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Saturday, November 13, 2010

Parad sanskar workshop(our first concrete step on the path divine…. parad science…)


पारद संस्कार कार्यशाला
part 1
( दिव्य पारद विज्ञान पर हमारा पहला ठोस कदम ...)
मेरे प्रिय मित्रों ,
दीपावली की ढेर सारी 'आप सभी को शुभकामनाएं . सदगुरुदेव जी आशीर्वाद के साथ आपकी शुभ कामनाये पूर्ण हो (निश्चय आपके प्रयास भी बहुत आवश्यक होंगे ) . जैसा कि आप पहले से ही जानते हैं कि पारद संस्कार की 40 दिन कार्यशाला पूर्ण हुए हैं .मैं आप सभी को धन्यवाद देता हूँ , आपकी शुभकामनाएँ और सहायता के सभी के बिना, यह बहुत मुश्किल काम था
पिछले 50 वर्षों मे जो की संभव नहीं हो पाया था , उसे सफलता पूर्वक करने का प्रयास किया , .
मैं अपने सभी साथी गुरु भाई और बहनों को भी धन्यवाद देता हूँ. इससे पहले की मैं इस कार्यशाला के बारे में लेखन प्राम्भ करूं, मैं ह्रदय से से आप का समर्थन आपके अपने ब्लॉग पर पाने के लिए धन्यवाद देता हूँ..
महत्वपूर्ण जानकारी: (नि: शुल्क पत्रिका)
अब हमारे ब्लॉग के फोलोवर की संख्या पहला जादूइ 100 के अंक तक पहुंच गए हैं या जब तक यह पोस्ट पुब्लिश हो उससे भी अधिक. अधिक. इस खुशी का पल पर मैं आपको बताना चाहता हूँ कि आरिफ जी इस ब्लॉग में सभी फोलोवर रजिस्टर (बेशक कि फ्री भी हैं ) के लिए एक नि: शुल्क पत्रिका की योजना बना चुके थे बस हम इंतज़ार कर रहे थे की जैसे ही ये संभव हो आप को बताया जाये . यह 20 पृष्ठों पत्रिका मे ज्योतिष, तंत्र, मंत्र यन्त्र, और सूर्य विज्ञान, आयुर्वेद और पारद विज्ञान को कवर किया जाएगा. और इस विषय पर चर्चा ही नहीं बल्कि पूर्ण साधना भी प्रकाशित होगी , ये साधना और ज्ञान जो की पूज्य सदगुरुदेव जी और हमारे सन्यासी अग्रज गुरु भाइयों से सीधे प्राप्त हुए हैं उन्हें दिया जाएगा. हर नए २५ फोल्लोवेर के बढ़ जाने पर इस फ्री पत्रिका के पेज और बढ़ा दिए जायेंगे . यही नियम रहेगा .
फिर भी मैं इसे आप सब के लिए स्पष्ट करना चाहूँगा हम सभी आपके केबल मात्र गुरु भाई हैं इस्ससे ज्यादा कुछ भी नहीं, हम हमेशा शिष्य ही रहेंगे, इससे बड़ा हमारा सौभाग्य क्या हो सकता हैं. प्रिय साथियों, हमे जो भी ज्ञान सद्गुरुदेवजी और उनके सन्यासी शिष्यों से प्राप्त हुआ हैं इसमे हमारे अपने अनुभव भी हैं , आपके साथ हम बाँट रहे हैं इस ज्ञान को आप अपने मन , ह्रदय मैं स्थान दे , इसे कृपया ध्यान दे की सदगुरुदेवजी का दिव्य ज्ञान केबल हमारी ही संपत्ति नहीं है, सदगुरुदेव जी हर एक के लिए है ,
और यदि आप इसे अपने जीवन के लिए एक प्रतिशत लाभ पाते हैं. यह हमारे लिए सदगुरुदेव जी के पवित्र चरण कमलों मैं छोटी सी भेंट होगी . आपकी प्रतिक्रिया के आधार पर, कि ये पत्रिका द्वि मासिक या तिमाही होगी फैसला किया जायेगा , अन्य गुरु भाइयों के साथ हर दिन मैं भी बड़े ही उत्सुक्कता से ब्लॉग हिट देखता था. मुझे अभी भी बहुत आश्चर्य होता था कि सिर्फ पिछले तीन महीने में कुल २१००० हिट से अधिक तक पहुंच गई , (यह सिर्फ किसी विशेष लेखों पर एक क्लिक गिनती है, और मोबाइल उपयोगकर्ताओं कितना हमरे ब्लॉग को एक्स्सस करते हैं उनकी गिनती हमें ज्ञात नहीं है) .
मैं मेरी अपनी आँखों पर विश्वास नहीं कर सकता है. आपका इतना बड़ा समर्थन है हमें , हम अपने ह्रदय से आप सभी को स्नेह करते हैं. और मैं इससे ज्यादा क्या कह सकता हूँ..
पारद संस्कार कार्यशाला:
एक और बात, बहुत ही हम सभी के लिए आश्चर्य की बात है की , "कार्यशाला की जानकारी है, और कार्यशाला के महत्व" हर 20 से 30 लोगों के द्वारा पढ़ा जाना ,पारद संस्कार कार्यशाला के क्षण आप सभी मेरे अपने के साथ बांटूं है. हालांकि मैं भी एक सदस्य के रूप में कार्यशाला में भाग लेने गया था , लेकिन मैंने हमेशा हर गतिविधि पर कड़ी नज़र रखी . और यहाँ, मैं सिर्फ सकारात्मक बिंदुओं की ही नहीं लेकिन नकारात्मक बिंदु भी चर्चा करेंगे, क्योंकि मैं इसे भाग लेने वाले सदस्य के पहले , एक आलोचनात्मक दृष्टि से पहले देखता हूँ .
पूज्यपाद सदगुरुदेव जी के आशीर्वाद के साथ, हम केवल १२ संस्कार (अभ्रक सत्व ग्रास) संस्कार तक ही नहीं बल्कि १३ वे संस्कार तक पूरा कर लिया है जिनमे अभ्रक सत्व चारण ,अभ्रक सत्व जारण और अंतर गर्भ दृति पूरा किया . रस शास्त्रों मैं इस बात का उल्लेख हैं ही लोग दृति करने के प्रयास मैं ,खुद ही द्रुत हो गए , पर नहीं कर पायें. इस दौरान .जब मैं स्वयं एक प्रसिद्ध फार्मेसी राजस्थान के प्रबंधक से मिलने गया ., उसने मुझसे कहा .. गुरु और भगवान् शंकर के आशीर्वाद के बिना यह संभव नहीं हो सकता है क्या और अधिक सबूत के लिए आवश्यक है. मेरे और आप जैसे सभी अपने बच्चों को सदगुरुदेवजी का आशीर्वाद हमेशा रहता हैं.
यह काम हमारे प्रिय सदगुरुदेव जी का सपना है, और उनके आशीर्वाद और उनकी उपस्थिति के बिना यह सफलता नहीं मिल सकती थी. इसलिए इस दिव्य काम पर गलती खोजने अच्छा नहीं था, लेकिन आरिफ जी , मुझे कहा की निष्पक्ष आँखों से सभी प्रक्रियां को देख कर मैं लिखूं
.
इसके लिए मुझे सिर्फ 3 या 4 लेख मैं बात पूरी करना हैं , जहां प्रत्येक घंटे मैं इतनी जानकारी दी जाती थी की उसे एक पोस्ट में कवर नहीं किया जा सकता है, को 40 दिन की गतिविधि संक्षेप करने के लिए मुश्किल है.कम से कम मेरे लिए तो कठिन हैं ही . मैं इसे 3 / 4 लेख और मेरे द्वारा कवर नहीं किये जाने भाग को मैं अपने अगले पोस्ट मैं पार्ट , पार्ट आपके सामने रखने का प्रयास करूंगा .. हम सब स्टेशन पर एकत्रित थे जिनमे आरिफ जी, रघुनाथ निखिल जी और आठ राज्यों से गुरु भाई एक झारखंड, एक चेन्नई से, चार पंजाब से , महाराष्ट्र से, मध्य प्रदेश , गुजरात से, उत्तर प्रदेश. भी. और मैं अनु आप सभी की और से ....( हैं ना )

या आप यह कह सकते हैं, एक आयुर्वेदिक (श्री आदित्य अवस्थी) चिकित्सक, एक एलोपैथिक चिकित्सक (डॉ. गुरिंदर सोढ़ी जी), एक गुरु भाई फैशन डिजाइन में पढ़ रहें हैं , दो लोग सॉफ्टवेर इंजिनियर ,तीन उद्योग क्षेत्र के सम्बंधित थे , उम्र के हिसाब से कहूं तो 24 साल से 75 साल तक के व्यक्ति शामिल थे. अधिकतम संख्या को 15 किया था लेकिन बाद में पाया गया कुल १९ सदस्य हो गए थे .
अन्य सभी की तरह मुझे भी थोड़ा चिंतित तो था ही , की कार्यशाला , कहाँ होंगी और कैसे संस्कार की प्रक्रिया पूरी होंगी . कार्यशाला राजस्थान के पाली शहर की जगह के पास हुई . हम एक आश्रम पर रहे, अब आप 40 दिनों के लिए है कि ऊँचे पहाड़ और जड़ी बूटियों दिव्योशिधि और सिद्धोशिदी से घिरा हुआ स्थान पर . मुझे कुछ भी जड़ी बूटियों के बारे में पता नहीं था.और मेरा रघुनाथ निखिल जी से विस्तार से मिलने के लिए अवसर. था, और साथ अन्य गुरुभाई यों से भी . थोड़ा झिझक के साथ, हम लोग एक दूसरे से परचित होते गए , सभी सदगुरुदेव जी के बच्चे जो हैं. और जब ४० दिन बाद बिछड़ने का समय आया तो और हमारे चेहरे पर मुस्कान तो थी मन मैं थोडा सा दु: भी था .इसे ही सदगुरुदेवजीका जादू कह सकते हैं बे अनजाने लोंगों को भी एक सूत्र मैं जोड़ देते हैं जीवन भर के लिए
.
आधुनिक समय में, 40 दिन, जैसे दूरदराज के इलाके में जा कर सीखना. बड़ा सवाल था, लेकिन 19 व्यक्ति ऐसा करने के लिए मन बनाया था .
अब यात्रा शुरू हो रही हैं
. सुबह सूरज उग रहा था , तो हमारे दिल में एक सूर्य हमारे सदगुरुदेवजी के ज्ञान रुपी आशीर्वाद, के रूप में ...
भाई उठो ... भाई, बुला रहे थे . मैं जानता था कि वह अपनी नित्य साधना कर चुके थे ... जब तक गुरु पूजन पूरा हो वह पानी की एक भी बूँद तक ग्रहण नहीं करते थे.
मेरी चाय ... मैंने पूछा?
भाई कुछ तो शर्म करो .. आरिफ जी ने कहा ..
लेकिन मैंने देखा .. मोहिन्दर भैया , डॉ सोढ़ी जी मुस्कुरा रहे थे
हम बना रहे हैं ......
धीरे से और ध्यान से मैं जमीन पर पहुंच ... ( हम सभी छत पर ही सोये थे )
मुझ भूल गये .. मैंने पलट कर देखा तो , ब्रुश कर रहे , अपने रघुनाथ जी मुस्कुरा रहे थे..
पहले दिन आरिफ जी ने पूज्य पाद सदगुरुदेव जी का पूर्ण पूजन फिर , भगवान् रशेश्वेर ,माँ रशेश्वेरी , स्वर्नाकर्षण भैरव , रस सिद्ध परम आचार्य और आचार्या का भी पूर्ण पूजन सम्पन्न कराया . आप सभी को इन आचार्य और आचार्या के नाम के बारे मैं पहले से ही पता हैं , सदगुरुदेव जी की प्रशिद्ध किताब स्वर्ण तंत्र मैं पूर्णता के साथ उनका उल्लेख हैं. हम सभी इस पूजन के दौरान पीली धोती और गुरु चादर गुरु माला ध्ह्रण किये हुए थे. पूरा पूजन होने मैं घंटे से अधिक समय लग गया था . हम सभी ने केबल अपने ही लिए बल्कि सभी की सफलता के लिए प्राथना की .इन सम्पूर्ण पूजन में खरल को रस क्रिया में सफलता के लिए सिद्ध करना और उसमे धनदा स्थापन अत्यधिक दुष्कर कार्य ही था.
बहुत दिलचस्प तथ्य है कि कांजी जैसे आवश्यक सामग्री भारी मात्रा में, मूलिका का रस, और दूसरी आवश्यक सामग्री पहले से ही तैयार रखी थी., सदगुरुदेवजी के आशीर्वाद के आलावा और क्या कहा जाएँ. आन्य्था हमारा बहुत समय ख़राब होता पर सदगुरुदेवजी हैं तो उनके बच्चो को क्या भय . गुरु मंत्र करने के बाद हमने अपने कपडे बदल लिए. हमें हमारा भोजन खुद ही बनाना था , मन मोहिंदर भैय्या , राजू भाई, डॉ सोढ़ी जी ने ये अपने उपर ले लिया , इन लोगों ने अपनी तरफ से कोई कसार बाकि नहीं छोड़ी . शेष दिन तक खाने से लेकर चाय तक चाहे रात मैं ही हो , इन लोगों ने ही हमारे लिए संभव कर दिखाया .
क्या कारण थे जो पिछले 40 वर्षों में इस तरह के एक कार्यशाला नहीं व्यवस्थित किया गया था ,पारद विज्ञान से सम्बंधित कार्य संस्कार और सदगुरुदेव जी के पारद विज्ञानं का सपना आदि पर , सायं काल समय पर आरिफ जी केबल हमारे प्रश्नों के जबाब दिए वह धैर्यपूर्वक सभी प्रश्न के उत्तर दिए , उन्होंने कुछ सदस्यों 'बा सा "का परिचय (एक 70 साल का जवान , जो की अच्छी तरह से धातु भट्ठी पक्ष में निपुण हैं ) का परिचय कराया ).
रात के समय में, बड़े नवनिर्मित हॉल की छत पर, हम इकट्ठा हुए . बड़ा मजेदार रत थी ठण्ड तो थी ही सभी कम्बल , रजाइयों मैं दबे हुए . वहीँ मैं सोच रहा था की कैसे होंगे १२ संस्कार क्या क्या होगा,
. नाम जैसे पातन, मर्दन ,रोधन ,अभ्रक सत्व पातन ,एक दूर देश पक्षी की तरह लग रहे थे , लेकिन सोचा कि जवाब समय के ही साथ ही मिलेगा
रोम एक दिन मैं तो नहीं बना था .. ( इसलिए , मैं यह रात में बना रहा था )
हालांकि अपने कुछ गुरुभाई में से singruf से पारा निकाल लेते थे पर बिस्तार से . उनका भी ये पहला अनुभव था .
इसकी मेरे लिए बहुत खुशी की बात थी की ,मैंने कई बार पर आरिफ जी से अनुरोध किया था कि मैं पारद के बारे में ज्यादा नहीं जानता बे हमेशा मुस्कुराते ........ भाई बस इंतज़ार करो.......
उन्होंने अपना वादा पूरा किया , अब एक सूर्य आकाश मैं उग रहा था और हमारे मैं और ह्रदय मैं सदगुरुदेव जी के ज्ञान रुपी सूर्य उग रहा था , वोह सूर्य तो शायद डूब भी जायेगा पर ये नहीं .
शेष अगली पोस्ट पर .साय काल के 5 बज रहे हैं ,
अब हस्ते हुए इतना कहूँगा की आप कैसे हो ...
आप सभी को ढेर सारी पूरी ट्रेन भर कर मिठएयों भरी शुभ कामनाएं,
वैसे मेरे लिए भी थोड़ी सी छोड़ देना.
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Dear friends,
happy deepawali ‘s good wishes to all of you, with the sadgurudevji blessing ,in this year all your good wishes be fulfilled (off course your effort is also needed too). as you are already aware that the parad sanskar 40 days workshop is completed now. on this moment, i thank you all ,without all of your good wishes and support, this very difficult task, which was not ever tried , completed successfully, which was not attempted, in last 50 years.
i also thank to you fellow guru brother and sisters. before, I start writing about the workshop, i again thank you all for the support you have provide on your own blog.
Important information :(Regarding free e magazine)
now the number of follower of our blog , just reaching our first magic figure 100. or till this post publish, more than that. on this happiest moment , i inform you that Arif ji planning a Free e magazine for all the follower register (off course that is free too) in this blog. this 20 pages mag will cover astrology, tantra, mantra, yantra and sun science, ayurved and off course parad science. and this will not be a magazine for discussing the topic but will contain the sadhana what he get directly from sadgurudev ji and our sansayasi guru brothers. Not only this but, as the follower number increases , the free e magazine pages will be increases , like on reaching next 25 follower , 4 page will be added .. this will be the rule. again i would like to make it very clear to all of you mine fellow guru brother and sister is that, we are just your guru brother nothing more than that and we all ,always be the shishya. What more luck and blessing can be of us .what we got with the blessing of sadgurudevji and his sanyasi shishyas and our own little experience in this great divine field, just providing in your kind heart and hand, keeping in mind that sadgurudevji divine knowledge is not just our property, sadgurudevji is for every one,
and if you find it a single percent benefit for your life. this will be our offering to the divine holy feet of our sadgurudevji. depending on your response, that e magazine will be bi monthly or quarterly be decided .each day i along with other gurubhai , checked the blog hits, i was /still am very surprised that in just last three months total hits reaches to more than 21,000 fig ( this is just a click count on the specific article, not all accessing the blog, and in that mobile users counting is not known to us. )
i could not believe , in mine own eyes. Your’s such a huge support, i am just offering my deepest heart feeling to you all, what more i can say.
Parad Sanskar’s workshop:
one more thing , very surprising to all of us, the post named" information of workshop , and importance of workshop" every day read by 20 to 30 people. i think it s the good times to share the parad sanskar workshop s moments with you all. though i also participate in the workshop as a member ,but i always kept a close eyes on each and every activity. and here ,i will not only discuss the positive points but negative point too, since i first go through the process with not as a workshop mode but mine criticizing ability always comes first.
with the blessing of sadgurudevji, we have completed not only 12 sanskar (til abhrak satav grasan )but upto 13 th (like abhrak satv charan, abhrak satav jajaran and antah garbh druti. for that ras shartra mentioned that people attempting to do druti, already drut (passes) to other world. when i personally meet manager of famous pharmacy situated in rajsthan, he told me.. without the blessing of guru and bhagvaan shanker this can not be possible. what more proof is required for sadgurudevji blessing to all his children like me and you.
this work is of our beloved sadgurudev ji dream, and without his blessing and his presence it will not got the success as it happened. so finding fault on this divine work was not good, but arifji, told me go through all the phase with impartial eyes.(but i have only two eyes... )
its very difficult for me to summarize 40 days activity in just 3 or 4 article, where each hours passes with so much info that cannot be covered in one post. anyway, i would tried to summarize it in 3/4 article and part not covered by me ,will be appeared in mine post or in a part of other article..we all gathered on the station, Arif ji, raghunath nikhil ,and guru brothers from eight states are there, one from Jharkhand, one from Chennai, 4 from Punjab, one from Maharashtra, mp and Gujarat,UP. too .and off course me from your side.....(is n’t it)
or you can say two It brothers from It software field , one an practicing Ayurvedic doctor ( shri Aditya Awasthi )and one is allopathic physician(Dr Gurinder sodhi ji ), one is studying in fashion design, three belongs to industry field .age wise i should say from 24 yrs to 75 years. though max number had to be 15 but later found it exceeded to 19.
with all other participent ,me too little bit worried, where and how the process of sanskar was going to be, the workshop happened near the place of pali city of Rajsthan. we stayed on a ashram , now coming 40 days had to be passed on that place surrounded by deep mountain and rich herbs divyoshidi , siddhoshidi there.i also not knew about herbs .its mine first turn to meet in detail raghunath ji, and with other gurubhais ,with little hesitation, things go well, and in last days though smile on our face but also having sorrow a little bit to miss them, this is the magic of sadgurudevji.
40 days , to be stayed in such remote area. in modern time, was the big question, but 19 person made up their mind to do so. now the journey started. as the morning sun rises, so our sadgurudevji blessing on us, in our heart...
are bhai utho... bhai calling us ,i knew that he had performed his nitya sadhna krama ,(i knew it already).since til the guru po0jan he not completed, he will not a drink a single drop of water.
where was mine tea... i asked?
bhai kuch to sharam karo.. arif ji replied..
but i saw downstairs ..mohinder bhaiyya , dr sodhi ji smiling on me.
are bhai hum se to bolo......
slowly and carefully i reached the ground...( I was on the roof)
mujhe bhool gaye.. i listened, the voice i turned, found raghunath ji brushing his teeth and smiled on me.
Day first arifji, as mentioned in mine earlier post (importance of workshop). Completed the all ritual like poojan to our sadgurudevji in details so the bhagvaan Rasheshver and ma Rasheshwery. lord swarnakarshan bhairav , and all the divine sidhha and archarya poojan in details with include an tuff procedure( the sthapan of Dhanda shakti in own kharal patra)
you all already knew their names as mentioned in sadgurudevji famous book named swarna tantram.it took more than 2 hours to complete .we took a little rest, though remember that we all wear yellow dhoti and guru chader and having our guru mala in our hand, prayed to sadgurudevji for success of not only to us but all mine fellow brothers too.
its very interesting that huge quantity off essential material like kanji , juice of muli, and others are already prepared there ,with sadgurudevji blessing we could start our work with any delay, other wise too much time wasted . after the pooja and completion of guru mantra. we changed our cloths. in Capri ,t shirt are a regular feature there. we had to prepare our food, but man mohinder bhai , raju bhai, and dr sodhi ji, took that responsibility on their hand, for remaining days they did their best. first days totally spend on arranging things, arif ji devoted too much times .
why we were there, why in last 40 years such an workshop was not arranged ,sadgurudevji dream on parad science, evening times ,we also asked our questions to Arif ji ,what were things on that time. he patiently provide answer to all the query, he also introduces some of the member like “ba sa” (A 70 years old young man well versed in the metallic furnace side) who also provide their help to us, and educate us.
in night times, on the roof of big newly constructed hall ,we gathered. we chatted a lot ,too much cold there so amazing experience , i also thinking that how 12 sanskar going to completed. names alike abhrak sat patan, marden , sweden, rodhan, like a distant land bird. i thought a lot but time would be the answer,
Rome was not built in a day..(thats why i was building it in night)...
necessary article like special goggle to protect eyes, essential medicine, singruf (male ,female).were waiting for us. though some of the gurubhai who successfully get mercury from singruf (they already keep in tough with arif ji).but in details .their first experience.
its matter of great joy for me to in person, that i requested arifji on many times that i new not much about parad science, he always smiled and used to tell me , brother just wait. he was fulfilling his promise to not only me but others too. Now
sun is not only rising and shining but sun of sadgurudevji divine knowledge and blessing rises in our heart too...
now not only coming 40 days but rest of life , all the participent would be mine brother ,friends eleder/ youngers.
jai gurudev..
... continuous....




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****ANURAG SINGH****

4 comments:

VINOD KUMAR SHARMA said...

Please could you tell me details regarding the Jyotismati kalp and please upload a lot of sadhana

VINOD KUMAR SHARMA said...

Please could you tell me details regarding the Jyotismati kalp and please upload a lot of sadhana

suvarnashilpi said...

Jab bhi blog par naya article publish hota hai to padh kar bahut bahut achha lagta hai...lagbhag 50 din 60 din pehle is karyashaala ke bare me padha tha to tabhi laga tha ki yeh purna rup se safal hoga Sadgurudev ke ashirwaad se.Gurudev to sadev kehte hai na ki jab bhi koi karya puri lagan nishtha ke saath kiya jay to safalta apke kadam chumegi.. Is karyashala ka vivran sun kar bahut bahut achha laga..Ap sabhi ka bahut bahut dhanyawaad ki aisa anmol gyaan ap is blog ke jariye har utsuk sadhak ke paas pahucha rahien hai...

Pawan said...

Jai Gurudev Bhaiya.Bhaiya magazine bimonthly ho aur 30 page ko ho to bahut achha hain.We love you bhaiya.