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Monday, December 5, 2011

AAVAHAN-24 (VAAYU NIYAMAN SE NAAD SIDDHI)


शरीर के मुख्य १० द्वार है जहा से वायु निकल जाती है. यु तो सूक्ष्म रूप से हमारे शरीर के सभी रोम छिद्र मे से वायु निकल सकती है. परन्तु मुख्य रूप से १० द्वार से यह निकल जाती है. वे द्वार है २ कान, २ आँख, २ नथुन, मुख, गुदा, लिंग तथा नाभि. योग मार्ग मे तथा योग तंत्र मे प्राणायाम को अत्यधिक महत्व दिया गया है. प्राणायाम का एक सामान्य अर्थ प्राणों को रोकना होता है. अर्थात प्राणों पर आधिपत्य स्थापित करना. और योग तंत्र मे वायु को भी प्राण कहा गया है. एक सामान्य योग सिद्धांत से साँसों की गति जितनी रोकी जा सकती है, उतनी ही आयु का विकास किया जा सकता है. नाभि केंद्र स्थान है जहा पर नाडियो का गुच्छा होता है, यु यह स्थान मणिपुर चक्र का भी है. जठराग्नि भी यही पर स्थिर है. पुरे शरीर मे अग्नि इस स्थान से उत्तपन की जा सकती है. अग्नि अर्थात ऊष्मा. योग सिद्धांत मे वीर्य अर्थात जिव तत्व को बचाव कर उसे अपने घन स्वरुप से प्रवाहि तथा उसके बाद उसे वायु स्वरुप मे परावर्तित करने का विधान है. वायु को जब ऊष्मा मिलती है तो वह ऊपर उठता है. यु इस जिव द्रव्य को वायुवान बना कर उसे पुरे शरीर मे प्रसारित किया जा सकता है. यह कार्य मणिपुर चक्र के माध्यम से संभव है.
नाद से सबंधित दूसरी प्रक्रिया के पहले चरण मे गुंजरण की प्रक्रिया मे ७ द्वारों को बंद किया जाता है. अब आगे की प्रक्रिया मे हमें बाकी बचे २ और द्वारों को बंद करना है. जो की गुदा तथा लिंग है. इसके लिए साधक अपने दाहिने पैर की एडी पर गुदा द्वार को स्थिर कर के बैठ जाए तथा बाए पैर की एडी से अपने लिंग स्थान के द्वार को दबा दे. अब शरीर मे जो भी उर्जा होगी वह नाभि द्वार से बाहर  जाने की कोशिश करेगी लेकिन अग्नि कुंड होने के कारण वह सहज संभव नहीं है. इस लिए वह वायु उर्जा मणिपुर चक्र के आस पास ही घुमती रहती है. यु मणिपुर चक्र अत्यधिक तीव्रता से गतिशील हो जाता है. सदगुरुदेव ने एक बार बताया था की अगर साधक यह प्रक्रिया बिना गुंजरण तोड़े २० मिनिट तक कर लेता है तो वह शून्य मे आसान लगा सकता है. क्यों की जो भी वायु होगी वह गुंजरण के माध्यम से मणिपुर चक्र पर केंद्रित होगी और अग्नि कुंड के कारण वह वायु के कण धीरे धीरे फैलने लगते है. इस प्रकार से वह वायु शरीर से बाहर  निकलने का प्रयत्न करेगी लेकिन जब शरीर के द्वार बंद रहने से यह संभव नहीं होता तो वह ऊपर दिशा मे गति करने लगती है. इस लिए जब वह ऊपर उठेगी तब अपने साथ ही साथ पुरे शरीर को भी उठा लेती है. यु यह क्रिया पेचीदा है तथा साधक मे धैर्य होना ज़रुरी है. पढ़ने मे यह जितनी आसान लगती है, उससे कई कई गुना यह श्रम साध्य है.
यहाँ हम नाद के सबंध मे चर्चा कर रहे है. जब व्यक्ति इस प्रक्रिया को अपनाता है तब उसकी अन्तश्चेतना जागृत हो जाती है. तथा गुंजरण प्रक्रिया की समाप्ति पर उसकी धारणा स्थिति बन जाती है, इस स्थिति मे वह अपने शरीर की गहेरी मे उतर सकता है तथा अनहद नाद को सुनने मे समर्थ हो जाता है.
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There are 10 doors of body from which air can come out of the body. As minor way, from our every minor halls of the body air can go out. But in majority it goes out from 10 main doors. They are 2 ears, 2 eyes, 2 nostrils, mouth, anus, lingam and navel. There is a big importance of pranayam in yoga and yoga tantra. One of the basic meaning of pranayam is to stop the pran in other words to control the pran. And in yog tantra, air is also called as Pran. As one of the yoga concept, for the time a breath could be stopped, the same development of the body life could be developed. Naabhi is central part where is collective veins are situated, this is also place for Manipur chakra. Jatharagni is also situated here. In whole body fire could be generated from this place. Fire here means heat. In yoga concepts the process is about to save the virya or jiv dravya and from solid to liquid and finally to convert it in gaseous form.  When air gets heat, it travels upwards. This way this jiv dravya is transformed in air form and it is spread in whole body. This is possible through Manipur chakra.

In the first stage of the second process of the naad in gunjaran process 7 holes/doors are allowed to be closed. Now in further process, we are supposed to close more two doors also which are anus and sexual organ. For this sadhak should establish anus on the foot hill of the left leg and with right leg’s foot hill one should press the opening of the lingam. Now all the energy will try to move out from the Naabhi (navel) but because of the agni kunda it is not easily possible. Thus, all that energy in the form of air will roam across Manipur chakra. This way Manipur chakra will quickly get activation. Sadgurudev one told that if sadhak does this process for 20 minutes without breaking the Gunjaran then he can have aasan in the air (levitation). Because what so ever air will be, it will be gathered nearby Manipur chakra and because of the agni kunda the air stars being spread. This way the air will try to come out of the body but because the doors or holes of the body are closed, the air will stars travelling upwards. Because of this situation, when it will go up, it will also lift the whole body. This way, it is very complicated process and sadhak must have patience. It seems very easy in reading but in actual a lot more time hard work seeking.

Here we are discussion in relation with Naad. When one gets involved in this process that results in awaken of antschetna or inner consciousness. And at the end of the Gunjaran process, Dharana stage could be gain. In this stage one can enter into inner self and becomes able to hear the ‘Anahad Naad’.

  
   

                                                                                                ****NPRU****   

2 comments:

Neeraj Kumar said...

Jaigurudev Bhai sahab maine apne vidhyathi jeevan mein naad shravan kiya tha aur mujhe kabhi ghante ke kabhi sankh ki dhvani aur kabhi chandan ki sugandh aati thi bhai sahab chandan ki sugandh to abhi bhi kabhi kabhi aati rehti hai aur kisi bhi samay aa jati hai kabhi travel karte hue kabhi bhethe hue kabhi bus mein jatein hue to kabhi soch mein jate hue bhi kripa karke margdarshan karein... Neeraj Kumar delhi

Anu said...

neeraj bhai , yah to bahut achchha aapka anubhav hain ,aap ko ab jo prakiya aavahan series me di gayi hain uska bhi abyyas kar age badhe aur jo bhi avshyak jankari aap chahenge aapko il jayegi . par sath hi sath guru mantra ka jap bhi badha de yah aur bhi anukulta den wala hoga .

bhai gourav ji ,ham ne aneko baar parad ke kuchh sanskar ka ullekh diya hain , aur is sambandh me aage bhi jo sambhav hoga aapko avgat karayenge hi .
smile
Anu