedure through that  you can energies  your  whole day  , and   you   do not need to siddh that   process  ,only  simple 4/5 minute of that   gives you  so much energy. You can  listen   Sadgurudev Bhagvaan  divine voice and get benefitted by that.
                                                 Sadgurudev ji has  given  one such a  very  powerful  vidhan in mantra  tantra  yantra  vigyan old issues ,  and also introduce a sadhak  , who even at that time 80/85 years old  but when he got angry ,  he could  uprooted  whole tree  from the  roots.( to be true, Sadgurudev Bhagvaan has given  so many divytam sadhana  process for all his aatamaansh , now it rests totally   upon  us , that in which direction ,we will move, take  all these  process as the view of criticizer or  became a shishy   but keep in mind  , to became a shishy  , one  must  first tread  on  the step of  jigyasu (means  real  truth seeker ),  and became  true seeker , since shishyata  is very far away, or without   going through this steps , we simply assume that we are  his shishy  , that so easy, but think  about a minute   ,   to get shishyta of such a  param yogi paramhans swami nikhileshwaranand ji, even maha yogies   do tapsaya  so many  births, than such a  blessing comes. Is  shishyta of Sadgurudev Bhagvaan is so simple and easy…..
                              “who do not know  the name of o  lord hanuman,  problem remover Is thy name “ it seems  that in our life  problem become   the real wealth of  us, how  to face  the problems , when it has so many faces,  and what  will a person do ,  if he worries about coming  problem. Than..
 This simple prayog  of Bhagvaan Aanjney   protects  you.
 Mantra :
Hanuman  pahalvaan,  barah  varas  ka  jawan | mukh  me  beera   haanth  me  Kaman |  lohe   ki  lathh  vajra  ka  keela | jahn  baithhe  hanuman hathhila | baal re baal raakho  |  sis  re sis rakho  |  aage  jogini  raakho |  paachhe narsinh raakho | in ke paachhe  muhmuda veer chhal  kare , kapat  kare , tinki kalak ,bahin beti par  pare | dohae mahaver swami ki |
 General rules:
·  No restriction regarding clothes and aasan and direction but red color cloths would be fine .
·  Mantra jap   time   ,if in the morning than its  much better.
·  Can use  rudraksh mala,
·  Have to chant only 108 times, and  offer aahuti means  havan  with guggul than  it would be fine.
·  Pray to Sadgurudev Bhagvaan than  through the blessing of  Bhagvaan Aanjney  all our  problems  gets removed,
 This is enough for today
****NPRU****

Sunday, August 28, 2011

FOR FINANACIAL GAIN-PADMAVATI DEVI PRAYOG


सदगुरुदेव भगवान  कहते हैं  की   जिस काल में  उन्होंने  अपना  एक शिक्षक  के  रूप में,   कार्य  प्रारंभ  किया  था, उस काल  में   और आज  के काल  में कोई ज्यादा अंतर  नहीं हैं , उ स समय  व्यक्ती के चरित्र  का  बहुत मूल्य  था अगर  व्यक्ति  भले  ही  निर्धन   हो पर यदि चरित्र वान  होता था  तो उच्च  से उच्च व्यक्ति  फिर वह चाहे  कितना ही  धनवान हो उसे  खड़े  हो कर सम्मान  देता  ही था ,
       पर आजके  युग में चरित्र   की कोई मूल्य  ही नही हैं , जिसके पास धन  हो  सब  उसे  ही  सम्मान देते हैं फिर  भले  ही बह कितने  ही  गिरे  हुए  चरित्र  का   ही क्यों न हो , वह भी ठीक  था , और आज भी ठीक हैं . 
  यह सत्य हैं  धन सब कुछ नहीं  होता  पर बहुत कुछ तो होता हैं  ही , इसी बात को ध्यान में रख कर सदगुरुदेव  भगवानने  इतनी  साधनाए  मात्र  धन के पक्ष   को मजबूत करने की लिये  दी थी.
  सदगुरुदेव भगवान् ने  यही  भी कहा  था  की तुम  इन साधनाओ का मूल्य समझते  नहीं हो  अगर  इनमे से एक भी साधना  अगर पूरे  मनोयोग से  की होती  तो आज तुम शिष्यों में से कितनो के पास यह आर्थिक  समस्या   होती ही नहीं , "यह कहते हुए  उन्होंने लगभग  २०  विभिन्न  संप्रदाय  के नाम , जितनी  की  साधनाओ  को उन्होंने  एक ही   पत्रिका के   अंक में  दी  थी गिनाये थी 
        "लक्ष्मी  प्राप्ति  ", "एश्वर्य महा लक्ष्मी  साधना "  , "तारा साधना ",  "महालक्ष्मी साधना  के दुर्लभ प्रयोग ", ऐसे अनेको ग्रंथो की रचना  की हैं पर हम लोग  भी  समझे  तो हैं  न ,, पर  हम  तो साधना  को मात्र पढ़ कर रख देने  की बात समझते हैं .
         इसी  श्रंखला में   उन्होंने  एक बार  एक लेख दिया था, “लक्ष्मी साधना के  दुर्लभ रहस्य”  उसमे  उन्होंने   यह बताया   हैं की  जब सामान्य लक्ष्मी साधना से भी  लाभ  होता न दिख रहा हो तो  व्यक्ति  को जैन धर्म की धन की आधिस्थार्थी " पद्मा वती  देवी की साधना  करने  को आगे  आना  ही चाहिए , इस स्वरुप  की प्रभाव  तो आज हम सभी   जैन धर्म के लोगों की संमृद्धि देख कर  समझ सकते हैं  ही सदगुरुदेव   भगवान ने अनेको  बार  भगवती पद्मा वती की पूरी साधना  विधि  दी हैं , पर ….
         जब समय न हो , जो की हमारी  पूरी पीढ़ी  का मूल वाक्य  हैं तब ...
·         जब हम बड़ी साधना के लिए उत्सुक न दिखे  तब ..
·         जब हम साधनात्मक  नियम पालन करने के  इच्छुक  न हो तब ..
·         जब हम अपने  पर नियंत्रण  न कर पा   रहे  हो तब,,
·         जब हम महगें यंत्र और माला   न ले पा  रहे  हो तब.
·         जब हमारे  घर में साधना का वाता वरण  ही न हो  तब
·         न ही हमारे पास  कोई अपना साधना कक्ष  हो  तब ..
        इन्ही बातों को सदगुरुदेव  भगवान ने बहुत पहले  समझ कर अनेको सरल प्रयोग भी  दिए थे , जो  की  बृहद  साधनाओ  का स्थान तो नहीं ले पाएंगे .
                  पर आपको जीवन में कुछ तो अनुकूलता  ला पाएंगी ही , और जब आपको थोडा  भी अनुकूलता  दिखाई  देगी तो आप स्वयं ही आगे बढ़ेंगे   हैं हैं न .
मंत्र  :
ओम पद्मावती सकल पद्मे पद्मपुषिनी वान्छितार्थ्य पुरय पुरय नमः
सामान्य नियम ;
·         यह मंत्र को रोज सुबह १ माला १ महीने तक जाप करना चाहिए
·         और आर्थिक उन्नति के लिए प्रार्थना करनी चाहिए
·         साधक को भोजन मे लहसुन प्याज का त्याग करना चाहिए.
·         माला स्फटिक / कमलगट्टे की रहे.
·         दिशा उत्तर, वस्त्र ,आसन सफ़ेद..
·         जप  का  समय सुबह  का
        क्या एक बार फिर से  लिखूं की सदगुरुदेव भगवान्  से प्रार्थना   तो हर साधना  का अनिवार्य  अंग हैं ही , यह तो आप सभी जानते हैं ही , पर  हममे से कितने हैं जो हर दिन का मंत्र जप करने के बाद , सारे मंत्र जप को  अपने परम  प्रिय ,प्राणा धार  सदगुरुदेव के श्री दिव्य  चरण कमल  में  पुरे मनो योग  से समर्पित  करते हैं ...हर साधना  का मूल आधार  सदगुरुदेव  भगवान् नहीं हैं बल्कि वे ही एक मात्र आधार हैं .........
वह ही आदि हैं अंत हैं
..  सदगुरुदेव  देव साक्षात्  परम ब्रहम
      तस्मै श्री सदगुरुदेव नमः
आज के लिए बस इतना  ही

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   Sadgurudev  Bhagvaan , on a place says that , “in comparison  to the  time ,when he started his career as a  teacher and   the current one  ,only differences is that ,  in that era , character had a  very high value , a person with high character with very low financial health ,  get respect  by even  the very wealthy person, and  now   the character  has been  replaced  by   money, now character has  not has  such  value  , only  if a person has  money ,everyone will see and  do  the respect of him,  that was  right at that time  so  this is  right in this time.”
 Money is not everything  but  it can do  many things,  for that view  our Sadgurudev has  given us  so many sadhana   to improve  our financial  health.
Sadgurudev  Bhagvaan  says that “ you are  not understanding the values of theses  sadhana, if you had completed any one sadhana   with full heart and  devotion than many of   you, are not facing the  problem  related to  wealth/money, as you are facing now ” and  he  mentioned approx 20 various sect name of that , he has given sadhana specially in a issue  at that  time.
“Lakshmi prapti “, “Ashvery Mahalakshmi Sadhana” , “Tara sadhana”,  “Mahalakshmi sadhana ke  durlabh prayog”  like so many  sadhanatmak books written  by  him.  But we are  not understanding their  value, if we can than…..
         In this relation , once he has  given various  hidden  secret rules  related to lakshmi sadhana  to us and  mentioned that when  desired financial property is not achieving  through various lakshmi sadhana , than a person must go for  “padmavati devi  sadhana” , who is   the ruler of financial prosperity in jain dharma sadhana.  And one can understand the  financial health our jain  brothers .  Sadgurudev  Bhagvaan has  given many times  padma vati sadhana ,but….
When  we  do not have time ( the basic argument of our  generation ) than..
When we are not interested in  any big sadhana  than,,
When we  are not ready  for  to follow  sadhanatmak rules than..
When we are not able to purchase   costly yantra and mala  than..
When   such a  sadhanatmak atmosphere is not available in our  home than..
When  we have not any separate room  for sadhana  than..

                                Taking  care of these arguments Sadgurudev Bhagvaan has  given  many small sadhana   for this  purpose,   yes its is  true that they  are a not replacing  the effect of  long sadhana  but they can surely  given  some relief and positivity in  money matter, when  you  feet the change   you can surely  come  forward to  do sadhana .. yes it is  true..
Mantra ;
Om padmavati  sakal padme padampushini  vaanchhitarthye puray puray namah ||
General rules:
Do jap   this mantra one  mala  for  next  30 days .
And pray  for financial improvement.
Should not eat  lahsun  and  pyaj in that duration.
Jap mala  be off   sphatik  or  kamal-gutte .
Direction should be  north and cloths/aasan  be of white  color.
Jap  time should be morning hours,
         Is it right  for me  to request  you  all that , pray to Sadgurudev Bhagvaan   for success in any sadhana ,  is an essential / must  part of any sadhana,  this all you  know already, but how many of us , offer our jap at the end of  any days  mantra  to  the  divine  holy lotus feet of Sadgurudev  Bhagvaan  with full devotion and heart ,
  Sadgurudev Bhagvaan is  not one of the basic  foundation of any  sadhana, but he is  the only  foundation of  any sadhana.

 He is the beginning and he is the end.
“Sadgurudev  sakshat  param   braham ..
 Tasmai  shri   sadgurudev   namah.”
 This is  enough for today..
****NPRU****

Saturday, August 27, 2011

KAARYA SIDDHI SADHNA PRAYOG


कुछ साधना प्रयोग तो हर दिन प्रारंभ किये  जा सकते हैं तो कुछ  के  लिए हमें  विशेष  दिन  रुकना  पड़ता  हैं ही .  इन विशेष  दिनों में  ग्रहण  काल का अपना ही महत्त्व हैं,   जिस  काल मे  एक   माला मंत्र जप   का सेकड़ों   गुना  असर मिलाता हैं पर इसका ये अर्थ हैं की   जो  साधना  १०० माला  जप  की हैं  उसके लिए  एक माला  मंत्र जप कर लिया जाये  तो वह पूरी हो गयी ?,
  नहीं नहीं……
  असर १००  गुना मिलेगा पर  आप को   जितनी माला  किसी भी  साधना   में निर्दिष्ट   की गयी हैं   उतना  तो  जप आवश्यक हैं ही चूँकि  उसका  परि णाम कई  गुना  मिलता   हैं  तो सफलता  कई  गुना सभव  हो ती हैं.
              हम सभी को अनेको  कार्य चाहे वह छोटे  हो या बड़े  हो   से  दिन   प्रति दिन  सामना करना  ही  पड़ता हैं ही पर  जहाँ कार्य हैं तो  मन में परेशान होना भी स्वाभाविक  हैं की  क्या परिणाम   होगा? ,  पर कुछ तो काम ऐसे  हैं जिनकी  की सफलता  हमारे लिए  बहुत  ही अर्थ रखती हैं  जैसे   जाब के लिए साक्षात्कार , अपने पुत्र  या पुत्री को किसी  अच्छे स्कूल  में एडमिशन  दिलाना या फिर घर मकान  के लिए लोन  लेने संभंधित  या कभी इनके  लिए कई  जगह  लोटरी  के माध्यम से आवंटन  किया  जाता  हैं  ऐसे अनेको  कार्य गिनाये   जा सकते हैं     .
 अब हर कार्य  के  लिए एक एक साधना   तो नहीं की जा सकती हैं  क्या  कोई एक साधना  ऐसी  हैं  जिसके माध्यम से किये  गए हर कार्य में सफलता   की सम्भावना कई गुना   मिल सके . किसी भी  बृहद साधना  को संपन्न  करने  की बात ही कुछ ओर हैं  क्योंकि उसके संपन्न होने पर  जो उर्जा आपमें निहित  होती हैं  वह तो कल्पना से परे हैं पर  सरल साधनाओ  का अपना ही एक अलग   ही असर  हैं
एक ऐसा   ही    सरल प्रयोग आपके सामने  हम रख रहे हैं ,
 जिसे आप समपन्न करके  जीवन में  सफलता   का आगमन  कर सकते हैं .
यह कार्य सिद्धि का मंत्र  है, मंत्र जप के बाद किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को संम्पन करने से पूर्व १ माला कर  लेने पर कार्य सिद्धि होती है और जितना संभव हो पूर्ण लाभ प्राप्त होता है
ॐ  सर्वोदय सम्पूर्ण लाभ प्राप्त्यर्थे नमः
साधना नियम :
·         जप  रुद्राक्ष  माला से करे
·         ग्रहण काल में  पहले ११ माला  जप   गुरु मंत्र की करे
·          फिर इस मंत्र  की  ११00 बार  उच्चारण  करे
·          जप  की दिशा उत्तर दिशा  होनी चाहिये
·         वस्त्र और आसन भी सफेद  हो ना चाहिए
·         सफलता  प्राप्ति के  लिए सदगुरुदेव भगवान् से प्रार्थना  करे 
आज के लिए बस इतना
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No..no..
                             Result will be  100 times  but   you have to required the mantra jap as directed in that sadhana. yes the result  is many times  so the possibility of getting  success  will be much much higher.
                           There are  so many work whether they are small or  big , always  comes in our way    in day to day life and  some  of   have so much importance  that  on the success of that work , we became worried. Work like  job interview , getting  admission of our children in any  prestigious  school , or  getting approval of loan  for our  home , or some times  through lottery system  the  house allotment has  been done , like that so many work…..
This will not be possible that for each  work we will start a separate  sadhana .
     is there any sadhana from which the success of any work what we undertake   will be successful or the possibility of  getting success is much much higher,.
        When we get success in any big sadhana  that is great things  since so much divinity comes in our body that is another experience. But  theses very easy prayog  have also  a place
One  of them here  for you ..
Through that  you can increase the  possibility of success
This is the kary  siddhi mantra , after completing  the sadhana  vidhi when  you have to go  for any  work  just chant one  round of this mantra   and  go ahead.
 Om sarvodaya  sampurna  labh praptyarthe namah

 General  rules:
1.    Do jap with  Rudraksha  rosary .
2.    In grahun kaal  first   jap 11 round of rosary   of guru mantra.
3.    Than chant 110  times the  kary siddhi mantra
4.    Direction should be  north
5.    And the  cloths and aasan should be white
6.    For getting success in this sadhana ,pray  to our beloved sadgurudev  Bhagvaan.
This is enough for today
****NPRU****

Friday, August 26, 2011

Shtru nashak sadhana prayog


सदगुरुदेव अनेको बार कहते  एक राजस्थानी कहावत हैं की   "ऐ माई एसा पुत जन दुश्मन होय हज़ार " मतलब  हे माँ तुम एक ऐसे  पुत्र  को जन्म  दो किसके  कम से कम हज़ार शत्रु  तो हो ही” . क्यों तुम्हारा तो कोइ शत्रु हैं नहीं ,क्योंकि शत्रु  तो उसी का  न होगा  जो कुछ लीक से हट कर कर रहा   होगा , अब केंचुए जैसे  जीवन का कोई क्या शत्रु होगा ,

सच बात  भी हैं आलोचना     तो उसी  की होगी  न  जो कुछ कर रहा   होगा, जो मात्र आखें बंद कर बैठा  हो  कुछ कर  ही न  रहा हो वह  तो सीधे  ही परम हंस  हो गया , जीवन में  गति शीलता और  कार्यशीलता   की आवश्यकता हैं ,
 आजके  युग में सतोगुणी  नहीं बल्कि   रजो गुणी  व्यक्तियों की आवश्यक ता हैं तभी तो इस साधना विधिया और  इससे सम्बंधित कार्य  को गति शीलता मिल सकेगी . 
 ठीक इसी  तरह  जीवन में हमारे कुछ उजाला आये , कुछ सदगुरुदेव  के  ज्ञान  रूपी सूर्य का उदय हमारे मन  में हो  तब न जीवन की सार्थकता  हैं, न की हम अपने जीवन में मात्र ही आलोचक न  बने,कि  अर्थ  हो इस जीवन का , कि  हर किसी पर चीखने  चिल्लाने पहुँच गए ,  यह तो इस जीवन का अपमान हुआ  न. यह कार्य  तो दूसरों पर  छोड़ दे

कम से कम हमारे सदगुरुदेव का  यह सपना   तो न  था, वह चाहते हैं की हम सभी दीपक से बढ़कर छोटे छोटे  ज्ञान के सूर्य बने , न की जय कारा  लगाने वाले  एक भक्त .

परन्तु सच्चाई  थोड़ी कडवी हैं  पर एक बार  निरपेक्ष  दृष्टी से सोचे   तो  हम सभी  को   साधक बनने  कि कोशिश करना  चाहिए  हैं / था पर  हम हो गए एक भक्त .. 
हमें सदगुरुदेव भगवान् ,आकाश कि  अपरिमित विस्तार नापने के  योग्य बनाना  चाहते  थे, पर हमने  एक भक्त बनना   ज्यादा   पसंद किया 


 जीवन हैं तो  शत्रुता  होगी  भी  पर शत्रु का मतलब क्या हैं वह हो हमारे   विरुद्ध खड़ा हैं  ,केबल वह शत्रु हैं .... .न ...न .....बल्कि ऐसी सारी परिस्थतिया   जो हमारे  विपरीत  हो  , जो मार्ग में वाधा  बन रही  हो , भौतिक  ही नहीं शारीरिक भी और  साधनात्मक भी उन सभी का निराकरण हो सके ,

अंतर और बाह्य्गत  दोनों  कि विपरीत परिस्थतियाँ  ही हमारी वास्तविक  शत्रु हैं 


फिर वह हमारी अत्यधिक बढ़ ती  हुए काम वासना  हो या फिर आसन पर स्थिर न बैठ  पाना  हो या  फिर कोई शारीरिक रोग  ही हो  या फिर हमारे जीवन  में आने वाला  कोई दुर्घटना या फिर किसी  अचानक  धन हानि  ये सभी  भी तो शत्रु हैं ही.घर में सुख शांति न हो . ये भी  तो उतनी  ही  घातक  हमारी शत्रु हैं .


 तो इन सबका निराकरण कैसे हो 

क्या  कोई उपाय हैं, अब सदगुरुदेव ने  तो कोई  क्षेत्र  छोड़ा नहीं ,वे  ही साधना   जगत  की सर्वोच्चता हैं अनंतता हैं , वही  सब कुछ हैं, उन्ही की कृपा ही तो हैं यह प्रयोग  जो आपके सामने प्रस्तुत हैं  यह अत्यंत सरल प्रयोग  को आप कभी  भी जब आपको लगे  की शत्रु तत्व के कारण आपकी प्रगति में वाधा आ रही हैं तो इस प्रयोग  को कर ले .
शत्रु होना जरुरी हैं , पर उनसे हार मान जाना   तो  जरुरी  नही हैं  तभी तो जीवन कि पौरष ता  हैं  मैंने इतनी विधियाँ क्यों लिखाये 

शत्रु दमन के लिए इस मंत्र को रोज २१ माला १ हफ्ते तक करे, सोम वार से शुरू करे माला रुद्राक्ष ,समय रात्रि काल मे १० बजे के बाद दिशा उत्तर / पूर्व वस्त्र स्वेत रहे.
रुं रुं रुं रुं रुं रुं रुं रुद्राय शत्रुदमनाय नमः

आज के लिए बस इतना 
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Sadgurudev Bhagvaan many times used to say this rajsthani proverb that “ye meri mai aisa put  jan  ,dushman  hoy hazaar “ means  o mother become a mother of such a son that  have at least  thousand enemies” but our life  is like earth worm  so where is the enemy ?, since enemy  will  be to those one , who are  doing something different.
Its  true , that  one ,the person will be a centre of criticisms , who is  doing something special, not to that  fellow who is sitting  with closed eyes  ,  he is already a paramhans.
Like that . our life will have rays of Sadgurudev bhagvaaan’s divine knowledge ,  than only our  life has a purpose , its  not good that we become only a criticizer, this is a accuse to  life. leave this criticism  too others.
At least that was not the dream of our Sadgurudev bhagvaan , he wants  that all of us turn  to  small  sun  from a small  Deepak., we should not be just a shishy who can  say only “ jai Sadgurudev”
When  there is life , then surely , some type of enemy will also,  we have,. but whom we call a shatru ???    to that who stand against us , or  our physical or  financial  or  mental  problem.  Theses all  above mentioned situation are our enemy.
 intrernal and external both are the problem.
 Like that we cannot  sit longer in our aasan , or worried about ever increasing our sexual desire in sadhana kaal  or  physical illness or our near and dear one.  Or any other type of accident.  All theses are known as shtru./enemies.
 Than  how we can solve that is there any  way to achieve that  ,
 Sadgurudev Bhagvaan did not leave any field on sadhana  on that he  not taught  to all of us,  since he is the param purush , ultimate  in sadhana  jagat.,  this is his blessing that are coming as  this prayog. Do this prayog any time when you think   shatru are creating problem.
 Do jap this mantra  for one week  with a jap of  21 round of rosary  for each 7 days. Start this prayog with Monday,   facing   uttar /purv direction  and  jap  time will be  after 10pm  night. And not only aasan but the  clothes of you should wear be  white.
 Mantra :
Rum rum rum rum rum rum rum rudraay shtrudamnaay namah ||
  
 This  is enough for today 
****NPRU****

Thursday, August 25, 2011

Sadhana for to know where about of missing person


साधना  जगत के महारथियों ओर सिद्धो, महा योगियों  ने जीवन के सभी पक्षों   को पूर्णता के साथ स्पर्श किया हैं ,फिर वह चाहे , वह भौतिकता  के  हो या फिर  आध्यत्मिकता  के हो , शारीरिक   हो मानसिक या जिनके बारे में शायद हम खुल कर बात नहीं कर पाए ऐसे अन्तरंग बाते हो या  परिवार  की बाते हो , सभी पक्षों  पर उनकी नज़र रही हैं ,सिरदर्द से ले कर हर रोग  पर ,हर स्थिति  पर उनकी  दृष्टी  रही हैं ,और इसके निवारणार्थ   हम  शायद   सोच भी   नहीं सकते  उन्होंने  हमे किन किन साधना विधियों  उपहारों  से नवाज़ा हैं , हम पर हैं कि    इसे संभाल कर  उपयोग में लाये या धुल में फ़ेंक दे . क्योंकि बहुमूल्य  कोहिनूर भी  तो हैं आखिर एक पत्थर  ही . दक्षिण भारत कि जिस जगह से  यह मिला था, आप जानते हैं कि कितने  दिन तक  एक किसान के बच्चे इसे  एक पत्थर  कि तरह  इससे   खेलते रहे हैं , ठीक इसी   तरह  ये सब भी,   यदि आप  इनका मूल्य समझे  तो ......

 पर इस  बढती हुए  भौतिकता  में अनेको बार  कभी  आर्थिक समस्या से  या  मन मुटाव से ,  या फिर किसी  को कोई बात  बुरी  लग जाये  या फिर  घर का  कोई  बुजुर्ग  कभी घर  छोड़ कर  चला जाये , भावावेश  या  क्रोध में  तो निर्णय ले लिया  पर  या तो वह घर आना ही नहीं चाहते  या फिर उनसे संपर्क करके यदि हम एक बार  स्नेह से बात करें तो शायद ...

पर  उनसे  से  हम कहना चाहते हैं  पर  कैसे कहें, अब जब की उनका पता  ही नहीं चल  पा रहा हो , अनेको प्रयोग  इस सन्दर्भ में  दिए गए हैं , कुछ तो बहुत  ही बड़े हैं,  तोकुछ सामान्य हैं पर प्रभाव दायक  हैं ऐसे  ही एक प्रयोग  से आपको यहाँ  हम  परिचित  करवा रहे हैं, आप हमेशा  ध्यान रखे  हर प्रयोग के मूल में सदगुरुदेव भगवान कि कृपा एक   अनिवार्य एक आवश्यक  तत्व हैं ही , हम सभी यह जानते  हैं की यह बात अब तो आपके ह्रदय  में  अच्छे से अंकित हो ही गयी होगी .
·          उस खोये  हुए व्यक्ति का फोटो अपने  सामने रखे,
·          ११ दिन तक ११ माला जाप  करना हैं .
·          जप समय रात्रि काल मे १० बजे के बाद  ही  प्रारंभ होगा .
·         जप माला  रुद्राक्ष माला  हो तो अच्चा  होगा ,
·          सफ़ेद वस्त्र  धारण  कर  सफ़ेद आसन का प्रयोग करे 
·         जप करते समय  आपकी दिशा  उत्तर पूर्व दिशा
·         गाय के शुद्ध दीपक  को जप काल में जलाना  ज़रूरी है
·         किसी भी शुभ  दिन से यह प्रयोग  प्रारभ किया जा सकता हैं 
 मंत्र :
दत्तदातार दिखादे चारो धारआगम निगम दिखावे कर दे बेडा पार
साधना काल या आखरी दिन मे खोये हुए व्यक्ति के बारे मे स्वप्न के माध्यम से  संकेत मिलते है 
 आज के लिए बस इतना ही
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                                 The mahayogies , siddh  of sadhana jagat  , has touched every aspect of our life,  whether that are  related to physical  world  or material  world  or spiritual  world  or that  may be related to  our physical problem or  problem like headache to major illness  or  some personal problem for that we cannot  talk to any one, that means they  touched each and every aspect of our  life and provide so many  boons  as a sadhana vidhiya   for to  solve them , now its  upon  us , how we can take that ,do you know that  how many days  ,even very costly diamond  “kohinoor ” was used as a  playing stone  by the children of a south india  villager , since apart from its value  after all  that is a simple   stone , like that  theses sadhana vidhiyan , if you understand and  use them in time of need , than you can understand its value  other wise..
 Now every day, growing materiality  creates so many problem sometimes  due to  financial problem  sometimes little minor  dispute , or someone  get hurt  with our behaviours  or sometimes any elder person of our  family  leave the home reason may be any . when this decision taken in sudden anger , or in emotional weakness , now what to do  to take back them  our  home,  either they are not want to return or  if we can make little effort to  convince  them for returning politely may be result  will be  positive , but  for that we have to   know about them,,,,
 For this cause  so many sadhana are mentioned in our sadhana granth some are little lengthy , but some are small sadhana but very effective for this  cause, here we are introducing one of  such  sadhana. But always keep remember that in the success of each  sadhana ,  the blessing of Sadgurudev Bhagvaan is a must factor. And we also knew that this fact  you all are very well known.
·         Place that missing person photograph in front of you.
·         Do jap 11 round of rosary for 11 days in continuous.
·         Start   jap after 1o pm in the night.
·         Use Rudraksh mala  for jap.
·         Wear white clothes and use white aasan.
·         Direction  will be north east.
·         And this sadhana/prayog can be started in any auspicious day.
 Mantra :
Dattdaataar dikha de  charo dhar ,aagam nigam dikhave kar de beda  paar
 During the sadhana kaal  or at the  last days  you will have clue or indication of that fellow  through dreams.
This is enough for today .
****NPRU****