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Sunday, August 14, 2011

Strot sadhana : for removing problems in life(Gajendra moksh strot)


हमें  अनेको गुरु भाई /.बहिनों के  इ मेल मिलते ही  रहते हैं  जिसमे  अपनी अपने कष्टों का  उल्लेख छोटे या बड़े का  उल्लेख  रहता हैं हम सभी   साधनात्मक  क्लिष्ट से बचना चाहते हैं और चाहते हैं  की हमें  १००% सफलता  मिल जाये  वह भी प्रथम बार में ,आप स्वयं  ही सोचे   की  यही हर बार   हो तो क्या  जरुरत हैं बड़ी साधनाओ  की, पर सबका एक अपना  अर्थ हैं  ही  .  समस्या   तो  तब बढ़ जाती हैं जब उन्होंने  दीक्षा भी नहीं ली  होती  हैं,  और किन्ही कारण वश  वे  यन्त्र माला  भी  नहीं ले पाते हो , आर्थिक कारण  के अलावा  यह कारण  स्वयमं के घर वालों का  असहयोगात्मक  व्यवहार  भी रहता हैं .
( हर असफलता आपके लिए  मानता  हूँकि स्वागत  योग नहीं हैं  पर जो इन  सब का मूल समझते हैं वह जानते हैं की एक बड़ी सफलता के लिए रास्ता  खोल रही हैं अन्यथा आप वही  रह जाये  ,)
 जो कहा गया हैं की सदगुरुदेव  तपाते हैं  हैं तो इसका अर्थ हैं की हमें , वे आग में डाल देंगे???  नहीं नहीं , बल्कि  इन असफलताओ के माध्यम से  वह देखते रहते हैंकितने  अभी  भी टिके हैं कितने  चल  दिए , कितनी गंदगी , कितना संशय अभी भी हमारे मन में हैं
एक बार उन्होंने ही कहा  थाकौन अपने बगीचे  में  मौसमी पोधा लगाना  चाहता हैं वह तो सदा  ब  हार   ही पौधे  ही लगाये गे जो एक दिन वृक्ष बन कर ,  जो झुलसी हुए मानवता पर     उस पर मेघ बना कर अमृत  वर्षा कर सके ,, 



पर जब ये संशय नहीं निकल पा रहा हो  या  किसी कारण वश साधना  मंत्रो की  न की जा पा  रही हो  तब  क्या  कोई और रास्ता नहीं हैं . 
क्या करें जिससे   हम सभी अपनी समस्या  से  मुक्त  हो पाए ,
सदगुरुदेव  भगवान् ने  पत्रिका में कई बार ऐसे प्रयोग  दिए हैं ,  उनमे से एक ऐसा ही स्त्रोत संबंधित प्रयोग हैं 
वह  हैं गजेन्द्र मोक्ष  स्त्रोत
सदगुरुदेव भगवान् ने   इस स्त्रोत  सेसंबंधित अपने स्वयं के अनेको अनुभव  बताये हुए हैं साथ ही देश के अनेक  उच्चस्तरीय नेता  और अधिकारी यो के अनुभव  बताया हुए हैं  , जब सदगुरुदेव  जी ने कह दिया  तो मन्त्र मूलं  गुरु वाक्य  के अनुसार  अब  और  विस्वास  के लिए क्या बाकी  रह  जाता हैं .  जब स्वयं    गरुडासीन  श्रीनारायण  ही अपने भक्त  की रखार्थ दौड़े चलेआयेहों , तब कौन  सी  और कैसी   परिस्थति   हो ,क्या अर्थ  रखती हैं    तब उस भाव  को  प्रदर्शित करने वाला  यह स्त्रोत   तो सचमुच में अद्भुत हैं ही , आप  इसे करें औरस्वयं भी एक प्रत्यक्ष  प्रमाण बन जायेंगे .
स्त्रोत वास्तव में अपने ह्रदय के उदगार हैं शब्दोंमे बंधी एक ऐसी रचना(जो किसी काल में किसी   महायोगी ह्रदय को मंथन से उत्पन्न  हुए हो जब उसने अपने इष्ट  को अपने  सामने देखा  हो )   जो आपके ह्रदय  की भावना  सीधे  ही  उस स्त्रोत के इष्ट  के ह्रदय से संपर्क कर आपके लिए मनो बांछित परिणाम ला ही देती हैं चूँकि यह मंत्र  नहीं हैं इसकार ण, इसका / इनका सही उच्चारण नहीं भी हो तो कोई समस्या नहीं हैं आपकी कितनी श्रद्धा और भावना  युक्त आपका पाठ हैं उस पर ही  सब  निर्भर हैं ,


स्त्रोत    पाठ के सामान्य  नियम  तो सभी जानते हैं  ही , फिर भी कुछ नियम   का पुनः उल्लेख  करना बाकि रह जाता हैं
·   स्नान  करके साफ स्वच्छ  वस्त्र  धरण करके  ही  पाठ करे .
·   कोशिश  करे की प्रिंटेड स्त्रोत का पाठ करे या वह संभव नहीं हो तो  अपने घर के  या  किसी  और व्यक्ति से कहे ही  वह  उसे  उतार  कर आप  को दे दे ,  क्योंकि स्वयं  लिखा  हुआ  उच्चारण  करना अच्छा  नहीं माना  जाता हैं ,(पर जब कोई ऐसे विशेष स्त्रोत  हो  की जिसका बारे में अन्य को न बताना  हो  तब परिस्थति और कालानुसार आप  स्वयं ही उसे उतार  कर लिखे .
·  सम्बंधित  स्त्रोत के इष्ट का चित्र  मिल जाये तो  उपयोग  करे
·   पूजा स्थान में सदगुरुदेव और पूज्य माताजी का चित्र  तो होगा ही 
·  धुप दीप , अगरबत्ती  तो आपके ह्रदय की भावना को व्यक्त करने के एक प्रकार हैं  उसे तो  उपयोग  करना  ही चाहिएआखिर सदगुरुदेव और इष्ट के प्रति  इतना हो हम बच्चो को करना ही चाहिए ही  
·  सबसे पहले जैसा की स्त्रोत में निर्देशित किया गया हो उतनी संख्या  में  उसका पाठ करके उसे सिद्ध करे , फिर आप उसका  उपयोग कर सकते हैं 
·   या फिर अपनी समस्या   को संकल्प में बता कर  निश्चित  संख्या  में जैसा  की  निर्देशित  किया  हो , , पहले से ही आप द्वारा   निश्चित दिन तक  जप करे .
·   एक निश्चित समय  पर साधना में बैठना  तो सफलता  का मूल मन्त्र हैं ही .
·  हर किसी  को की आप क्या कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं  बताना उचित  ही नहीं  बल्कि असफलता  के द्वार पर आपको ला खड़ा कर देता हैं  
·         सबसे अंत में  सबसे महत्वपूर्ण   बात  की हर दिन  का पाठ का जप सदगुरुदेव भगवान के  श्री चरणों  में समर्पण  करना न  भूले , आखिर वे  ही  तो अनेक देव देवी  के माध्यम से हमें  परिणाम दे रहे हैं , हमारी आँखों में व ह निर्मलता  नहीं आई हैं इस कारण वह ऐसे  भी  कार्य करते हैं ...   

 आप मेसे जो भी किसी  भी समस्या से पीड़ित  हो उसका  कोई हल नहीं सूझ  रहा  हो , समय न हो ,बड़ी साधना  करने की तो एक बार इस स्त्रोत को  पूरी गंभीरता से  उपयोग करे , यह स्त्रोत ,बाज़ार मेंआसानी से मिल जाता हैंबहुत  ही अल्पमोलीय  हैं  पर इसका प्रभाव  बहुत  ही अद्भुत हैं ,

सदगुरुदेव  के मूल स्वरुप  भगवान् नारायण  के  पालन कर्ता और रक्षा कर्ता स्वरुप का  यह स्त्रोत  आपके लिए सौभाग्य    के रास्ते खोल देगा और इसे जीवन की हर वह स्थति  जो की आपके लिए समस्या  हो उसके लिए उपयोग किया  जा सकता हैं . 

आज  के लिए  बस इतना ही
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We are  continuously getting so many  mails from our  guru brother and sisters  mentioning so many problem(every aspect of life) what  they are facing. think about a minute, we all are trying  to escape from the  hard work/devotion/faith needed for success in sadhana, and still want to have  100% success in very  first attempt!!!!, then think about  yourself what  is the value and usefulness of  big sadhana?, if  all the  work  can be easily completed by  small sadhana. Each sadhana has   its own value . problem could be  worse, when sadhak has not taken  guru Diksha, and  due to any reason,  they are not able to purchase yantra or mala and may be sometimes  non corporation of member of their family.
(every failure   not a welcome  things,  but those one ,who can understand the basic phenomena  lies  behind every failure, already knows that it just opening of a  new  horizon  for  success,  other wise on getting success on that  point ,may be  you  will not grow/interested to go ahead.)
 It has been said that  Sadgurudev  always  purify   us through   fire , that  simply does not means that   he would  throw us in the midst of fire but   created such a circumstance  and condition ,where we can easily  find out  mistake weakness and other impurities of our life , and  he also watches us  in the midst of  these failure how many of us   will move other destination /other guru and   how many still on the path, how we react s and how much  doubt  still  lies in our heart  and mind,
 Once Sadgurudev ji wrote that  who  want to   sow  the seasonal   plants in his  garden ,every one preferred  evergreen plants, so that he also  plants  such a  evergreen  plants who one day  become  the tree, that  provide shelter to  whole mankind in this time of highly testing.,
(some  guru bhai and sister are in confusion regarding using of certain words in sabar mantra,  like “shiv ko trishul  pade” for them ,we just  want to say that  not  to pay much attention on the literal meaning of the sabar mantra  since  mantra  is a force that  works on the  vibration ,  so  do not change the words,  and also you will get no  harm, and  if any where any such  a precaution is needed,we  will already mentioned,)
 But when this doubt  is not  loosing its ground  from  our heart, and  we are  not having time  to go for big sadhana, is there any more way?.
 So that we can  set aside our problem.
 Sadgurudev Bhagvaan   provide  so many prayog in our  mag. And one of such a  prayog is  “gajendra moksha  strot” Sadgurudev Bhagvaan  wrote many  experiences related to himself and   from high ups  and top political leaders, when Sadgurudev ji  has said   than according to “mantra moolam  guru vakya” what more is needed to write. When bhagvaan  Vishnu /narayan  himself  run to protect his  bhakt ,than any worst condition can stand in front of him? this strot  really provide amazing miraculous result. just go  for that  and you also become a witness of its effects.
 What is the strot means , this is  the combination of  so many  shlok composed by  mahyogies/great one/masters, when their isht appeared before him , and  that time  their heart voice comes in the form of   strot. And  these words carries your heart feeling  directly towards the  your isht and proved the miraculous result., since this is not  mantra  so  if any  pronunciation  problem occurs that not much matters since it    depends  upon  your purity of heart and feelings,
 As many of you already aware of general rules applicable in this strot sadhana, but  here are some general and some  special points.
·  Have a  bath and wear   clean cloths,
·  Try to have printed strot, if not possible than  do try to get the strot written  by some one else,  since  it s not recommended that  person note down in his own handwriting the strot and  than  start path of that, but  if sometimes  such a  circumstance occurs where  you  do not want to show  other than you can  d o that  yourself.
·  Try to have the photograph of that strot isht before  you,
·  In your pooja room Sadgurudev  and param bandniya mataji’s photo must  be present.
·  Try to  light up the earthen lamp, and  ddhoop agarvatti , theses are the instrument to  show  the proper respect  and your feeling for towards your isht.
·  Do try to  chant the strota as  the minimum  number specified  for that to have siddhita,  and than you can use.
·  Or take water in your hand  say your problem and mentioned  clearly how many day and how much  number of path you are going to  do.
·  Always be very punctual  regarding your sadhana starting time, it’s a must factor  for  the sadhana success.
·  Never publicize what  you are doing and  how you are doing , this  many time bring you failure.
·  And last  but not the least point that always offer every days jap/path in the  divine lotus feet of Sadgurudev ji, since through many dev /devta only he is  giving us the  fruits/result of  that path to all of us . since still  we have  not  get those purity in our eyes.

If any one of you having so much  trouble some  life and  not getting any  way to overcome that  , have a try for this strot  with full heart and devotion,  and  you will see the result yourself in  some days. And this strot  is very easily available in  any market religious  shop. Bhagvaan shri narayan is the   real  form of Sadgurudev ji’s when he is caring  all of us, this surely open  doors of good luck, and this strot can be used in any  type of   problem in life you are facing.
 This is enough for today.
****NPRU****

2 comments:

navin said...

Shabd nahi he aap ko thanks kahne ke bhai ji

raj said...

yahe karya guru kriepa aur guru prerana se hi ho sakata hai,
guru kripa hi kevalam !!


samajne vale is bat ko samje