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Sunday, April 3, 2011

Tantra Vijay-Sharir Raksha Sadhna



साधना मार्ग पे चलने वाले हर एक व्यक्ति को अपने लक्ष्य तक पहोचने में कई बाधाये आती हे लेकिन साधक वही होता हे जो अपने गंतव्य की और आगे बढ़ाते ही जाए और सभी बाधाओ का शमन करता ही रहे. साधना जगत में हर एक बाधा के लिए हर एक समस्याओ के लिए समाधान हे ही और साधक अपने आप पर तुल जाए तो फिर असंभव जेसा कोई शब्द रहता ही नहीं. हो सकता हे प्रारंभ में कुछ समस्या आए लेकिन अभ्यास के साथ ही साथ सब कुछ योग्यता प्राप्त करने लग जाता हे. साधना जगत अत्यंत ही गूढ़ हे और कई रहश्य इसमे छुपे हुए हे. कई साधको को साधना के प्रारंभ में एसे अनुभव हुए हे की उनका डर बहोत ही बढ़ जाता हे यु हर एक समय साधना के मध्य मानसिक भय व्याप्त रहता हे. या फिर कोई भी निर्जीव स्थान पर साधना के मध्य एक डर व्याप्त रहता हे की कुछ अघटित न हो जाए. तीव्र साधनाओ के मध्य नाना प्रकार से साधक को विचलित करने के लिए उसके भय को बढाया जाता हे. यु साधक को इस भय से रक्षा मिले एसी साधनाओ भी सदगुरुदेव ने अपने शिष्यों को करवाई हे. साधना का उद्देश्य यह हे की साधक को एक रक्षा कवच प्राप्त हो जिससे वो अपने आतंरिक भय से विचलित न हो, और न ही कोई बाह्य पक्ष का भय उसे किसी भी प्रकार से नुकशान पहोचा सके. अगर साधक कोई निर्जीव स्थान पर जाए या फिर जंगल में साधना करनी हो या फिर स्मशान के मध्य अगर साधक इस साधना को सम्प्पन कर ले तो फिर उसे किसीभी प्रकार से अन्य योनी से डरने की जरुरत नहीं हे. या फिर कोई अज्ञात भय सता रहा हो तब भी सिद्ध किये हुए मंत्र का उच्चारण करने से वह भय निर्मूल हो जाता हे.
साधना को किसी भी रविवार से शुरू किया जा सकता हे. दिनों की संख्या निश्चित नहीं हे. ये मंत्र सुबह या रात्रि में किया जा सकता हे. पर रोज समय व जाप की संख्या निश्चित रहे. आसन और वस्त्र सफ़ेद रहे. दिशा उत्तर या पूर्व रहे. इसमे रुद्राक्ष माला का जाप किया जाता हे.
मंत्र :
ॐ परब्रम्ह परमात्मने नमः मम शरीरे पाहि पाहि कुरु कुरु स्वाहा
मंत्र का १०००० जाप हो जाने के बाद शुद्ध घी से मंत्र की १०१ आहुति देना चाहिए
इसके बाद जब भी इस मंत्र का उपयोग करना हो तो थोडा पानी हथेली में ले के इस मंत्र का ९ बार उच्चारण करके अपने शरीर पर छिड़क दे. सर्व रूप से रक्षा होगी. और किसी भी साधना को शुरू करते समय आसन पर बेठने के बाद पहले लोहे की किसी नुकीली वस्तु से अपने चारो और इस मंत्र को बोलते हुए घेरा बनाले तो बाधाये उस घेरे में प्रवेश नहीं कर पायेगी.
यह शरीर रक्षा का मूल शाबर मंत्र हे.

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the one who made step forward on the path of sadhana will face so many difficulties to reach a destination but a true sadhak is one who will keep on moving to his destiny and remove all the barriers. in the sadhana world, there is a solution for every trouble and if sadhak is owner of tough mental strength then there is no world like impossible for him. it happens that in starting period one may face some problems but with practice everything gets to set. the world of sadhana is too mysterious and there are so many secrets inside. some sadhak have experienced that when they start a sadhana their fear increases this way during the sadhana unknown fear keeps on rising in mind. or else at place far from humans recitation the fear stays of something unusual. in tivra sadhana with various difficulties, it is tried to increase the fear of the sadhana. for this, sadgurudev made their many disciples do various sadhanas for to get cover from fear. the motto of the sadhana is that the sadhak receive divine shield in his surroundings by which he don't get distracted and with this, no other elements from outside do harm him. if sadhak is going to some place like forest or shamashana for sadhana in that case if sadhak has done this sadhana, there is nothing to be feared about anything. or if some unknown fear is arising in that condition too the mantra chanting can remove the effect.
the sadhana could be started on any Sunday. the no. of days are not fixed. this mantra sadhana could be done in morning or during night but daily time and no. of chanting should remain fix. aasana and cloth should remain white. direction should be north or east. Rudraksha rosary should be used for mantra chantings.
Mantra :
Aum parabramh paramatmane namah mam sharire pahi pahi kuru kuru swaha
give aahutis of the same mantra 101 times with pure ghee when the 10000 chantings is completed.
after that at the time using a mantra, take little water in palm and chant the mantra 9 time and sprinkle that water on your body. the divine shield will protect. and while starting any sadhana, after sitting on asana take anything sharp made of iron and with the help of it create a round surroundings your asana by chanting this mantra. no barrier from outside will be able to enter inside that round.
This is body protection Mool Shabar mantra.
****NPRU****

2 comments:

Bishwajit said...

Jai Gurudev ,
ish sadhana ki bahut jarurat hai pata nahi kaha se itna bhay aa jata hai sadhana ke dauran .kabhi kabhi to sadhana start karne se pahle hi pata nahi kaha se darawane khayal ata hai aisa lagta hai pata nahi agar sadhna ne baitha to kaya anist ho jayega par jaab baith jao to guru kripa se sadhna purn ho hi jata hai , par kabhi socha bhi nahi tha is ke liye bhi sadhna ho sakta hai .Gurudev teri mahima aparampar .

Regards
Bishwajit

TANTRA said...

hi,
Kindly post any unfailing sharir siddhi prog and a saraswati one.
Thank you,
With regards.