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Tuesday, March 27, 2012

निखिल तत्पुरुष साधना - NIKHIL TATPURUSH SADHNA


 जीवन मे सदगुरुदेव की प्राप्ति का महत्व और आनंद क्या होता है यह तो सिर्फ वही व्यक्ति जनता है जिसने यह आनंद को पिया हो. जो उस प्रक्रिया से गुज़रा हो. जिसे “शिष्य” शब्द अपने साथ जोड़ने का गौरव प्राप्त हुआ हो. बाकी जिसने वह क्षण जिए ही नहीं, जिसने वह आनंद लिया ही नहीं वह इसे कैसे समज सकते है. अनुभवों की अभिव्यक्ति हो सकती है, अनुभूति की नहीं. एक साधक और शिष्य के लिए सद्गुरु का स्थान सब से ऊपर होता है और वह मधुर और भावपूर्ण सबंध विशुद्धता की चरम सीमा पर होता है. यह सबंध वह निश्चल प्रेम का प्रतीक है जहा पर सभी देवी देवता तथा ब्रम्हांड के सभी रहस्यों का ज्ञान अपना आकार लेने लगता है. हमारे शास्त्रों मे प्रमाण है की गुरु की देह मे ही सभी देवी देवता का निवास है. “गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुदेवो महेश्वरा..” तो जब सर्जन पालन और संहार की शक्तिया और देव जब सद्गुरु की देह मे निहित है तो वही तो सर्वोपरी हो जाते है एक शिष्य के लिए.
सदगुरुदेव के संन्यास स्वरुप श्री निखिलेश्वरानंदजी के सबंध मे कई साधनाऐ प्रचलित रही है जो की उनके सन्यासी शिष्यों तपस्या तथा सदगुरुदेव के प्रति समर्पण की लगन का परिणाम है. हम कहते है की सदगुरुदेव हमारे लिए सब कुछ है और उनसे ज्यादा हमारे लिए कोई नहीं है, लेकिन क्या बोलने मात्र से यह हो जाता है. हम खुद अपने अंदर की वास्तविकता को जानते है, सदगुरुदेव के साथ शब्दों के मायाजाल से नहीं जुड़ा जा सकता. वहा पर तो मात्र निश्छल प्रेम और समर्पण ही आपको जोड़ देता है उनके ह्रदयकमलसे. लेकिन यह प्रेम और यह समर्पण कोशिश करने पर नहीं आता. क्यों की यह तो एक लहर है, जिसने महसूस किया उसे अपने आप ही जोड़ लिया. लेकिन यह प्रेम और समर्पण की प्राप्ति होती कहा से है. अगर हम सदगुरुदेव को सभी शक्ति का स्तोत्र मानते है तो उनके ह्रदय से जुड़ने के लिए जो प्रेम और समर्पण चाहिए वह भी तो एक शक्ति स्वरुप ही है जो की सदगुरुदेव ही तो देते है. फिर हम तो उनके ही अंश है, उनके ही बच्चे है तो हमारा हक़ है उनसे प्रेम मांगना. लेकिन हमारी मांग भी उचित हो, अभिव्यक्ति योग्य रूप से हो फिर जरुर हमें जो चाहिए मिल सकता है. इसी अभिव्यक्ति की प्रतिरूप है यह प्रस्तुत साधना.
इस साधना को सम्प्पन करने के बाद साधक का सदगुरुदेव के प्रति प्रेम और समर्पण वेगवान हो जाता है तथा साधक सदगुरुदेव के ह्रदय से जुड जाता है. तब साधक के लिए कोई भी ज्ञान दुर्लभ नहीं रहता. क्यों की सदगुरुदेव की उर्जा साधक को निरंतर प्राप्त होती रहती है. और इसी उर्जा के माध्यम से साधक साधना क्षेत्र मे कीर्तिमान कायम कर सकता है.
जीवन के इस अत्यधिक महत्वपूर्ण प्रयोग को साधक किसी भी गुरुवारसे शुरू कर सकता है. यह १४ दिन की साधना है.
गुरुवार को प्रातः गुरुपूजन करे तथा पुरे दिन गुरु चिंतन मे लिन रहे. उसके बाद रात्रिकाल मे साधना शुरू करनी है. साधक का मुख उत्तर दिशा की तरफ हो. वस्त्र व् आसान सफ़ेद हो. साधक अपने सामने सफ़ेद वस्त्र पर सदगुरुदेव का चित्र स्थापित करे और पूजन कर के गुरु मंत्र का यथा संभव जाप करे और साधना मे सफलता के लिए प्रार्थना करे. इसके बाद साधक स्फटिक माला से निम्न मंत्र की २१ माला जाप करे.
ॐ निं तत्पुरुषाय जाग्रतम क्लीं निखिलेश्वराय नमः
साधना समाप्ति पर साधक माला को धारण करे या फिर पूजा स्थान मे रख दे. इस माला को विसर्जित नहीं करना है.
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The joy and importance of the Sadgurudev in the life could be felt by the one who had been through that joy. The one, who have passed through that process. The one, who owns dignity to attach the word ‘disciple’ with self. But those could not understand this joy, which had not lived it, which have not ever experienced it. It is possible to express an experience but never exact the feel.  For a sadhak and disciple, the place of sadgurudev is always remains on the top and that connected and soulful relation stays on its extreme purity of the soul. This relation is the benchmark of the stage where all the secret knowledge of universe and gods-goddess starts taking their place. Our scriptures denote that every gods and goddesses are merged in the Sadguru. “GururBramha GururVishnuGururdevo Maheshwara…” so, if powers of the creation,  rear and destruction stays within the Sadgurudev then for a disciple Sadgurudev only remains above all.

There remains many famous sadhanas related to the ascentic form of Sadgurudev Nikhileshwaranandji which are results of the austerity of Sanyasi disciples and their dedication toward Sadgurudev. We often say that Sadgurudev is everything for us and nothing is more than him, but is that all happens just by mere speaking it? We our self know our internal reality, trap of the word games don’t help to be connected with sadgurudev. At that place only pure love and dedication could connect with his heart. But this love and dedication do not come with tries because this is just a wave; the one that felt it, directly attached it. If we believe sadgurudev as source of all energy then the required energy of love and dedication which let us attaches us with him; that particular energy could also be granted by him. And we are his ‘ansh’ (part), we are his kids and thus we have right to ask for love from him. But if our demand is right and presented in right manner then we will for sure receive it. Here is the sadhana which represents the right expression or manner.

After accomplishing this sadhana, sadhaka’s dedication and love towards Sadgurudev becomes rapid and sadhak gets connected with sadgurudev’s heart. And after that there remains no knowledge out of the reach. Because power from sadgurudev keeps on received by sadhaka and with the medium of same energy or power; sadhak can creates benchmark in the sadhana world.

This very important process of the life, one should start it from any Thursday. This is 14 days procedure.

Do guru poojan on Thursday morning and remain in Guru Thoughts for whole day. After that, sadhana should be started in night time after 10PM. Direction should be north. Cloths and aasan should be white in color. Sadhak should establish picture of sadgurudev on the white cloth in front of him and after doing poojan of the picture one should do Guru Mantra as far as possible and should pray for the success in the sadhana. After that sadhak should chant 21 rounds of the following mantra with Sfatik rosary.

Om Nim Tatpurushaay Jaagratam kleem Nikhileshwaraay Namah
The process should be continued for next 13 days. After completion of the sadhana one should either wear rosary or place it in worship place. This rosary should not be immersed.  

                                                                                               
 ****NPRU****   
                                                           
 PLZ  CHECK   : -    http://www.nikhil-alchemy2.com/                 
 

2 comments:

mahakal said...

Jai Sadgurudev bhaiyya, yesi moolbhoot sadhna se avagat karane ke liye hridya se aabhar karta hun yesi sadhna to samast sadhnayon ki source hain un sabhi ki mool hai sabse badi baat ye ki ye Sadgurudev ki sadhna hai.....

Avtar Singh said...

Very good sadhana..
JAI GURUDEV !!!