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Tuesday, March 26, 2013

HOLIKA DAHAN - CHANDAALINI SADHNA VIDHAAN



My heartiest Greetings to you all on this festive occasion of Holi
In order to simplify the path of attainment of need and to ensure that success is attained by minimum efforts, person should know calculation of time so that we can select appropriate time and utilize it accordingly. Effect of sadhna done in special Muhurat is very much exceptional and intense. Night of Holi is utilized for various types of sadhnas. Sadhak has got its own desires, some wants to perform beauty sadhnas, some wants to manifest Yakshini and Apsara, some wants to utilize it for success in Shatkarmas, some to attain divinity, some aspire to accomplish Vashikaran and few wants to simplify the attainment of Asht Siddhis. In other words, it is amazing night for fulfilment of desire of sadhak.
We can do any sadhna as per our desire on this night and get results. We can do any sadhna given by Sadgurudev, Tantra Kaumudi, Blog or any self-experienced sadhna of brother in group and attain success.
   Nearly all of us would have selected some sadhna or other for today’s night. After all how can we miss such precious moment? Therefore, I made up my mind not to give any special prayog since it could have resulted into dilemma for sadhak. But I got mail from many sadhak for combined attainment of money and Vashikaran power. Therefore I am giving this sadhna for this purpose and it is completely tantric procedure which is beyond rules. And just by chanting 3 rounds of this mantra on night of Holika Dahan can infuse power in this mantra. Then as you will do this mantra in future, you will automatically get money. In fact, some rules are relaxed for this mantra and that’s why most of sadhak will find it interesting. One should not take food in evening. Night of Holika Dahan i.e. today’s night from 9:32 to 3:56 in morning is auspicious for sadhna, Therefore, we can utilize any time of this Muhurat and we can do any sadhna before/after it. It is better not to eat anything before doing this sadhna.
Sadhna will be done while facing west direction. Red or yellow dress will be used only today. Til-oil lamp will be used. No incensed stick will be used. Udad bade (crisp ball of Udad) and some sweet will be used as Bhog. After Guru Poojan, chanting of Guru Mantra and Ganpati Poojan, chant 3 rounds of this mantra by coral or Rudraksh rosary.

Om namo uchchhisht chandaalini purpaatan kshobhni aakarshini aakarshini aakarshay aakarshay drawya aanay aanay hreem phat swaha

After completion of sadhna, on next day keep Bhog on any uninhabited place and thereafter, you can recite this mantra without taking bath, while going for toilet, without gargling or without washing the face. In other words, there is no need to take care of cleanliness and uncleanliness. It means that in future you have to chant this mantra 108 times either using rosary or without it. You can do it at your chanting place or while sitting on bed or unclean mouth.
This Vidhaan is amazing because in it, in starting 7 days one sees the bad dreams. But from eighth day onwards, due to effect of chanting, they get translated into auspicious signs which indicates rise of positivity after destruction of negativity. Attraction of wealth and attainment of intense power of Vashikaran becomes possible through this sadhna. After accomplishment of this mantra, some Aghor and intense works are also carried out for this there is separate procedure on which we will discuss later in future.I wish that you will utilize this short but exceptional procedure today’s night and get benefits.

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होली पर्व की आप सभी को ढेर सारी शुभकामनाएं.
जीवन की आवशयकता की प्राप्ति का मार्ग सुगम हो सके और कम प्रयासों में सफलता की प्राप्ति हो.इस हेतु व्यक्ति को काल गणना का ज्ञान होना चाहिए.जब हम उचित समय का चयन कर तदनुरूप प्रयोग कर सके. विशिष्ठ मुहूर्त में की गयी साधना का प्रभाव भी उतना ही  तीक्ष्ण और विशिष्ठ होता है. होली की रात्रि का प्रयोग विभिन्न प्रकार की साधना हेतु किया जाता है.साधक की अपनी मनोकामना होती है, कोई सौंदर्य साधनाओं को संपन्न करना चाहता है,कोई यक्षिणी,अप्सरा का प्रत्यक्षीकरण,कोई षट्कर्म में सफलता के लिए इसका प्रयोग करना चाहता है तो कोई देवत्व की प्राप्ति हेतु,किसी का उद्देश्य वशीकरण सिद्धि होता है तो कोई अष्ट सिद्धियों की प्राप्ति को सुगम करना चाहता है. कहने का अर्थ ये है की साधक की मनसा पूर्ती के लिए ये अद्भुत रात्रि है.
  हम हमारी कामना अनुसार किसी भी साधना को इस रात्रि में संपन्न कर परिणाम की प्राप्ति कर सकते हैं.सदगुरुदेव प्रदत्त,तंत्र कौमुदी,ब्लॉग अथवा ग्रुप में किसी भी भाई द्वारा अनुभूत साधना को संपन्न कर हम सफलता की प्राप्ति कर सकते हैं.
  लगभग हममें से सभी ने किसी ना किसी साधना का चयन आज की रात्रि के लिए किया हि होगा,आखिर इतना बहुमूल्य समय हम ऐसे कैसे व्यर्थ जाने देंगे. इसलिए मैंने किसी विशेष प्रयोग को ना देने का हि मन बनाया था क्यूंकि उससे साधक के मन में दुविधा उत्पन्न होती. किन्तु बहुत से साधक के मेल आये थे तीव्र धन प्राप्ति और वशीकरण शक्ति की सम्मिलित प्राप्ति हेतु.अतः मैं ये साधना उसी हेतु यहाँ दे रहा हूँ जो की पूर्ण तांत्रिक साधना है जो नियमों से परे है.और होलिका दहन की रात्रि को मात्र ३ माला करके इस मंत्र में शक्ति उत्पन्न की जा सकती है,फिर जैसे जैसे भविष्य में आप इस मंत्र को करेंगे,आपको स्वतः ही धन की प्राप्ति होते जायेगी. वस्तुतः ये मंत्र कई नियमों को शिथिलता देता है और शायद इसलिए बहुत से साधक को ये रुचिकर भी लगेगा. शाम को भोजन नहीं करना है.और होलिका दहन की रात्रि का मतलब आज की रात्रि का ९.३२ से सुबह ३.५६ तक का मुहूर्त पूर्ण साधनामय है.अतः हम इसी मुहूर्त का कोई भी काल खंड प्रयोग कर सकते हैं,और उसके बाद या पहले किसी भी अन्य साधना को संपन्न कर सकते हैं.साधना के पूर्व यदि कुछ ना खाया जाये तो बेहतर है.
  पश्चिम दिशा की और मुख करके साधना की जाएगी,लाल या पीले वस्त्र का मात्र आज प्रयोग करना है. दीपक तिल के तेल का प्रयोग होगा,धूप बत्ती का निषेध रहेगा.उड़द के बड़े और कुछ मिष्ठान को भोग के रूप में प्रयुक्त करना है. गुरु पूजन,मंत्र जप,गणपति पूजन के पश्चात आप इस मंत्र की ३ माला मूंगा या रुद्राक्ष माला से करें.

ॐ नमो उच्छिष्ट चंडालिनि पुरपाटण क्षोभणी आकर्षिणी आकर्षिणी आकर्षय आकर्षय द्रव्य आनय आनय ह्रीं फट् स्वाहा ||

Om namo uchchhisht chandaalini purpaatan kshobhni aakarshini aakarshini aakarshay aakarshay drawya aanay aanay hreem phat swaha

 साधना पूरी होने के बाद आप अगले दिन भोग आदि को सुनसान स्थान पर रख दें और बाद में इस मंत्र को बिना नहाये,शौचादि के लिए जाते हुए भी कर सकते हैं,बिना कुल्ला किये,बिना मुह धोये भी खाने के बाद भी कर सकते हैं. अर्थात शुचिता अशुचिता का ध्यान रखना अनिवार्य नहीं है.इसका तात्पर्य ये है की भविष्य में बिना माला अथवा माला के मात्र १ माला ही करना है,फिर चाहे आप जप जप स्थल पर बैठ कर करें अथवा बिस्तर पर,या झूठे मुंह की अवस्था में.
  हाँ ये विधान है जरुर अजीब क्यूंकि इसमें शुरू के ७ दिनों तक गंदे स्वप्न आदि दृष्टिगोचर होते हैं.किन्तु ८ वे दिन से आपके जप के प्रभाव से यही शुभ संकेतों में परिवर्तित हो जाते हैं जो की नकारात्मकता समाप्त होकर सकारात्मकता का उदय बताती है.धन के आकर्षण और वशीकरण की तीक्ष्ण शक्ति की प्राप्ति होना इस साधना के द्वारा संभव हो जाती है.इसी मंत्र की सिद्धि के बाद कई अघोर और तीव्र कार्यों का सम्पादन भी किया जाता है.जिसके लिए अलग विधान है.जिन पर हम भविष्य में चर्चा करेंगे.आज की रात्री इस लघु किन्तु विलक्षण विधान को आप प्रयोग कर लाभ पायें,यही कामना करता हूँ.

****NPRU****

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