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Wednesday, November 30, 2011

AAVAHAN-21 (SOHAM KRIYA)


जैसा की कहा गया है अनुलोम विलोम के ५ भेद है. पूरक और रेचक की प्रक्रिया तथा दोनों नथुनों से यह भेद का अस्तित्व है.

१ ) दाहिने नथुने से पूरक तथा बाएँ नथुने से रेचक

२ ) दाहिने नथुने से पूरक तथा उसी नथुने से रेचक

३ ) बाएँ नथुने से पूरक तथा दाहिने नथुने से रेचक  

४ ) बाएँ नथुने से पूरक तथा उसी नथुने से रेचक  

५ ) दोनों नथुनों से पूरक तथा रेचक की प्रक्रिया

प्रथम चार प्रक्रिया मे जब एक नथुने से पूरक करा जाए तब दूसरी तरफ के नथुने को अंगूठे से दबा दिया जाए उसके बाद कुम्भक कर के रेचक के समय भी दूसरी तरफ के नथुने को अंगूठे से दबा दिया जाए.

जब भी पूरक करे तब ‘सो’ का मन ही मन जाप करे, जितना साँस को खींचें का समय होता है, मंत्र का लय  भी उतना ही लंबा रखे. कुम्भक के समय जितना भी संभव हो आज्ञा चक्र पर आतंरिक रूप से ध्यान देते हुए सोऽहं मंत्र का जाप करे. रेचक करते समय सिर्फ ‘हं’ बीज का जाप करे.

इस तरह इस प्राणायाम के ५ प्रकार को १०-१० बार करे. यह प्रक्रिया २१ दिन तक नियमित रूप से करने पर आज्ञा चक्र पर एक पीला प्रकाश दिखाई देता है. इस प्रकाश मे अंदर उतरने पर सूक्ष्म जगत मे प्रवेश प्राप्त किया जा सकता है. इसके साथ ही साथ साधक को सोऽहं बीज का जितना भी यथा संभव हो जाप करते रहना चाहिए.

यह नाद की योग तांत्रिक प्रक्रिया का प्रथम चरण है. इसी के दूसरे चरण के लिए जो बीज मंत्र का जाप किया जाता है वह है ‘हंसः
यह बीज भी अपने आप मे एक अत्यधिक महत्वपूर्ण बीज है. जिसका उपयोग भी इसी प्राणायाम के साथ होता है. जब व्यक्ति सूक्ष्म जगत मे प्रवेश कर ले उसके बाद उसे इस दूसरे चरण की प्रक्रिया को अपनाना चाहिए.

इस प्रक्रिया को अपनाने पर साधक का चित पूर्ण रूप से निर्मल हो जाता है. साथ ही साथ ह्रदय चक्र के चेतन होने से साधक अपने आप मे अत्यधिक क्षमतावान बन जाता है. किसी भी स्थान पर हो रही घटना को जानना उसके लिए संभव हो जाता है. ध्यान की स्थिति साधक के लिए सहज हो जाती है.

इस प्रक्रिया मे साधक को प्रथम प्रक्रिया की तरह ही जाप करना है, जब पूरक किया जाए तब ‘हं’ बीज का जाप करना है, जब कुम्भक करे तो ‘हंसः बीज का जाप करना है तथा जब रेचक करे तब ‘स’ बीज का जाप करना है. साथ ही साथ यथा संभव जितना भी हो सके इस मंत्र का जाप करते रहना चाहिए. इस प्रकार अनुलोम विलोम की पांचो प्रक्रियाओ को २०-२० बार करना चाहिए. यह २१ दिन का दूसरा चरण है.

इसके बाद इस प्रक्रिया का तीसरा चरण आता है. दिव्यात्मा ने जब इस प्रक्रिया का मंत्र मुझे बताया तब मे हक्काबक्का सा रह गया, एक बारगी विश्वास नहीं आया.

As it has been said, there are 5 types of anulom vilom. The different is based upon the breath taken from the nostril and poorak & rechak processes
1)    Breathe in from left nostril and breath out from right
2)    Breathe in from left nostril and breath out from the same
3)    Breathe in from right nostril and breath out from left
4)    Breathe in from right nostril and breath out from the same
5)    Breathe in and breathe out from both nostrils.

In first four process when breath in is done from the one nostril, the other nostril should be closed with thumb after that do the holding process and while breathing out from the one nostril, the other nostril should be closed with thumb.

When the process of breath in is done chant mantra “So” in the mind, the time duration of breathe in, the equal time should be used for stretching the chant of mantra. At the time of holding the air with concentration on agya chakra one should chant mantra “soham” mentally. While breathing out one should chant “ham”.

With this process, every 5 type of this pranayam should be done 10-10 times. This should be continuing till 21 days which results in a yellowish light on the agya chakra. Entering in this light is the passport of the sukshm jagat. With this sadhak should also keep on chanting “soham” mantra as much as possible.

This is first stage of the yog-tantrik process of Naad. For the next stage the mantra which is taken to use is “hansah”
This beej mantra is also one of the very important beej mantra which is also used with the same pranayam. When a person is eligible to enter in sukshm jagat he may go for second stage.

With application of this process the soul of the sadhak becomes pure. With this, the activeness of the Hriday Chakra makes sadhaka more eligible. To generate information of anything occurring at any place becomes possible. Position of Dhyana even becomes easier.

In this process also, sadhak is needed to chant the mantra like previous method only. While breathing in “Ham” mantra; at the time of holding “hamsah” mantra and while breathing out “sa” mantra should be chanted. With that one should keep on chanting this mantra as much as possible for them. This way 5 process of anulom vilom should be done 20-20 times. This is 21 days second stage.

After this, there is a third stage of the process. When Divyatma told me about this mantra, I was stuck and I did not come to believe it certainly.
 


                                                                                               
 ****NPRU****   

Tuesday, November 29, 2011

AMAL RUHE HAMJAAD


चानक उस टूटे हुए कमरे का वातावरण और अधिक रहस्यमय हो गया था ,शनैः शनैः रात्रि का तीसरा प्रहर प्रारंभ हो गया था,उन्होने अपने अमल को और तीव्रता दे दी थी,मेरा आसन उन्ही के बगल में बिछा था,और उनकी सभी प्रक्रियाओं पर मैं बहुत बारीकी से ध्यान दे रहा था.
   उन्होंने मुझे बताया था की आज वो सदगुरुदेव द्वारा प्रदत्त सिद्धात्मा आवाहन की विशिष्ट साधना को करेंगे,आज उन्हें ऐसा ही आदेश हुआ है.
क्या आपने पहले ये क्रिया कभी नहीं की-मैंने उत्सुकतावश हसद बक्स जी से पूछा .
बहुत बार की है मेरे बच्चे......अक्सर मैं उच्च कोटि की साधनाओं और रहस्यों की प्राप्ति के लिए सदगुरुदेव की आज्ञा से इस साधना का प्रयोग करता रहता हूँ-उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा.
क्या आप इस साधना को मुझे समझायेंगे ???
क्यों नहीं...आज रात्रि को तुम मेरे साथ ही इस साधना के लिए बैठना और ध्यान पूर्वक इसकी प्रक्रियाओं और विधान को देखना,तंत्र की अत्यधिक गोपनीय साधना है ,जिसके द्वारा उच्च लोकों में स्थित दिव्य व सिद्ध आत्माओं को प्रत्यक्षतः आवाहित करके उनसे अभीष्ट ज्ञान की प्राप्ति की जा सकती है .
वाह क्या बात है ....मजा आ गया.
बेटे ये साधना मजे के लिए नहीं की जाती है ,अपितु अत्यधिक गंभीर और एकाग्र भाव से ही इस प्रकार की साधनाओं में सफलता पाई जा सकती है ,इस बात का हमेशा ध्यान रखन और गलती से भी कभी मात्र परखने या मनोरंजन के लिए इस साधना को नहीं करना चाहिए.
जी माफ कीजिये... मैं इन बातों का ध्यान रखूँगा- मैंने सकुचाते हुए झुकी निगाहों से उत्तर दिया.
अरे कोई बात नहीं ,बस साधक को गंभीर होना चाहिए.
रात्रि को बाजना मठ के पास स्थित सरोवर के मध्य में स्थित रानिवास हमाम को इस क्रिया के लिए चुना गया ,और सारी तयारी कर गुप्त मार्ग से हम दोनों उस जगह पर पहुच गए,जबलपुर की विशेषता रही है की यहाँ के महलों या पुराने मंदिरों के गर्भ में कई तहखाने रहते हैं,जिनमे जाने का रास्ता इतना सुगम नहीं है,परन्तु तंत्र और शाक्तों का किसी समय में गहरा वर्चस्व रहा है यहाँ पर खास तौर पर चुरी नरेशों ने शैव शाक्त साधनाओं के अद्भुत प्रभाव से पूरी नगरी और उनके भग्न मंदिरों और महलों को अद्भुत रूप से शक्तिमय बना दिया था ,और जिसका प्रभाव आज भी कोई भी साधक अपनी साधना के द्वारा प्रत्यक्ष अनुभूत कर सकता है.शरीरस्थ १०८ चक्रों और ३२४ केन्द्रों पर इन शक्तियों का इतना तीव्र प्रभाव पड़ता है की सारा शरीर साधना काल में और उसके बाद भी तीव्र गति से स्पंदित और रोमांचित होता रहता है.
  खैर ये सब प्रथक विषय है जिस पर फिर कभी हम बात करेंगे,अभी तो.... हाँ... हम साधनाकाल की बात कर रहे थे ,सभी सामग्रियों का विधिवत स्थापन और पूजन करने के बाद हसद बक्स जी ने मन्त्र जप प्रारंभ कर दिया और बीच बीच में सामने रखे मिटटी के धूपदान में सुलग रहे कोयलों के अंगारों पर लोहबान डालने लगे,जिससे वातावरण में मादक सुगंध फैलने लगी और धुएं का तीव्र गोला जैसा बनने लगा.मंत्र उच्चारण करते हुए उन्हें ३ घंटे हो गए थे ,अचानक वातावरण में बहुत ही भीनी और धीमी धीमी सुगंध फैलने लगी ,और हसद भाई अपने दोनों हाथों को जोड़कर उस धुएं में देखने लगे ,मैंने भी उनका अनुसरण किया तो देखा की धुआँ हल्का हो गया था और अधर में एक आकृति का निर्माण होने लगा,और धीरे धीरे वो आकृति स्पष्ट होने लगी ,सफ़ेद साफा और सफ़ेद ही चोगा पहने हुए,हाथ में तस्बीह लिए हुए,लंबी सफ़ेद दाढ़ी,और चेहरे पर गजब का तेज लिए हुए आकृति और आँखे इतनी चुम्बकीय शक्ति से युक्त और नूरानी की बस जिस पर पड़े वो थम सा जाये.
आरिफ इन्हें सलाम करो.....ये सिद्ध औलिया रूहाफिन अदब हैं ,रूहानी ताकतों और ज्ञान में इनसे बड़ा कोई नहीं हुआ है अब तक ..अनगिनत अमलों को जो की खत्म हो गए हैं और जिनकी जानकारी भी आज किसी को नहीं है ,वे सब इनके पास सुरक्षित हैं और इन्होने उनमे नए नए अमलों को इन्होने जोड़ा है .
मैंने अदब से उन्हें सलाम किया .
उन्होंने भी जवाब देकर बहुत प्यार से मेरी और देखा और भाई जी अपने बुलाने का कारण पूछा .
भाई जी ने कहा –जी मैंने कभी सदगुरुदेव से सुना था की रूहे हमजाद और बादशाहे जिन्नात के कई सिफलि और अजायबात  अमल आपने अपने पीरों मुर्शिद से पाए हैं,मैं कई सालों से इन अम्लों को तलाश रहा था,यदि आप को सही लगे तो क्या आप मुझे इनमे से कुछ बताने की तकलीफ करे .
तब उन्होंने अपने चोगे में से एक हस्तलिखित उर्दू में लिखी हुयी मोटी सी किताब दी और कहा की ये मेरे जीवन भर का निचोड़ है .इसमें वो सारे अमल हैं जिन्हें मैंने खुद आजमाए और अपने उस्ताद से पाए हैं.तत्पश्चात उन्होंने उस किताब को कैसे प्रयोग करना है बहुत देर तक समझाया और वापिस जाने की ख्वाहिश की,हमने तकलीफ के लिए माफ़ी मांगी और उनका शुक्रिया अदा किया.
सारा सामान समेट कर वापिस हम भाई जी के डेरे पर पहुचे और सदगुरुदेव से मानसिक आज्ञा प्राप्त कर  उस किताब को खोल कर बैठ गए ,किताब का नाम था “ अमल-ए-रूहानी अजायबात”.और उस किताब में बने विभिन्न यंत्रों और क्रियाओं को समझाने लगे,रूहानी और गैबी ताक़तों की दुनिया से जुडी ऐसी जानकारी मैंने आज तक किसी भी जगह नहीं पढ़ी है. अद्भुत साधनाएं भरी पड़ी हैं उस किताब में. सबसे बड़ी बात ये रही है की सरल और सहज उपलब्ध सामग्री से होने वाले ये सभी विधान रहे हैं .
  २ साल बाद जब मैं हसद भाई से मिलने गया तो वहाँ पंचमी भाई और मेरे प्यारे बंगाली दादा भी थे,जब मैंने हसद भाई से उस किताब के प्रयोगों के बारे में पूछा तो उन्होंने वो किताब मुझे थमा दी और कहा की इसके सारे प्रयोग सत्य हैं .परन्तु बहुत से प्रयोग बहुत ही भयानक है और यदि आमिल इसे करते हुए डर जाए तो उसकी जान पर भी बन सकती है,परन्तु बहुत से प्रयोग अत्यधिक सरल है और यदि इन्हें विशेष प्रकार से किया जाये तो ये तत्काल पूर्ण लाभ देते हैं.और गैबी ताक़तों को आपका मित्र भी बना देते हैं ,परन्तु मेरी सलाह ये है की बिना सद्गुरुदेव की आज्ञा और दृढ़ इच्छा शक्ति के ऐसे प्रयोग नहीं करना चाहिए. फिर उन्होंने मुझे जिन्नात,पीर और हमजाद साधनाओं के कई प्रयोग सामने करके दिखाया .हमजाद साधना के बारे में उन्होंने बताया की  आकाश तत्व के योग से ही ब्रह्माण्ड के उन रहस्यों को आत्न्सात किया जा सकता है और जीवन में उतारा जा सकता है.ये नितांत सत्य है की यदि आकाश तत्व को समझ लिया जाये तो किसी भी व्यक्ति के मन को मष्तिष्क को पढ़ा जा सकता है,और उन विचारों की नकारात्मकता को सकारत्मक रूप में परिवर्तित किया जा सकता है,इसी तत्व का मूल रूप होता है छायापुरुष या हमजाद ,जो की व्यक्ति विशेष के आकाश तत्व और अग्नितत्व से निर्मित होता है ,यदि इन्हें सही तरीके से सिद्ध कर लिया जाये तो ये आपका सभी अभीष्ट पूरा कर सकते हैं ,हाँ एक बात ध्यान रखने वाली है की ये आपका काला रूप अर्थात आपकी परछाई होती है और परछाई का रंग हमेशा काला इसलिए होता है ,क्योंकि कुदरत आपको बताती है की ये आपकी नकारात्मक ताकत है और ये कभी भी आपसे छल कर सकती है ,यदि आपने सही तरीके से इनका रूपांतरण अच्छाई में नहीं किया तो ये आपको भ्रमित करते हुए आप पर ही राज करने लगती है .परन्तु मैंने सबसे निरापद और अन्य साधनाओं की अपेक्षा अमले रूहे हमजाद साधना को ज्यादा आसान पाया है और जल्दी सिद्ध होने वाला भी अतः मैं उसका समर्थन अन्य के मुकाबले ज्यादा कर सकता हूँ. हमजाद साधना के बहुत से गूढ़ रहस्य हैं ,चूँकि ये गैबी और रूहानी ताकट है अतः यहाँ पर ज्यादा लिखना उचित नहीं होगा,यहाँ मात्र मैं उतना ही लिख रहा हूँ जितना मैंने स्वयं करके सत्य पाया है और परख कर उसकी सत्यता देखि है ,पूर्ण श्रृद्धा और सदगुरुदेव की कृपा और उनके आशीर्वाद से आप निश्चय ही इस साधना का प्रभाव देख सकते हैं .
किसी भी शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से इस साधना को आप प्रारंभ कर सकते हैं ,एकांत कक्ष की व्यवस्था कर लेनी चाहिए और कक्ष में १४ दिनों तक कोई ना जाये इस बात का ध्यान रखे.पश्चिम दिशा की और मुह करके बैठना है ,सफ़ेद हकीक माला से मंत्र जप होगा ,ये साधना २ चरण की है पहले ३ दिन दरूद शरीफ को सिद्ध करे और उसके बाद ४ थे दिन से नित्य 24 माला मंत्र जप होगा, हर माला के बाद लोहबान की धुप देना है या बेहतर होगा की आप लोहबान की अगरबत्ती सुलगा ले और उसे बुझने न दे, बल्कि बुझने के पहले ही नयी जला लें. रात्री का दूसरा प्रहर इसके लिए उपयुक्त रहता है. तहमद (लुंगी) पहनकर और सर पर टोपी लगी हो सफ़ेद कुरता पहना हुआ हो.शुरू के तीन दिन अपने सामने आंटे का गोल घेरा बनाकर उसमे मिटटी का दीपक रख दे और उसमे चमेली या मेहँदी का तेल भर दे और उस दीपक के चारो और ३ गोमती चक्र,सफ़ेद आकडे की ३ अंगुल लंबी जड़ और तीन हकीक पत्थर रख ले और माला से नित्य ७ माला निम्न दरुद शरीफ की करे .माला करने के पहले एक बार ..
बिस्मिल्लाह हिर्रहमानिर्रहीम” बोले और फिर माला करे .
दरूद शरीफ-
अल्लाह हुम्मा सल्ले अल्ला,सैयदना मौलाना मुहम्मदिव बारिक वसल्लम सलातो सलामो का या रसूल्लाह सल्ललाहो तआला अलैह वसल्लम
तीन दिन तक यही क्रिया रहेगी ,तीन दिन बाद उस दीपक को जिसमे तेल भरा है साफ़ रुई की बत्ती डालकर अपने पीछे लगाना है और दीपक प्रज्वलित करना है ,याद रखिये आपका आसन सफ़ेद होना चाहिए और अपने आसन के चारो और आंटे से एक घेरा दरूद शरीफ पढते हुए बनायें. सामने जो भी वस्तुए स्थापित हैं वो वैसी ही रहेगी ,अब जबकि आपके पीछे जल रहे दीपक की वजह से आपकी परछाई सामने दिखाई दे रही होगी आपको उस की गर्दन पर आपको निगाह केंद्रित करनी है और मंत्र जप करना है ,पलकें झपक भी जाए तो कोई बात नहीं ,यथा सम्भव दृष्टि उसी पर केंद्रित करे.हाँ जप के पहले १ माला दरुद  शरीफ की अवश्य करना है ताकि क्रिया हानि न पहुचाये .और सबसे पहले बिस्मिल्लाह ..... भी अवश्य कहे.मूल मंत्र जप के ७ वे दिन से ही आपकी परछाई विचित्र खेल खेलने लगेगी ,कभी गायब हो जायेगी ,कभी आकार बड़ा या छोटा कर लेगी अजीब सी आवाज सुनाई देने लगेगी,आगे के दिनों में आपको ऐसा लगेगा जैसे आपके साथ साथ कोई और आपकी आवाज में ही बोल रहा है. अंतिम दिवस आप आंटे का हलवा बनाकर रख ले और जप के मध्य में भोग लगा दे ,मंत्र जप की आखिरी मालाओं में एकाग्रता की जरुरत है क्यूंकि आपका ध्यान बांटने के लिए हमजाद जोर से धमाके करता है पर अंततः आखिरी माला से थोडा पहले ही आपकी परछाई आपका ही रूप लेकर सामने बैठ जाती है ,और मुस्कुराकर आपकी और देखती है .माला पूरी होने के बाद वो आपसे पूछती है की “बताओ मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता हूँ” तो आप कहे की जब मैं तुम्हे इस मंत्र का १४ बार उच्चारण करके बुलाउंगा तो तुम हाजिर होगे और मेरे सभी नेक काम में मेरा साथ दोगे ,तो वो बदले में आप क्या दोगे तो आप उसे कहिये की हर काम के एवज में मैं सवा पाँव आंटे का हलुआ तुझे दूँगा.आपके इतना कहते ही वो “ठीक है” ऐसा कहकर चला जाता है ,दुसरे दिन आप हलवे समेत सभी सामग्री एक गढ्ढे में दबा दे .और माला को संभल कर रख ले तथा कमरे को धो ले.और जब भी नेक काम के लिए जरुरत हो,तब उसका आवाहन करे.
मंत्र-
हमजादे हमजाद पीरो मुर्शिद का तू गुलाम ,या कुफ्र गैबी अजायबात ,हमजाद कहना मान,जो ना माने तो कुफ्र टूटे तेरे सर पर तुझे माँ का दूध हराम, पीरो पैगम्बरों की आन.
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Suddenly that ruined room environment becoe so mysterious, gradually third part of night was started, he had speeden up his implementation. My asan was placed near by his asana only. And i was minutely observing his actions.

He told me, today we are going to do a specific Sadhna given by Shree
Sadgurudev called Siddhatma Avahan sadhna, today same has been ordered.

Due to eagerness i asked to
Hasad Baks ji – Have you done this before? He said – yes my son, many times i did this sadhna....Very smiling usually i take permission from Sadgurudev to performing this sadhna, so as to achieve information regarding the high level of Sadhnas & their secrets.

Will you make me understand this sadhna???

Why not... tonight you sit with me and watch keenly the preparations and procedures. Its the most secretful sadhna in Tantra because of which we can earn great knowledge from different spheres from high level of people.

Oh Wow...Thats so nice....

Son, this sadhna is done mere for pleasure rather only with high level of concentration and devotion can help you to achieve success in it. Mind well, never perform this sadhna just for sake of entertainment or authencity of it.

With consiousness and guilty eyes i said - Oh forgive me... I will adhere these points..

Oh thats fine, just sadhak need to be very serious at that time.

In night time, in centre of river, a place called Ranivas Hamam at Bajna Math was choosen for this sadhna. With all preparation we reached there via secret path on time. Its speciality of Jabalpur, that the old palaces are consists of underground rooms. from which the path is not that easy but in the Tantra and shakt had deep vigorousness over the old times. Especially the Churi Prince had activated the whole area, temples and palaces due to impact of Sahiva Shakt Sadhnas which can be validate at today’s date also by any sadhak via performing sadhna. Bodily this impact hits on 108 chakras and 324 centres of body and keeps you activated, vibrated for long time.

Anyways theses are different subjects on which we can converse some other time. Now.. ya where were we...Yaa we were talking about the sadhna duration, After establisment and worship of each and every thing, Hasad Baksji started mantra chanting. Meanwhile he was flaming the Lohban Dhup on the burning coals placed infront of him. Due to this aroma the environment became mesmerizing. Vapour was converting in dense circle. While mantra chanting already three hours paased on. suddenly whole environment filled with light aroma smell. Then Hasad Bhai was greeting with folded palms in that smoky area. I followed him as it is. Now the smoke density has ben reduced and converted into a humanly shape. gradually that shape becomes clear to us. wearing whole white cloths and white hat sort of on head, holding tasbeeh in hand, long beard and terrific glow on face personality was that attractive that whosoever see it once will bound to keep eye on it.

Then he said - Arif, Greet them... He is
Siddh Auliyaa Ruhafin Adab.. In Ruhaani Powers and knowledge no one touched his achievement yet... indefinite Amala which are vanished and are now invincible, are safe with him only. Even he has invented and added in them.

With due respect, I greeted him..

In return he also saw me with adorable eyes and asked whats the reason for calling me..?

Bhai ji said – I have heard some time from sadgurudevji regarding Ruhe Hamjaad and Baadshaahe Jinnaat whose various sifil and ajayabaat have been earned by you from Peero Murshid. I have been searching this since long. If you feel right, then could you please oblige me with few of them?

Then from his bag, he took out heavy weight handwritten book and said this is the extract of my whole life. It consists of all those amals which are tested by me and which I earned by my Ustad. Thereafter he explained the usage of this book. Then expressed his returning wish, we apologized u for bothering and expressed our thanks..

After winding up all things we returned at Bhai ji’s place and took the metal permission from Sadgurudevji and opened that book. The name of that book was “
Amal-E-Ruhaani Ajaayabaat” and started imbibing the various types of yantras and kriyas mentioned in it. I have never seen nor read the types of Ruhani and Gaibi powers before in whole life. Its full of wonderful sadhnas. The most importantly fact is that they can be done by easily available facts and figures.

After 2 years when I met Hasad bhai, I found Panchami Mai and Bangali Dada too. When I asked the experiments mentioned in that book, he then took that book in my hand simply and said all are authentic. But many of them are too dangerous and if the performer gets scared while doing this prayogs the he can die then and there.

Where as many are so easy to perform. if they are performed with special way they can give you results instantly. And make you a friend of gaibi Powers. But still I advise not to do this prayogs without Sadgurudev’s permission and strong heart. Then he did Jinnat, Peer and Hamjaad Prayogs infront of me. Regarding Hamjaad sadhna he told me, with the joint of Aakash tatva, one can imbibe those secrets of universe and implement in his own life. This is mere truth, that if understood the akaash tatva correctly then you can read any person’s mind and brain. Even you can convert the negative thoughts into positive. Chaayapurush is the original form of this only which is formed with Sky element and Fire element of a person. If they could be accomplishes in correct way then you can achieve any wish.

Hmm one thing you should keep in your mind i.e. this is your black form i mean shadow. and this is in black colour because Nature reminds you that this is your negative power and this can decieve you any time. If you doesn’t convert it into the positive form then she will create illusion infront you and in result rule on you.

But I found
Amale Ruhe Hamjaad Sadhna much easier and safer that any one else. Even it gets easily accomplish as compared with others. Hamjaad Sadhna consists of many secrets in it. As it belongs to Gaibi and Ruhani Powers so much explaination is recommended here. Only that much can be expressed which i have found correctly and tested. With complete devotion and blessings of revered Sadgurudev You can definitely be successful in this sdhana.

On any new to moon night ( Shukla Paksh) you can start this sadhna on friday. Arrange a lonely cabin, so as no one enter in atleast for 14 days. facing towards western direction, chanting with white hakik rosary.the complete sadhna is devided in 2 charan,in the first face we need to siddh Darud sharif. and in secand daily 24 rosaries should be done. After each rosary present a lohbaan dhup (aroma) or lohbaan Agarbaatti. But it should not slaked of from fire. Rather before slaking a new one should enlighted.

Dwiytiya prahar of Night is best for it. Wear a (Tahmad/ Lungi) a long cloth, white kurta and hat should be the dress. In starting 3 days make a circle of wheat flour( as u make it for chapatis) and place it infront of you and enlight the mud lamp on it. fill it with jasmine or heena oil in i, draw a gomti chakraaround the mud lamp, take the root of white Akada app. 3 inch long and 3 hakik stones and do darud sharif for 7 rosary daily before rosary chanting...

"Bismillah hirrahmanirraheem"

Darud Sharif –

“Allah humma salle allah, saiyadanaa maulana muhammdiv barik vasallam salato salamo ka ya rasulallah salallallaho taaala aleah vasallam”
Do it continuously for 3 days, after three days take that lamp filled with oil, and with cotton thread enlight it at back side of your asana. Asan should be white. And make a boundary line made up of wheat flour around your asan and pronounce darud sharif while drawing it. Established things should remain as it is, now point to be noted that due to flaming lamp is behind you so the shadow will reflect in front of you. And you have to concentrate on neck of that shadow.

And you have to do mantra chanting, you can blink your eyes, try to concentrate on it. Before mantra chanting, chant 1 rosary of Darud Sharif so that kriya doesn’t cause you harm. First of all say
Bismillah also. From the 7th day of Original Mantra chanting onwards you may find your shadow is playing different games, sometime it may disappear or some time it may enhance or it may shrink, strange noises may come, in further days you may find that any body else is repeating your voice.

On last day make a sweet made up of wheat flour, sugar and milk/ water called as Halva and meanwhile chanting mantra just represent it, At last mantra chanting of rosaries more concentration is needed as to interrupt or divert you hamjaad makes different types of blasts. At last before few rosaries Hamjaad takes form exactly like you and sits infront of you. And with smiling face just stairs at you and says “
Tell me what can i do for you” Then you should say, whenever i will chant this mantra for 14 times then you should appear infront of me and will follow and support my each good hearted intensions.

Then in return you will say “
I will give you 250 gm Halva against of every work” Instantly he will agrees and says “OK” and disappears infront of you. Then on next day just put all the things along with Halva in deep under ground. and Keep the rosary safe with you. and wash the cabin. Then at every good work if you need him then you can call him with the following mantra.

Mantra

“Hamjaade Hamjaad peero murshid ka tu gulaam, yaa kufra gaibi ajaayabaat, Hamjaad kehnaa maan, jo naa maane to kufra tute sar par tuze maa ka doodh haraam, peero paigambaro ki aan”

   


                                                                                               
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AAVAHAN -20 (SOAHAM RAHASYA)


दिव्यात्मा के द्वारा जैसे कहा गया था की सोऽहं अपने आपमें एक अत्यधिक विशेष मंत्र है. योगियो का मत रहा है की १२ प्रकार की विशेष सिद्धियो को प्राप्त करने के लिए यह एक मंत्र ही काफी है. इस मंत्र के भी कई उपभेद है. योग तंत्र मे यह मंत्र अपने आप मे अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है. यु तो यह अजपा मंत्र है जिसका उच्चारण किसी भी वक़्त किया जा सकता है लेकिन इस मंत्र विशेष की आवाहन मे सूक्ष्म जगत मे प्रवेश के लिए एक अत्यधिक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है.
प्राणायाम के मुख्य प्रकारों मे एक है अनुलोम विलोम. इस प्रक्रिया से पहले कुछ ज़रुरी बाते है. हकीकत मे योगिक प्रक्रियाओ के बारे मे आज जो धारणा फ़ैल गयी है वह यथा योग्य नहीं कही जा सकती. योग कोई शारीरिक व्यायाम मात्र नहीं है, योग का अर्थ अत्यधिक संकीर्ण कर दिया गया है. कुछ एक उलटे सीधे पैर कर शरीर की लचक को बनाना यह आज के युग मे योग की धारणा बनी हुई है. आसान तो एक प्रकार के योग जिसका नाम अष्टांग योग है उसके ८ मुख्य पक्षों मे से एक है. वस्तुतः यह मात्र शारीरिक रूप से सक्षम बनने का विज्ञान नहीं है अपितु आध्यात्मिक जगत मे स्व प्राप्ति का मार्ग है. इसी प्रकार से प्राणायाम मे भी कई प्रकार की गलत धारणाये समाज मे फ़ैल गयी है. प्राणायाम से सबंधित एक सामान्य नियम है की बहार से शुद्ध वायु को अंदर खिंच कर प्राणायाम उसे उर्जा के रूप मे शरीर को प्रदान होती हो और दूषित वायु को शरीर से बहार हो. आज कल के शहरी वातावरण मे जो वायु होती है उसकी अशुद्धता के बारे मे हर कोई जनता है. भला उस वायु को अंदर खिंच कर शरीर को फायदा होगा या नुकशान? प्राणायाम शुद्ध वातावरण मे ही किया जाए यह अत्यधिक ज़रुरी है. साथ ही साथ प्राणायाम का सबंध चक्रों से है इस लिए बिना पूरी जानकारी लिए इसे करना फायदा नहीं नुकशान कर सकता है. अनुलोम विलोम के सबंध मे बात आगे बढ़ाते है. इस प्राणायाम के ५ भेद है. अनुलोम विलोम प्राणायाम की इस योग तांत्रिक प्रक्रिया मे महत्वपूर्ण चिंतन यह है की साँस मे ली गयी वायु फेफडो मे ना भर के उसे मणिपुर चक्र यानी के नाभि तक लाया जाए तथा उसे सिर्फ उतनी देर तक ही रोका जाए जब तक वह अपने आप रुके, किसी भी प्रकार की जोर ज़बरदस्ती ना की जाए. प्राणायाम मात्र खाली पेट ही किया जाना चाहिए. प्राणायाम के लिए ब्रम्ह मुहूर्त सबसे उपयुक्त समय है. बरगद तथा पीपल के पैड के निचे दिन मे प्राणायाम करना अच्छा है. बिल्व के वृक्ष के निचे दिन के अंतिम प्रहार मे सूर्यास्त से पहले प्राणायाम करना अच्छा है. किसी भी वृक्ष के निचे या नजदीक बैठ कर रात्री काल मे प्राणायाम की प्रक्रिया नहीं करनी चाहिए. प्राणायाम मे मुख्य 3 चरण है
पूरक – वायु को शरीर के अंदर लेना
कुम्भक – वायु को शरीर मे स्थिर करना या रोकना
 rechak – वायु को शरीर से बहार निकलना
योग तांत्रिक प्रक्रियाओ मे प्राणायाम को सगर्भयाम या सगर्भप्राणायाम कहा जाता है जिसका अर्थ है की प्राणायाम की प्रक्रिया को मंत्रो के साथ करना. मंत्र की उर्जा का वायु के माध्यम से पूरे शरीर मे संचरण करना. सोऽहं बीज शिव तथा शक्ति से निहित है. इस लिए यह प्रक्रिया अपनाने पर साधक अपने आप ही कई प्रकार के ज्ञान को स्वतः प्राप्त करने लगता है.
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As said by divyatma  soham is very special mantra in itself. It is siddha peoples saying that this single mantra is enough to give you 12 type of rare siddhi. This mantra also has many further types. In yog tantra this mantra is considered as very important mantra. Though this is under Ajapa mantra which could be chanted at anytime but there is a special and important process under aavahan to enter in sukshm jagat.
Anulom Vilom is one of the base pranayam. There are few important things to know before process. In reality, the conception spread in today’s time belonging to yoga cannot be said a complete truth. Yog is not just physical exercise. The meaning of yoga has been made very narrow. The definition of yoga have now turned to make legs up-down and to maintain flexibility of the body. Asan is one of the 8 side mentioned in a one system of yoga called ashtang yoga. Literally, this is not just a science to make our self fit physically but also a way to attain our self in spiritual field. The same way there are many wrong conceptions had been spread relating pranayam in the society. There is simple rule in relation to pranayam that the pure outer air should be inhaled which is transformed as energy in the body through pranayam and impure air should be exhale. Everyone is aware about the impure atmosphere in the cities today. If that impure air is inhaled will that give benefit or problem to the body? It is essential that pranayam should be done in pure atmosphere. With that, pranayama has relation direct with chakras so if with improper information practice of pranayam may cause troubles and not the benefits. Let we continue with anulom vilom. This pranayam have 5 type of it. In this specific yog tantric process of anulom vilom pranayam  the important specification is the breath inhaled should not be stored in lungs but it should reach to navel or Manipur chakra and it should be stored there till the time it stay, there should not be any force to stop it inside. Pranayam should be done empty stomach. Best time for pranayam is bramh muhurt. It is good to do pranayam under baniyan tree or peepal tree during day time. It is also good to do pranayam under bilva tree during the evening time before sun set. No pranayam should be practice near or under trees during night time. There are three steps of pranayam.
Poorak – to inhale the air inside body
Kumbhak – to hold the air inside body
Rechak – to exhale the air out of the body
In yog tantric process pranayam is called as sagarbhayaam or sagarbhapranaayam which means to do practice pranayam with mantra. To spread the energy of mantra in the body with the help of air. Soham beeja is collective form of shiv-shakti.  Therefore by applying this particular process many type of knowledge starts generating in sadhak itself.
   


                                                                                               
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Monday, November 28, 2011

विषेले हानिकारक जंतुओ से रक्षा कारक : एक साबर प्रयोग


साबर  मंत्रो का  जादू  तो  सारा  विश्व  मानता हैं  और  जितना  ज्यादा    मानव  जीवन  को इन्होने  स्पर्श किया हैं वह शायद   ही  कोई अन्य साधना  पद्धिति कर पाई  हो , आप  सर दर्द  से ले कर  पाँव दर्द तक ..... सामान्य  से  बुखार से लेकर   अत्याधिक  परेशानी करने  वाले  रोग  तक  और    जो सामान्य   सी कही जाने  वाली बीमारी से   लेकर   किसी  अन्य से  न कह सकने  वाले   रोगों पर  भी  इस साधना  क्षेत्र में  आचार्यों की  दिव्य  दृष्टी रही हैं, 
 अनेको  विधान  जो कई बार   जिन  पर बिश्वास    भी नहीं  हो पाता   की यह कोई असर दे  भी पायेंगे पर  जब  इतनी जल्दी से उनका  असर  पाया  जाता  हैं या  मिलता हैं  तो  बरबस  व्यक्ति इन  साधनाओ की  उच्चता के  सामने  नत मस्तक  हो  ही जाता हैं.. अभी तक   तो मात्र  कुछ साधारण  आयाम   ही  हमारे  सामने  आये हैं पर   इन मंत्रो के  उच्च आयामों   पर  अभी  भी पर्दा  पड़ा  हुआ हैं. 
  और अनेक ऐसी  ही  परिस्तिथि  में  से एक हैं खास  कर  हमारे  ग्रामीण  भाई  बहिनों के  सामने  अक्सर    जाती हैं  या जिनका   कार्य  क्षेत्र   जंगल  आदि में  हो या   जो किसी भी  जड़ी  बूटी कि खोज में   जंगल  जाते  हो या  कभी  यह भी संभव हैं की हमारे स्वयं के  घर में  भी  ,  जब भी आपका  सामना  कोई भी   इस  तरह से  हानिकारक  और  बिष   युक्त  जीव से  हो  फिर वह चाहे नाग   हो   या सर्प  हो या  कोई भी जंगली पशु  हो जो आपको लगता हैं आपको  नुक्सान  पंहुचा  सकता हैं
  इस  मन्त्र की मात्र 7 बार पढ़ कर एक फूंक  उस  ओर मार दे वह निश्चय   ही  आपसे  से दूर  आपना     मार्ग कर लेगा  , पर इस प्रक्रिया   को करने  से पहले  इस मन्त्र   को  किसी भी  शुभ पर्व  या  ग्रहण काल में  या मंगल वार  सिद्ध करना  आवश्यक  हैं ,  और  हमने  सामने  साबर मंत्रो को  सिद्ध करने के नियम  कई बार  दे  चुके हैं अतः   हर  बार उन्ही को दुहराना  ठीक नहीं हैं  उसी प्रक्रिया  से  सिद्ध कर ले   और इस  प्रक्रिया  में सिद्ध करने मन्त्र  जप केबल  108  बार  ही  करना हैं l
 मन्त्र  :
 फकीर   चले परदेश  कुत्तक   मन में  भावे   बाघ  बांधू बघाइन  बांधू   बाघ के  सातो   बच्चा बाँध  सौपा चोरा  बांधू  दात बंधाऊं   वाट  बांधि दाऊ   दुहाई   लोना  चमारी   की    
****NPRU****

How to make again cordial relation with your own brother


"राम लक्ष्मण  सी जोड़ी हैं   इन भाइयों  की"   अब  आजकल कहाँ सुनने  में  आता हैं  एक समय   यह आशीर्वाद  तो  घर के   अग्रज  और वयो  वृद्ध  सभी को देते  थे   पर   आज इस  आधुनिकता    ने  पता  नहीं कितने  रिश्ते  की  गरिमा  और स्नेह   और आपसी सद्भाव की  बलि  ले  ली हैं   और जो कुछ रिश्ते  अभी  भी हैं वह भी धीरे  धीरे   अपन  अस्तित्व   वचाने केलिए   सघर्ष रत   हैं, . कहाँ  और किसके  पास  समय हैंकि  इन शब्दों  के अर्थ  में पड़े   जब सभी अपना  स्वार्थ   ही  पहले  देख रहे   हो  तब   ..
                     पर यह  भी   तो सच हैं  की  जीवन में  परिवार में  व्यतिगत  ता  में सामजिकता  में  अपने  भाई का  स्नेह और  योगदान  यदि  लगातार मिलता जाए  तो   आजकल  यह वरदान स्वरुप  ही हैं,  और यदि  किसी  कारण या  अकारण वश भाई    ही विरोध में खड़ा  हो जाये   तब  आपकी परेशानी कई  गुना   बढ़ सकती हैं,  यहाँ   तक  की   यही  भाइयों  की आपस  न मिलना घटना का परिणाम  विभीषण का  अपमान   लकापति रावण के लिए    ही   कितना घातक  बना,  रावण की हार में  विभीषण का  कितना सहयोग रहा   हमसभी जानते  हैं ही.

                      पर साधना हमारे इस  जीवन  की  प्रतिकूलता  जैसे     यदि भाई  हमारा  शत्रु  हो गया   हो तो अब से  हमारे  अनुकूल  हो  जाय   और   यदि अनु कूल  होतो  वह सदैव हमारे अनुकूल  ही रहे   इस  हेतु  कोई मार्ग  दिखाती हैं???,,क्यों नहीं  अनेको  ऐसे  प्रयोग हैं जो  इस  समस्या  को   बनने   देते  ही नहीं और  आपका  जीवन  ज्यादा   सुखमय  और प्रसन्नता मय  हर दृष्टी से  हो जाता हैं.
                           एक बात  सदैव ध्यानमे  रखना  चाहिए  की   साधना  यदि बड़ी होगी  और  अनेक  उसमे  हो या  कुछ  कठिन विधान  हो तभी फलदायक  हो ऐसा कदापि नहीं हैं  वस्तुतः  हम सरल साधनाए   ज्यादा  मनोयोगता  पूर्वक  और ज्यदा  सफलता  पूर्वक कर सकते  हैं और   इन छोटी छोटी सफलता से उत्साहित  होकर   हम  एक बड़ी  छलांग भी लगा  सकतेहै. 
                       घर के  एकांत  कोने   को पहले  अच्छी   तरह  से साफ कर ले    और संभव हो तो  गोबर से लीप ले,  और उस  पर   जब  वह सुख जाए तो आटे से एक  त्रिकोण बना  ले   फिर  इसके  बीच में  अपने   उस  भाई का नाम लिखे  जिसे  आपको अपने  अनुकूल करना  हैं   और  फिर  इस लिखे  गए नाम पर सिदुर छिडके   और  इसी   नामके  ऊपर  कम्बल का आसन बना  कर  बैठ  जाये  और प्रतिदिन 108 बार मंत्र जप  करना हैं और  संभव होतो  घी  से हवन भी  भी. और  जब  तक आपके  भाई  से आपका  पहले  जैसे हार्दिक सम्बन्ध     हो जाये  आप यह  प्रयोग लगातार कर सकते  हैं

मंत्र :
विनोन  तप  योग  सरन्क्ता सतोप   विषटांग
रक्त चन्दन  लिप्तांगा  भक्ताना   च शुभ प्रदम,
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 Thses  brothers pair  looks   like  Ram , Lakshman   is  very hard  to listen   in thses  days ,due  to  growing materialization  and   modern  society self centeredness   many of the  relation Is not as  in  original  form/nature  as  it should  be. , and  many  relation are  in breathing  his  last . since  when everyone is  only  looking /concern  for   his own   and   not  having  time   for  other   than  how   thses relationship   even between   very   close  can  flourish.
But  its very   easy  understand   that  if one  receive   cooperation   from  his own  brother  than   achieving  success  not only in professional  world  but in  social  and  in personal life is  quite  easy. and  if our  own  brother is  creating problem   for  us than  one  can  also  imagine  the   problem  he has  to  face in  every aspect  of life . its well known facts  that the  result or  our come of   brothers  fight/ non  co operation  often produces  worst .
 But is there any way  so that  we can always  enjoy   the  co operation   from our   own  brothers  or  if our relation is   not  so  good    so that  will  be  converted  in     very   healthy  one.???   Why  not  there are  so many   prayog    that  creates  such an  environment   so     developing  chances  of friction between    brothers  becomes very less.
 One should  always  note  down  or remember  this  facts  that if  sadhana   has  some  long  duration  or  having  some very  difficult mantra  or some  very  great  procedure  than  only  that  will be  more  effective ,,no  no    there is   no such  rules.  The  real  facts is ,  we can  do  simple  and  easier  sadhana  with much  more ease and  comforts. And   slowly  and  slowly  we can  jump     over   for  the  big  success in sadhana life  too.
Thoroughly clean any  one  corner of  your   home where people least  go. and also  clean   through  cow  dung .(gobar).  When    floor become  dry  , make  a  triangle (through flour  /  aata ) and in  between that triangle ,  write  down the  your  brother’s name   than  sprinkle  sindur over  that. And   place  your  kambal aasan on that  and  sit down and  daily  you have  to   chant  108  times  this  mantra  and if possible  some  hawan    with  ghee .till  you experience   co operation   from   your  brothers.
Mantra :
Vinon  tap  yog sarankta satop  vistaang
Rakt chandan  liptaanga  bhktana  ch  shubh pradm

    


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