There was an error in this gadget

Wednesday, February 29, 2012

सिद्धकाली क्रिया चेतना प्रयोग (SIDDHKALI KRIYA CHETNA PRAYOG)


 ज्ञान इच्छा और क्रिया शक्तियो के क्रम मे हमने पहले मातंगी प्रयोग से ज्ञान चेतना के विकास तथा इच्छा शक्ति के विकास के लिए कमला प्रयोग के बारे मे जाना. इससे भी आगे चेतन ज्ञान का स्तर ऊपर लाने के लिए ज्ञान शक्ति के लिए ज्ञानमयी भुवनेश्वरी साधना का क्रम दिया. चेतन ज्ञान से इच्छाशक्ति का विकास तीव्र होता है तथा इसके बाद ज्ञानमयी साधना करने पर निहित ज्ञान को तुरंत इच्छा मे परावर्तित किया जा सकता है. पहले ही ज्ञानमयी साधना क्रम अपनाने पर इच्छाशक्ति की साधना तथा शक्ति संचार मे साधक का समय ना जाए इस लिए यह क्रम इसी प्रकार से किया जाता है. जब ज्ञान से इच्छा तथा इच्छा से क्रिया शक्ति का एक संचार बनता है तब नूतन ज्ञान की प्राप्ति होती है. यह तथ्य को समजना नितांत आवश्यक है क्यों की यह अपना साधना स्तर ऊपर उठाने की मूल पध्धति है. अगर व्यक्ति एक ज्ञान को प्राप्त कर ले, उसके लिए निश्चित स्तर पर इच्छा भी रखे लेकिन कभी उसकी प्रक्रिया हो ही नहीं तो? परिणाम शून्य. एक व्यक्ति को भूख लगती है, उसे शरीर मे भोजन की अतृप्ति का ज्ञान हुआ उसे भोजन की इच्छा हुई, अत्यधिक वेग से यह इच्छा तीव्र हुई, लेकिन अगर वह भोजन करने की क्रिया नहीं करेगा तब ज्ञान व् इच्छा व्यर्थ है. और इसी क्रिया के माध्यम से जो भोजन तृप्ति का ज्ञान होने वाला था वह नहीं होता. और वह ज्ञान से वंचित हो, उसी स्तर पर रहता है. हमारे जीवन मे कई प्रकार की इच्छाए हमें होती रहती है. लेकिन उसकी पूर्ती की क्रिया हम नहीं करते है. या फिर किन्ही कारणों से नहीं कर पाते है. इन सब के मूल मे क्रिया शक्ति की अचेतना है. अगर किसी प्रकार से क्रिया शक्ति को चेतना दी जाए तो हम उस इच्छा के सबंध मे क्रिया करने के लिए पूर्ण मनोबल की प्राप्ति होती है. साथ ही साथ प्रक्रिया मे सफलता की संभावना भी बढ़ जाती है. यह हमारे भौतिक तथा आध्यात्मिक दोनों पक्षों के लिए अत्यधिक ज़रुरी है की हम हमारी इच्छा शक्ति के सबंध मे क्रिया शक्ति को भी स्थान दे, जिससे की नूतन ज्ञान को आत्मसार कर सके. कई बार ये भी देखा गया है की साधक को पूर्ण ज्ञान होता है, उसे साधना करने की तीव्र इच्छा भी होती है लेकिन साधना की प्रक्रिया नहीं कर पाते. इन सब के समाधान मे सिद्धकाली क्रिया चेतना प्रयोग है.

महाकाली के सभी रूप अपने आप मे निराले है. इसी महाविद्या के एक रूप है सिद्धकाली. सिद्धकाली क्रियाशक्ति की चेतना का विकास करती है. इस प्रयोग के माध्यम से साधक को क्रिया के लिए स्पष्ट भावभूमि तथा क्रिया के लिए योग्य वातावरण की प्राप्ति भी होती है. इस प्रयोग को करने पर साधक की ज्ञान तथा इच्छा शक्ति के पूरक के रूप मे क्रियाशक्ति भी जागृत होती है तथा नूतन ज्ञान प्राप्त कर साधना क्षेत्र मे साधक अपना स्तर ऊपर उठाता रहता है.
इस साधना को साधक रविवार रात्री मे १० बजे के बाद से करे. अपने सामने देवी सिद्धकाली से सबंधित यन्त्र चित्र रखे तो उत्तम है. साधक का मुख उत्तर की तरफ रहे. वस्त्र और आसान आदि लाल या सफ़ेद रहे. देवी का सामान्य पूजन कर सदगुरुदेव तथा देवी से क्रियाशक्ति के जागरण तथा साधना मे सफलता के लिए प्रार्थना करे. इसके बाद साधक निम्न मंत्र की २१ माला जाप रुद्राक्षमाला से या मूंगा माला से करे.
 क्रीं सिद्धकालिके क्रियासिद्धिं क्रीं नमः
 साधक यह प्रयोग अगले रविवार तक (कुल ८ दिन) करे. साधना समाप्ती पर माला को किसी देवी मंदिर मे चडा दे. इस प्रयोग मे साधना काल मे सिरदर्द तथा बदनदर्द होना या पसीना आना स्वाभाविक है अतः साधक विचलित ना हो.
============================================
In the sequence of the gyana ichchha and kriya powers we first understood about development of knowledge development through Maatangi process followed by kamala prayog for ichchha shakti development. Further the process related to gyanmayi bhuvaneshwari sadhana was given to develop and move ahead conscious level of the gyan shakti. With a conscious knowledge, development of the ichchha power or will power would be quick and after that by accomplishing gyanmayi sadhana, it becomes easy to transform knowledge power into the will power. In starting only, if gyanmayi sadhana is done then that will result in a big time duration for power generation and will generation to do the sadhana that is the reason why this sequence has to be done as given. When the sequence becomes from knowledge to will and from will to process in that condition new knowledge could be gained. This is very essential to understand this as it is the base procedure to uplift the sadhana level. If one have the knowledge, for the same the one have desired will too but if there is no process in that regard; then? No result. If one feels hunger, one has knowledge of hunger in the body, this went to extreme will but if one does not do the process to have food then that knowledge and will has no mean. And with this process the knowledge of the satisfaction which was about to be gained could not be received. And the person remains on the same level of knowledge. We have many will and desires in our life. But we become not able to complete those wishes. Or with many reasons we do not fulfil it. In the root of all these, unconsciousness of the kriya shakti or the process power is responsible. If with any process consciousness to the process power is given then that will result in we gain mental strength to do the process in regards of that will. And to gain success in that process could be gained. It is essential for our material and spiritual aspects that with will we even provide place for the process too in our life, with which a new knowledge could be gained. Sometimes it has also been seen that sadhak haves the knowledge, even will to do sadhana is also there but the process could not be done. For the solution of all these there is a siddhkaali kriya chetna process.
Every form of Mahakaali is incomparable. This mahavidya has her one form Siddhakaali. Siddhakaali develops consciousness of Kriya shakti or process power. With this process, sadhak gains mental state and platform to accomplish the process. By accomplishing this prayog, sadhak’s kriya shakti gets activation as a supplement of knowledge and will power and can uplift the sadhana level by acquiring new knowledge.
This sadhana should be started after 10PM in night on Sunday. It is better if someone establish yantra and picture related to siddhakaali. Direction should be north. Cloths and aasan should be red or white in color. After doing normal poojan of devi, sadhak should pray to sadgurudev and goddess for kriyashakti activation and success in sadhana. Sadhak should then chant 21 rounds of the following mantra with rudraksha aur Munga rosary.
Om Kreeng Siddhhakaalike KriyaSiddhim  Kreeng Namah
Sadhak should do the process till next Sunday (total 8 days.) when sadhana is completed, rosary should be places in any goddess temple. During the sadhana day’s headache, body pain and sweating is natural therefore sadhak should not worry in this regard.


****NPRU****   
   
                                                           
 PLZ  CHECK   : -    http://www.nikhil-alchemy2.com/                 
 
For more Knowledge:-  http://nikhil-alchemy2.blogspot.com 

2 comments:

mahakal said...

jai gurudev bhaiyya, ek vinamra nivedan hai ki kya siddhakali ka yantra chitra mil sakta hai taki use banaya ja sake...

apka chhota gurubhai

Guru Darshan said...

jay Gurudew,
Bhai aapse ek help chahiye,plz 100% manokamna purti ki koi bhi ek sadhna es holi ke parv ke liye muze pradan kijiye,plz plz plz....
Kyuki sadgurudeo bhagwan hamesha ek baat kahete the apne amrut prawachan me ki ''364 din tum apne mann ki karo but sirf 1 din meri baat suno,holi ke din purn ratri sadhna kiya karo''
Thanks