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Saturday, February 26, 2011

Sadgurudev And Ayurved



  सच  हैं  भव रोगों के लिए भी  सदगुरुदेव ही  वैद्य  होते हैं , उनके बिना क्या ये ठीक होसकते हैं  पर क्या वे  भौतिक  शरीर के रोगों को भी निदान करने में भी सक्षम हैं . 
  गुरुदेव मुझे  क्षमा  करें   मुझे वन्य प्रान्त  मैं कोई भी जड़ी या बूटी या वनस्पति बेकार नहीं मिली , मैं आज्ञा पालन नहीं कर पाया ...सदगुरुदेव  अपने सदगुरुदेव जी  से कह रहे  थे , पूरे महीने भर गुरु आज्ञा  से  सारे वन्य प्रान्त  में घूम   भूम कर  देख कर अपने सदगुरुदेव जी कह रहे थे.
परम गुरुदेव जी आगे बढ़ कर उन्हें अपने गले से लगा लिया कहा की आज मेरा श्रम सार्थक हो गया , तू ही धन्वन्तरी के सामान  मनुष्यों को नहीं बल्कि मृत  प्राय आयुर्वेद  को भी नव जीवन दे सकेगा.
साथ ही साथ  कई अवसरों पर सदगुरुदेव जी ने बिलकुल स्पष्ट  कहा था  कि- भले ही सारा संसार मुझे  मंत्रग्य , तंत्रग्य , ,ज्योतिषी माने, कुछ मेरे रूप का रसान्ग्य  रूप भी देख सके हैं, पर तुम लोग तो  यह नहीं  मानोगे कि इस सबसे भी बढ़ कर मेरा  रूप एक आयुर्वेदज्ञ का हैं. सारे उत्तरांचल और दूरस्थ हिमालय में मेरी ख्याति एक अयुर्वेद्ग्य  के रूप में हैं.

इस भौतिक लीला रूप में सदगुरुदेव , ने अनेकों गुरुओं से इस विद्या को सिखा  और सीताराम जी जैसे उच्च कोटि के वैद्ग्य  से भी  उन्हें सम्मोहन विद्या सिखा  कर  उनसे कुछ दुर्लभ  शाश्त्रीय योगो को सिखा .जिस कि आप लोग जानते हैं कि जिन शिष्यों का सौभाग्य सदगुरुदेव के साथ  पहाड़ या हिमालय यात्रा पर  साथ गए थे, वे जानते हैं कि सदगुरुदेव जी ने कितना उन्हें समझया था.

सदगुरुदेव जी कि कृति "मूलाधार से सहस्रार  तक " तो मात्र उनके व्यक्तिव का एक पक्ष का परिचय मात्र हैं,  उन्होंने एक छोटी सी किताब , "आबू पर्वत माला पर पाए जाने  वाली दिव्य वनस्पतियाँ "और इस जैसे कई किताब   कि रचना  कि थी.

वनस्पतियाँ - दिव्यऔषधियों  ,सिद्ध औषधियों  के रूप में पाई जाती हैं , वहीँ पर ये स्थिर  ओर  चल औषधियों के रूप में भी पाई जाती हैं , साथ ही साथ जल चारी ,भूचारी , ओर अविश्वसनीय  नभ्चारी , उभयचारी  के रूप में भी  पाए जाती हैं .  बही द्रश्य ओर अद्रर्श्य  रूप में भी  पाई जाती हैं ,
भला ये कौन  ये  मानेगा कि वर्ष के एक दिनविशेष ये मानव रूप में इकठ्ठी हो कर  अगले वर्षा कैसे कैसे परिणाम देना हैं निश्चय  करती हैं . ओर चतुर वैद्य  इनके गुण इन्ही जान  कर  लोगों का इलाज करते हैं. (अरे जिस तरह पारे को मात्र एक धातु मान कर उसके जीवित ओर अजीवित के बारे में सोच सोच कर हस्ते हैं, पर आप जान कर ये अचरज में पढ़ जायेगें ,कि पानी से १३.५ गुना भरी धातु पानी के ऊपर   भी तैरती हैं.  इसी तरह से यह आयुर्वेद का क्षेत्र हैं. )
काश उनका अयुर्वेद्ग्य रूप भी समाज के सामने आता , क्या वे  हमें इस रूप से परिचित नहीं करना चाहते थे, इसी कारण तो उन्होंने एक अद्भुत आयुर्वेद चिकित्सालय  कि कल्पना को मूर्त रूप में जामा पहनना प्रारंभ  भी  किया था.आयुर्वेद सुधा  नामक   एक पत्रिका का प्रकाशन का काम भी प्रारंभ किया पर अपनी व्यस्तता के कारण , ओर शिष्य  वर्ग कि उदासीनता के कारण उसे  आगे नहीं बढाया.

वन दुर्गा  सम्पूर्ण वन्य  प्रान्त  कि अधिष्ठार्थी  हैं , उनकी साधन के बाद ही ये संभव हो पाता  हैं कि व्यक्ति स्वयं वनस्पति के पास जाये, वनस्पति स्वयं ही अपने गुण ,विशेषता, सम्बंधित अन्तर जप स्वयं ही स्पष्ट कर देती हैं .

इस तरह महाविद्या वर्ग  में माँ भुवनेश्वरी इस विद्या कि  अधिष्ठार्थी हैं , ये कैसे संभव हैं .

भू+ वनेश्वरी  के रूप में देखिये ना, सारे भू जगत के वनों कि  अधिष्ठार्थी   माँ हैं तो  जिनको भी  इस आयुर्वेद  क्षेत्र में  रूचि हैं विशेष कर पारद विज्ञानं के  सिखाने वालों को तो इस ओर भी ध्यान देना ही चाहिए .  

आखिर कितनी वनस्पतियों  का  आप नाम किताबो से याद रखेंगे, उनके गुण हर ऋतू ही नहीं दिन के  हर प्रहर में   भी बदलते रहते हैं ,इसके लिए कितना कितना श्रम आप कर सकते हैं, साधना क्षेत्र में प्रवेश करना ही पड़ेगा ही .
वैसे  भी शास्त्रों कि आज्ञा हैं
पहला सुख निरोगी काया , ओर दूसरा सुख घर में हो माया ....
इस  से तो यही समझ आता हैं कि ना केबल हम अपनी बल्कि सारे संसार को रोग ओर जरा से मुक्त करना चाहते हैं..... 

आगे आपको कुछ आयुर्वेद  के अत्यंत सरल प्रयोगों से परिचित करा  रहे हैं जिस से कि  आप इन्हें  जब आवश्यकता पड़े  उसके अनुसार  इस्तेमाल कर सकते हैं .

 सेहुंया  रोग जो  तवचा के पर हलके हलके  सफ़ेद दाग  तो नहीं  पर उस  जैसी आक्रति बना देते हैं . इसके लिए आप लाल चन्दन  ले कर साथ ही साथ भुना हुआ सुहागा  भी थोडा सा ले ले , किसी भी  पत्थर के टुकड़े पर    लाल चन्दन घिसते जाये उसमें  थोडा सा भुना सुहागा भी धीरे  धीरे मिलाते जाये जब एक रस सा हो जाये तो इस पेस्ट को उंगली  पर लगा कर जहाँ पर ये धब्बे बन रहे हैं वहां पर लगा ले , साडी रात लगा रहने दे , या दिन भर भी. फिर साफ पानी से धो  ले इस तरह  एक एक  हफ्ते  के अंदर कि परिवर्तन आप को समझ आने लगेगा.

स्त्री पुरुष ,बच्चे भी यदि सोते समय ठन्डे पानी के साथ बाल हरड का चूर्ण  ले ले सामान्य मात्र १/२ चम्मच  से १ चम्मच  तक  के बीचमें  रहे तो ,  पाचन संबंधित समस्याए दूर हो जाती हैं.

 यदि  हौंठ  (lips)   फटते  हो तो  नमक को घी में मिलाकर  हौंठ और नाभि पर लगा ले ,  हौंठ फटना बंद हो जायेंगे .

एक गिलास गर्म दूध में  एक चम्मच पीसी हल्दी ओर १० ग्राम  गुड घोल ले , सुबह शाम  दोनों बार पिए शरीर के अन्दुरुनी दर्द समाप्त  हो जाते हैं 
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Its true that Sadgurudev ji is  capable enough   to remove  various spiritual illness but can that be possible he is able to remove illness of us.
Gurudev please excuse me , I could not able to find any herbs that could not be useful in any other sense , I am not able to fulfill  you’re your  agya. Sadgurudev ji is telling this to his Sadgurudev ji. last one month he was searching in whole forest to find  a single herbs that could not be useful to the field.
Param Gurudev ji  blissfully said that now his effort to make such a shishy is complete , not only he like Dhanvantari  to again bring life to mankind but he is capable enough to  again induce life to almost dead  Ayurveda.
 In addition to that Sadgurudev ji himself  told on many occasionthat   no matter even the whole world consider him as a well versed in  the field of tantric, mantra, and also in rasayan vigyan but he has more fame and interest and well versed ness in Ayurveda. In uttranchal and in  Himalaya too   people remember him as a ayurvedagya.
In this material life Sadgurudev has learned this science from many sages and vaidya like sitaram ji. whom sadgrudev ji first taught sammohan vidya than he will be ready to teach this science to Sadgurudev ji, Sadgurudev ji has got some time less valuable “ayurvedagya  prayog” from him. as all we aware of the fact that many people as his shishy visit mountain and in Himalaya shivir with Sadgurudev whole  day and night Sadgurudev whenever has to time educate  their  shishyas for benefit of ayurved.
Herbs can be found  - siddoshidhiyan, and divyaushdhi , like waise movabale and immobile one. Like that too  unbelievable  nabhachari and  , jal chari and bhu chari , in that two more category like may be that she hidden and open appear one himself .        
Now who can believe this fact that in a day already  fixed  every year , when  they together some  places and make a deal that in this years period  they have to reflect particular behavior.   Some good vaidya knew the secret. (its like that mercury a metal who can believe that having density of 13.5 and  means 13 times more heavier  than .we saw that floating on the water . that’s the same story for ayurveda.)
 It would be much better if his ayurvedic forms comes in front of us. Would he be like that , if not so, than why Sadgurudev already clear the sttrugal for his dream come true., Sadgurudev published a mag. named “ayurveda shudha “but to increase in demand for shishya side  that or some  shishy also not interested much.
 some more info needed,
only after van durga sadhana  person has ability to ask any jadi /booti how and what is the name and utility and characters of that she willfully describe about herself.
Like same , one mahavidya  is rular of this varga who she was, she is ma bhuvneshwaeri, no you are not believing that  of why not pronounce  this bhu+ vaneshweri  , meaning of that goddess who rules the all the forest situated on this earth. specially person who are in the parad field must remember this facts.
 After all how many herbs name their charastics and   utility you can remember. there is the limit so that one day you have to come to sadhana field. Their nature changes from season to season, and part of the day too.
This also been said that
पहला सुख निरोगी काया , ओर दूसरा सुख घर में हो माया ....
 That can be clearling us ,nether  of us but all the person related to Ayurveda  keep in mind. Now we are introducing some of the easy prayog of Ayurveda. That’s why he came here,
 There is rog – named sehuna. Which creates white color like patches on the body, to remove this simple , take red colored chandan  and bhuna suhaga (backed).  Smoothly   mix  of chandan and bhuna suhaga   thoroughly and with single finger apply this paste to the place where sehuna rog showing sign.
If any stree, ma   or child can take one baal harad powder  in normal cold water while going to bed at night is the best way to remove indigestion.
If your lips get problem apply  ghee and known  to lips and  navel point . lips breaking problem get solved.
 In one gilas filled with milk add 1 full spoon  haldi and 10 gm gud , and take morning and in evening one gilas of milk than  you can see the changes… .
Smile
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****ANURAG SINGH****

1 comment:

METEORA said...

we need more aurvedic receipes. kindly concentrate on thoes measures which are handy, easy and easily reproducable like totka vigyan. you missed it in tantra kaumudi 2. that was best part in first.