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Sunday, November 27, 2011

AAVAHAN-18 (KAALANUGAMAN VIDHYA BHED)


मेरी प्राथना को स्वीकार करते हुए सदगुरुदेव ने पूरा विधान बताया की पहले व्यक्ति को महाकाली बीज क्रीं (क्रीन्ग) का सवालाख मंत्र का अनुष्ठान करना चाहिए जिसे किसी भी कृष्ण पक्ष की अष्टमी से किया जा सकता हे अपने सामने महाकाली का चित्र व् यन्त्र को स्थापित कर पूर्ण नियम के साथ इस बीज का अनुष्ठान एक हफ्ते मे कर ले. जिसमे वस्त्र व् आसान काले रंग का हो तथा माला काले हकीक की हो इस अनुष्ठान के समाप्त होते ही इसी प्रकार धूमावती बीज ‘धूं’ का सवा लाख मंत्र जाप का अनुष्ठान हो. इसमें वही माला का प्रयोग करे जो माला महाकाली बीज मे प्रयोग हो गयी है. जब यह अनुष्ठान समाप्त हो जाए तब फिर से धूं क्रीं धूं” मन्त्र का सवालाख मंत्र जाप का अनुष्ठान करने पर साधक की यह स्थिति आ जाती है की वह योग तंत्र के अभ्यास के माध्यम से अपने वास्तविक काल खंड से अलग हो कर सूक्ष्म रूप मे भूत काल मे उपस्थित हो सकता है. साधक को यथा संभव कुण्डलिनी योग का भी अभ्यास करते रहना चाहिए. धीरे धीरे अभ्यास के माध्यम से साधक फिर वास्तविक काल से जितना भी संभव हो पीछे जा सकता है.
कुण्डलिनी योग का अभ्यास कैसे किया जाए?
साधक को चाहिए की वह शांत वातावरण मे बैठ कर आँखे बंद कर अपनी कुण्डलिनी को देखने का प्रयत्न करे और यह अनुभव करे की वह अपने शरीर की अनंत गहेराई मे अंदर उतर रहा है. इस वक्त साधक किसी भी प्रकार के चिंतन को अपने मन मे ना रखे धीरे धीरे अभ्यास करने पर साधक को बाहरी आवाजे सुनाई देना बंद हो जाती है और वह अपने शरीर की अनंत गहेराई मे उतरता ही जाता है. व्यक्ति को धीरे धीरे अपनी कुण्डलिनी साफ़ दिखने लग जाती है जब वह पूर्ण रूप से अंदर उतर जाता है तब वह मूलाधार चक्र पर स्थिर हो जाता है. उसके बाद साधक अभ्यास को आगे बढ़ते हुए ऊपर उठे और धीरे धीरे आतंरिक चक्रों को देखने का प्रयत्न करे. इस प्रकार जब साधक आज्ञा चक्र को देखने मे समर्थ हो जाता है तब यह योग की पूर्णता को प्राप्त कर लेता है तथा नाद योग की तरफ आगे बढ़ सकता है.
नाद योग क्या है?
ब्रम्हांड की संरचना मे जो मुख्य ध्वनि रही है वह ध्वनि को नाद कहा जाता है. वह ध्वनियो मे मूल है तथा वह सर्व जड़ चेतन मे निहित है. वही नाद को ओम की ध्वनि कहा गया है. हमारे शरीर मे नित्य वह ध्वनि गुंजरित रहती है. उसी ध्वनि को आत्मसार कर ब्रम्हांड से अपना संपर्क बनाने के लिए जो योग है वही नाद योग है. यु शरीर मे मुख्य नाद के अलावा दो गौण नाद भी है. साधक नाद की ध्वनि को प्राप्त कर लेता है तो उस ध्वनि से निहित उर्जा का क्षय होने से बचता है तथा वह उर्जा योग के माध्यम से संग्रहित होती रहती है. यु साधक अपने इष्ट को प्राप्त करने मे समर्थ हो जाता है.
तो क्या इन विविध योगो का काल से कोई सबंध है?
योग तांत्रिक प्रक्रियाओ मे इन विविध योग पद्धतियों का संयोग तांत्रिक मंत्रो के साथ कराया जाता है जिससे की इसका प्रभाव तीव्र तथा त्वरित हो. जैसे की दोनों प्रक्रियाए अपने आप मे पूर्ण योगिक प्रक्रियाए है लेकिन अगर इनके साथ ही साथ तांत्रिक मंत्रो का संयोग करा दिया जाए तो साधक कम समय मे ही अपने लक्ष्य पर पहोच सकता है. तुम्हारी इच्छा इस प्रकार की प्रक्रियाओ की प्राप्ति की है तो आवाहन के माध्यम से तुम्हे वह प्रक्रियाए प्राप्त हो जाएंगी साथ ही साथ आवाहन से सबंधित कई गोपनीय तथ्य भी तुम्हारे सामने साकार हो सकेंगे....
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By accepting my prayers, sadgurudev disclose the complete process that first one should do anusthan of 1,25,000  mahakaali beej mantra ‘Kreeng’ which could be started on the 8th dark night of any month. By establishing yantra and picture of mahakaali in front one should complete the anusthan in one week during night time following all the rules and regulations of sadhana in which cloth and aasan should be black in colour and rosary should be black hakeek. When this anusthan get completed, same way start next anusthan certainly for dhoomavati beej “Dhoom” fo 1,25,000 chanting. The same rosary should be brought in use which has been previously used for mahakaali beej. When this anusthan is completed one should does next anusthan of mantra “dhoom kreeng Dhoom” with this a sadhak receive the stage where with the medium of yog-tantra exercise he can leave his actual time and could remain present in the past time with his shukshma form. With this sadhak should also apply practice of kundalini yoga. With practice sadhak can go as far possible in time factor as he wish.

How to practice kundalini yoga?

Sadhak should sit in peaceful atmosphere and by closing his eyes one should try to look and locate kundalini and should imagine to enter as deep as he can inside his internal infinite depth. At this time sadhak should not keep thoughts in his mind; slowly sadhak will not hear outer noise during practice and he starts travelling into depth inside body. Slowly sadhak will clearly starts watching his kundalini and when he completely goes inside, he find himself at muladhar chakra. At that stage sadhak should move ahead by going upward and slowly try to look at the inside chakras. When sadhak will get success in looking agya chakra at that time he may receives success in this yoga system and move ahead for naad yoga.

What is Naad Yoga?

The basic sound which has remained when the universe was created that is called naad. It is basic in sounds and the one which is present in all living and non living creature of the earth. The same is also called as sound of Aum. That sounds keep on playing in our body. To establish contact with whole universe by realizing the same sound is naad yoga. This way there are also 2 sub-sounds (naad) apart from basic naad. When sadhak holds that sound of naad then the power produced with that sound gets protection from loosing and that power is collected with yoga. This way sadhak becomes eligible to achieve ‘isht’.

So, does all these various yoga have relation with Kaal?

In yog tantric processes all these yoga systems are merged with tantric mantras with which the effect becomes firm and quick. Like both of these processes are completely yoga systems but if tantric mantras are included in these practices then sadhak can reach to his desired destination very quick. If your wish is to have such processes you may have it through aavahan with which you will also understand many mysteries related to aavahan….
   


                                                                                               
 ****NPRU****   

1 comment:

sureshbadar said...

bhiya aap ne bahut he guhya gyan ko bahut he saral vidhi se sabk samne rakha aap ko bahut bahut dhanyabaad