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Sunday, December 14, 2008

पारद की महत्ता


सदगुरुदेव कहते हैं की वे लोग धन्य हैं जिन्होंने जीवन में पारद के दर्शन किए हो और जो पारदेश्वर की साधना में रत हो. क्यूंकि पारदेश्वर और पारद लक्ष्मी के माध्यम से ही जीवन की वे उन्चैयाँ हमें प्राप्त होती हैं जिनकी चाहत हमें होती है.

पारद शिवलिंग संसार का दुर्लभ शिवलिंग होता है यदि उस दिव्व्य व शुभ्र प्रवाहित पारद को स्वर्ण ग्रास देकर भव्य व आबद्ध बनाया जाए . और यह ग्रास देने की क्रिया ३२ बार होनी चाहिए . क्यूंकि ऐसा स्वर्ण ग्रास दिया पारद ही जीवन में भौतिकता और आध्यात्मिकता का समावेश करता है. यहाँ पर सदगुरुदेव ने बहुत ही विशेष बात कही है की स्वर्ण ग्रास के बगैर पारद पूर्णता दे ही नही सकता . फिर चाहे उस निर्बीज (बिना ग्रास लिए हुए) का आप शिवलिंग या पार्देश्वरी बनाओ या फिर उसे भस्म करो क्यूंकि शास्त्र कहता है की निर्बीज पारद को भस्म करने वाला नरक गामी होता है वो शिव हत्या का दोषी होता है. और यह ग्रास देने की क्रिया विजय काल से प्रारम्भ होनी चाहिए. तथा जहा पर पारद शिवलिंग स्थापित हो या निर्माणित हो रहा हो वह पर आग्नेय कोण में पार्देश्वरी स्थापित होना चाहिए.

भगवान् शिव के दिव्व्य ३२ रूपों को तभी आबधिकरण किया जा सकता है जब उनके प्रत्येक रूप के जप द्वारा ग्रास दिया जाए. इसी प्रकार हीरक ग्रास भी ३२ बार लक्ष्मी के ३२ रूपों की स्थापना के लिए दिया जाता है और यह पूर्ण प्रक्रिया १६ घंटो में होती है प्रत्येक घंटे में २ बार शिव चैतन्य होते हैं और दो बार लक्ष्मी.

इस प्रकार जो पारद प्राप्त होता है उससे निर्माणित विग्रह अद्विय्तीय होता है पूर्णता दायक होता है और ऐसे ही शिवलिंग और लक्ष्मी पर की गयी साधना फलीभूत होती ही है . वैसे भी जो लोग दूकान से पारद के विग्रह खरीद कर स्थापित करते हैं उन्हें कोई अनुकूलता इसी लिए नही मिलती क्यूंकि जब पारद अष्ट संस्कार के बाद बुभुक्षित होता है तो उसे भोजन देना अनिवार्य है , आप ख़ुद ही सोचिये की जो ख़ुद भूखा हो वो आप को तृप्ति कैसे दे सकता है. और दूसरी बात दुकानों पर मिलने वाले विग्रह पारद से नही बल्कि सीसे से या जस्ते से निर्मित होते हैं जिनमे नाम मात्र का पारद होता है , न उनमे चेतना होती है न ही कोई संस्कार. अब वो आपको पूर्णता कैसे दे सकते हैं. यह जीवन का सौभाग्य होता है की जीवित गुरु से इन विग्रहों को प्राप्त कर अपने घर में स्थापित करें और ऐश्वर्य व साधनात्मक स्टार की उच्चता की प्राप्ति करे जो होती ही है. इन ६४ दिव्य लक्ष्मी- शिव रूपों के आलावा उनमे ४ और विशिष्ट शिव रूपों की भी स्थापना होती है. इस प्रकार ६४ तंत्रों की दिव्व्य शक्तियों से यह विग्रह संयुक्त हो जाते हैं. यदि इन प्रक्रियाओं से युक्त पारदेश्वर और पार्देश्वरी घर में स्थापित हो तब कैसा भी बुरा ग्रह प्रभाव, तंत्र प्रभाव, पूर्व जन्म्क्रित दोषों से सद्फ्हक को मुक्ति मिलती है.

और ऐसा विग्रह ही आपको वो अनुकूलता और पूर्णता देता है जैसा की आप चाहते हैं. ऐसी पार्देश्वरी ही आग्नेय कोण में स्वर्णावती बनकर स्थापित होती है और खुशियों की बारिश करती हैं.

ऐसे पारद शिवलिंग पर ही शैव गुरु साधना , पूर्व जन्म दर्शन साधना ,तथा सप्त लोक भेदन साधना होती है जो की सदगुरुदेव द्वारा विश्व की श्रेष्ट दीक्षाएं में भी दी हुयी है.
एक महत्वपूर्ण बात याद रखिये , ऐसे विग्रह पूर्ण शुभ्र और दैदीप्यमान होते हैं जो सम्मोहन क्षमता और दिव्व्य तेज से आपको आप्लावित कर देते हैं , तो आइये और सदगुरुदेव से इन विग्रहों को प्राप्त कर जीवन को सफल बनायें

****आरिफ****

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