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Monday, October 3, 2011

To establish a friendly relation between near and dear one


आधुनिक सभ्यता  हमारे सामने  एक एक से ऐसे अजूबे रखती जा  रही हैं  की जो  कुछ समय पहले संभव  नहीं थावह  आज   तकनिकी के  कारण  सभव   होता  जा रहा हैं और   विज्ञानं  के नये नए  आविष्कार  से हमारा  जीवन सुख सुविधा से  और  भी संपन्न होता  जा रहा  हैं ,  और  यह स्वीकार करने   में किसी  को कोई भी हिचक नहीं    होगा  की आज  इस  आधुनिक सभ्यता   के वरदान के   बिना  जीना  असंभव  तो  नहीं  पर  बहुत कठिन अवश्य  ही  हो जायेगा 
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पर  इस सुख सुविधा की आड़ में  कुछ क्या बहुत कुछ खोता भी  तो जा रहे हैं ,,हम सभी महसूस  तो क रते हैं पर  क्या  करे  जीवन की आप धापी  ही ऐसी हैं और अकेले   हम क्या   कर लेंगे  पर ऐसी सुख सुविधा का अर्थ क्या   हैं  जब मन  में शांति न हो ,, पर चलिए मन कि शान्ति को छोडिये  वह तो एक अलग विषय हैं   पहले   संयुक्त परिवार थे  ... जो आज के  दिन एक आश्चर्य से बन गए हैं लोग बहुत  ही आश्चर्य से देखते हैं कि आप  के  यहाँ अभी   भी इतने लोग  साथ में ..
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पर चलिए  यह  भी संभव  न   हो पाए  कि एक साथ  रहे ,, तो दूर से  ही  सही  कम से कम एक दुसरे के दुःख सुख में साथ  रहे  यही भी किसी  वरदान से कम नहीं   हैंकी जब भी  वे हमारे  यहाँ  या हम उनके यहाँ जाए ,,  तो पूरे स्नेह  के साथ वह भी हमारा स्वागत  करे ,और हम   भी ऐसा  करे,

पर हम तो करना चाहते  हैं  पर वह लोग ही अड़ियल हैं ,,उनका स्वभाव् ही ऐसा हैं,,उन्हें अपने  उपर बहुत घमंड हैं .अगर एक वह सुधर जाये   तो हम लोग का स्नेह वापिस आ सकता हैं ऐसी अनेक बातो से कौन नहीं बचना चाहता  क्योंकि तीज त्यौहार का एक अपना ही आनद हैं  यदि  चाचा ,मामा ,  फूफा  सभी के परिवार  स्नेह  से मिले ..

 पर चलिए यह भी बहुत बड़ी सी बात हैं  अब तो विवाह के नाम से ऐसे ऐसे सम्बन्ध आ रहे  जो बस अभी एक दशक  पहले सुने भी नहीं गए थे जहाँ  पति पत्नी  का एक ही कमरा  होता  था  उन्हें एक ही इकाई  माना जाता  हैं/ था पर अब तो इधर भी अलग अलग   कमरे चाहने लगे हैं ,,

किसे  समझाए की स्नेह   ही   जीवन का आधार  हैं उसके  बिना  सारी  चीजे  एक यांत्रिक  हैं 
इस बात  को ध्यान में रखते हुए  एक सरल सा प्रयोग   जिसकी  पूरी  बुनियाद आपके  विस्वास  पर ही टिकी हैं आपके सामने  हैं.
 मन्त्र :
 धां धीं धूं धुर्जटे पत्नि वां  वी वूं वाग्धिश्वरि 
क्रां क्रीं क्रू   कालिका   देवि  शां शीं शूं शुभं कुरु ||


आपको भगवती महाकाली  की  जो भी सामान्य पूजन  बन  सके करके  इ स प्रयोग  को संपन  करे हर पूजन में    दीपक  का एक अर्थ होता   हैं वह वास्तव मे    अग्नि देवका  प्रतीक  ही होता हैं तो एक दीपक  जप काल में  तो लगा रहना ही चाहिए 

अब कितने  दिन तक करे यह तो आप के  ऊपर हैं  वेसे  तो यह कोई कठिन नहीं    हैं तो जब तक आपके  अनुसार   आपके  या तो अपने परिवार में    या  आपके  रिश्तेदारों मतलब निकट संबधीयो से  जब  तक अनुकूलता  न मिले  करते जाये पर कितना  करे  जप  यह भी आपके  ऊपर  ही हम छोड़ देते हैं वेसे एक माला  तो कम से कम करना   ही चाहिए .... 
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There are many  miracles that  has  been brought   in front of our eye  by the modern  science, what that has not been possible , some times back , is now became a reality . and our way  of life is full of more and more comforts. And no one can deny  the blessing of modern technology . without   that our life would be   much harder.
But we are paying  a lot for these comforts , we all are feeling the same  but  what we can do ,  this is the way of  modern life and  what we can be done alone . when you  are not  having peace in your  heart/mind,  ok   just leave this question, that became a separate subject,  in the beginning   there  were united family , but now a days those also become  a very rare things, people  now a days  can not believe that   still there are still some  united family.
 But when this would not  be possibility to have united family  than   even we are  residing  a distance  but  common  love  and respect should  be  part of our relation  , like that when we visit there , they became really happy and same is applicable   to us.
 We all  want to do that ,  but  these are the common excuse  like  he is not co operating,   they are very rigid , they are very egoistic are  very common . but we all feel that when any  good or festive occasion comes and if we all  together than our joy will be thousand  fold increases.
But just leave that  , consider  relation between husband  and wife  sometimes back they (both)are considered a single entity /unit  but   now a day such a relationship coming/increasing   in that even  both are  demanding separate rooms  in  many family.
Who has the time  to understand that sneh/love is the basic foundation  of  any relation. Other wise  things become just  mechanical .
   To consider all those   things  here is the very simple  prayog  , the  success of that  totally rests  upon  your faith ,
Mantra :
dhaam dhiim dhoom dhoorjateh pathni vaam vim vum vaagadheeshwari

kraam krim kroom kalikaa devi shaam shiim shoom me shubham kuru 

just   do the simple  poojan  of goddess Mahakali and   light an earthen lamp .
 how many days  this prayog has to be  done  is totally depend  upon you, when you feel  that    the needed happiness and cooperation comes than you can stop, and second  how many   round of  rosary is need  , at least one round is must. no other rules  are required .

****NPRU****   

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