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Monday, September 5, 2011

NISHCHIT MANOVANCHHIT PREM PRAPTI SADHNA


मानव जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और बहुमूल्य भाव है प्रेम !!!! जो जीवन में दबे पांव आता है और पूरे जीवन और व्यक्तित्व को ही आमूल चूल परिवर्तित कर देता है lयदि मानव संवेदना से विहीन भी हो तो तब भी उसकी संवेदना को पूरी तरह जगा ही देता हैlआप परिवार के साथ ही जन्मते हो,बढते हो और अपने जीवन के नवीन आश्चर्यों से दो-चार भी होते हो ,पर जैसे ही प्रेम आपके जीवन में आहट देता है अचानक उस व्यक्ति विशेष को छोड़कर बाकी सब आपको निरर्थक लगने लगता है l

   पर क्या मात्र जीवन में प्रेम होने से ही जीवन को पूर्णता प्राप्त हो जाती है ? नहीं ऐसा बिलकुल नहीं हैllll बल्कि सच्चाई ये है की प्रेम का जो स्वरुप हमने उसके प्रारंभ में देखा था,वही समय के साथ प्रगाढ़ होता चला जायेlllतभी प्रेम की सार्थकता कही जाती है l
     पर अक्सर ऐसा होता नहीं है lमैंने अब तक लगभग ७०,००० से ज्यादा हाथ और जन्मकुंडलियों का अध्यन किया है lऔर प्रेम प्रकरण में मैंने लगभग ९६% प्रेम विवाह और प्रेम प्रकरण में असफलता ही देखी है...फिर वो चाहे विवाह के पहले हो या विवाह उपरांतlदोनों ही स्थिति में सिर्फ भग्न ह्रदय,एक उदास निश्वांस और जीवन भर की टूटन लिए हुए लोगो को देखा हैlllऔर साथ ही ये वाक्य भी की “प्रेम जैसा कुछ भी नहीं होता है”l ये मात्र छलावा है और कुछ नहीं l और ऐसा कहना कुछ गलत भी नहीं होता है lक्यूंकि अक्सर हम आकर्षण को प्रेम की संज्ञा दे देते हैं जो पूरी तरह गलत कहा जायेगाl प्रेम एक तरफ़ा हो ही नहीं सकता.... क्यूंकि वेदना का बीज ही रोपित हो जाता है ,यदि व्यक्ति एक तरफ़ा प्रेम में पड़ जाए,अब ऐसे में तो परिणाम दुःख ही होगा ना l
  ज्योतिष शास्त्र में ऐसे कई योग निरुपित किये गए हैं जो की प्रेम संबंधों में असफलता को दर्शाते हैंl और प्रेम सम्बन्ध का लेना देना विवाह के पहले नहीं अपितु जीवन के आखिर तक होता है,उसी का जीवन सुखी कहा जाता है और उसी के जीवन में आनंद का प्रवाह होता है ,जिसे ताउम्र प्रेम भाव का स्थायित्व मिले खुद के जीवन मेंl विवाह के पहले भी और विवाह के बाद भी lपरस्पर एक दुसरे के प्रति प्रबल समर्पण और खुशी देते रहने की भावना ही प्रेम की सार्थकता कहलाती है l
परन्तु प्रश्न ये है की ऐसी आनंद की स्थिति की प्राप्ति कैसे हो सकती है????
नीचे उसी प्रयोग को मैं आप सभी भाई-बहनों के समक्ष रख रहा हूँl जो ‘रति आमोद तंत्र’ में वर्णित हैlये तंत्र काम भाव और प्रेम के ऐसे ऐसे रहस्यों को अपने आप में समेटे हुए जिनका वर्णन भी मन को अत्यधिक आह्लादित कर देता है l यदि ये कहा जाए की प्रेम और काम भाव की पूर्ण प्राप्ति की कुंजी ही है ये ग्रन्थ तो अतिसियोक्ति नहीं होगीl वस्तुतः ये तंत्र मिश्र तंत्र ही कहा जायेगा ,जिसमे विविध प्रकार की साधनाओं का संकलन किया गया है l सभी साधनायें एक से बढ़ कर एक और सभी प्रेम भाव की पूर्ण प्राप्ति से सम्बंधितl
  और सबसे बड़ी विशेषता ये है की ये जीवन के तृतीय अनिवार्य पुरुषार्थ ‘काम’ के भी समस्त व्यवधानों और विकारों की समाप्ति इन प्रयोगों के माध्यम से होती ही है l और इन साधनाओं और प्रयोगों की एक विशेषता मुझे हर दम आश्चर्य में डाल देती थी की ये प्रयोग कदापि वशीकरण प्रयोग नहीं हैं, या ये किसी एक को आप के वशीभूत नहीं करते हैं ,बल्कि ये उन वर्ण विन्यासो से रचित हैं जो साधक और उसके अभीष्ट इन दोनों को ही एक दुसरे के प्रति पूर्ण समर्पित कर देते है l और ये साध्य और साधक के मष्तिष्क पर प्रभाव ना डालकर उनके  अन्तः मन को ही पूर्ण अनुकूल करते हैं जिससे की प्यार का ये प्रभाव उन दोनों के चित्त पर अनंत काल तक स्थायित्व पा सकेl इस ग्रन्थ में वर्णित प्रयोगों को और उनके प्रभावों को मैंने कई बार परखा है l सदगुरुदेव की सन्यासी शिष्या सौंदर्या माँ के पास मैंने ये ग्रन्थ देखा था और उन्ही से इसके प्रयोगों के विधान को मैंने हृदयंगम किया था l
क्या क्या करते हैं ये प्रयोग:-
जब आप किसी से पूर्ण ह्रदय से प्रेम करते हो,और वो आपकी उपेक्षा कर रहा हो l
जब आपने परस्पर साथ निभाने का वादा किया हो,और कोई एक उसे तोड़ने के लिए लालायित हो l
जब आप परस्पर प्रेम करते हों और विवाह में बाधा आ रही हो l
जब अचानक दांपत्य जीवन बिखरने लगे और उसमे से आनंद सुख समाप्त ही हो गया हो l
जब अचानक हमारा साथी किसी दुसरे की तरफ आकर्षित होने लग जाये l
जब हमें ये समझ में नहीं आ रहा हो की हम जिसके साथ चल रहे हैं ,वो प्रेम कर रहा है या मात्र दोस्ती निभा रहा है l
जब हमारा प्रिय मित्र हमसे रूठ कर दूर जा रहा हो .
जब हम पूर्णता के साथ पूरे जीवन भर प्रेम भाव से युक्त रहना चाहते हो l
जब हमारा प्रेम हम हमारे सदगुरुदेव के चरणों में पूर्णता के साथ अर्पित करना चाहते हो और पूरी तरह उनके श्री चरणों में अपने आपको समर्पित रखना चाहते हो l
जब हम सौंदर्य की पूर्ण प्राप्ति करना चाहते हो अपने जीवन में l
जब हम अप्सरा,योगिनी और यक्षिणियों का पूर्ण साहचर्य पाना चाहते हो और इसके पूर्व हमें इन साधनाओं में असफलता मिली हो l
   इन सभी स्थितियों को पूर्ण अनुकूल बनाने हेतु ही इन प्रयोगों का प्रयोग किया जाता हैl उपरोक्त ग्रन्थ में ३१९ विधियाँ वर्णित हैं ,इनमे से सर्वाधिक सरल और तीव्र प्रभावयुक्त विधि का मैंने विवरण दे रहा हूँl जो मेरा अनुभूत हैl बाकी की लगभग सभी विधियों में पारद दीप और गुटिकाओं का प्रयोग होता है,और लोगो को ऐसा लग सकता था की मैं उनका विज्ञापन कर रहा हूँ,वास्तव में पारद तीव्र आकर्षण क्षमता से युक्त है ,परन्तु वो सब यहाँ लिखना उचित नहीं होताlइसलिए उन प्रयोगों को ना देकर दूसरी तीव्र और निरापद विधि का वर्णन कर रहा हूँ जिसमे पारद का कोई विग्रह प्रयुक्त नहीं होता है l
  ये प्रयोग शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से ३ दिन का है lइस प्रयोग के लिए गुलाबी वस्त्र,आसन  और पुष्प की आवशयकता होती है l अर्ध रात्रि में इस प्रयोग को किया जाता है l प्रतिदिन ११ माला जप स्फटिक माला से किया जाता हैl प्रयोग के प्रारंभ में स्नान करके अन्तः वस्त्र नहीं पहनना है.मात्र धोती या साडी धारण करना है. पूजन कक्ष में आसन पर बैठ कर दैनिक साधना विधि से सदगुरुदेव और भगवान गणपति का पूरी तरह पूजन कर साधना और साध्य से सम्बंधित संकल्प ले और बाजोट पर गुलाबी वस्त्र बिछाकर उस पर कुमकुम से निम्न यन्त्र अंकित कर उसके मध्य में चौमुखा दीपक प्रज्वलित कर दे और उसका पूजन निम्न मन्त्रों से करे और जहाँ जहाँ ‘क्लीं’ अंकित है वहाँ कुमकुम और गुलाब का इत्र लगाएं. गुलाब के पुष्प,लवंग,कपूर,पान और खीर का भोग अर्पित करे . यन्त्र अंकित करते समय निम्न मंत्र का २१ बार उच्चारण करे और बाद में दीपक जलने के पहले कुमकुम से रंगे  १०८ चावलों को यन्त्र बनाते समय उच्चारित किये गए मन्त्र से एक-एक करके उस यन्त्र और दीपक पर अर्पित करें.
 यन्त्र बनाते समय उचाचरण करने वाला मंत्र –
क्लीं रत्यै क्लीं नमः
मूल मन्त्र-
अनंग की रानी अनंग की रानी सुन्दर रति कहावे, रति रति  काम पुष्प बाण बिराजे,काम की रानी अनंग की रानी चित्त बीच ठोर लगावे,प्रेम भाव उपजावे, उलझी मति सुलझावे ,जो ना ठोर लगावे ,कारज ना कर जावे तो दुहाई सारंग नाथ की,छू ..
अंतिम दिवस तक नित्य यही क्रम रहेगा.आखिरी दिन साधना पूर्ण होने के बाद सद्गुरु के चरणों में  सफलता की प्रार्थना करे और सभी सामग्री सुनसान स्थान पर विसर्जित करदे.ये प्रयोग परखा हुआ है.आप भी अपना अभीष्ट प्राप्त करे ,ऐसी ही मैं सदगुरुदेव से सभी के लिए प्रार्थना करता हूँ.
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One of the most important and precious aspect of human life is…..LOVE!!!!! which silently marks its existence in life and changes everything….even sometime our basic roots. It has the capacity to arise the sleepy emotions as since from our birth we spend each and every second of our life with our family to experience every growing step of our age but as soon as love enters in our life in the form of our dream girl or prince charming suddenly our whole life starts revolving around him or her.
But is it so that only love can accomplish one’s life……definitely a big “NO” because love remains true only then when it remains the soon bubbly and lovely as it was in its initial state…..then it will call a true love.
But usually it doesn’t happen as till date I have done palmistry of approximately 70,000 Hands and janamkundlies and out of this 96% were met with failure in case of love affairs and marriages too though it happens before marriage or after hardly matters as in both cases results remains the same….broken hearts, destroyed faith and unfulfilled dreams which remains shattered till end of life with the piercing feeling that “ There is nothing like love exists”. And at some extent this is true as mostly we entitled our attraction with love which is completely wrong as love can never be one sided….as one sided love is bound to bring sorrow and disaster with itself…isn’t it….ya it is!!!!!
In the saga of jyotish shastras there are so many yogs are inscribed which explained failure in love as love deals not only with dating which we done before marriage as it goes along till the end of life. Only that person can be and should be considered happy in his life that gets love from the very beginning till end and that too constantly. As only that two persons can do this who remains one from their soul and their first and foremost priority is to give his/her complete devotion and care to his/her partner.
But but but!!!!!!! Here the most important query is how this feeling or emotion can be gained?? So for all of you my dear I am explaining that procedure which is inscribed in “RATI AMOD TANTRA” as this granth is compilation of mysteries of love and sexual feelings and this is not hyperbole statement if this granth is entitled as “the key for success in love and sex”. As in it there are so many sadhnaas are given which are wholly solely about the success in love and rare are of their kinds.
The most important thing is that through these procedures one can get resolves issues about the third most important aspect of life i.e. sex. And the extraordinary fact about these procedures is that they are not on based on hypnotism or single handed procedures as by doing these procedures saadhak and his deity becomes one with complete devotion for the whole life. These procedures cast their effects on the heart of their doer instead of mind so that effects can be long lasting. I too have personally cross check their authenticity. One of the sanyasi shishya of Sadgurudev, Soundarya Maa has this granth with herself and I saw it and learn it by heart when I was with her.
What miracles can be performed by these procedures?
When you truly love someone but he/she is avoiding you…
When you both are committed in relationship but the other one is about to break it…
When you both want to get married but problems are happing…
When suddenly married life get disturbed and happiness get ruins properly….
When suddenly our partner get attracted towards someone…
When we are double minded that the person with us is actually in love or just carrying on his friendship…
When our love one is slipping away from us…
When we want to lead a loveful life…
When we want to offer our life and love on the holy feet of our Sadgurudev with complete devotion and dedication….
When we want to achieve complete beauty in our life…
When we want to enjoy the company of Apsaras, Yakshinis or Yoginis in our life and prior witnessed failure in these sadhnaas...then these sadhnaas can be conducted to make the conditions favorable.
Above given named granth have 319 sadhnas in its command and out of that I am giving here the most practical and easiest procedures over here that too are experienced by me. Actually in all other practicals Parad Deepak and Parad Gutika are used and if I give that procedures then it may sound that I am just advertising them so leave that matter but the actual fact is that Parad ( mercury) has the capacity of fastest attraction…. anyway the procedures I am mentioning here can be conducted without parad.
This procedure is about of three days that is from the Friday of Shukl Pakshh to following three days. In it one need pink dress, pink altar (aasan) and pink flowers and this sadhna can carry on mid night. Per day 11 mala mantra chanting by Sfatik mala . At first one should take bath and just need to wear single cloth that is loin cloth (dhoti) or saree. Than in pooja room in front of Sadgurudev and bhagvan Ganpati offer your daily Poojan and took resolution related your sadhna and put pink clothe on Bajot then make below given yantra on it and offer kumkum tilak (vermillion mark) to it then lit four faced earthen lamp (chomukha Deepak) at yantra’s centre and starts its pooja with below given mantra and in the mantra at the place of word “kleem” offer kumkum and rose scent. Then kheer as bhog (holy food) offer rose flowers (pushp), loung, camphor (kapoor) and paan (betel leaf). Before making of yantra speak out given mantra for 21 times and before lighting the Deepak offer 108 rice pieces to the Deepak and yantra that too should be colored with kumkum.
Mantra that need to speak while yantra making is-
Kleem Ratyai Kleem Namah
Mool Mantra
 Anang Ki Raani Anang Ki Raani Sunder Rati Kahave, Rati Rati Kaam Pushp Baann Biraje, Kaam Ki Raani Anang Ki Raani Chitt Beech Thour Lagave, Prem Bhaav Upjaave, Uljhi Mati Suljhave, Jo Na Thour Lagave, Kaaraj Naa Kar Jaave To Duhaai Saarang Nath Ki, Chhu.
…carry on the same process till the last day and on the last day took Sadgurudev’s blessings and dispose the whole material at some deserted place. This practical is reliable and you too get your destination is my whole hearted prayer for all of you… 
****NPRU****

1 comment:

Abhi said...

please give the yantra.. ithink you have forget to write yantra here.
but it is mention in the procedure.

thnx