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Friday, September 16, 2011

Mekhala prayog for tantra siddhi


 तंत्र  में एक से एक विधान कहे जाते  हैं या दिए जाते हैं साधारण  साधक  को  यह बहुत अचरज लगता हैं की  की यह भी  प्रयोग करना चाहिए   फिर जाता हैं की यह भी करना चाहिए , फिर  यह भी जरुरी  भी हैं इसके  बिना    सफलता नहीं  मिल सकती हैं , या फिर  इसके लिए  यह भी विधान  भी जरुरी हैं , अब क्या क्या  हम और क्या नहीं  या तो यह विधान यह साधना  को ही करते रह जाये , मूल साधना  को कब करे ??   तो पहले  यह हम समझ ले , की यह क्षेत्र   ऐसा नहीं हैं  की बस यन्त्र माला  ले ली और कल एक  अनुष्ठान कर लिया और हम और  आप  विश्व प्रसिद्द  हो गए  , थोडा सा  देखें  की जिन्होंने  सफलता  पाई हैं कितनी कठिनाई  सहन की  हैं
 पर आप   कहेंगे  की वह एक ,आपके पहचान का  हैं उसे तो एक  ही बार में .. उसने  तो यह नहीं और यह  भी  नहीं किया था  .....तब भी ..
मित्रों , तंत्र जगत में  कुछ भी  एक दम  से नहीं होता हैं  अगर  किसी ने  विगत  जन्मो में साधना  की हैं या वह साधना की  हैं और  उसका  थोडा सा  ही रास्ता  बाकि था   तो उसे इस जीवन में  जल्दी ही सफलता  मिल  ही जाएगी/जाना  ही चाहिए     पर  इसका मतलब  हम हाथ पर हाथ  धरे बैठे रहे की कोई कर पहले हमें हमारे विगत  जीवन के बारे हमें बताये  की यह साधना  करो ..  
नहीं नहीं
 यह तो भाग्य वादी दृष्टी  कोण हो गयी हैं .  तो हमें  जब तक  सफलता  नहीं मिल  जाये  तब तक अपनी साधना के लिए  विशेष  विशेष विधान  समय समय  पर अपनाना  ही  चाहिए , यह बिलकुल हैं की  कोई  मात्र एक किताब पढ़ कर टॉप कर लेता हैं  तो किसी  किसी को  tution  भी लेनी पड जाती हैं पर सफल  तो सभी कहलाते हैं .

  ठीक इसी  पूज्य  सदगुरुदेव   जी ने अनेको विधान  दिए हैं आप से जिसको  लगे  यह विधान उनके  लिए  उपयोगी  हो सकता  हैं वह आगे आये  और इस विधान  को करे 
Imp:
 पर ध्यान  रखे  यह विधान  या  बहुत  ही उग्र  हैं  इसलिए कमजोर ह्रदय  वाले  को इस के बारे में सोचना  भी नहीं चाहिए 
मंत्र :
ॐ मेखले सर्व सिद्धिं तन्त्र सिद्धिं कुरु कुरु नमः
साधारण नियम :
·        दिशा दक्षिण. 
·        इस मंत्र को  रुद्राक्ष या काली हकीक माला से जपना  हैं 
·        काले वस्त्र पहन कर और काले आसन  ही उपयोग करना हैं 
·        निखिलेश्वरानंद  कवच  का  उपयोग करे  और आवश्यक  रक्षा विधान करके  ही इस प्रयोग में जाये 
·        क्योंकि स्मशान कोइ मजाक  या  प्रयोग करने की जगह नहीं हैं  इसका   विशेष ध्यान  रखे ,  
·        स्मशान मे रात्रि काल मे ( after 10 pm )२१ माला २१ दिन तक जपने से आगे की जाने वाली साधनाओं में तन्त्र सिद्धि होती है
 और साधक को आगे की साधनाओ के लिए देवी बिम्बात्मक रूप मे दर्शन देकर आशीर्वाद देती है
आज के लिए बस इतना  ही 


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 There are  various sadhana  and prayog  are in tantra sadhana jagat ,  and its   very natural that a common sadhak often get confused  on reading that this  sadhana /prayog is  must , and  this  too , and without this  prayog  one cannot get success , and  this is an essential sadhana , than what to do or not to do is a  big question ?, if we go  this way  so it seems  when  we have time  for  our   main sadhana ,???
 Than  at first we  understand  that , this is not  such a  field that  you  have  taken one yantra  and mala  and  just do  a single anusthan and  get  world  fame. Just  see  those who have  got success how much  hard work they  took.
 But on  replying this  simply you  would say that , he is  one whom you know , did not do any of  such thing and  got success in one attempt. why  Is it so …
 Friend  there  is no sanyog/coincidence   in  tantra sadhana , if  he  undertook that sadhana in his  previous life and  just little more was needed to have the success,  s o its  quite  natural  that   in this  life  he will get success  in very little minimum efforts. And   it should be , but that  does not means  that we just sitting  effortlessly , waiting for  some one  to come and  tell that  this sadhana  you have to  do  ,since in past life..
 No no
 Than is  just not  a good approach ,we should  apply each and  every sadhana that will give  us success  in  our aimed sadhana,  which is  in someone  views  helpful  for   success in  sadhana  . this is  just like that someone  get top in exam  by just reading a  book  and other one has to  take  tuition ,  but on the  success  both are considered  successful and equal  .
So considering these facts  poojya Sadgurudev  ji has  given  so many prayog , which ever you think good  for  you  , go ahead .
Imp:  keep it in mind this  prayog  is  tough ,  so  do not undertake  it in any cost  if  you are having weak in heart.
 Mantra :
  Om mekhle sarv siddhim  tantra siddhim  kuru kuru namah
General  rules :
  • Direction would be south
  • Do jap  with using  either  rudraksha  or  black hkik mala .
  • Use black color  aasan and  clothes.
  • Chant nikhileshwaranand kavach and  do necessary  rakshatmak vidhan .
  • Always  remember  shamshan is  not a place  for  joke  or  for experimenting .keep  this  always in mind.
  • In shamshan , night time(after 10pm)   do jap  21 round of rosary  for  21  days , than you  got  tantra siddhi .
And   devi   will bless  you   for  getting success in  coming  sadhana  .
This is enough for today
****NPRU****

1 comment:

Harshal said...

Bhaia ji, kya yeh sadhna sirf samshan me ki jaa sakta hai, kahi aur nai aur Chant nikhileshwaranand kavach kya hota hai and rakshatmak vidhan ke bare me bhi kuch btae.

With Respect
Harshal