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Tuesday, November 23, 2010

TANTRA VIJAY-16 MUSLIM TANTRA(Which influence is unbeatable)


तंत्र विजय- १६ मुस्लिम तंत्र – जिनका प्रभाव अचूक है

सदगुरुदेव के दिव्य सानिध्य में विविध साधना पद्धतियों के ज्ञान को प्राप्त करते हुए हमेशा मैं ताज्जुब में ही पद जाता था तब जबकि मैं किसी प्रश्न को सोचने वाला होता और उत्तर सदगुरुदेव पहले ही दे देते ...... आश्चर्य के एक नहीं सैकडो उदाहरण मेरे पास हैं इस बात के लिए. खैर मुस्लिम तांत्रिक पद्दतियों को जानने के लिए उन्हें समझने के लिए बहुत बैचैन था मैं. हाँ मेरे पापा ने अपने स्तर पर बहुत से अमल (प्रयोगों) को मुझे समझाया था . पर अन्य जहा भी इस बाबत मैं गया मुझे निराशा ही हाथ लगी क्यूंकि प्रयोगों को देने में इतनी आनाकानी होती थी की मुझे शक होने लगता की इन्हें ज्ञान है भी या नहीं. अचानक घर पर एक खत आया जो की सदगुरुदेव द्वारा भेजा गया था और मुझे तुरंत ही दिल्ली बुलाया गया था. २ दिन का कठिन सफर पूरा करके जब मैं वहाँ पंहुचा तो मुझे बताया गया की सदगुरुदेव शाम को मिलेंगे. शाम को सभी लोगो से मिलने के बाद जब उन्होंने मुझे बुलाया तो मैं अंदर जाकर उनके चरणों से मैं लिपट ही गया ........ उठ तेरी डायरी कहाँ है ??????
जी मेरे बैग में !!!!!
जा निकाल कर ले आ.
मैं उठा और बैग में डायरी ढूँढने लगा , पर डायरी होती तब मिलती ना .
बेटा तू डायरी लाया ही नहीं तो उसे ढूँढ क्यूँ रहा है ..... इधर आ ये ले मैंने पहले से ही तेरे लिए डायरी ला कर रखी है.
उनके हाथों से डायरी ले कर मैं सोचने लगा की हर पल का ख्याल रखते हैं वे.
तू मुस्लिम तंत्र के प्रयोग तलाश रहा है न. ... विस्तृत है तंत्र की ये पद्धति जिसके प्रयोगों की काट सरलता से संभव ही नहीं है- उन्होंने कहा.
भला क्यूँ- एक उत्सुकता सी मेरे दिमाग में दौड गयी थी.
बेटा क्रिया की प्रतिक्रिया होती है, सीधे का उल्टा होता है पर इनकी विपरीत क्रिया इतनी सहज नहीं होती है न. पांच संध्याओं में की गयी शुद्ध मन से अल्लाह की इबादत का असर इतना प्रभावकारी हो जाता है जब कोई पूरे नियम से नमाज को अता करते हुए इन्हें कर लेता है तो.
अग्नि तत्व तो पूरी तरह नियंत्रण में ही होजाता है . साधक या आमिल के ..
भला वो कैसे????? मैंने पूछा .
देखो इन साधनाओं का आधार रूप जिन मवक्किलों या शक्तियों पर निर्भर रहता है, उन का जन्म लगभग आग से ही होता है जैसे की जिन्न,जिन्नात आदि . ये खुद भी इबादत गार होते हैं. सैकडो हाजरात प्रयोग उन असाध्य कार्यों को भी साध्य बना देते हैं जिनकी कल्पना अभी नहीं की जा सकती.
पर ध्यान रखने वाली बात ये है की साधक को इन अमलों को करते समय बहुत ही साफ सफाई का ख्याल रखना पड़ता है. पूर्ण ब्रह्मचर्य , ईश्वर की इबादत में अपना मन लगाना पड़ता है और निर्भय होकर ही इन साधनाओं को संपन्न करना पड़ता है.
७ बजे से लेकर ११ बजे तक वो मुझे तंत्र की उन मुस्लिम पद्दतियों को समझते रहे और ऐसा आगे के ६ दिनों तक होता रहा , बाद में भी कई बार मैंने उनके द्वारा कई मुस्लिम तंत्रों को प्राप्त किया जो की पाक कुरान-ए-मजीद में वर्णित है और दुर्लभ ही हैं उनमे दी हुयी पाक आयतों का प्रायोगिक ज्ञान भी . मेरी स्मृति पटल पर अंकित उन के द्वारा दिए गए इन अद्भुत मुस्लिम तंत्र के सैकड़ों प्रयोगों के लिए मैं उनका कोटि कोटि आभारी हूँ .
पर उन जटिल प्रयोगों के नियमों का पालन करना संभव सामान्य तौर पर है ही नहीं. लेकिन इसका ये अर्थ है ही नहीं की मैं उन प्रयोगों को बताऊंगा ही नहीं. तंत्र-कौमुदी के हर अंक में मैं कुछ चुने हुए मुस्लिम प्रयोग बताता रहूँगा और उसी में मैं इन प्रयोगों को करते समय क्या नियम या सावधानी रखना पड़ता है तथा कैसे इन मन्त्रों के द्वारा सफलता पाई जा सकती है. हाँ एक बात बताना तो मैं भूल ही गया था की १९८८ में मेरी दीक्षा के पहले ही सदगुरुदेव ने मुस्लिम हाजरात शिविर लगाया था और सैकडो साधकों ने उनमें सफलता पाई थी . हजारों की संख्या में मुस्लिम साबर मन्त्र हैं जिनका सही प्रकार से यदि प्रयोग किया जाये तो आप अपना मनोरथ सिद्ध कर सकते हैं. मैं सदगुरुदेव द्वारा प्रदान किये गए उन सैकडो प्रयोगों में से जो की मेरे अनुभूत हैं में से २ प्रयोग दे रहा हूँ जो की आप कर के स्वयं अनुभव कर सकते हैं की कितने तीव्र हैं ये प्रयोग और इनकी पद्दति भी कितनी निरापद और सरल है .... बस ध्यान ये रखना की गलत कार्य के लिए यदि ये प्रयोग किये गए तो इनका लाभ मिल ही नहीं सकता . यदि विविध तंत्र सिद्धि दीक्षा गुरुदेव से प्राप्त कर लिया जाये तो बहुत अच्छा है. जो प्रयोग मैं यहाँ पर उल्लेखित कर रहा हूँ वे अत्यधिक सरल हैं कोई जटिल नियम नहीं हैं उन्हें सिद्ध करने या प्रयोग करने के लिए पर इन प्रयोगों की शक्ति निश्चय ही अद्भुत है. हालाँकि इन प्रयोगों को करने के लिए भी तारों की गणना का प्रयोग अन्य तांत्रिक पद्दतियों में की गयी काल गणना के समान ही होता है पर वो प्रथक विषय है जो की मैगजीन में समयानुसार लिखेंगे ही. यहाँ दिए गए प्रयोग बहुत बार के अनुभूत हैं , आप करिये और खुद ही इनका असर देखिये.
नियम- जिस आसन पर आप प्रयोग करें वो सिर्फ आपके द्वारा ही उपयोग किया जाये.
पवित्रता का विशेष रूप से ध्यान रखा जाये.
लोहबान धूप का प्रयोग किया जाये.
प्रयोग एक ही जगह पर किये जाये, ये न हो की आज यहाँ बैठ कर जप किया और कल किसी और जगह.
अमल (प्रयोग) नेक काम के लिए नेक विचार के साथ ही किये जाये.
१.यदि ऑफिस में बॉस से या किसी काम को करवाते समय अधिकारी वर्ग या व्यक्ति विशेष से दिक्कत आ रही हो तो शुक्रवार को सुबह ५ बजे नहा कर पूरी तरह पवित्र होकर निम्न मन्त्र को ३ दिन तक वज्रासन में बैठ कर साफ़ कपडे पहन कर पश्चिम की और मुह कर ५०० बार पढ़े और चौथे दिन १००० बार पढ़ कर अपनी हथेली पर लिख लें और जब उस दिन अधिकारी से मिलने जाये तो उसके सामने जाने के तुरंत पहले उसका ध्यान कर १५ बार पढ़ ले और जाकर खुद अंतर देखे.
“या रहमाना कुल्ली शयइन दराहिमहु”
२.यदि आपका प्यार आपसे रूठ गया हो या किसी और की तरफ आकर्षित हो रहा हो . या आपको ऐसा लग रहा हो की आप दोनों के बीच का प्यार कमजोर होने लगा है तो नीचे दी गयी आयत को आप ११०० बार ३ दिन तक ऊपर बताई हुयी विधि से ही सिद्ध कर ले और एक चीनी मिटटी की प्लेट में इसे केसर से ७ बार लिख कर उसे धोकर उस पानी को यदि आपके साथी को पिला दिया जाये तो निश्चय ही वापिस आपके सम्बन्ध पहले से भी प्रगाढ़ हो जायेंगे . यदि पानी पिला न सके तो किसी भी तरीके से उसकी बनी हुयी चाय या कोई भी व्यंजन पान आदि में मिलकर भी इसका प्रयोग किया जा सकता है.
“इन्नमा तुन्जिरू मनित्त-व-आज्जिक रा व खशि यर्रमहाना बिल गैबी फबश्शीरहू बिमग फिरतिन व अजरिन करीम”
तो करिये और करके खुद ही परिणाम देखिये. मैं अपने भाग्य को हमेशा सराहा करता हूँ और गौरवान्वित हूँ की मुझे सदगुरुदेव ने अपनी शरण और शिष्यता दी और दिया ऐसा ज्ञान. आप भी आगे बढिए और गुरु त्रिमूर्ति से ज्ञान के इन अद्भुत सूत्रों को प्राप्त कर जीवन को धन्य बनाये.
आपका ही
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In Sadgurudev’s divine presence I always found wonders by the different ways of attempting sadhna’s and the divine knowledge, where any type of query arises in my mind the moment Sadgurudev answered it before. And surprisingly it was not just a single time infact have thousands of examples of such happenings. Neverthless I was very much eager for knowing the Muslim tantric wisdom. Oh yaaa my dad taught me various Amal (experiments). But whenever I tried to enhance my knowledge I was always found my self disappointed.Becuase every next person was bit reluctant to share this knowledge and then I used to count them in suspicious manner whether they had that knowledge or just predicting. Suddenly on one fine day I got one letter which was sent by Sadgurdev only and I was promptly called for Delhi. After travelling a tough journey of two days when reached over their, I was told that sadgurudev will meet me in evening.In evening after meeting everyone when called me then just hugged his feet… stand up... Where is ur diary hnnnn?
Ohh that’s in my Bag!!!
Go and bring it.
I woke up and was searching diary in my bag.But it should ve been in my bag then only I may found it naa..
Son, U didn’t brought ur diary, so why r u wasting time in searching it. Come here I already bought a dairy for u before only.
While taking that dairy from his hand I was think that he takes care of a single moment.
He said - U r searching for the processes of Muslim Tantra na… Its very extensive process of Tantras who’s succeeding rate is bit high and tough.
But why? – I felt with curiosity.
Son, Every action have reaction, like parallel action has opposite reaction too but the oppsosite is not that easy to digest. A divine worship at mosque in 5 evening intervals with pious mind is always leaves a terrific impact which controls the Agni Tatv completely.
I said – how is it possible?
Look the base of all such powers is directly related with fire as they produced from fire only like Jinn, Jinnnat etc… They themselves are Ibaadatgar. Thousands of Haajraat processes can convert the impossible into possible which are really beyond of our imaginations
But the remembering thing is while doing such process the Sadhak need to maintain the cleanliness vey much. He has to maintain the chastity, complete devotion, concentration towards god and have to attempt with full courage.
He told me about the muslim process of tantra from 7 pm to 11 pm, this schedule went for six days consecutively. Afterwards also I learnt various mislim tantras which are mentioned in Paak-e-Kuran-e- Majeed. Which are very rare and the Paak Ayaats process is also given. The wisdom of such wonderful muslim tantra is embossed on my mind and I thank him millions of times for it.
But following those rules n regulations in general sense is bit impossible.But it doesn’t mean that I ll not share with u all. In Tantra Kaumudi every single part I am going to disclose one by one process and along with the rules and regulation too…And how to achieve success in this. So not to worry…Oh I just forgot to tell u one thing, before when I had my Diksha in 1988, sadgurudev had conducted Muslim Haajraat shivir ans hundreds of sadhak got success in that shivir.Thier are thounsands of Sabar mantras in Muslim Tantras if we use it in desired manner so we can achieve our every single wish. Whatever thousands of processes which had been given by Sadgurudev and are personally experienced by me, from it I am going to give u two processes by which u can personally address their potential, aggression and free from misfortune.And just remember one thing if u use this process for any bad or wrong kind of work then it is unuseful as nothing will happen apart from failure.If u get Vividh Tantra Sidhhi Diksha form gurudev then it will be wonderful.Whatever processes I mentioning here are very easy to understand and no hard rules are their success.But they are simply unbeatable.Whereas for attempting those process the stars are counted are as like the other Tantrik procedures have the kaal ganana in them.But that’s a different matter which will discuss further via magazine. All are personally verdict so do by urself and u urself see the magic.
Rules – The Asan which is used by urself must be used be eclusively used by u only.
Please do take special care of purity.
Do use of Lohbaan Dhup.
Process must be done on a same single place. It should not be happened that today this place is used and tomoro the other place for mantra chanting.So keep it one.
Last but not least - use this process for pure, good and right work and attempt it with bonafide intentions.
1. If in office ur boss or ur colleges are creating problems for u then just do this process as told – Start this process on Friday morning around 5 o’clock with purity and chant the below mantra for 500 times for 3 consecutive days facing in west directionand onforth day read it for 1000 times and write it down on ur palm.on same when u ll be meeting just before that again read it for 15 times and see the wonders.

“Ya Rehmana kulli sha yin daraahimahu”

2.If ur love is annoyed from u or became attracted towards any other person or u feel some thing missing between u people or becoming ur relationship weak day by day then do this process – Read this Ayaat for 1100 times for 3 consecutive days exactly in same above manner. And write it down on bone china plate for 7 times and then wash it by the water and give that same water to ur partner and make him/her drink. Due to this ur relationship would become more stronger that before.If fail to make him drink then put it in any juice, tea or food item and serve him.

“Innmaa tunjiru manitt-va-aajjik ra va khashi yarrmahaanaa bil gaibee fabshshirahu bimag firtin va ajrin kareem”

So do it and experience the results personally.I always appreciate my fortune and feels proud that Sadgurudev adored me and made me his disciple and enriched me with great knowledge.So u also step forward and take wisdom from Guru Trimurti and make ur life full of prosper and happiness.

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7 comments:

TANTRA said...

hello brothers
in one of your blogs you have written that all ten mahavidyas are considered in three mahavidyas. kindly explain which r three basic mahavidayas and what mahavidyas are considered in them.
thanks

with regards
dr. rahul

TANTRA said...

you brothers can reply to our queries via comments.
that would be easy and quick.

regards

dr rahul

Nikhil said...

bhai bahut jaldi main is vishay par blog me article de raha hun.

Anu said...

Dear Friend,
there are three main division in Shakti sadhana like
Sharsthi kram ,
sthiti kram ,
sanhaar kram.
this shthiti kram is consider in shrasthi kram. so now, only two main division sharthi ,and sanhaar kram. the three kram or kul is kali, tara, shodshi(shree)kul.
As ma tara and kali are consider one.no difference is in between them. so at last two kul or kram is available..
kali kul and
shree(shodashi) kul.
for example "ma chhinmasta" is consider in tara kul and tara is consider in kali kul, so ma chhinmasta is in kali kul. like this all ten form of divine mother divided in two kram or kul.
in future, if possible then we will discuss in detail..
with smile
Anu

gurubhai said...

pranam plz sar muze ish mantra kisari diel kahe plz

BABLOO SHARMA said...

Bhai jai gurudev.I recieved e mag 3rd issue.thanks a lot for sending the devine mag.I've no words about its sharpness and importance.Afterall its the blessings of our beloved sadgurudev nikhil jee.

baba said...

jay ho juru maharaj ki,bhai maine abhi is blog ko join kiya hai,aapse anurodh hai ki aap humko bhi guru ji ki krapa ka kuchh ansh humko bhi bhejen. dhanyad!