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Saturday, February 25, 2012

अघोरेश्वर प्रत्यक्षीकरण साबर प्रयोग (AGHORESHWAR PRATYAKSHIKARAN SAABAR PRAYOG)


साबर साधनाओ के अद्बुध करिश्मो के बारे मे तो सब परिचित ही है. अघोर मार्ग का उद्धार करने वाले भगवान श्री दत्तात्रेय और साबर मंत्रो का सबंध अपने आप मे अटूट है. श्री दत्तभगवान की प्रेरणा तथा आशीर्वचन से नाथ योगियो द्वारा साबर मंत्रो का प्रचार प्रसार हुआ था. इस प्रकार अघोर साधनाओ मे भी साबर मंत्रो का प्रयोग प्रचुरमात्रा मे होने लगा था. अघोरी के लिए भगवान अघोरेश्वर मुख्य देव है, जिनके मुख से समस्त तन्त्रो का सार निकलता रहता है. जो शिवतत्व को अपने अंदर स्थापित कर सदा शिव आनंद से युक्त हो कर अपने आप मे ही लिन रहता है वही अघोरी है. सिद्ध अघोरी की यही पहचान है जो अघोरेश्वर की तरह ही निर्लिप्त रहता है समस्त विकारों भेदभाव तथा पाशो के बंदन से छूट गया है. ज़रुरी नहीं की वह स्मशान भष्म से युक्त हो, नग्न रहे या घृणा पर विजय होने का प्रदर्शन करे. जो इन सब से ऊपर उठ चूका हो, जिसके लिए ये भेद ही न हो, वही तो है अघोरी. किसी समय मे इनका घर मे आना, स्वयं शिव के आने जितना सौभाग्यदायक माना जाता था लेकिन कुछ स्वार्थपरस्तो ने तो कुछ हमारी अवलेहना भ्रम और कुतर्क ने इस मार्ग का ग्रास कर उसे भय का रूप दे दिया. खेर, अघोरी के लिए यह ज़रुरी है की वह अघोरेश्वर के चिंतन मे लिन रहे. भगवान अघोरेश्वर स्मशान मे बिराजमान है, सर्पो से लिप्त वह स्मशान भस्म को धारण किये हुए है. जिनके चेहरे पर आनंद ही है तथा और कोई भाव हे ही नहीं. ऐसे अघोरेश्वर के श्रेष्ठ रूप का ध्यान करना साधक के लिए उत्तम है. प्रस्तुत साधना भगवान अघोरेश्वर के इसी रूप के दर्शन प्राप्त करने की साधना है. वस्तुतः यह अपने आप मे अत्यधिक महत्वपूर्ण साधना है जिसको करने के बाद साधक का चित हमेशा निर्मल रहता है, भेद से मुक्ति मिलती है तथा सर्वसर्वात्मक भाव का उसमे उदय होता है. साथ ही साथ अघोरेश्वर के वरदान से साधक अष्टपाशो से मुक्त होने लगता है. इस प्रकार की भावभूमि प्राप्त होते साधक को विविध प्रकार की साधनाओ मे सफलता प्राप्त होने लगती है. वैसे भी अघोरी के लिए यह एक अत्यधिक महत्वपूर्ण क्रम है की साधनामार्ग के इष्ट के दर्शन कर उनके आशीर्वाद प्राप्त करना.
साधक को चाहिए की वह इस साधना को स्मशान मे ही सम्प्पन करे. रात्री मे ११:३० के बाद इस साधना को शुरू करना चाहिए. साधना को सोमवार से शुरू करे. साधक को स्नान कर अघोर गुरु पूजन सम्प्पन कर विशेष शाबर मन्त्र का ५१ माला जाप करना चाहिए. मंत्र जाप के लिए साधक को रुद्राक्ष माला का प्रयोग करना चाहिए. आसान तथा वस्त्र काले हो. आसान के निचे चिता भष्म को बिछा देना चाहिए. इस क्रम को ११ दिन तक करने पर विविध अनुभूतिया होने लगती है, साधक जब इसे २१ दिन कर लेता है तब उसे भगवान अघोरेश्वर के दर्शन होते है.
 अघोर अघोर प्रत्यक्ष वाचा गुरु की अघोरनाथ दर्शय दर्शय आण सिद्धनाथ की
साधक को भयभीत ना हो कर वीर भाव से यह साधना करनी चाहिए.
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Everyone knows about miracle effects of sabar sadhana. There is a strong relation between up lifter of aghora way shri dattatreya and sabar mantra. With blessings and order of bhagwan datt, Nathyogi Disseminated sabar mantras.  This way, in aghor sadhana also use of sabar mantra started widely. For aghori, god Aghoreshwara is major diety from whose holy mouth abstract of all tantras keeps on coming. The one who have established Shivtatva within and being merged with Shiva joy remain lost on one’s internal self is true Aghori. Identification of true Aghori is the one who stays detached mind from all the disorders & discriminations and those who have left all the boundations. Not require that he remains with smashana ash, naked or exhibits his victory over disgusts. One who has become above all these, the one who do not have these differentiations, that one is Aghori.  At some era, it was counted a great boon like visiting Shiva, if aghori visit the home but this great way became defected and re presenter of fear by few selfish and somewhat our ignorance, fallacy and sophism. Anyways, for aghori it is essential to remain in contemplation of Aghoreshwara. God Aghoreshwar is seated in Smashana, wearing smashana bhasma he is accompanied with snakes. The one who have only joy on the face and no more expression. Such meditation of aghoreshwara is boon full for sadhak. The presented sadhana is sadhana to have glimpses of the same meditated aghoreshwar. Literally this sadhana is very important sadhana when accomplished will give internal purity of the soul, get relief from differentiations and gets humour development in Sarvasarvaatmak thinking. With that blessing of Aghoreshwar is gain to get relief from eight basic loop traps or Astapasha. Reaching such mentality level, sadhak will start getting success in various sadhana. With that this is an important order for aghori to get blessings through glimpses of Isht Aghoreshwara in the long way of sadhana.
Sadhak should do this sadhana in Smashana only (cremation ground). One should start this sadhana after 11:30 in night. Sadhana could be started from Monday. Sadhak should take bath and complete Aghor Guru Poojan, after that one should chant 51 round of special sabar mantra. For mantra chanting one should use rudraksha rosary. Aasana and cloths should be black in colour. One should spread ash of cremation under aasana. If this process in continues for 11 days, one will start having divine experiences, when sadhak completes 21 days of the process at that time god Aghoreshwar will give glimpse to sadhak.
Om Aghor Aghor Pratyaksh Vaachaa Guru Ki Aghoranaath Darshay Darshay Aan Siddhanaath ki
Sadhak should not get scare and with courage one should proceed in sadhana.
   

                                                                                               
 ****NPRU****   
                                                           
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1 comment:

montuprit said...

is sadhna me vastara silai vale ,ya koi bhi black chalege , naived me kya rakhna hoga , dipak jalana he ya nahi , bethne ki disha ?