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Sunday, August 28, 2011

FOR FINANACIAL GAIN-PADMAVATI DEVI PRAYOG


सदगुरुदेव भगवान  कहते हैं  की   जिस काल में  उन्होंने  अपना  एक शिक्षक  के  रूप में,   कार्य  प्रारंभ  किया  था, उस काल  में   और आज  के काल  में कोई ज्यादा अंतर  नहीं हैं , उ स समय  व्यक्ती के चरित्र  का  बहुत मूल्य  था अगर  व्यक्ति  भले  ही  निर्धन   हो पर यदि चरित्र वान  होता था  तो उच्च  से उच्च व्यक्ति  फिर वह चाहे  कितना ही  धनवान हो उसे  खड़े  हो कर सम्मान  देता  ही था ,
       पर आजके  युग में चरित्र   की कोई मूल्य  ही नही हैं , जिसके पास धन  हो  सब  उसे  ही  सम्मान देते हैं फिर  भले  ही बह कितने  ही  गिरे  हुए  चरित्र  का   ही क्यों न हो , वह भी ठीक  था , और आज भी ठीक हैं . 
  यह सत्य हैं  धन सब कुछ नहीं  होता  पर बहुत कुछ तो होता हैं  ही , इसी बात को ध्यान में रख कर सदगुरुदेव  भगवानने  इतनी  साधनाए  मात्र  धन के पक्ष   को मजबूत करने की लिये  दी थी.
  सदगुरुदेव भगवान् ने  यही  भी कहा  था  की तुम  इन साधनाओ का मूल्य समझते  नहीं हो  अगर  इनमे से एक भी साधना  अगर पूरे  मनोयोग से  की होती  तो आज तुम शिष्यों में से कितनो के पास यह आर्थिक  समस्या   होती ही नहीं , "यह कहते हुए  उन्होंने लगभग  २०  विभिन्न  संप्रदाय  के नाम , जितनी  की  साधनाओ  को उन्होंने  एक ही   पत्रिका के   अंक में  दी  थी गिनाये थी 
        "लक्ष्मी  प्राप्ति  ", "एश्वर्य महा लक्ष्मी  साधना "  , "तारा साधना ",  "महालक्ष्मी साधना  के दुर्लभ प्रयोग ", ऐसे अनेको ग्रंथो की रचना  की हैं पर हम लोग  भी  समझे  तो हैं  न ,, पर  हम  तो साधना  को मात्र पढ़ कर रख देने  की बात समझते हैं .
         इसी  श्रंखला में   उन्होंने  एक बार  एक लेख दिया था, “लक्ष्मी साधना के  दुर्लभ रहस्य”  उसमे  उन्होंने   यह बताया   हैं की  जब सामान्य लक्ष्मी साधना से भी  लाभ  होता न दिख रहा हो तो  व्यक्ति  को जैन धर्म की धन की आधिस्थार्थी " पद्मा वती  देवी की साधना  करने  को आगे  आना  ही चाहिए , इस स्वरुप  की प्रभाव  तो आज हम सभी   जैन धर्म के लोगों की संमृद्धि देख कर  समझ सकते हैं  ही सदगुरुदेव   भगवान ने अनेको  बार  भगवती पद्मा वती की पूरी साधना  विधि  दी हैं , पर ….
         जब समय न हो , जो की हमारी  पूरी पीढ़ी  का मूल वाक्य  हैं तब ...
·         जब हम बड़ी साधना के लिए उत्सुक न दिखे  तब ..
·         जब हम साधनात्मक  नियम पालन करने के  इच्छुक  न हो तब ..
·         जब हम अपने  पर नियंत्रण  न कर पा   रहे  हो तब,,
·         जब हम महगें यंत्र और माला   न ले पा  रहे  हो तब.
·         जब हमारे  घर में साधना का वाता वरण  ही न हो  तब
·         न ही हमारे पास  कोई अपना साधना कक्ष  हो  तब ..
        इन्ही बातों को सदगुरुदेव  भगवान ने बहुत पहले  समझ कर अनेको सरल प्रयोग भी  दिए थे , जो  की  बृहद  साधनाओ  का स्थान तो नहीं ले पाएंगे .
                  पर आपको जीवन में कुछ तो अनुकूलता  ला पाएंगी ही , और जब आपको थोडा  भी अनुकूलता  दिखाई  देगी तो आप स्वयं ही आगे बढ़ेंगे   हैं हैं न .
मंत्र  :
ओम पद्मावती सकल पद्मे पद्मपुषिनी वान्छितार्थ्य पुरय पुरय नमः
सामान्य नियम ;
·         यह मंत्र को रोज सुबह १ माला १ महीने तक जाप करना चाहिए
·         और आर्थिक उन्नति के लिए प्रार्थना करनी चाहिए
·         साधक को भोजन मे लहसुन प्याज का त्याग करना चाहिए.
·         माला स्फटिक / कमलगट्टे की रहे.
·         दिशा उत्तर, वस्त्र ,आसन सफ़ेद..
·         जप  का  समय सुबह  का
        क्या एक बार फिर से  लिखूं की सदगुरुदेव भगवान्  से प्रार्थना   तो हर साधना  का अनिवार्य  अंग हैं ही , यह तो आप सभी जानते हैं ही , पर  हममे से कितने हैं जो हर दिन का मंत्र जप करने के बाद , सारे मंत्र जप को  अपने परम  प्रिय ,प्राणा धार  सदगुरुदेव के श्री दिव्य  चरण कमल  में  पुरे मनो योग  से समर्पित  करते हैं ...हर साधना  का मूल आधार  सदगुरुदेव  भगवान् नहीं हैं बल्कि वे ही एक मात्र आधार हैं .........
वह ही आदि हैं अंत हैं
..  सदगुरुदेव  देव साक्षात्  परम ब्रहम
      तस्मै श्री सदगुरुदेव नमः
आज के लिए बस इतना  ही

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   Sadgurudev  Bhagvaan , on a place says that , “in comparison  to the  time ,when he started his career as a  teacher and   the current one  ,only differences is that ,  in that era , character had a  very high value , a person with high character with very low financial health ,  get respect  by even  the very wealthy person, and  now   the character  has been  replaced  by   money, now character has  not has  such  value  , only  if a person has  money ,everyone will see and  do  the respect of him,  that was  right at that time  so  this is  right in this time.”
 Money is not everything  but  it can do  many things,  for that view  our Sadgurudev has  given us  so many sadhana   to improve  our financial  health.
Sadgurudev  Bhagvaan  says that “ you are  not understanding the values of theses  sadhana, if you had completed any one sadhana   with full heart and  devotion than many of   you, are not facing the  problem  related to  wealth/money, as you are facing now ” and  he  mentioned approx 20 various sect name of that , he has given sadhana specially in a issue  at that  time.
“Lakshmi prapti “, “Ashvery Mahalakshmi Sadhana” , “Tara sadhana”,  “Mahalakshmi sadhana ke  durlabh prayog”  like so many  sadhanatmak books written  by  him.  But we are  not understanding their  value, if we can than…..
         In this relation , once he has  given various  hidden  secret rules  related to lakshmi sadhana  to us and  mentioned that when  desired financial property is not achieving  through various lakshmi sadhana , than a person must go for  “padmavati devi  sadhana” , who is   the ruler of financial prosperity in jain dharma sadhana.  And one can understand the  financial health our jain  brothers .  Sadgurudev  Bhagvaan has  given many times  padma vati sadhana ,but….
When  we  do not have time ( the basic argument of our  generation ) than..
When we are not interested in  any big sadhana  than,,
When we  are not ready  for  to follow  sadhanatmak rules than..
When we are not able to purchase   costly yantra and mala  than..
When   such a  sadhanatmak atmosphere is not available in our  home than..
When  we have not any separate room  for sadhana  than..

                                Taking  care of these arguments Sadgurudev Bhagvaan has  given  many small sadhana   for this  purpose,   yes its is  true that they  are a not replacing  the effect of  long sadhana  but they can surely  given  some relief and positivity in  money matter, when  you  feet the change   you can surely  come  forward to  do sadhana .. yes it is  true..
Mantra ;
Om padmavati  sakal padme padampushini  vaanchhitarthye puray puray namah ||
General rules:
Do jap   this mantra one  mala  for  next  30 days .
And pray  for financial improvement.
Should not eat  lahsun  and  pyaj in that duration.
Jap mala  be off   sphatik  or  kamal-gutte .
Direction should be  north and cloths/aasan  be of white  color.
Jap  time should be morning hours,
         Is it right  for me  to request  you  all that , pray to Sadgurudev Bhagvaan   for success in any sadhana ,  is an essential / must  part of any sadhana,  this all you  know already, but how many of us , offer our jap at the end of  any days  mantra  to  the  divine  holy lotus feet of Sadgurudev  Bhagvaan  with full devotion and heart ,
  Sadgurudev Bhagvaan is  not one of the basic  foundation of any  sadhana, but he is  the only  foundation of  any sadhana.

 He is the beginning and he is the end.
“Sadgurudev  sakshat  param   braham ..
 Tasmai  shri   sadgurudev   namah.”
 This is  enough for today..
****NPRU****

1 comment:

Rishiraj awasthi said...

Bhaia ji padmavati sadhna me mantra me puray shabbad me bade oo ki matra hai ya chote oo ki. Bhaia please reply