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Thursday, March 21, 2013

VAKTAVYA SHAKTI JAAGRAN - BHAGWATI SARASWATI PRAYOG




There will be no person who does not know the importance of words and speech in human life. Regarding speech tact, our sages and saints have explained so many centuries back that through speech person can attain everything in life and can also lose everything in life. It is very important fact relating to life that irrespective of the eras of time, speech is related to our behaviour and it is extremely important to be exhibited in dignified manner. In today’s era, for solving the personal problems and domestic problems, it is necessary for person to use speech in capable manner. In student life too, it is possible to attain progress through speech. What can be said about business and service field, everyone witnesses this fact that more is the person competence to speak sweetly, more success he will attain. But along with it, it is also true that it is a divine blessing for a person to use speech in better manner and touch novel dimension in his life. Many times, after deliberately considering so many things, person can use sweet words in speech but it is very difficult to attain flexibility and sweetness naturally. But there are various types of procedures in Tantra sadhna through which sadhak can activate his Vaak-Shakti (communication skill), can become exponent of sweet speech. Along with it, person’s speech becomes attractive due to which whosoever listens to him is impressed by attraction. Along with it, sadhak attains Vaak Saundarya related to beauty aspect. In today’s era, these types of procedures are essential for every person since in this competitive world, on each and every step every person has to prove its capability. Procedure presented here is one of the procedures in this context through which sadhak can attain this extremely important art. Along with it this procedure is simple and easy which can be done by any sadhak.
This procedure should be started on Sunday of Shukl Paksha of any month. It can be done in day or night but it should be done daily at same time.
Sadhak should take bath, wear white dress and sit on white aasan facing north direction. First of all, sadhak should perform Guru Poojan and then do the poojan of Saraswati Yantra/picture.
After it, sadhak should do the Nyas.
KAR NYAS
HREEM HAM AING SHREEM ANGUSHTHAABHYAAM NAMAH
HREEM HAM AING SHREEM TARJANIBHYAAM NAMAH
HREEM HAM AING SHREEM MADHYMABHYAAM NAMAH
HREEM HAM AING SHREEM ANAAMIKAABHYAAM NAMAH
HREEM HAM AING SHREEM KANISHTKABHYAAM NAMAH
HREEM HAM AING SHREEM KARTAL KARPRISHTHAABHYAAM NAMAH

HRIDYAADI NYAS
HREEM HAM AING SHREEM HRIDYAAY NAMAH
HREEM HAM AING SHREEM SHIRSE SWAHA
HREEM HAM AING SHREEM SHIKHAYAI VASHAT
HREEM HAM AING SHREEM KAVACHHAAY HUM
HREEM HAM AING SHREEM NAITRTRYAAY VAUSHAT
HREEM HAM AING SHREEM ASTRAAY PHAT

Then, sadhak should do Dhayan (meditation).
YaaKundenduTushaarhaarDhawlaYaaShubhvastravritaa |
YaaVeenavardandmanditkaraaYaaSwetpadmaasnaa ||
YaaBrahmaachyutshankarprabhritibhiedevaihSadaVanditaa |
SaaMaamPaatu Saraswati Bhagwati NihSheshjaadyapaha ||
ShuklaamBrahmavichaarsaarparmaadyaamJagadvyaapinim |
Veena-Pustak-DhaarinimbhdaamJaadyaandhkaarpahaam ||
Haste Sfatik MaalikaamViddhantiPadmaasneSansthtaam |
VandeTaamParmeshwareemBhagwatimBuddhipradaamShardaam ||
After meditation, sadhak should chant the 51 rounds of below mantra by crystal or Rudraksh rosary.
 (OM HREEM HAM AING SHREEM NAMAH)
Sadhak should perform this procedure for 3 days. In this manner, this sadhna is completed in 3 days.

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मनुष्य के जीवन में शब्द तथा वाणी का क्या महत्त्व है इससे कोई भी व्यक्ति अपरिचित नहीं होगा. वाक् चातुर्य के विषय में हमारे ऋषि मुनियों ने आज से कई कई सदियों पहले से ही इस महत्वपूर्ण विद्या के बारे में स्पष्ट किया था की वाणी के माध्यम से व्यक्ति जीवन में सब कुछ प्राप्त भी कर सकता है तथा जीवन से सब कुछ हार भी सकता है. निश्चय ही यह एक महत्वपूर्ण तथ्य है जीवन से सबंधित भले ही वह प्राचीन काल रहा हो या आधुनिक समय क्यों की वाणी का सबंध व्यवहार से तथा संस्करण प्रदर्शन के लिए अति आवश्यक है. आज के युग में चाहे वह साधक का व्यक्तिगत जीवन हो अपने घर की, घर परिवार की समस्याओ के समाधान के लिए व्यक्ति को योग्य रूप से वाणी का प्रयोग करना अनिवार्य है. चाहे वह विद्यार्थी जीवन भी हो तो भी वाणी के माध्यम से उन्नति की प्राप्ति करना संभव है. व्यापार और नौकरी आदि क्षेत्र में तो आज कहना ही क्या है, जिसकी जितनी ज्यादा उत्तम मधुरता युक्त बोलने की शैली होगी वह व्यक्ति उतना ही ज्यादा सफलता की और अग्रसर होता है यह हम नित्य देखते ही है. लेकिन यह भी एक सत्य है की यह एक दैवीय उपहार ही है की कोई व्यक्ति अति उत्तम रूप से वाणी का प्रयोग कर सके, बोल सके तथा अपने जीवन में एक नूतन आयाम को स्पर्श कर सके. कई बार विविधतम बातों का ध्यान रखने पर व्यक्ति वाणी में मधुर शब्दों का प्रयोग कर सकता है लेकिन जो प्राकृतिक लोच तथा मधुरता होनी चाहिए वह प्राप्त करना अति कठिन है, लेकिन तंत्र साधनामें कई प्रकार के विधानो का वर्णन प्राप्त होता है जिसके माध्यम से साधक अपनी वकृत्व शक्ति को जागृत कर सकता है, मधुरता युक्त वाणी का धनि हो सकता है, साथ ही साथ व्यक्ति के वाणी में आकर्षण का संचार होने लगता है जिसके माध्यम से जो भी उसकी बात को सुनता है वह निश्चय ही आकर्षण से प्रभावित होने लगता है इसके साथ ही साथ साधक को सौंदर्य पक्ष से सबंधित वाक सौंदर्य की प्राप्ति होती है. आज के समय में हर एक व्यक्ति के लिए इस प्रकार के प्रयोग अनिवार्य ही कहे जा सकते है क्यों की स्पर्धात्मक युग में कदम कदम पर व्यक्ति को अपनी काबलियत को साबित करना पड़ता है.  प्रस्तुत प्रयोग इसी क्रम में एक प्रयोग है जिसके माध्यम से यह नितांत आवश्यक कला की प्राप्ति साधक कर सकता है, साथ ही साथ यह प्रयोग सौम्य है तथा सहज भी, इस लिए कोई भी साधक साधिका इस प्रयोग को सम्प्पन कर सकती है.
यह प्रयोग शुक्ल पक्ष के रविवार को शुरू करना चाहिए. इस प्रयोग को दिन या रात्रिकाल में सम्प्पन किया जा सकता है लेकिन रोज एक ही समय पर साधक को साधना के लिए बैठना चाहिए.
साधक को स्नान कर के सफ़ेद वस्त्र धारण करने चाहिए. इसके बाद साधक को सफ़ेद आसन पर उत्तर की तरफ मुख कर बैठना चाहिए. सर्व प्रथम साधक को गुरु पूजन तथा देवी सरस्वती के यंत्र या चित्र का पूजन करना चाहिए.
इसके बाद साधक को न्यास करना चाहिए.
करन्यास
ह्रीं हं ऐं श्रीं अङ्गुष्ठाभ्यां नमः
ह्रीं हं ऐं श्रीं तर्जनीभ्यां नमः
ह्रीं हं ऐं श्रीं मध्यमाभ्यां नमः
ह्रीं हं ऐं श्रीं अनामिकाभ्यां नमः
ह्रीं हं ऐं श्रीं कनिष्टकाभ्यां नमः
ह्रीं हं ऐं श्रीं करतल करपृष्ठाभ्यां नमः
हृदयादिन्यास
ह्रीं हं ऐं श्रीं हृदयाय नमः
ह्रीं हं ऐं श्रीं शिरसे स्वाहा
ह्रीं हं ऐं श्रीं शिखायै वषट्
ह्रीं हं ऐं श्रीं कवचाय हूं
ह्रीं हं ऐं श्रीं नेत्रत्रयाय वौषट्
ह्रीं हं ऐं श्रीं अस्त्राय फट्
इसके बाद साधक को ध्यान करना चाहिए.
या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।।
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ।।
शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमांद्यां जगद्व्यापनीं ।
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यांधकारपहाम्।।
हस्ते स्फाटिक मालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम् ।
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम् ||
ध्यान के बाद साधक को स्फटिक माला से या रुद्राक्ष माला से निम्न मन्त्र की ५१ माला जाप करनी है.
ॐ ह्रीं हं ऐं श्रीं नमः
(OM HREEM HAM AING SHREEM NAMAH)
साधक को यह क्रम ३ दिन तक करना चाहिए. इस प्रकार तिन दिन में यह साधना पूर्ण होती है.

****NPRU****

2 comments:

khlak said...

kya aap vistaar purwak danik puja kese ki jati hai uske baare me jankri de sakte hai
kon se mantra
kis cheej ke baad kya karna hai
step by step
kon se aarti
hawan
sankh
jal
bhog
tilak
mala
fuul
etcccc

sameer said...

I want to take diksha and do sadhana..please guide me through the procedure...eagerly waiting for your reply..thanks