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Thursday, June 30, 2011

YAKSHA LOK



भारतीय साधना या यूँ  कहे तो साधना जगत में कुछ ऐसे  ज्ञान की दृष्टी  से आयाम  हैं जिन पर एक आदमी  तो क्या समाज  के उच्च संभ्रांत  वर्ग के व्यक्ति भी विस्वास नहीं कर पायेगें /या करते हैं , उसे मन गढ़ंत या कपोल कल्पना ही मानते हैंओर अभी तक आये भी  हैं  .पर  केबल "प्रत्यक्ष  किं प्रमाणं " की अबधारणा के आधार पर  तो  ये  अत्यंत  गोपनीय उच्च  रहस्य  केबल इसलिए तो  दिखाए  जा सकते  कि  कोई कहता  हैं की में नहीं मानता .व्यक्ति को अपनी योग्यता, स्वयं सिद्ध करनी पढ़ती हैं /या पड़ेगी  केबल ये कहने मात्र की में नहीं मानता  से तो जीवन में कुछ उपलब्ध खास कर इन विषयों का  नहीं हो पायेगा . 

 हमारे साधनात्मक ग्रन्थ ही नहीं अनेको पवित्र किताबो में अनेको लोक  लोकांतर ,आयामों कि चर्चा बार बार आई हैं  जैसे भुवः  लोक, जन लोक , सत्यम लोक . तप लोक ओर इनके साथ  अनेक ऐसे लोकों  के नाम भिलागातार आते रहे  हैं जैसे गन्धर्व लोक , यक्ष लोक , , पित्र लोक देव लोक  ओर इन सभी कि इस द्रश्य/अद्रश्य ब्रम्हांड  में उपस्थिति  हैं ही . मानव त्रि आयामात्मक  हैं वही इनमेंसे अनके लोक या उनमें निवासरत  व्यक्तित्व  द्वि  आयामात्मक  हैं इस तथ्य का कोई  सत्यता या प्रमाण हैं क्या ?सबसे साधरण तह  तो हम सोचे कि हमारे पूर्वजो को  यह सब लिख कर क्या फायदा होना था , क्या वे हमें दिग्भ्रमित  करना चाहते  थे( उन्हें  इससे  क्या लाभ होता ), क्या उन्हें कोई रोयल्टी  मिल रही   थी कि चलो लिख दो . ऐसा कुछ भी नहीं हैं यह तो महरी सोच  ही पंगु हो गयी हैं इस कारण हम हर चीज /तथ्य कि सत्यता    का प्रमाण मांगते  रहते हैं.महानतम अमर योगी पूज्य महाव्तार बाबाजी  जी , परमहंस योगनान्दजी कि  विश्व विख्यात कृति में कहते हैं  कि "देख कर  तो कोई भी मान लेगा , धन्य  हैं वह जो बिना देखे मान लेता हैं " यहाँ पर वे अविज्ञानिक होने को नहीं कह रहे हैं , पर एक दम प्रारंभ में तो  ऐसा कर ना पड़ेगा ही . हम मेसे से  अनेक गणित के प्रश्न  हल करते हैं ही उसमे तो पहली लाइन होती हैं कि मानलो  ये वस्तु कि  कीमत बराबर  x  हैं  तो .... जब कि हम सभी जानते हैं वह वस्तु कि  कीमत  ,  बराबर  x  कभी  नहीं  होता हैं ,पर अगर ये भी ना मने तो वह प्रश्न  हल कैसे हो ..   

 ये सभी लोक (यक्ष लोक ) भी हमारे बहुत पास हैं  यु कहे तो हमारे साथ ही साथ खड़ा  हैं बस आयाम अलग हैं दुसरे अन्थो में कहे तो "यथा पिंडे तथा ब्रम्हांड " कि अब धारणा के हिसाब से तो हमारे अन्दर ही हैं . ऐसे अनेको उदहारण यदा कदा पाए गए हैं जब किसी अगोचर प्राणी या व्यक्ति ने  अचानक मदद की  हैं ,अब इस तथ्य   के प्रमाण  के बारेमें तो उसी से पूछिए ,हर अंतर्मन  की बातों का कोई प्रमाण  तो नहीं हैं . वास्तव   में यक्ष  या यक्षिणी  एक शापित     देव/देवी   हैं जो किसी गलती या अपराध  के कारण इस योनी में आ गए हैं ओर जब तक वे एक निश्चित संख्या  में मानव लोक के निवास रत  व्यक्तियों की मदद /सहायता  न कर ले, वे इस से मुक्त नहीं हो सकते हैं .
 इन्हें भूत प्रेत पिशाच वर्ग के समकक्ष  न माने , ओर वैसे भी  भूत प्रेत डरावने नहीं होते हैं  इन वर्गों  ओर लोकों के बारे  में एक तो हमारा चिंतन स्वथ्य नहीं हैं साथ  ही साथ हमारा  स्वानुभूत ज्ञान भी इस ओर  नगण्य हैं , जो भी  या जिसे भी हम ज्ञान मानते आये हैं वह रटी  रटाई  विद्या हैं उसमें हमारा स्वानुभूत ज्ञान कहाँ हैं , तीसरा , जो मन में बाल्यकाल से भय बिठा दिया गया हैं वह भी  समय समय  पर सामने पर सर उठाता ही रहता हैं .हमारा अपनी  ही कल्पना हमें भय कम्पित  करती  रहती हैं  
  हम में  से अधिकाश ने महान रस विज्ञानी  नागार्जुन  के बारे में तो सुना ही होगा उन्होंने लगभग १२ वर्ष की कठिन  साधना  से   वट  यक्षिणी साधना पुर्णतः से संपन्न की  ओर पारद/ रस विज्ञानं के अद्भुत रहस्य  प्राप्तकर इतिहास में एक अमर व्यक्तित्व  रूप में आज भी अमर हैं .(उनकी साधना पद्धिति  अलग थी )
ये यक्ष  लोक से सबंधित साधनाए  अत्यंत सरल हैं इन्हें कोई भी स्त्री या पुरुष , बालक या बालिका आसानी से संपन्न  कर करसकता  हैं
 यक्ष लोक के निवासी अत्यंत  ही मनोहारी होते हैं साथ ही साथ  वैभव ओर विलास  के प्रति उनकी रूचि अधिक होती हैं , हमेशा उत्सव में लें या उत्सवो जहाँ हो रहे हो वहां उपस्थित रहते हैं इसका साधारणतः अर्थ तो यही  हैं  की माधुर्यता  ओर आनंदता  इनके मूल में ही  समाहित  हैं . पर इनकी वेश भूषा हमसे इतनी अधिक मिलती हैं की इन्हें पहचान पाना बेहद कठिन  हैं
यह अद्भुत आश्चर्य जनक तथ्य हैं की  हर किताब  इनके बारेमें एक भय का निर्माण करती हैं ,हमें इसके बारेमें चेतावनी देती हैं ,इन साधनाओ  को न किया जाये , करने पर यह   या वह  होसकता हैं , ओर उस  साधक  के साथ  तो ऐसा ऐसा हुआ . पर परम पूज्य सदगुरुदेव  जी ने सारा अपना भौतिक जीवन इन  अनेक दिग्भ्रमित  ता  उत्पन्न करने वाले तथ्यों के बारे  में   तथा हमें सत्य  तथ्यों से अबगत  कराया  उन्होंने जिस भी प्रकार  की कोई  भी  साधना या  यक्षिणी  साधना भी ,कोई भी  मंत्र, शिविरों में  या पत्रिका में या किताबोंमें दिए हैं वह सभी साधक के लिए  बेहद सफलता दायक ओर प्रसन्नता प्रदायक रही हैं  , जिन्होंने  भी इन साधनों में आगे बढ़कर सफलता पाई हैं वे सभी न केबल भौतिक बल्कि  आध्यात्मिक क्षेत्र  में भी सफलता  की चोटी  पर लगातार बढ़ते रहे  हैं ही .
.हम दीपावली की रात्रि  को कुबेर ( यक्ष और यक्षिणीयों  के अधिपति हैं ) का पूजन क्यों  करते हैं कारण एक दम साफ हैं की वे देवताओं के प्रमुख खजांची  माने गएहैं ओर उनकी साधना उपसना से  भौतिक सफलता के  नए आयाम  जीवन में में खुल जाते हैं , यक्षिणी वर्ग नृत्य कला में भी अपना कौशल  रखता हैं ओर वे अपने नृत्य  के मध्यम से साधक  को प्रसन्नचित्त बनाये रखती हैं साथ ही साथ यदि साधक चाहे तो इनसे ये भारतीय संस्कृति  की अद्भुत  कला  विद्याये  सीख भी सकता हैं .एक प्रिय मित्र के रूप में आपके साथ  हमेशा रह सकती हैं (आपको द्रश्य  रूप में   दिखाए  देती हैं पर अन्य इसे नहीं देख सकते हैं ) साथ ही साथ हम ये तथ्य  जान ले की  जो भी मानवोत्तर वर्ग हैं वे एक बार आपके मित्र होने पर ,वे धोखा  जैसी मानसिक विकारात्मक  चीजे जानते ही नहीं हैं
यक्षिणीयां  तंत्र की विशेष विधा की  न केबल उच्च कोटि की जानकर  बल्कि वे  उस बिभाग की अधिस्ठार्थी  भी होती हैं  यदि साधक चाहे तो इनकी सहायता से  उस तंत्र के विभाग में  अत्याधिक योग्यता  ओर  उच्चता पाई जा सकती हैं .ओर यह  कोई न माने वाली बात नहीं हैं .ओर क्या क्या लिखा जाये इस वर्ग या लोक के बारे में , आप आगे बढिए तो सही फिर  इससे भी अद्भुत  रहस्य आपके सम्मुख होंगे  केबल इन तथ्यों  को पढ़ने से तो कुछ नहीं होगा . ये क्या आपकी आध्यात्मिक जिज्ञासा  को ढकने का काम तो नहीकर रहा  हैं , बल्कि होने तो ये चाहिए की आपमें आगे बढ़ने ओर सिखाने की  प्रबल इच्छा ओर जगा दे.
यह लोक भी हमारे साथ ही उपस्थित हैं पर उसका आयाम अलग हैं साधन के माध्यम  से आयाम भेद  मिट जाता  हैं .हमारी आँखों में यह क्षमता  जाती हैं की हम इस लोक या अन्य  लोकों भी देख सकते हैं , आप के और हम  सभी के ऊपर जब हमारे  आध्यात्मिक पिता का वरद हस्त  हैं  तो इस  बारेमें बेसिरपैर के तथ्य  पर धयान न दे , आप आगे बढे  ओर आपको सफलता प्राप्त होगी ही .  
Bharitya sadhana or Indian sadhana world have various such a dimension that not only general common masses but people belongs to higher section of the society cannot believe easily.  And pratyash kim pranam    on the basis of that one cannot say that higher level of secrets will be relived to him is just because he /she cannot trust. One must has to show his eligibity merely I do not believe will not serve the purpose.
There are various   other plane or lok has been mentioned on various places in holy text   like swas lok , bhu lok , bhvah lok , jan lok, styam lok ,  tap lok  etc and apart from  thses well known  plane  other lok like gandharav lok, yaksh lok , pitar lok  etc also exists in  this universe. Man is three dimension living things where these are two dimension one.  What is the proof of this doctrine, is the simple why so many incidents mentioned in the holy book just because they wanted to miss lead us, or they were in mind of getting any royalty of that, lacking part is our understanding.  Greatest sage immortal yogi Mahavtaar babaji tells in  Autobiography that” dekh kar to koi bhi  biswas karlega , paranti jo bina dekhe biswas karta hain wah  sherthey hain “ means  when the miracles shown to us than question of non belive does not arise , but  that will be most important who without seeing that believe that”
 Thses lok(yaksh lok) are very close to us, infacts there are many incident in that they helped us without   coming any visible form. Actually yaksh and yakshini are the cursed Devi devta because of that curse they fall from their original position. And till they help certain number of people their cursed will not get removed. So  they can be consider cursed devta.
Do not consider them , as bhoot prêt  type of varga, infact bhoot prêt are also  not fearful , just they are invisible  and  we do know very little of them and so many base less things  already rooted in our mind that’s why we fear them .our own self imagination  creates a fears for us.  but there  is no need to be that like other varga this yaksha varga   present .

Who can forget  the great   Alchemist sage Nagarjun  story according to  that  he  devoted 12 complete year   for   success in vat yakshini sadhana and through that he was able to got very  secrets and  hidden  things of parad vigyan tantra and still immortal one.
 They belong to higher level to us. And  yet very close to us  that’s why their sadhana  prove to more fruitful to us , either boy  or girl or man or woman.
 They  inhabitants’ of yaksha are very  beautiful  and very much interested to  much luxury things. Always found of festivals , means happiness are the  core of that.  On many festival time they are wondering to  earth , they seems as like us so  recognizing them is very difficult to common persons.
Its very strange that almost every book or text published warn us  about the and create fear like  thought about them but  sadgurudevji whole life   teaches us that there is no need to fear  of them, whatever  the mantra and sadhana  till date provided by them always proved  very  great and helpful for sadhak/shishy. Those who get successful  in that   not only they reach a height in spirituality but material  world too.
 On Deepawali we  do poojan of  kuber why, the king of  yaksha and yakshni reason is simple  kuber Is the chief accountant of devta. And through  his blessing  or material prosperity also increases. This yakshini varga is well versed in dancing  too, so if one may have desire than he/she can enjoy the classical dancing and can learn the one of the most important aspect of Indian culture. This means as a true friend she will be with you. This also clearly shows that the   uchch varga  doesn’t know the cheating things once they became friend. 

 Yakshini  also rules certain sect of tantra , and through  the help of them one can get mastery or expertise over  that, yes theses can be possible too. And what more can be written here , now move ahead  and see yourself how much true the  things through own eye , how long just reading this type of stuff , cam shade  our   real will to be successful in this field.
  That yaksh look is  also exist side by side of us  yes the dimension is different , to see that  sadhana is must and not to worry of  various rumor spread in this connection, our  divine father(Sadgurudev ji )assures us than   do we still need support of any other words.
****NPRU****

Wednesday, June 29, 2011

SOME MORE TOTKE


आज के इन व्यस्तम  क्षणों में बहुत कम लोग हैं  जो  साधनाओ  के प्रति जितना  श्रद्धा विश्वास  होना चाहिए वह रखते हैं पर इनके लिए समय निकाल पाना  वाले तो बहुत  ही कम हैं, समयाभाव की इन्ही परिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए कुछ ऐसे प्रयोग आपके सामने हैं जो आपके जीवन में कुछ अनुकूलता लाने का प्रयास  करते हैं .. 
1.    पीपल  के वृक्ष  पर  जल अर्पित करने से पितृ  दोष का शमन  होता हैं.
2.    खुशहाल पारिवारिक जीवन के लिए  किसी भी आश्रम  में कुछ आटा ओर सरसों का तेल दान करे.
3.     अच्छी तरह से हाँथ पैर  धो  कर  बिस्तर पर सोने जाने से स्वपन दोष की समस्या  में  कमी आती हैं .
4.    कटेरी की जड़ चार  /पांच बार सूंघने से व्यक्ति उस दिन काफी उर्जावान महसूस करता हैं .
5.    यदि नीबू के चार तुकडे करके चार दिश में फ़ेंक दिए जाये तो ओर ये प्रक्रिया  ४० दिन तक की जाये तो  रोजगार प्राप्त  होने  की दिशा  में विशेष अनुकूलता होती हैं .
6.    लक्ष्मी  पूजन अकेले नहीं बल्कि भगवान विष्णु का भी पूजन साथ किया जाना चाहिए  तभी तो लक्ष्मी की अनुकूलता अनुभव होती हैं .
7.    यदि महा मृत्यु न्जय मन्त्र का  जप करके घर से बाहर  निकले तो व्यक्ति को दिन भर सुरक्षा  रहती हैं .
8.    शनिवार के दिन पीपल की जड़ छूने से व्यक्ति  की आयु   बढती हैं ओर अ काल मृत्यु की सम्भावनाये कम होती हैं .
9.    कुलदेवी /देवता का ध्यान /पूजन करने से सारा दिन मगलदायक बना रहता हैं .
10.  यदि व्यक्ति हर अमावस्या को भोजन  ग्रहण करने से पूर्व कुछ  भाग अपने पितरो को अर्पित करता हैं तो उनके आशीर्वाद से अत्यधिक अनुकूलता उसे अर्जित होती ही हैं.
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                                                            Now a day a very  less people, who has  needed s   faith a/believe on sadhana effect and power and  much lesser are  those , who have taken some moment for doing that sadhana whole heartily, considering these time limitation here are some  small totka ( in this series) that will ease your life.
1.     Offer water daily on papal tree reduces the pitra dosha.
2.      To have /lead happy family life one must  offer some aata and  sarson oil  to any ashram.
3.     If after washing  your  hand and feet  than go to bed, than those who are suffering from night fall problem , this helps them.
4.     If any one have taken three or four time the fragrance  of kateri root  than he will feel much energetic  on that day.
5.     Cut the nibu in four piece  and though one piece  in each direction  for 40 days then this helps him to  find a job.
6.     One should not have poojan of lakshmi alone, one must also worship Bhagvaan Vishnu along with her, than blessing of goddess lakshmi gained/achieved,
7.     If one goes out  of home  with prior  mahamrityunjaya  jap than whole days his security  is assured.
8.      If the root of  papal tree  touched on the Saturday then  the person life  extended .
9.     If  kuldevi /devta  dhyan or poojan is done every day than the whole day  their blessing falls upon you.
10.  If before taking your meal  you  offer some  part to your  pitar then their blessing , can be easily earned and much success  on our life front ,can be achieved.
****NPRU****

AAVAHAN-12


संन्यासी की साँसे अभीभी फूली हुयी थी...योगिनी के अट्टाहास्य ने वातावरण मे चारो तरफ खौफ फेल गया...संन्यासी को देखते हुए योगिनी ने कहा, तुमको यहाँ पे आना ही था वर्ना मेरा पराकेशी साधना कैसे सिद्ध होता...मुझे ज़रूरत थी एक अक्षत कौमार्य युक्त पुरुष की, जिसके साथ मैथुन के बाद मेरी साधना पूर्ण हो जाएगी, अगर तुम अपनी मर्ज़ी से मुझे सहयोग दोगे तो सायद बच जाओगे नहीं तो मे अपना उदेश्य तो पूर्ण कर ही लुंगी साथ ही साथ तुम्हारी बलि भी दे दूंगी...योगिनी की सफ़ेद आँखे अब खुनी लाल हो चुकी थी...संन्यासी भय के मारे अंदर से कांप उठा. उसने इस प्रकार की साधनाओ के बारे मे सूना था, यौन मत एक अलग ही साधना पद्धति है. इस साधना के अंतर्गत साधक को अपनी साधना पूर्ति के लिए अक्षय यौवना नारी जिसका कौमार्य भंग न हुआ हो उसका साथ मंत्रजाप के बाद मैथुन करना अनिवार्य है, इसके विपरीत सधिकाओ को अक्षत कौमार्य युक्त पुरुष के साथ मैथुन करना अनिवार्य है. इसी मत के अंतर्गत पराकेशी साधना भी होती है जिसे सिद्ध करने के बाद एक एसी विशिष्ट सिद्धि प्राप्त कर लेता है जिससे उम्र का या काल का उस पर कोई प्रभाव नहीं होता है, ऐसे साधकोको अन्य लोक लोकान्तरो मे जाना सुलभ हो जाता है और पुरे ब्रम्हांड मे द्रष्टि मात्र से किसी को भी अपना गुलाम बनाया जा सकता है. संन्यासी को ये भी पता था की अधिकांश विवरणों मे जे जाना गया है की जिसके साथ मैथुन किया जाता है उसकी बलि हो जाती है. संन्यासी ने बचाव के लिए वीर आवाहन शुरू किया लेकिन एक क्षण मात्र मे योगिनी स्तम्भन व् किलन प्रयोग कर चुकी थी. सन्यासी अब कुछ भी प्रयोग नहीं कर सकता था क्यूँ की उसकी सारी सिद्धिया स्तंभित हो चुकी थी और वह क्षेत्र कीलित. संन्यासी के पास अब कोई रास्ता नहीं बचा था, हिम्मत के साथ वह पद्मासन मे बैठ गया. योगिनी का चेहरा खिल उठा, उसने सोचा की संन्यासी तैयार हो गया है साधना मे सहयोग देने के लिए. लेकिन नहीं, संन्यासी के पास एक ओर रास्ता बचा हुआ था. उसने दिव्य मंत्र से स्वआवाहन किया और शावाशन मे लेट गया. योगिनी को कुछ समज नहीं आ रहा था की संन्यासी आखिर कर क्या रहा है किन्तु वह निश्चित थी अपने किलन प्रयोग के बाद. सब से पहले उसने अपनी प्राण ऊर्जा का विखंडन किया. और उसके बाद अपने स्थूल शरीर से उसने सूक्ष्म शरीर को अलग कर लिया. योगिनी अभीभी मुस्कुरा रही थी, वह संन्यासी के सूक्ष्म शरीर को देख सकती थी जो की रज्जतरज्जू से उसके स्थूल शरीर से जुड़ा हुआ था. योगिनी ने तारक तन्त्र का प्रयोग किया जिससे किसी को भी सूक्ष्म शरीर से अपने स्थूल शरीर मे वापस आने के लिए बाध्य होना पड़ता है. लेकिन सन्यासी ने कुछ और ही सोचा था, उसने अपने सूक्ष्म शरीर को निष्क्रिय कर दिया और सूक्ष्म शरीर से एक ओर शरीर को निकाल दिया जो की अब कारणशरीर था...
Sanyashi was still in heavy fear…after the laughter of yogini, the surrounding went scary…looking at sanyashi yogini told you were supposed to come here other else how I could accomplish my Parakeshi Sadhana… I was in need of a virgin man with whom I can proceed for Maithoon and thus my Sadhana will be complete. If you willingly give support, you may save yourself, or else however after accomplishing my task I will bow you as offering (Bali). White eyes of yogini now turned to blood red.... Sanyashi was shocked with fear. He heard about such sadhanas previously, Yaun Mat is a very different sadhana system. Under this category of sadhana, Sadhak requires young female who is virgin and it is required to undergo Maithoon process after mantra chanting, on other hand Sadhikas require to undergo Maithoon process with virgin male.Under this system there is Parakeshi Sadhana, which when accomplished, will give many special powers which includes no effect of time on the body, such sadhak may get easy entry in other worlds and to make anyone hypnotised serven in whole universe is just a child play. Sanyashi was also aware that in majority of the case, the one with whom Maithoon process is done, immediately applied for Bali. To save himself sanyashi started doing Veer Aavahan Prayog but within a moment Yogini were done with Stambhan and Keelan Prayog. Now, sanyashi was unable to do any Prayog because all the siddhis of him were flabbergasted because of stambhan and the place was kilit so no where he can move from the place. Now, sanyashi was having no other way, with courage he seated in lotus position. Yogini went happy; she thought that sanyashi is ready to give support in sadhana, But No.  Sanyashi was having one more way. He started Sva-aatma aavahan with Divya mantra and arranged himself in Shavasan position. Yogini was not able to understand what exactly sanyashi was doing but she was confident after Keelan Prayog. First of all, Sanyashi did Pran Vikhanadan process and after that he separated his Sukshm Sharir (astral body) from his main body. Yogini was still smiling; she was able to watch Sukshm Sharir of Sanyshi which was connected with his Physical body with RajjatRajju. Yogini started Taark Tantra prayog through which anyone is made to return in his physical body from sukshm Sharir. But sanyashi had thought something else, He inactivated his Sukshm Sharir and from Sukshm Sharir one more body was ooze out which was Sanyashi’s Kaaran Sharir...
****NPRU****

Tuesday, June 28, 2011

PAARAD SWARN ANU SIDDHI GOLAK-MY EXPPERIENCE

२१ अप्रेल २०११ हम सभी के लिए अद्भुत दिवस था ना सिर्फ इसलिए की इस दिन हम माँ कामख्या के प्रांगन में पारद तंत्र के कुछ नवीन तथ्यों को समझने के लिए एकत्र था अपितु सदगुरुदेव के जन्म दिवस और माँ कामख्या के आँगन हमारी इस ख़ुशी को करोड़ गुना कर रहा था. हम यहाँ पर पारद विज्ञानं की अग्रिम कार्यशाला के लिए एकत्र हुए थे .इसके पहले हम सभी १२ संस्कार कर चुके थे ,अब बारी थी पारद का तंत्र से योग कर उसके द्वारा अपने मनोरथ को सिद्ध करने की प्रक्रिया को समझने की. हम लगभग २७-२८ गुरु भाई थे जिनका रुझान पारद के गुप्त रहस्यों को समझने में रहा है. प्रथम दिवस ही हम सभी ने पारद स्वर्ण अणु सिद्धि गोलक का पूर्ण पूजन किया , रस शास्त्र के गोपनीय ग्रंथों में इसे चैतन्य करने का विधान बताया गया है, सदगुरुदेव की कृपा से ही इन मन्त्रों की प्राप्ति सिद्धाश्रम  साधक परिवार को हुयी है. सदगुरुदेव द्वारा बताई गयी विधि से ही चैतन्यीकरण की वो अद्भुत प्रक्रिया उस अद्भुत गोलक पर जो की अत्यधिक श्रम, संस्कारों ,रत्नों और वनस्पतियों के योग से निर्मित है. इस क्रिया के लिए सर्व प्रथम पूर्ण विधि विधान से सदगुरुदेव का ब्रह्मत्व पूजन किया गया और भगवान गणपति के पूजन के पश्चात् इस गोलक की प्राणप्रतिष्ठ क्रम में भगवान् सूर्य के त्रि रूपों, मुन्था सहित नव ग्रहों, स्वर्नाकर्षण भैरव(जो पारद विज्ञानं के अधिष्ठाता हैं),भगवती श्वेत तारा,नव नाथ और दत्तात्रेय ,लक्ष्मी के १०८ स्वरूपों का ,वाराही देवी(जो स्तम्भन के लिए जरुरी हैं),भगवान महाकाल का ,महाकाली के स्वरूपों का  और अंत में जगदम्बा माँ को स्थापन रस मन्त्रों द्वारा किया गया.पूरा पूजन लगभग ४ घंटे तक चल.अद्भुत ही वातावरण था साधना के इस काल में.और इस पूरे काल में किसी भी किताब या कापी को हाथ नहीं लगाया गया था अपितु पूरी तरह मौखिक क्रम था ये.
यह गोलक अब अपने आप में दिव्यतम थी.इसके बाद कार्यशाला में हमे इस गोलक से सम्बंधित विशिष्ट प्रयोग बताये गए और संपन्न भी कराये गए जो अपने आप में बड़े शीघ्र प्रभाव दिखने वाले हैं.हमें वोर्क्शोप में १ रहस्यमय बात पता चली की हमे शरीर ही कलित हैं .अगर ऐसा हैं तो हम साधना जगत में कैसे आगे बढ़ सकते हैं.इस गोलक के द्वारा उत्कीलन संभव हैं और ये विधान हमें विधिपूर्वक बताया गया जो आजकल मैं कर रहा हु.इसके अलावा ये गोलक  धन प्राप्ति के लिए,अदृश्य होने के लिए,बांझपन मिटने के लिए,शमशान साधना के लिए,छायापुरष सिद्धि के लिए ,दत्तात्रेय दर्शन के लिए भी अत्यंत प्रभावकारी हैं और इन सब से सम्बंधित प्रयोग का पूरा विधान हम  सब को समझाया गया .

यह गोलक तंत्र  जगत के ६ कर्मों के लिए भी उपयोगी हैं.इन ६ कर्मों में से हमे स्तम्भन,वशीकरण,उचाटन से सम्बन्धित प्रयोग बताये गए.इन प्रयोगों में मैंने वशीकरण प्रयोग सफलता से संपन्न किया कल तक जिस आत्म विश्वास और सम्मोहन क्षमता की कमी के कारण मैं मनोवांक्षित सफलता व नौकरी को प्राप्त नहीं कर पाता था  वहीँ आज इस प्रयोग के  कारण मुझे साक्षात्कार में २ बार सफलता मिली.आज इस प्रयोग के कारण मेरे पास २ नौकरी  हैं.इस प्रयोग के विधि मैं नीचे स्पष्ट कर रहा हु.

यह एक दिवसीय
 प्रयोग हैं.यह प्रयोग शुक्रवार या रविवार को रात को ११:३० बजे के बाद संपन्न  किया जाता हैं.वस्त्र और आसन लाल होंगे.अपने सामने बजोट पर जिस व्यक्ति पर वशीकरण करना हैं उसकी फोटो,अगर आप उसे खिला सकते हैं हैं तो खाद्य सामग्री और अगर ये भी संभव नहीं हैं तो एक कागज़ पर उसका नाम और उसके पिता का नाम लिख ले.फिर  फोटो/कागज़ /खाद्य सामग्री  पर अनु गोलक को स्थापित करे.सामने तेल का दीपक होगा.अगर आपने भविष्य के लिए मंत्र सिद्ध करना हो तो आप शकर या लौंग  का इस्तेमाल करे.आपको फिर ११ माला निम्न मंत्र की करनी  हैं


मंत्र- ॐ आदिपुरुषाय अमुकं आकर्षय आकर्षय कुरु कुरु स्वाहा 

om aadipurashaay amukam aakarshay aakarshay kuru kuru swaha


अमुकं के जगह व्यक्ति का नाम या फिर अगर आपने भविष्य के लिए सामग्री सिद्ध करनी हैं ,या फिर आपको नाम नहीं पता हो,जैसे की अक्सर साक्षात्कार में होता हैं सर्वजन का प्रयोग करे.फिर जब भी आपको व्यक्ति से मिलना हो या फिर साक्षात्कार पर जाना हो तो आप घर से निकलते हुए मात्र २१ बार इस मंत्र का उचारण करके इस गोलक को अपने शारीर से संपर्क करके धारण कर ले
इस प्रयोग को नेक इरादे के लिए ही करना चाहिए.अगर आप इसका इस्तेमाल गलत कार्य के लिए करना चाहियंगे तो ये काम नहीं करेंगा.तो देर किस बात की,जो व्यक्ति नौकरी खोज रहे हैं या फिर साक्षात्कार में असफलता मिल रही हैं तो ये प्रयोग उनके लिए वरदान स्वरुप हैं.
अंत में बस इतना कहना चाहूँगा मेरा अत्यंत सौभाग्य हैं की मैं इस कार्यशाला की हिस्सा बना.अगर गुरुदेव  की कृपा रही तो भविष्य में भी आने वाली कार्यशाला का हिस्सा बनना चाहूँगा.
जय गुरुदेव 

PAWAN MADAN

****NPRU****

AAYURVED FOR YOU


आयुर्वेद   तो जीवन का सौन्दर्य हैं,  इस श्रंखला में हम आपको  कुछ सरल  उपयोगी  उपाय  आपके सामने रखते हैं  जो  आपके स्वास्थ्य के लिए  उपयोगी होंगे. 

1.    यदि शहद  दो /तीन चमच्च  यदि पानी के साथ  सोने से पहले ली जाये तो  यह  शरीर का वजन  कम करने केलिए  बहुत अच्छा  उपाय हैं पर या  किसी भी हाल में २ / ३ महीने से ज्यादा उपयोग नहीं करना चाहिए .
2.    यदि शहद  दो /तीन चमच्च  यदि दूध  के साथ  सोने से पहले ली जाये तो  यह  शरीर का वजन  बढ़ाने  करने केलिए  बहुत अच्छा  उपाय हैं पर या  किसी भी हाल में २ / ३ महीने से ज्यादा उपयोग नहीं करना चाहिए .
3.    प्याज ओर शहद  का बराबर मात्रा  में लिया गया मिश्रण  कफ नष्ट  करता हैं
4.    नारियल के तेल  से किसी भी  मौसम  में  मालिश करना अच्छा रहता  हैं .
5.    एक/दो चम्मच  अश्वगंधा  का चूर्ण खाने के बाद  एक गिलास मीठा दूध पी लेना स्वास्थ्य के लिए बहुत  ही अच्छा  होता हैं .
6.    यदि आप थके हुए  हैं तो  दो/तीन बूँद शहद की एक गिलास  पानी में डाल कर  पी लीजिये  तुरंत शक्ति अनुभव  होगी . 
7.    यदि अर्जुन पेड़ की छाल को चाय की पत्ती की तरह , चाय बनाने मेंप्रयोग  करे तो यह ह्रदय के लिए बहुत  ही अच्छी  होती हैं
8.    यदि खाना खाने के बाद   ३ ग्राम  अर्जुन  पेड़ की छाल को पानी के साथ लिया जाये तो  स्वास्थ्य  के लिए अच्छी होती हैं .
9.    रात्रि काल में दही  या खट्टी चीजे नहीं खाना  चाहिए  
10. हल्दी ओर प्याज को  मिक्स करके हल्का सा गर्म करके जहाँ पर  दर्द  हो रहा हो  एक लेप की तरह लगाये  यह मोच ओर इन्टरनल पैन के लिए अच्छा होता हैं ( पर यदि कोई muscular  pain   स्टार्ट हुआ हैं तो पहले दो दिन  तो उस जगह पर   बर्फ  किसी  कपडे में लपेट कर  हल्का हल्का  लगाये .)

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 Ayurveda is the beauty of life here in this series  some useful healthy  tips for you  to achieve healthy body.
1.     If honey taken  (2/3 spoon )with    water  in night time while sleeping  good for decreasing   weight to body.(never take more than 2/3 month )
2.     If taken with   milk  good for  health  means adding weight to the body. .(never take more than 2/3 month )
3.     Take equal quantity of  onion  juice and honey  is good for reducing cough.
4.     Massage with  coconut oil is good for  all the season.
5.     Take one or two  spoon of asvagandha  and after that take  one milk with sugar  is very good for health.
6.     If  tired than take two three drop of honey in one Gilas of water , it will help you  to gain energy.
7.     Arjun tree’s bark (chhal ) is very good for  heart patient  if used  asa tea leaves in  making tea ,
8.     If taken after  meals   just 3-3 gram  with  water is very good.
9.      One should not eat dahi  or any khatti things in night time..
10.                Onion and turmeric  thoroughly mix with each other and   heat this mix  with very light heat and  apply  on the place where you are feeling  because moch or  some internal pain as a paste. Doing that  for  two /three days  much relief in pain . ( in any muscular pain it  is better first two days apply ice  on that area very gently and covered with  cotton cloths.
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AAVAHAN-11



सन्याशी के कदम तेज़ी से आगे बढ़ रहे थे. शाम घिरने को थी और तब तक सन्याशी पहोच चूका था अपनी मंजिल तक. एक छोटासा क़स्बा था, जिसमे कुछ कच्चे और कुच्छ पक्के मकान बने हुए थे. कोई आम छोटे गांव की तरह ही वह था, नगर से थोड़े दूर सन्याशी के कदम रुके और उसने देखा उस जगह को जिसके बारे मे उसने न सिर्फ अघोरी से बल्कि कई और लोगो से भी सुना था..सालो से होती आ रही तीक्ष साधनाओ का गढ़, जिसे एक समय चिरकूट कस्बा भी कहा जाता था, लेकिन आज ये बहोत बदल चूका है, यहाँ तक की नाम भी. जोपडियो की जगह ले ली है नए मकानोंने, इंसानों को इस वसाहत की पहले के विवरणों से जैसी भयंकर कल्पना मन मे होती थी अब ऐसा नहीं है. सब बदल सा गया है. यही सब देखा के सन्याशी ने सोचा की  सायद लुप्त हो गयी है यहाँ की योगिनिया और साथ ही साथ अब सायद नहीं रह गयी यहाँ पे उनकी मायावी साधनाऐ...डर के मारे कई सालो तक यहाँ पे कोई नहीं आया और किसीको पता भी नहीं चला की ये तो अब एक आम गांव की तरह ही बन गया है. मुस्कान के साथ वो आगे बढ़ा, गांव के बहार ही उसने रात बिताने का निर्णय किया लेकिन फिर कुछ सोचता हुआ सा गांव के अंदर जाने लगा. रस्ते मे ही एक व्यक्ति ने उसे रोक कर प्रणाम किया और बैठने का आदर्श किया. कुछ देर बैठने के बाद सन्याशी ने रुकने की जगह की चिंता जताई. साथ के व्यक्ति ने कहा यहाँ पे कई परिवार सन्यासी को अपने घर मे आसरा देना अपना सौभाग्य समजते है. आप चलिए, मे आपकी व्यवस्था कर देता हू...इसी के साथ वह व्यक्ति उठा और एक तरफ आगे बढ़ गया... सन्याशी भी उसके पीछे पीछे चल पड़े. थोड़ी दूर पर ही एक कच्चा मकान बना हुआ था, व्यवस्था कुछ एसी थी की एक कमरा थोड़ी ऊंचाई पर बना हुआ था जो की घर से थोडा अलग था और वहाँ जानेका रास्ता भी अलग ही था. जो व्यक्ति उन्हें यहाँ लाया था, वह उसी कमरे के दरवाज़े के पास रुका और थोडा सा किवाड़ खोल के सन्याशी को कहा की आपकी व्यवस्था यही हो जाएगी. सन्याशी ने अभिवादन मे एक स्नेह युक्त मुस्कान उस व्यक्ति की और देखा. वह व्यक्ति किवाड़ से दूर हो गया और सन्याशी अब दरवाज़े के बिलकुल पास आ गए. दरवाज़े पे हाथ लगते ही एक तेज़ हवा ने उनको कमरे मे धकेल दिया और दरवाज़ा अपने आप ही बंद हो गया...सन्याशी इसके लिए तैयार नहीं था हडबडाहट मे वह दरवाज़े की और भागे लेकिन वापस उन्हें किसीने खिंच लिया...सन्याशी ने कमरे मे पीछे मुडके देखा...दिए की पतली सी रोशनी मे जो कुछ भी दिखाई दिया उससे सन्याशीके दिल की धडकन थम सी गई. छोटा सा हवनकुंड, उसके पास नुकीला त्रिशूल गड़ाया हुआ. आस पास कुमकुम हल्दी और न जाने क्या क्या पदार्थ बिखरे से, शराब की खाली पड़ी बोतल, नरमुंड, उफ़ और इस सब के बिच मे एक आसान पर वीरासन मे बैठी हुई २५-२६ वर्ष की अत्यधिक सुन्दर योगिनी, उसने एक लाल रंग का चौगा लपेटा हुआ था जिसमे से उसके कमनीय बदन का अत्यधिक गौरा रंग साफ़ नज़र आ रहा था, खूबसूरती को वह मुट्ठी मे बंधे हुई थी, कपाल पर अत्यधिक लंबा सिन्दूर का लाल तिलक. ध्यानस्थ मुद्रा मे बैठी हुई उस कोई काल्पनिक मूरत सी उस रूपसी ने अपनी आँखे धीरे से खोली और संयाशी को देख के मुस्कुरादी...सन्याशी अभी भी सदमे मे ही थे, निश्चय ही वह व्यक्ति जिसने उसे यहाँ छोड़ा था, इस योगिनी से परिचित है और मुझे षड़यंत्र मे फसा कर यहाँ लाया गया था, मगर किस लिए ? तभी उस रूपसी ने अट्टाहास्य किया जैसे के वह सन्याशी की मूर्खता पे व्यंग कर रही हो. सन्याशी को काटो तो खून नहीं सी स्थिति हो गयी यही सोचके की पता नहीं अब आगे उसका क्या होगा..
Steps of sanyshi were going really fast. It was about to be sun set and sanyashi were reached to his destination. It was just Small Township, in which there were some mud and some concrete houses. It was just like other common villages, the step of Sanyashi stopped at a very small distance of village. He looked at the place about which he heard not only from aghori but from many other people to… center of years long Tikshna Sadhana which was called as Chirkoot Kasbaa at some time, but today it was changed, the name too. Huts were replaced by new houses, the description of the early humans living here were causing a horrible imagination about this place in mind but no more. Everything is changed. After observing all these, Sanyashi thought that it is extinct the Yoginis now and here, there is no more cause of their mysterious Sadhanas...no one have visited this place from years with reason of fear and nobody get to know that this now has become just an another village only.
With a smile he went ahead, He decided to stay outside of village for the same night but with wondering something, he stared getting in village. In middle of the way a person stop him and bowed & requested him sincerely to sit. After sitting a while sanyashi explained his worry to stay in village. The person accompanying him told ‘here, there are so many families which find it blessings if some guest monk stay at their house. You come; I just arrange it for you.’ With this the person stood up and started walking to particular direction...sanyshi too started walking on that person’s steps. At a small distance only there was a small house, it was built in such a way that one room was at a bit height then others which was a bit far from house and the way to that room was even separate.The person, who took sanyshi here, went to the door of the same room and while opening a bit he told sanyashi that your stay is arranged. For the appreciation, sanyashi looked at the person with an emotional smile. The person backed from the door and sanyashi came very close to the door. With a process of placing hand on the door,  wind throw him in and door closed by its own, sanyashi was not ready for this. He ran towards door in frustration but something again drawn him...sanyashi went back and started looking..whatever he looked in the thin light of the Ghee lamp, that cause a break in Sanyashi’s heart..Small Hawan Kund near buried edgy Trishul, there were Scattered Turmeric and vermillion nearby and other unidentifiable, empty bottle of wine, Human head skull, and in between all these sitting on aasan in viraasan position 25-26 years a very beautiful Yogini, she was in a long single red cloth which was showing a bright glowing colour of her beautiful body. She was holding beauty in her hand...a long mark of vermillion on forehead. In meditation posture like a image idol that beautiful yogini slowly opened her eyes and looking at sanyashi she smiled. Sanyashi was still in shock, definitely, the person, and the one who left him here was familiar with this Yogini that person brought him here with planned trap, but why? And at the same time that Yogini laughed loudly like she was kidding on the foolishness of the Sanyashi. Sanyashi went senseless in his mind with fear of unknown with wondering that what was about to happen with him now…

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Monday, June 27, 2011

TOTKA VIGYAN


                             
चाहे कोई प्रयोग  कितना  भी छोटा या बड़ा हो पर यदि  वह आपके जीवन को आरामदायक बनाने में   सहयोगी सा होता हैं तो उसे निश्चय  ही जीवन में स्थान देना चाहिए . इसी तरह के कुछ  प्रयोग आपके लिए ...
1.     यदि हर बुधवार , एक पीला केला  गाय को खिलाया जाये  तो यह धन दायक होता हैं आवश्यक यह हैं की  इस कार्य  का प्रारंभ , शुक्ल पक्ष  से ही किया जाना चाहिए.
2.    यदि धतूरे की जड़ को  अपने  कमर  में बाँध लिया जाये तो यह  जो व्यक्ति विशेष  स्वपन दोष से पीड़ित हैं उनके लिए लाभदायक  होगा.
3.    सूर्योदय के पहले किसी  भी चोराहे पर जाकर थोडा सा गुड चवा कर  थूक दे फिर बिना किसी से बात करे  बिना , नहीं पीछे देखे ओरअपने घर  जाये , आपकी सिरदर्द  की बीमारी में यह लाभदायक होगा .
4.    अपने व्यापारिक स्थल को यदि  वह  उन्नति नहीं दे रहा हैं तो एक नीबू लेकर उसे अपने प्रतिष्ठान के चारों ओर घुमाएँ  तथा बहार लाकर चार भाग में काट   दे ओर फ़ेंक  दे. आपकी उन्नति  के लिए यही भी लाभदायक होगा.
5.    किसी भी शुक्रवार   को  यदि  तेल में  थोडा सा गाय का गोबर मिला कर  मालिश  अपने शरीर की जाये  फिर स्नान  कर लिया जाये , तो यह व्यक्ति के विभिन्न दोषों को दूर करने में सहयोगी होता हैं .
6.    सुबह उठ कर यदि थोडा सा आटा यदि चीटीयों  के सामने डाल दे तो यह भी एक पूरे दिन का रक्षाकारक  प्रयोग  होता हैं .
7.    यदि  रवि पुष्प   के दिन अपामार्ग  के पौधे को  विधि विधान से उखाड़ लाये ओर  फिर तीन  माला नवार्ण मंत्र जप करेंइसे पूजा स्थान या  अपने व्यापारिक  स्थान पर  रखे आपके यहाँ धनागम में वृद्धि होगी . 
8.    परिवार में दोषों को समाप्त करने के लिए कुछ मीठा  या  मिठाई  ओर उसके ऊपर  थोडा सा मीठा पानी  भी   पीपल के वृक्ष  की जड़ में अर्पित करे .
9.    रविवार के दिन  पीपल का वृक्ष  नाछुये .
10. यदि व्यक्ति  दोपहर  के बाद यही पीपल के वृक्ष को स्पर्श  करे तो  व्यक्ति  की अनेको बीमारी स्वतः  ही नष्ट  होती जाती हैं . 
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 Every prayog however big or small, if change person life for  better  than one must  apply that, like that ,here some small prayog that will  ease your life if applied with  faith .
1.      1.each  Wednesday , offer a yellow  banana to cow this will increase you  wealth and that should be start from  moon waxing period.
2.     Tie black dhaootura root around  your waist  gives to relief in night fall problem.
3.     Before sun rise go to any square and   through a little gud after chewing  little first ,, and  turn back without taking to any one, help to reduces  headache.
4.     To  gain open  closed business ,  taken one nibuu  circled all the side of your business promises and after that  cut in four piece and through that out.
5.     On Friday if any one have massage with  oil and little bit  cow doung and than  have a bath with water all his dosha will be removed.
6.     While in the morning  when you awake offer some aata( WHEAT FLOUR ) to ant (chiti), this  will protect you all round.
7.     On ravi pushy day  take our   chirchitta (apamarg) with full  process and  chant  three round of navarn mantra and place that  in your pooja room or  your shop , finance incoming will increase.
8.     To reduce tension offer  some sweet   or sweet water/ besan laddu to pepal tree  after that add water on that  this will  very effective totaka.
9.     Never  touch  pepal on Sunday ,
10.                        One touch  pepal tree’s roots  every after noon , his incurable  illness get  vanishes.

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