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Tuesday, December 21, 2010

TEEVRA VASHIKARAN SIDDH KLEEM SADHNA



जब हम संगीत का अभ्यास प्रारंभ करते हैं तो उसकी शुरुआत ही सप्तको से मतलब स,रे,ग,......नी से होती है, है ना. भला क्यूँ, क्यूंकि बगैर इन स्वरों को समझे आप संगीत या गायन में निपुणता पा ही नहीं सकते. सम्पूर्ण संगीत का आधार यही ७ सप्तक हैं. ठीक इसी प्रकार जब हम साधनाओं का प्रारंभ करते हैं तो उसकी सिद्धि का मूल ही होता है मन्त्रों का अर्थ समझना. इसका अर्थ ये कदापि नहीं है की हम भावार्थ को ही जपने लग जाये. मन्त्र तो जिस भाषा में हो उसी भाषा में उनका जप करना चाहिए परन्तु यथा संभव उसमे प्रयुक्त बीजों के अर्थ हमें ज्ञात होना चाहिए. तभी तो हम समझ पाएंगे की कौन सा शब्द या बीजमन्त्र उस मन्त्र विशेष को उर्जा और गति प्रदान कर रहा है. जैसे ‘सा’ को समझे बगैर आप ‘रे’ को नहीं समझ सकते, ठीक उसी प्रकार प्रत्येक वर्ण की अपनी शक्ति होती है और होता है उसका अपना ध्यान, विनियोग, आकृति और मंत्र भी, ये लेख इस विषय पर केंद्रित नहीं है क्यूंकि ये सब गूढता सूर्य विज्ञानं या गोपनीय आगम तंत्र और रस सिद्धि के लिए होती है पर फिर भी बात वशीकरण और लक्ष्मी साधना की है तो मेरा दायित्व बनता है की मैं उसकी पृष्ठभूमि से आपको अवगत करा दूँ. वर्णमाला के प्रत्येक अक्षर का उच्चारण करने पर शरीर पर एक विशेष प्रभाव पडता है, जैसे ‘र’ वर्ण पर अनुस्वार अर्थात बिंदी लगा कर यदि १००० बार ‘रं’ बीज का उच्चारण किया जाये तो शरीर की उष्णता १ डिग्री तक बढ़ जाती है. ऐं बीज का उच्चारण मष्तिष्क को कुशाग्र करता है. ‘खं’ बीज का जप लीवर की समस्याओं को दूर कर देता है, इस प्रकार प्रत्येक बीज का अपना विशेष प्रभाव होता है, जिसके बारे में आगे कभी विस्तार से चर्चा करेंगे.ठीक इसी प्रकार ‘क्लीं’ बीज का अपना एक व्यापक प्रभाव है,ये काम बीज है या ये कहूँ की काम राज बीज है जो की सभी नकारात्मक शक्तियों या विषों का विनाश कर इन्द्र के सामान वैभव देता हुआ प्रबल आकर्षण प्रदान करता है. यदि व्यक्ति इस साधना को किसी भी अन्य लक्ष्मी या आकर्षण, मोहन, वशीकरण साधना के पहले संपन्न कर लेता है तो कठिन से कठिन लक्ष्मी और वशीकरण साधनाएं सहज ही उसे सिद्ध हो जाती हैं. क्यूंकि ये प्रबल आकर्षण बीज है इसलिए इसके प्रभाव से लक्ष्मी भी बाध्य हो जाती हैं साधक का वरण करने के लिए.मैं एक और बात इस बीजमंत्र के बारे में बता दूँ की तंत्र मार्ग में इस बीज से सम्बंधित ऐसी भी विधियाँ है की यदि व्यक्ति मात्र इस बीज के प्रारंभ में किसी अक्षर विशेष का योग कर इस मन्त्र को यदि ५ मिनट भी जप कर किसी को देख या स्पर्श कर ले तो जिस पर भी दृष्टि या स्पर्श किया हो वो या वह के सभी उपस्थित व्यक्ति अत्यधिक उत्तेजित हो जाते हैं. पर वो एक अलग तरीका है हमें तो तीव्र परन्तु सौम्य प्रयोग चाहिए हाँ ये अलग बात है की उसके लिए भी नीचे वर्णित विधि का ही प्रयोग पहले सिद्धि के लिए किया जाता है.मुझे याद है की सदगुरुदेव ने सन  १९९० के आस पास पत्रिका में ‘क्लीं’ बीज पर आधारित प्रयोग दिए थे जिनके बहुत सकारात्मक परिणाम आये हैं. एक महत्वपूर्ण बात ये भी बता दूँ की वशीकरण साधनाओ को संपन्न करने वाले साधकों को त्राटक का अभ्यास भी करना चाहिए. ये त्राटक उपरोक्त काम बीज पर किया जा सकता है या गुरुधाम से विशेष सम्मोहन वशीकरण यन्त्र प्राप्त करके भी किया जा सकता है.
   इस मंत्र की सिद्धि के लिए सफ़ेद कागज या भोजपत्र पर त्रिगंध से बने हुए मैथुन चक्र के मध्य में कम बीज मन्त्र को कुमकुम से बना लेना चाहिए.तत्पश्चात कुमकुम , रक्त पुष्प, नैवेद्य, रक्त वर्णीय बत्ती से युक्त घृत का दीप जला हुआ हो और गुलाब, मोगरा, चमेली आदि की महक से युक्त धूपबत्ती का प्रयोग साधना काल में करना चाहिए.रात्री या सुबह का समय इसके लिए उपयुक्त है, पश्चिम या दक्षिण दिशा का प्रयोग किया जा सकता है, लाल वस्त्र व आसन का प्रयोग करना चाहिए.गुरु पूजन और यन्त्र पूजन के पश्चात उस यंत्र का ध्यान अपने भृकुटी मध्य अर्थात त्रिकूट पर करना चाहिए और ध्यान में भी इस मैथुन चक्र के मध्य निर्मित कामबीज लाल ही होना चाहिए. ये क्रिया दुष्कर प्रतीत होती है लेकिन जब आप ये क्रिया जो क्रम यहाँ देय गया है उसी अनुसार यदि आप करते हैं तो जरा भी समस्या नहीं आएगी . सिद्धासन या सुखासन का प्रयोग करना चाहिए और अन्तः त्राटक (जो की निश्चय ही संभव हो जायेगा) का प्रयोग करके १ घंटे तक ११ दिन तक जप करे माला मूंगे की हो जप की गिनती नहीं बल्कि समय को पूरा करे. धीरे धीरे ये मंत्र उद्दीप और तेज युक्त,प्रकाशित होकर आपके ध्यान में आने लग जायेगा जो की आपकी सफलता का प्रमाण है. ये प्रयोग कितना महत्वपूर्ण है ये तो आप तभी समझ पाएंगे जब बगैर इस प्रयोग को करे किसी भी अन्य वशीकरण या लक्ष्मी साधना को संपन्न करे और फिर उसी प्रयोग को इस कामबीज की साधना के बाद करे. प्रभाव देख कर आप खुद दांतों तले अंगुली दबा लेंगे तो फिर देर किस बात की, खुद परख कर देखिये ना.


TEEVRA VASHIKARAN SIDDH KLEEM SADHNA
When we begin to learn music we start with basic notes which are SA, RE, GA….NI, because without these notes we cannot learn it. These seven notes are the basic of music. Like music when we start SADHNA our first duty is to learn the meanings of MANTRAS. But this does not mean that we start enchanting (japna ya jaap karna) the meanings. MANTRA should enchant in the language in which they are written but we should know word to word meaning. It helps us to learn that which Word or BEEJ- Mantra is giving power and energy to that basic mantra. As you cannot understand music note RE until you don’t understand SA just like that each VARN has its power and its own DHYAAN, VINIYOG, AAKRITI and MANTRA also. This essay is not about this topic because such deep knowledge is important for SURYA VIGYAAN, GOPNIYE AAGAM TANTRA and RAS SIDDHI but as matter is about VASHIKARAN and LAKSHMI SAADHNAA so it’s my duty to give basic information about it. When we pronounce any word from VARANMALA than it release special effect on our body for example if “R” word is spoken out with anuswaar “means “BINDI” for thousand times as RAM( रं ) it increase body’s warmness( उषणता) up to one degree. Pronunciation of Aim (ऐं) sound sharpens the mind and KHAM (खं) sound controls lever problems. So every word has its special effect about which we will discuss some other day. Just as KLEEM BEEJ has its global effect. This is KAAM BEEJ or we can say KAAM RAAJ BEEJ which makes end every type of negative powers and gives most powerful attractiveness (aakershan) and luxuries (vaibhav) as INDRA DEV. If a person completes this sadhnaa before any type of LAKSHMI or AAKERSHAN, MOHAN, WASHIKARAN sadhnaa then he/she can sidh toughest LAKSHMI or WASHIKARAN sadhnaa easily. Because it is powerful AAKERSHAN SADHNAA so it compels GODDESS LAKSHMI to bless the saadhak with her blessings. In tantra one more thing about this BEEJ MANTRA is that at the starting of this mantra if a person gets sidh or yog of an aksher vishesh and then enchant this mantra for five minutes. After this to which he just look or touch will increase sexual excitement (उत्तेजित) in them. This thing can happen more than one person. But that is other system here we need a soft but fast idea. This is different matter that below given system can be used for this sadhnaa also. I remember in 1990 SADGURUDEV gave paryogs based on KLEEM BEEJ in magazine which gave positive results. One more important thing is that a saadhak who sidh WASHIKARAN SAADHNA also needs to practice TRAATK. This TRAATK can practice on KAAM BEEJ or on VISHESH SAMMOHAN VASHIKARAN YANTRA which saadhak can have from GURUDHAAM.
To sidh this mantra, take a white paper or bhojpatra which have MAITHUN CHAKRA make from TRIGANDH and in the centre of this CHAKRA draw BEEJ MANTRA with KUMKUM. Then light a deep (earthen lamp) with the things- KUMKUM, RAKT PUSHP, NAIVODYA, and RAKT VARNIYE BATTI. It is must to use AGRBATTI having fragrance (khushbu) of GULAAB, MOGRA, and CHAMELI during sadhnaa kaal. To sidh this sadhnaa saadhak should use red clothes or red aasn to sit. Morning and night hours are good for this sadhnaa and west or south directions can use for this sadhnaa. After GURU POOJAN and YANTRA POOJAN pay attention (dhyaan) on that yantra at TRIKUT (center of forehead) and during dhyaan KAAM BEEJ at the center of MAITHUN CHAKRA must be red. If you do this sadhnaa as I said here then there will be no problem otherwise some dangerous results can happen. Always use SIDDHASAN or SUKHASAN and finally do TRAATAK (which decidedly saadhak can do). Do this sadhnaa daily ONE HOUR for 11 days and if you are using MOONGE KI MAALA then do not count jaap but complete your one hour. Slowly- slowly this mantra will come into your mind with its great light and power which is the sigh of your success. You can understand it’s important only then when you do some LAKSHMI or VASHIKARAN sadhnaa without it and again do that sadhnaa with the help of this KAAM BEEJ MANTRA. After seeing its effect you get shocked so what are you waiting for? Go ahead and see the difference.           

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****ARIF KHAN****

6 comments:

t.p. said...

aarif bhai, aap ne yahan maithun chakra(yantra) ka photo/design nahi diya hai uske bina sadhana kaise poori hogi????

jai gurudev

Guru said...

What is Maithun Chakra ? where i can get it. Is it same as photo posted in your post ??

Pls reply

gurubhai said...

જય ગુરુદેવ
હેલો સર પ્લીઝ હેલ્પ મી મુઝે કલીમ બીજ મંત્ર કે બારે મેં જનના હે
મેં એ સાધના કરના ચાહતા હું કિશ દિન સે કરું ઓર મેને ગુરુદીક્ષ નહિ લીહે ઓર મેરે પાસસ મૂંગા કી માળા ભી નહિ હે તો મેં ક્યાં કરું પ્લ્ઝ હેલ્પ આપ મુઝે સબસે પાવર ફુલ્લ વશીકરણ મંત્ર કહે પ્લ્ઝ



મેં આપ ક આભારી રહુગા

ધન્યવાદ

MUKESH SAXENA said...

bahut achchhi sadhna hai,arif bhaiyya ,hum beej mantron aur unke alag alag vishisht prayogon ke baare mein vistaar se jaanna chahte hain,iske liye aap to hamein practical gyaan de hi rahe hain,lekin aisa kya koi granth hai ,jismein beej mantron ke vistrat aur vishisht ki jaankaari mil sake,plz. bhaiyya ,tell me.....

Tantrik baba said...

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vashikaran

prav singh said...
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