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Saturday, February 19, 2011

Tantra Vijay- Tantra Badha Nivarak Teevra Dhoomavati Prayog


जीवन की गतिशीलता में रोज बरोज कितनी ही बाधाए आती हे, और न जाने कितनी समस्याओ के हमें ग्रस्त रहना पड़ता हे. कई बार देखने में आया हे की लोग अपने स्वार्थ के वशीभूत हो कर अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए तंत्र का सहारा लेते हे और तथाकादित तान्त्रिको से कई प्रयोग करवाते हे जिससे फुल की तरह खिला हुआ परिवार अचानक बिखर जाता हे, अनगिनत समस्याए सामने आ जाती हे, धारणा के विपरीत परिस्थितिया प्रतिकूल हो जाती हे, कई बार शत्रु खुद ऐसे प्रयोगों को उपयोग में लाते हे या फिर किसी से करवाते हे, जिनमे मारण प्रयोग जेसे भयंकर प्रयोग करने से भी नहीं चुकते. यु ही तंत्र का नाम समाज में भय का प्रतिरूप बन गया हे, एक वैज्ञानिक ने अगर छुरी का अविष्कार किया हे तो उसे कोई शस्त्रक्रिया में उपयोग करके किसीकी जान बचाता हे तो कोई उससे किसीका खून कर के जान लेता हे उसमे छुरी का क्या दोष? तंत्र तो हमारी जीवन की न्यूनताओ को मिटाने के लिए हे मगर अगर कोई उसका दुरूपयोग करे तो इसमे तंत्र का क्या दोष. 

खेर, ऐसे हे तांत्रिक प्रयोगों द्वारा किये जाने वाले प्रयोगों में ब्यापार स्तम्भन, शत्रु उच्चाटन, शत्रु उत्पीडन, भुत प्रेत चढाना, रोग ग्रस्त करना आदि मुख्य हे, इसी तरह कई बार मूठ और मारण प्रयोग भी उपयोग में लाए जाते हे. ऐसे प्रयोगों के होने पर व्यक्ति का जीवन अत्यंत ही बोजिल बन जाता हे और तान्त्रिको और साधुओ से अपनी समस्या का निराकरण हेतु अपनी जीवन पूंजी का व्यय करते रहते हे, और ऐसे नकली साधू और खुदको सिद्ध कहने वाले महान ज्ञानहिन् तांत्रिक ऐसे ग्राहकों से अपनी जेब भरते रहते हे. आपका जीवन तो अभावग्रस्त ही रहेगा मगर उनकी चांदी हो जाएगी. ऐसे ही व्यक्तियो की वजह से हमारे देश की महान तंत्र संरचना को हेय द्रष्टि से देखा जा रहा हे. ऐसे तांत्रिक प्रयोगों को दूर करने के लिए हमारे ग्रंथो में कई प्रकार के प्रयोग दिए हुए हे, सदगुरुदेव ने भी ऐसे अनगिनत प्रयोग बताये हे जिससे तांत्रिक बाधाओ का निराकरण हो सके. लेकिन हमने कभी ध्यान नहीं दिया हे, हम परिस्थिति को स्वीकार कर लेते हे और बोजिल जीवन को जीने के लिए अपने आपको समजा लेते हे या फिर किसी नक्कर कोरे ज्ञान वाले तान्त्रिको के पास जा कर के अपने समय और धन को बरबाद करना ज्यादा श्रेयकर मानते हे, वजह की इसके, हम खुद प्रयोग करे और समस्या से मुक्ति पाए. अगर हम मुसीबत में हे तो हमें चींख के मदद को बूलाना चाहिए या फिर किसी को पैसे देके उन्हें चीख के मदद बुलाने को कहना चाहिए? सदगुरुदेव और त्रिमूर्ति गुरुदेव ने बाधा निवारण के लिए कृपा कर के कितनी दीक्षाए दी हे लेकिन हम उनके दिए हुए दीक्षामंत्रो का भी प्रयोग नहीं करते. यही पर हमारी मुख्य परेशानी हे, सदगुरुदेव ने कहा था की गुरु तुम्हे खाना बना के दे तो तुम निवाला नहीं तोडते, तोडके देते हे तो फिर गले के निचे नहीं उतारते. दीक्षा ९९% काम कर देती हे लेकिन १% तो आपको महनत करनी ही होगी. हम कायरो की तरह नहीं जी सकते, क्षमा विरो का आभूषण होती हे, मतलब की जो कायर नहीं हे. लेकिन वीर वो होता हे जो परिस्थितियो को अपने अनुकूल कर सकता हो, फिर वो क्षमा अपना सकता हे. जब हमारे ऊपर कोई चाकू से वार करदे और हम वहाँ खड़े खड़े  क्षमाविरश्यभूषणं  का रटन करते रहेंगे तो फिर हमारी लाश श्मशान के मध्य होगी कुछ ही घंटो में. ये विरो का नहीं कायरो का लक्षण हे, हम समस्याओ से न डरे वरन होना तो ये चाहिए के परेशानी हमारे सामने आने से हे डरे, अरे हम समर्थ गुरु के शिष्य हे, सदगुरुदेव के शिष्य हे तो फिर बाधा को तो हम लात मारके उछाल सकते हे. ऐसे ही तंत्र बाधा निवारण के प्रयोगों में से एक हे धूमावती प्रयोग. निचे में उसी धूमावती प्रयोग को आप सब के सामने रख रहा हू.

यह प्रयोग शनिवार की रात्रि ११ बजे के बाद होता हे, इसमे काले वश्त्र पहेनना चाहिए और काली हकीक माला का उपयोग हो.
प्रयोग के लिए ९ लौंग जो की मसाले में उपयोग किया जाता हे लेले. इसके अलावा ५ आक के पत्ते तोड़ लाए. पूजा स्थान में धूमावती का चित्र लगाये. फिर सदगुरुदेव का पूजन कर उन्हें साधना में सफलता के लिए प्रार्थना करे. फिर अपने सामने ही एक आक का पत्ता रखे उसके चारो और चार दिशाओ में एक एक पत्ता उसी के पास रखे. इस तरह ५ पत्ते रखले. अब हाथ में जल लेके संकल्प करे की में ये प्रयोग अपने ऊपर किये गए सभी तांत्रिक प्रयोग और तांत्रिक बाधाओ के शमन के लिए कर रहा हू. माँ धूमावती मुझे सफलता प्रदान करे. फिर जमीं पर जल छोड़ दे. आक के सभी पत्तों पर एक एक लौंग रखे. माँ धूमावती की तस्वीर के पास २ लौंग प्रसाद के लिए रखे और २ लौंग अपने आसान के निचे रखले. इस तरह ९ लौंग को स्थापित किया जाता हे. तेल का दीपक लगाये रखे जो की पूरी साधना के दरम्यान जलता ही रहे.

फिर निम्न मंत्र की एक माला करे
धूं धूं बाधानिवारणाय फट
उसके बाद निम्न मंत्र की ८८ माला उसी रात हो जानी चाहिए
धूं धूं  धूमावती ठ: ठ:

८८ माला हो जाने पर फिर से फिर निम्न मंत्र की एक माला करे
धूं धूं बाधानिवारणाय फट

इसके बाद साधक जो आक के पत्तों पर लोंग रखे हे उनमे से जो लोंग जिस दिशा में स्थापित हे उसे घर के बहार उस दिशा में फेंक दे. बीचवाले लोंग को कही जमीं में गाढ़ दे. धूमावती तस्वीर के पास जो २ लोंग रखे हे उसे चबा के खा जाए और आसान के निचे जो २ लोंग हे उसे जलादे. आक के पत्तों को और हकीक माला को किसी पानी में बहादे या घर के बहार गाढ़ दे. ये सब काम रात्रि में मंत्र जाप के बाद ही या फिर सुबह सूर्योदय के आस पास खत्म करले. ये करने के बाद फिर एक बार स्नान करे और पूजा स्थान में जाके सदगुरुदेव और माँ धूमावती से सफलता के लिए प्रार्थना करे. आप खुद ही देखेंगे की ये प्रयोग कितना तीव्र हे और उसी दिनसे परिस्थितियो में केसे बदलाव् आ रहा हे.

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In the life, we find many difficulties in day to day life and with so many problems we are living the life.  Often it has been seen that some Interests subjugated people takes help of tantra to accomplish their tasks and makes various rituals through said tantriks which lays a happy family to hardship, so many difficulties do comes in a way, and reverse situations do rise which have never been thought. Sometimes enemy does such prayog or they let it done by others, which include very fierce practices like Maaran prayog even. This way the name Tantra has become fear re presenter in society, if a scientist has invented knife, some one will use it in operation to save a life and some one will use it in murder to take a life, what is the fault that knife does have? Tantra is for to remove our deficiencies of life, but if someone misuses it, what is the fault of tantra in that. Anyways, this way of tantra prayog includes holding a running business, harassments, to evilising, to make ill are major. This way sometime the practice like Mooth or Maaran even been taken to use. When such practices are applied on someone, the life becomes too much difficult and they run for tantrik and sages to get ride of it and waste their savings of life and such self said noble fake tantriks keep on filling their pockets through such customers. Your life will still remain hell but they would be running in great money. Because of such people only, in the eyes of general people such a great system of India, the tantra has become fake and cheap. To remove effect of such tantra prayogs there are many prayogs has been given in our scriptures, Sadgurudev has even gave so many countless prayog through which can remove effect of such prayogs. But we never concentrated, we accept the situation and make our self understand to live in such situation even or else we feel nice going to the black knowledge holder said tantrik and wasting our money and time, instead of this we our self should do something and get ride on such situations. If we are in some trouble then should we shout for help or should we give money to someone to shout on behalf of us? Sadgurudev and gurudev trimurti gave so many diksha to get ride on the problems but we do not even care to chant Diksha Mantra. This is our main problem, Sadgurudev once said “ if guru cook food for you, you don’t care to eat even. Diksha makes your work 99% done but rest 1% you need to put your efforts.” We can not live like cowards, forgiveness is jewel for Veer, means those who are not cowards. But Veer is those who can make every situation in favor.  Then only they can adopt forgiveness. If some one attacks on us with knife and we stand there keep on chanting “ kshamah virasya bhushanam” then our dead body will be there at cremation ground in hours. This is not sign of brave, this sign belongs to coward. We should not be scared of troubles but it should happen that troubles should be scared of us, we are disciples of Sadgurudev then we can kick out any troubles. This way for tantra badha we have one prayog named Dhumavati Prayog. I am sharing the same Dhumavati prayog with you.

This should be done at Saturday night after 11 PM. The cloth should be black and black hakeek rosary should be brought into use.

For the prayog take 9 cloves which are taken into use as spice. Apart from this, take 5 leaf of Aak Plant. Place picture of mother Dhumavati. Now, do poojan of sadgurudev and ask for blessing to success in the sadhana. Now place one leaf of aak plant in front of you and around that leaf, place other four leafs in four directions, this way all 5 leafs should be placed. Now take water in hand for sankalp and speak “ I am doing this ritual to get ride on all the tantra prayog and difficulties done on me. Oh mother dhumavati, please help me.” And leave the water on the ground. Place one clove on every leaf of aak plant. Place 2 cloves in front of mother dhumavati’s photograph and two cloves down to your aasana. This way all 9 cloves should be places. Light a lamp of oil which should be kept burning till the sadhana ends.

After that chant one rosary of following mantra:
Dhoom Dhoom Badhanivaranay phat

After that chant following mantra’s 88 rosary which should be completed in that night only
Dhoom Dhoom Dhoomavati Thah Thah

When 88 rosaries are done chant again chant one rosary of following mantra:
Dhoom Dhoom Badhanivaranay phat

After this, the cloves which are placed in particular direction on the aak leaf should be thrown out of the house in same particular direction. The clove which was in middle leaf should be dump in the ground out side of home. The 2 cloves which are placed in front of goddess dhoomavati’s picture should be chewed and eat. Other 2 which were placed down to your aasana should be burned. The leaf of aak plant and rosary should be placed in river or should be dumped. This all work should be completed after mantra jaap in same night only or quick after sunrise. When these entire tasks are done, have bath and pray to Dhoomavati devi’s picture to help. You, your self will see the effect of this prayog and that how the circumstances are being changed from the same day.
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4 comments:

mr.dev said...

JAI GURUDEV ,,,
MAIN DEVESH GURUBHAI AAP KE BLOG SE BAHUT PEHLE SE JUDA HUAN HUN...LEKIN ABHI TAK MUJHE KOI BHI TANTRA KAUMADI KI ISSUE NAHI MILI HAIN...KRIPYA JALD SE JALD MAIL KAREIN..MERI MAIL ID : DEVESHSINGH75@GMAIL.COM

Anurag said...

Dear Devesh ji,
i am sending you the both issue of Tantra Kaumudi,plz reply me once you got the issue,
but why waited so long to inform me about this .
smile
Anu

Dino said...

Joh laung gaadni hai woh kahan gaade ghar mein ya kahin bahar ?
I wanna do this in next few days. just waiting for ur response.

Aneesh Ace Aryan said...

I sincerely appreciate and admire the hard work you are putting in to help the needy people.. May you be blessed to continue this cause forever