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Saturday, December 15, 2012

PAARAD SHRIYANTRA SADHNA


 
It has been said in shastras that-

Yaa Devi SarvBhuteshu Shrirupen Sansthita |
Namastasyai Namastasyai Namastasyai Namo Namah ||
   
The Shri Yantra Sadhna Vidhaan which has been mentioned in previous articles is described below. I did this Vidhaan on Asht Sanskarit and Chaitanya Parad Shri Yantra by the orders of Guru. I was not able to achieve desired results of this prayog on other type of Shri Yantra. Therefore , you all can apply your mind , do it accordingly and get complete results.
Do the Poojan of Shri Yantra and sadhna on fixed Muhurat as below(16 december,1 january or the only your date of birth (only birth date not birth month reqrd here).
At approximately 10:30 in the night, take bath, wear red cloths, and sit on red aasan facing north direction. In absence of red aasan, one can use any aasan except black aasan. Poojan articles will include normal daily poojan articles, Red sandal. In absence of red sandal, one can mix vermillion in white sandal. One can use red or yellow coloured flowers i.e. jwa flowers (Hibiscus rosa-sinensis), Semvati, Marigold or rose flower. One will need Kheer, Kesar and rice coloured with vermillion and piece of red cloth. Moonga rosary, Kamalbeej rosary, Rakt Chandan rosary or Sarv Siddhi rosary can be used for chanting.
Spread red cloth on Baajot and make one Maithun Chakra on it by vermillion. Picture is given above. Place one copper plate on it. First of all, do poojan of Sadgurudev and Vinayak and chant Guru Mantra according to your capacity and offer it in his lotus feet. Take water, flower and rice in your hand and pray for fulfilment of wish and take Jap Sankalp for fulfilment of wish and put the water in any other container placed in front of you. Now establish yantra Raj in copper plate, take flower in hand and do dhayan of Bhagwati while taking flower in hand by below mantra.
Dhyaayeniraamyam  Vastu Jagatryvimohineem |
Asheshvyvhaaraanaam Swaaminim Samvidim Paraam ||
Udhyatsoorya Sastrabhaam Daadimikusumprabhaam |
Japakusumsankashaam Padmraagamniprabhaam ||

After this, do the Pratishtha of Shri Tripura Devi in yantra by offering vermillion-coloured rice (kept in your hand) while chanting below mantra 7 times
OM BHURBHUVAH SWAH SHREE TRIPURADEVYEI EHAAGACH EH TISHTH

After Pratishtha, offer water on yantra by Aachmani (copper spoon) and chant below mantra
OM MANDAKINYA SAMANEETAIH HEMAMBHORUH-VAASITEIH SNANAM KURUSHAV DEVESHI

Offer red sandal by chanting Salilam Ch Sugandhibhih Om Shri Tripura Devyai Namah Edam Rakt Chandnam Lepnam.
Offer vermillion by chanting Om Shri Tripura Devyai Namah Edam Kumkumaabharnam
Offer Dhoop by chanting Om Shri Tripura Devyai Namah Edam Dhoopam Aaghrapyaami
Show Til/ Ghee lamp by chanting Om Shri Tripura Devyai Namah Edam Deepam Darshyaami

Om Mndaar-Paarijaatadhyaih Anekaih Kusumaih Shubhaih Poojyaami Shive Bhaktyaa , Kamlayai Namo Namah Om Shri Tripura Devyai Namah Pushpaani Samarpyaami –offer flower by this mantra.

Offer some rice 7 times on piece of red cloth by chanting “HREEM KLEEM HASOUHM” seven times. Then offer red cloth on Shri Tripura Devi by chanting Om Shri Tripura Devyai Namah Edam Rakt Vastr Samarpyaami

After it, do Ang Poojan of Devi (worship body parts of Goddess)

Take vermillion mixed rice in left hand and offer them on Yantra Raj by right hand.
OM SHREE TRIPURAAYAI NAMAH PADAU POOJYAAMI
OM BHAGVATYAI NAMAH JAANUM POOJYAAMI
OM SAUBHAGYA DAAYINYAI NAMAH KATI POOJYAAMI
OM DASH MAHAVIDYAI NAMAH NAABHI POOJYAAMI
OM POORNSIDDHI DAATRYAI NAMAH JATHARAM POOJYAAMI
OM SHRI VIDYAI NAMAH VAKSHSTHAL POOJYAAMI
OM SARV SIDDHI DAATRYAI NAMAH BHUJAU POOJYAAMI
OM SHRIYAI NAMAH NETR TRAYAM POOJYAAMI
OM RAAJ RAAJESHVARYAI NAMAH SARVAANGE POOJYAAMI

After it, do the poojan of Asht siddhi on yantra again.

Just like Ang Poojan, take piece of flowers and vermillion-mixed rice in hand and offer them on yantra while chanting mantras.
Om Animne Namah
Om Mahimne Namah
Om Garimne Namah
Om Laghimne Namah
Om Praptyai Namah
Om Prakaamyai Namah
Om Ishitaayai Namah
Om Vashitaatai Namah

After it, just like Ang poojan and Asht Siddhi Pooja , vermillion-coloured rice in hand and offer them on yantra while chanting mantras.

Om Kriyaayai Namah
Om Gatyai Namah
Om Saubhagyai Namah
Om Urdhvditaayai Namah
Om Shriyai Namah
Om Praan Siddhi Daatryai Namah
Om Aatm Siddhi Daatryai Namah
Om Amrit Tatvaayai Namah

OFFERING NAIVEDYA

After poojan, offer Naivedya of Kheer to Devi by mantra “ Edam Naanaavidhi Naivedyaani Om Shri Tripura Devyai Samarpyaami”
After offering Naivedya, do aachman by chanting below mantra Edam Aachmaniyam Om Shri Tripura Devyai Namah
Now offer camphor and paan Edam Taambool Pungifal Karpoor Samayuktam Om Shri Tripura Devyai Namah
Now take flower in hands and offer it to Shri Tripura Devi and say Aeshah Mantra Pushpaanjali Om Shri Tripura Devyai Namah

After it do Praanmayam at least 4-7 times and chant 54 rosaries of the below mantra.

OM SHREEM HREEM SHREEM PRASEED SHREEM HREEM SHREEM HUM.
After it offer Jap by showing Yoni Mudra, pray to Bhagwati, apologize and pray for fulfillment of wish. Take the Kheer while sitting at same place. On the next day, establish yantra at worship place or in safe. Whenever possible, chant this same mantra 108 times daily and offer dhoop and lamp to yantra. You yourself will experience the results.

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शास्त्रों में उद्धृत है की-

या देवि सर्वभूतेषु श्रीरूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||
   
      जिस श्रीयन्त्र साधना विधान का वर्णन विगत लेखो(http://www.nikhil-alchemy2.blogspot.in/2012/11/paarad-shriyantra-aur-mera-anubhav.html मे किया गया था,उसे नीचे वर्णित किया गया है,इस विधान को मैने अष्ट संस्कारित तथा चैतन्य पारद श्री यन्त्र पर ही गुरु आदेश से संपन्न किया था,अन्य प्रकार के  श्रीयन्त्र पर इसका प्रयोग कर देखने मे आशानुकुल फल की प्राप्ति नही  हो पायी थी.अतः आप अपने स्वविवेक से इसे संपन्न कर इसका पूर्ण फल प्राप्त कर सकते हैं.
निर्धारित मुहूर्त पर (जैसे १६ दिसंबर,१ जनवरी या जनवरी माह की वो तारीख जो आपकी जन्मतिथि हो,मात्र जन्म तारीख जन्म माह कोई भी हो सकता है) पारद श्रीयंत्र का पूजन और साधना निम्नानुसार करें.
रात्रि के करीब १०.३० बजे स्नान के पश्चात रक्तवस्त्र धारण करके उत्तर दिशा की ओर मुख करके लाल आसन पर बैठ जाएँ,अभाव में काला आसन छोड़कर कोई भी आसन प्रयोग किया जा सकता है.पूजन सामग्री के रूप में सामान्य दैनिक पूजन सामग्री,रक्त चन्दन,यदि रक्त चन्दन ना हो तो सफ़ेद चन्दन में थोडा सा कुमकुम मिला सकते हैं,लाल या पीले पुष्प,यथा जवा पुष्प,सेवंती,गेंदा पुष्प,गुलाब का प्रयोग किया जा सकता है.खीर,केसर,कुमकुम और कुमकुम से रंगे हुए अक्षत.लाल वस्त्र का टुकडा,जप के लिये मूङ्गा माला,कमलबीज की माला,रक्त चन्दन माला,सर्वसिद्धि माला का प्रयोग किया जायेगा.
सामने बाजोट पर लाल वस्त्र बिछा कर उस पर कुंकुम द्वारा रञ्जित मैथुन्चक्र का निर्माण करें,चित्र ऊपर दिया गया है. उस पर एक छोटी तांबे की प्लेट रख दे.सर्वप्रथम सदगुरुदेव का और भगवान विनायक का पूजन करें तथा गुरुमन्त्र का सामर्थ्यानुसार जप कर उनके श्री चरणो में अर्पित करें.तथा हाथ में जल तथा पुष्प और अक्षत लेकर अपनी मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें तथा उसी मनोकामना की पूर्ति हेतु जप का संकल्प ले कर जल सामने रखे किसी अन्य पात्र में डाल दे.अब तांबे की प्लेट में यन्त्रराज की स्थापना करें और हाथ में पुष्प लेकर भगवती का ध्यान निम्न मन्त्र से करें.
ध्यायेन्निरामयं वस्तु जगत्रयविमोहिनीम |
अशेषव्यवहाराणाम् स्वामिनीं संविदं परां ||
उद्यतसूर्य सस्त्राभां दाडिमिकुसुमप्रभां |
जपाकुसुमसंकाशां पद्मरागमणिप्रभां ||

इसके बाद यन्त्र में श्री त्रिपुरा देवी की प्रतिष्ठा हाथ में रखे हुये कुंकुम रञ्जित अक्षत डालते हुये निम्न मन्त्र का 7 बार उच्चारण करते हुए  करें.
ॐ भूर्भुवः स्वः श्री त्रिपुरादेव्यै इहागच्छ इह तिष्ठ.

प्रतिष्ठा के बाद यन्त्र पर आचमनी से जल अर्पित करते हुये भगवती को स्नान कराएं और निम्न मन्त्र का उच्चारण करे.ॐ मन्दाकिन्या समानीतैः, हेमाम्भोरुह-वासितैः स्नानं कुरुष्व देवेशि.

सलिलं च सुगन्धिभिः ॐ श्रीत्रिपुरा देव्यै  नमःइदं रक्त चंदनम् लेपनम् से रक्त चंदन लगाएं. 
ॐ श्रीत्रिपुरा देव्यै  नमः इदं कुंकुमाभरणं से कुंकुम लगाएं. 
ॐ श्रीत्रिपुरा देव्यै  नमः इदं धूपं आघ्रापयामि से धूप अर्पित करें.
ॐ श्रीत्रिपुरा देव्यै  नमः इदं दीपं दर्शयामि से तिल या घृत का दीपक दिखाएँ.

ॐ मन्दार-पारिजाताद्यैः, अनेकैः कुसुमैः शुभैः. पूजयामि शिवे, भक्तया, कमलायै नमो नमः ॐ श्रीत्रिपुरा देव्यै  नमः, पुष्पाणि समर्पयामि.इस मंत्र से पुष्प चढ़ाएं
 लाल वस्त्र के टुकडे के ऊपर 7 बार थोडे थोडे अक्षत “ह्रीं क्लीं ह्सौं” मन्त्र का 7 बार उच्चारण करते हुये डालें और श्री त्रिपुरा देवी को ॐ श्रीत्रिपुरा देव्यै नमःइदं रक्त वस्त्र समर्पयामि कहकर लाल वस्त्र का टुकडा अर्पित करें.

इसके बाद देवी का अङ्ग पूजन करें.

बायें हाथ में कुंकुम मिश्रित अक्षत लेकर दायें हाथ से थोड़ा-थोड़ा यन्त्र्राज पर  छोड़ते जायें 
श्री त्रिपुरायै नम: पादौ पूजयामि
भगवत्यै नम: जानूं पूजयामि
सौभाग्यदायिन्यै नम: कटि पूजयामि
दशमहाविद्यायै नम: नाभि पूजयामि
पूर्णसिद्धि दात्र्यै नम: जठरं पूजयामि
श्री विद्यायै नम: वक्षस्थल पूजयामि
सर्वसिद्धिदात्र्यै नम: भुजौ पूजयामि
ॐ श्रियै नम: नेत्रत्रयं पूजयामि
राज राजेश्वर्यै नम: सर्वाङ्गे पूजयामि.

इसके बाद यन्त्र पर पुनः अष्टसिद्धि का पूजन करें.

अंग पूजन की भांति हाथ में पुष्प की पन्खुड़ी और कुंकुम मिश्रित अक्षत लेकर मंत्रोच्चारण करते हुये यन्त्र पर अर्पित करते जाये. 
ॐ अणिम्ने नम:
ॐ महिम्ने नम:
ॐ गरिम्णे नम:
ॐ लघिम्ने नम:
ॐ प्राप्त्यै नम:
ॐ प्राकाम्यै नम:
ॐ ईशितायै नम:
ॐ वशितायै नम:. 


इसके बाद अंग पूजन एवं अष्टसिद्धि पूजा की भांति हाथ में कुंकुम से रञ्जित अक्षत लेकर मंत्रोच्चारण करें और यन्त्र राज पर अर्पित करते जाये. 
क्रियायै  नम:
 गत्यै  नम:
सौभाग्यै नम:
उर्ध्वदितायै नम:
श्रियै नम:
प्राण सिद्धि दात्र्यै नम:
आत्म सिद्धि दात्र्यै  नम:
  अमृत तत्वायै  नम:

नैवैद्य अर्पण
पूजन के पश्चात देवी को "इदं नानाविधि नैवेद्यानि ॐ श्रीत्रिपुरा देव्यै  समर्पयामि" मंत्र से खीर का नैवैद्य अर्पित करें.
नैवेद्य अर्पित करने के बाद निम्न मन्त्र बोलते हुये आचमन करायें. इदं आचमनियं ॐ श्रीत्रिपुरा देव्यै  नम:.
इसके बाद कर्पूर तथा ताम्बूल चढ़ायें: इदं ताम्बूल पुंगीफल कर्पूर समायुक्तं ॐ श्रीत्रिपुरा देव्यै समर्पयामि.
अब हाथ में  फूल लेकर श्री त्रिपुरा  देवी पर चढ़ाएं और बोलें: एष: मन्त्र पुष्पान्जलि ॐ श्रीत्रिपुरा देव्यै  नम:.
इसके बाद प्राणायाम क्रिया कम से कम 4 या 7 बार संपन्न करें और निम्न मन्त्र की 54 माला जप संपन्न करें.

श्रीं ह्रीं श्रीं प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं हुं
OM SHREEM HREEM SHREEM PRASEED SHREEM HREEM SHREEM HUM.
इसके पश्चात योनि मुद्रा का प्रदर्शन करते हुए जप समर्पण करें और भगवती को प्रणाम करें और उसे क्षमा याचना कर अपने मनोरथ पूर्ती की प्रार्थना करें. खीर स्वयं उसी स्थान पर बैठकर ही ग्रहण कर ले.और दुसरे दिन यंत्र को पूजन स्थल पर या तिजोरी में स्थापित कर दे.यथा संभव इसी मन्त्र का १०८ बार उच्चारणकरते हुए नित्य यन्त्र राज को धूप दीप अर्पित करें.रही बात परिणाम की तो वो आप स्वयं ही देखेंगे.

****NPRU****

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