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Monday, May 3, 2010

Tantra Vijay 3(A different experience)


In my sadhna period with blessings of Sadgurudev I came to know about such experiments which in general language known as “Totkas”…but my dear listeners, it is a part of Tantra only… due to which not only the obstacles of our work get finished but also it becomes easier to endup orderly.As u all know when we put red chillies in fire then how strong cough irritation comes out.but when it is affected by an evil eye no irritation came out… strange na…..do know why? Well here it gives birth to a different act of discrimination.But it is pretty clear that all common things (I mean to say daily domestic things) have tremendous grasping power.If it is used with specific process we can easily fulfil our treasured wish.And using that things in specific and unusual way is known as Tantra.Tantra means using any processs in serialized manner.It is only because Sadgurudev had given such easiness.By ordinary things and common sequence how to resolve life’s problem has been taught by Sadgurudev only.Similarly some facts which my elder guru brothers and I have experienced and tasted that success.And time to time I will represent it infront you also.One of process metioned below for all of you.

On Saturday just prepare some sweet rice and take it at the place were crows get together and then spread it.When that crows come forward for eating sweet rice then they would definitely have fight with other.During that time their bodies get rubbed with each other and feathers fall down.Some of them are from their stomach area which are very small and whitish in color.Now gather it and continue this process for 24days consecutively.After wards deposit it in pure honey.When it become large in quantity mix some hot wax in it and lastly make a thin shape rope.Whenever you will be having any important conference with your boss or any business meet which is too important for you and in that meeting you want acceptance in your favour then tie that rope in your Right hand and then present your views...And Watch the wonders by your own eyes.Definitely success will be yours.Not Just by reading,this is the thing which one should try it personally and feel the joy.

Sadgurudev had bestowed easy but unfailing experiments counts which may continues as it is and all guru brothers should get benefit from it that is only my request to Sadgurudev.

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साधना काल में सदगुरुदेव के आशीर्वाद से कई ऐसे प्रयोग मिले जिन्हें सामान्य भाषा में हम टोटकों के नाम से जानते हैं पर मेरे प्रिय आत्मीयों ,ये तंत्र का ही एक प्रभाग है .जिनके द्वारा हमारे कार्यों की न सिर्फ बाधाएं समाप्त होती है बल्कि उन कार्यों को सरल रूप से पूर्णरूपेण संपन्न किया जा सकता है. आप सभी ने देखा
होगा की जब हम आग में मिर्ची डालते हैं तो कितनी तीखी धांस उठती है की सभी खांसते खांसते परेशां हो जाते हैं. पर जब हम नजर का उतारा करते हुए ऐसा करते हैं तब किंचित मात्र भी धांस नहीं उठती . आखिर ऐसा क्यूँ???? यहाँ उसकी विवेचना एक् प्रथक लेख को जन्म दे देगी पर इतना तो मतलब साफ़ है की सामान्य वस्तुओं में भी (जो की रोजमर्रा के जीवन में उपयोगी होती हैं) ग्राह्य गुण होता
है . और एक विशेष विधि से यदि इनका प्रयोग किया जाये तो अपना अभीष्ट सिद्ध किया जा सकता है. और इन वस्तुओं का उस विशेष विधि से प्रयोग करना तंत्र कहा जाता है. तंत्र का अर्थ ही है किसी प्रक्रिया को उचित क्रम में प्रयोग करना. और सदगुरुदेव ने यही सरलता हम शिष्यों को प्रदान की हैं. साधना का सरलीकरण उन्ही की दें है समाज को. सामान्य वस्तुओं के द्वारा या सामान्य क्रम के द्वारा भी अपने
जीवन की समस्याओं का समाधान कैसे किया जाये ये ज्ञान सदगुरुदेव ने हमें प्रदान किया है. कुछ ऐसे सूत्र हैं जिनके द्वारा मुझे और कई गुरुभाइयों को सफलता मिली है यहाँ मैं आप सभी के लाभार्थ समय समय पर प्रस्तुत करता रहूँगा. आशा एक् प्रयोग आप सभी के समक्ष मैं रख रहा हूँ->>>>>>>>>>>
शनिवार के दिन घर पर मीठे चावल बनाकर उन्हें ऐसे स्थान पर लेकर जाये जहाँ कौए इकठ्ठे होते हैं. वहां उन चावलों को बिखेर दीजिए .जब वे कौए उन चावलों को खाने के लिए आते हैं तो ज्यादा खाने के लिए छीना-झपटी होगी. और ऐसे में उनका शरीर रगड खता है और उनके पंख गिरते हैं इनमे उनके पेट के
सफ़ेद छोटे छोटे पंख भी होते हैं. उन्हें इकठ्ठा करते जाएँ ,ये क्रम २४ दिन तक बनाये रखें.इन पंखों को शुद्ध शहद में रखे और जब बहुत से पंख हो जाये तो इन शहद मिश्रित पंखों को गरम मोम के साथ मिलकर पतली रस्सी की तरह बंट लीजिए. और जब भी अधिकारीयों या किसी व्यवसाय कार्य हेतु मिलने जाना हो .और वो कार्य बहुत जरुरी हो या आपको उस व्यवसाय मंत्रणा में अपने पक्ष में स्वीकृति
चाहिए ,तो उस रस्सी को दाहिनी कलाई में बांध कर जाइये .और अपना पक्ष रखिये. चमत्कार कार्य की सफलता के रूप में आपके सामने होगा. सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं अपितु ये तो करके देखने में ही आनन्द देगा.
सदगुरुदेव प्रदत्त सरल पर अचूक प्रयोगों की श्रृंखला ऐसे ही अनवरत चलती रहे और सभी गुरुभाइयों को इसका लाभ मिलता रहे यही सदगुरुदेव से मेरी हार्दिक प्रार्थना है


****ARIF****

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