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Saturday, September 24, 2011

VIGYAAN VA TANTRA BHED- 4(RAS VIGYAN VA TANTRA-2)


पारद क्षेत्र से सबंधित पुरातन विज्ञान नियमों के बारे मे हमने पिछले लेख मे जाना. यहाँ पर पारद विज्ञान के बहुचर्चित शब्द वेधन के बारे मे जानना आवश्यक है. सामान्य रूप से वेधन का अर्थ रस विज्ञान के क्षेत्र मे रूपांतरण से सबंधित है. लेकिन इसके साथ ही साथ वेध के गूढार्थ है. वेध से पारद के परिवर्तन करने की क्षमता का पता चलता है. परिवर्तन के साथ ही साथ एक नया तत्व सृजन के रूप मे भी सामने आता है. मृत्यु के बाद मनुष्य का शरीर पंचमहाभूत मे विलीन हो जाता है और उसके साथ ही साथ आत्म तत्व से उसका वापस जन्म लेना एक सृजन की प्रक्रिया है. लेकिन यूँ  मूलतः ये सृजन, परिवर्तन के नियम से ही आकार लेता है. वेध की क्षमता जीस प्रकार रस मे होती है उसी प्रकार चेतना धारण करने वाले सभी तत्वों मे वेध क्षमता होती है. वो क्षमता बीज मे समाहित रहती है, उसी द्वारा वेध कर के मनुष्य अपने जैसे किसी मनुष्य को जन्म दे सकता है. उस बीज मे निहित वेध क्षमता के माध्यम से वह एक परिवर्तन करता है, जिससे सृजन संभव हो पता है. पारद तो शिव बिंदु है, इसी लिए उसमे सब से ज्यादा वेधन क्षमता का होना स्वाभाविक है यही नियम से वह अपने से अनंतगुना वेध कर सकता है, मतलब की परिवर्तन कर सकता है. वेध के पांच प्रकार है लेप, क्षेप ,कूप, शब्द और धूम्र, इसके बारे मे संक्षिप्त वर्णन पहले ही दे दिया गया था. वेध की क्षमता का एक निश्चित स्तर तो हमारे पास होता है, लेकिन पारद से उसी वेध क्षमता को आगे बढ़ाया जाता है और अनंतगुना किया जा सकता है. धातु रूपांतरण के पक्ष मे यही तथ्य है की अगर पारद धातु का वेध कर उसकी क्षमता को बढ़ा सकता है तो वह मनुष्य का भी आतंरिक वेध कर उसकी क्षमता को बढ़ा सकता है. इसी लिए पारद के विविध कल्प है जिसके बारे मे रससिद्ध नागार्जुन ने कहा है की पारद के विशेष कल्पों का सेवन करने वाले व्यक्ति के मूत्र से भी वेधन संभव है. रस सिद्ध नित्यानाथ ने तो यहाँ तक कहा है की ऐसे व्यक्तिओ के पसीने मात्र से भी वेध संभव हो जाता है. उनका तात्पर्य तो मनुष्य मे वेधन क्षमता का विस्तार पारद किस हद तक कर सकता है ये बताना था लेकिन इन प्रक्रियाओ को हमने स्वर्ण निर्माण से जोड़ दिया है. वस्तुतः यह पारद विज्ञान या रस विज्ञान पूर्णतः शुद्दीकरण, वेधन और गुणाधान के पुरातन वैज्ञानिक नियमों पर ही आधारित है. आगे के लेख मे हम रस के तन्त्र पक्ष पर कुछ चर्चा करेंगे.
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We understood about concepts of ancient science related to the paarad field in last article. Here it is essential to know about one famous word in paarad field ‘Vedhana’. In general the term in rasa vigyana is related to the transformation. But with that there are secret meanings related to vedha. With vedh, the power of mercury could be measure. With transformation a new thing comes to the existence in the form of creation. After death, human body get dissolve in five basic elements and with that holding aatma tatva the new birth is the process of creation only. But in actual, this creation does take place with the bounding concepts of transformation only.  The way rasa have power of transformation, the same way every conscious being owns the power of transformation. What so ever holds that power of transformation, with the same performing vedha human can give birth to another human. One creates a transformation of the beeja, with which creation becomes possible.  Paarad is shiv bindu, this way; it is natural to have biggest power of vedhana. With the same concept it can transform or in other words can do vedhana infinite times than its own.  Vedha are basically five types; lep, kshep, kup, shabd and dhumra about which a short description has previously given. A limited stage of vedhana power we humans even do have, but with paarad the same vedhana power could be increase and could be taken to infinite time. On the metal transformation side, the final fact is the parad which can increase capacity and power of metals through vedha therefore it can cause inner vedhana in humans and increase our capacity of infinite time too.  For which there are so many paarad kalpa about which ras siddha nagarjuna said that the one who consume special kalpas of paarad even urine of that person can cause vedhana. Ras siddh nityanath said that the sweat of such person even can cause vedha. Their aim was to describe about paarad’s capacity to transform human powers but we relate these processes with metal preparations. Literally, this paarad vigyan / ras vigyan is completely depended on the ancient scientific concepts and rules of complete purifications, vedhana and gunadhana (power increment). In next part we’ll discuss about tantra side of ras.
****NPRU****

1 comment:

Pawan Madan said...

Bhaiya is series ko please aage continue kariye.