There was an error in this gadget

Tuesday, December 4, 2012

VAKRATUND VASHIKARAN PRAYOG


 
Shatkarmas have got a special place in field of Tantra. Solution of many problems of human life is contained in these six procedures. Among them, Vashikaran procedure certainly is one of the most useful Tantra procedures. Though it is fact that in today’s era Vashikaran procedure is seen with fear. In reality, reason behind it is that few selfish people in order to meet their selfish ends have made these procedures synonymous to fear in society. Some degraded persons also tried to misuse this Vidya but in reality use of Vashikaran should be done for the welfare of society. This was the main intent of ancient sages and saints who propagated this Vidya. Using Vashikaran, animosity with enemies can be destroyed. This prayog has been in vogue from ancient times for various tasks like stopping a person from doing wrong, stopping any family member from bad company or saving husband from spell of other lady etc. Even Vashikaran procedure has been utilized to stop wars and human genocide. But in today’s era it has come to be considered as bad procedure. Due to various reasons, its deformed form has come in front of us. But above examples illustrate that this Vidya was never bad and uptil a time, it was utilized for moral purpose and safeguarding interest of humans.
Its necessity and utility in modern day era can be easily understood by person from above examples. May be today’s era has changed but situation is still the same. Through this Vidya, person can certainly safeguard interest of him and his family. In case of conflict with any officer or if some person in family is having bad company or if any near ones wants to cause harm  , in all these circumstances , Vashikaran can be used.

Though there are many Vashikaran-related prayogs mentioned in various Tantra scriptures but Prayog present here is hidden prayog through which desired results are obtained very quickly. Here it is not about making thoughts of mind favorable. Through the prayog presented here, state of mind of person on which prayog has been done can be molded as per wish of person doing the prayog. This rare prayog is different from other vashikaran prayog in this respect. This prayog, related to Lord Vakratund is considered to be one of infallible and intense prayog among siddhs and is done by means of Parad Ganpati.
Sadhak can start this prayog from any auspicious day. It should be done after 10:00 P.M in night.
In Night, sadhak should take bath, wear red dress and sit on red aasan facing North/ East direction.
Sadhak should keep one important fact in mind that in this sadhna, red colour is most important. Thus sadhak should try that all the sadhna articles being used in this sadhna should be of red colour. Cotton to be used in lamp should be made red colored in advance by sadhak. If any fruit is being offered, it should also be of red colour. Sadhak should offer red flower and rice should first be coloured with vermillion and then used.
Sadhak should do Guru Poojan and establish Parad Ganpati in front of him and do its normal poojan. After chanting Guru Mantra, sadhak should pray to Guru and Lord Vakratund for success in sadhna and chant 21 rounds of below mantra by Moonga Rosary. In this Mantra, in the place of AMUKAM, name of the person on which vashikaran Prayog needs to be done should be used. If sadhak has photo or piece of cloth of Saadhy person (on which prayog is being done) then it should also be kept in front.

om kleem hreeng shreeng galum vakratundaay var varad amukam vashamaanay swaha

After completing 21 rounds, sadhak should pray with reverence. In this manner, Sadhak should do this procedure for 5 days. After completion of prayog, sadhak should immerse the rosary.
=====================================
तंत्रमत में षटकर्म का एक अत्यधिक विशेष स्थान है. मनुष्य के जीवन की बहुता समस्याओ के समाधान इन्ही ६ क्रियामें समाहित है. इसमें भी वशीकरण की क्रिया आज के युग में निश्चय ही अतिउपयोगी तंत्र प्रक्रियाओ में से एक है. यह बात अलग है की आज के युग में वशीकरण क्रिया को भयावह द्रष्टि से देखा जाता है. वस्तुतः इसके पीछे का कारण यह है की कुछ स्वार्थी व्यक्तियों ने अपने स्वार्थ सिद्ध करने के लिए इस प्रकार की क्रियाओ को समाज में भय की प्रतिमूर्ति बना दिया है. कुछ हिन् व्यक्तियो ने इस विद्या का दुरुपयोग करने की भी कोशिश की, लेकिन वस्तुतः वशीकरण का उपयोग समाज के हित के लिए किया जाए इसी लिए हमारे प्राचीन ऋषिमुनियों ने इसका प्रचार प्रसार किया था. वशीकरण का उपयोग कर शत्रुओ से शत्रुता समाप्त की जा सकती है, अगर कोई व्यक्ति अहित करने के लिए उद्ध्वत हुआ हो तो उसको रोकने के लिए, परिवार के किसी सदस्यों को बुरी संगत से छुडाने के लिए, या फिर पति को पर स्त्री के फेर से बचाने  के लिए प्राचीन काल से ही इस प्रकार के प्रयोग का प्रचालन रहा है. यहाँ तक की युद्धों और मनुष्य कतलेआम को रोकने के लिए भी वशीकरण का प्रयोग होता आया है. लेकिन आज के युग में इसे एक हिन् कार्य मान लिया गया है, विविध कारणों से इस विद्या का एक विकृत स्वरुप ही सामने आया है. लेकिन उपरोक्त उदाहरण से यह स्पष्ट होता है की न हो यह विद्या कभी हिन् थी और एक समय तक इसका नैतिक कार्यों के लिए तथा मनुष्य की हित रक्षा के लिए ही प्रयोग होता आया है.

आज के युग में इस विद्या की अनिवार्यता तथा उपयोगिता क्या और कितनी हो सकती है यह भी व्यक्ति उपरोक्त उदाहरणों से समज सकता है. भले ही आज का युग परिवर्तित हो गया हो लेकिन परिस्थितियाँ वही है.  इस विद्या के माध्यम से व्यक्ति अपने तथा अपने घर परिवार के हितों की रक्षा निश्चय ही कर सकता है. किसी अधिकारी से मतभेद, या फिर परिवारजनो में किसी की बुरी संगत या फिर कोई नजदीक का व्यक्ति ही अहित करने की तैयारी में हो, एसी अनेक स्थिति में वशीकरण का प्रयोग किया जा सकता है.

यूँ तो वशीकरण से सबंधित कई कई प्रयोग तंत्र ग्रंथो में वर्णित है लेकिन प्रस्तुत प्रयोग एक गुप्त प्रयोग है जिसके माध्यम से अभीष्ट की प्राप्ति शीघ्र ही संभव हो पाती है. यहाँ पर बात सिर्फ मन के विचारों को अनुकूल बनाने की नहीं है, प्रस्तुत प्रयोग के माध्यम से साध्य व्यक्ति अर्थात जिस पर प्रयोग किया जा रहा हो वह व्यक्ति के मनोभाव ठीक उसी प्रकार से बनाए जा सकते है जिस प्रकार प्रयोग करता चाहता हो. यह दुर्लभ प्रयोग इस प्रकार अन्य वशीकरण प्रयोगों से भिन्न है. भगवान वक्रतुंड से सबंधित  यह प्रयोग सिद्धो के मध्य एक अचूक और तीव्र प्रयोग माना जाता है जिसे पारद गणपति के माध्यम से सम्प्पन किया जाता है.  

साधक यह प्रयोग किसी भी शुभ दिन से शुरू कर सकता है. समय रात्री में १० बजे के बाद का रहे.

रात्री में स्नान आदि से शुद्ध हो कर साधक लाल रंग के वस्त्र को धारण करे तथा उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ मुख कर साधक लाल आसान पर बैठ जाये.

इस साधना में साधक को आवश्यक रूप से ध्यान रखना चाहिए की इस साधना में लाल रंग की प्रधानता है अर्थात साधक को प्रयत्न करना चाहिए की जितनी भी सामग्री साधना में प्रयुक्त हो रही हे वह यथा संभव लाल रंग की हो. साधक को दीपक की रुई भी पहले से ही लाल रंग में रंग कर रख देनी चाहिए. अगर कोई फल भोग में लगाया जा रहा है तो वह भी लाल रंग का हो. साधक लाल रंग के पुष्प समर्पित करे तथा अक्षत को भी कुमकुम से रंग कर पहले से ही रख ले तथा उसी का प्रयोग करे.

साधक गुरु पूजन सम्प्पन कर अपने सामने पारद गणपति का स्थापन करे तथा सामन्य पूजन सम्प्पन करे. तथा गुरु मंत्र का जाप कर साधक गुरु एवं भगवान वक्रतुंड से साधना में सफलता के लिए प्रार्थना करे और मूंगा माला से निम्न मन्त्र की २१ माला मंत्र जाप सम्प्पन करे. इस मंत्र में अमुकं की जगह साधक को साध्य व्यक्ति जिस पर वशीकरण प्रयोग करना हो उसका नाम लेना चाहिए. अगर साधक के पास साध्य व्यक्ति की तस्वीर या वस्त्र का टुकड़ा हो तो उसे भी अपने सामने रख देना चाहिए.

ॐ क्लीं ह्रीं श्रीं ग्लौं वक्रतुण्डाय वर वरद अमुकं वशमानय स्वाहा

(om kleem hreeng shreeng galum vakratundaay var varad amukam vashamaanay swaha)

२१ माला पूर्ण होने पर साधक श्रद्धा सह वंदन करे. इस प्रकार साधक ५ दिन तक प्रयोग करे. प्रयोग पूर्ण होने पर साधक माला को विसर्जित कर दे.

****NPRU****

No comments: