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Thursday, March 7, 2013

PAARAD SE HI POORNTA




पूर्व लेखो में हमने जाना की वैध संलग्न कों भी चतुर्वर्ग कहा जाता है. “चार गुना अच्छा” जो हिंदू मान्यता की मूल आधार निति है. सभी उपरोक्त गतिविधियों से – प्राचीन काल से अर्थ की भूमिका का अपने आप में एक अलग ही महत्व रहा है. अगर हम अपना जीवन पूर्णता के साथ जीना चाहते है तो जीवन में स्थैर्यता लाना अत्यंत आवश्यक है. और ये स्थैर्यता केवल देवी लक्ष्मी जी प्रदान कर सकती है. इसीलिए ये कहावत भी बहुत प्रसिद्द है की अगर आप अपने शत्रुओ कों जड़ से नष्ट करना चाहते हो तो उसके सभी आर्थिक स्त्रोतों पर घात करो वो ऐसे ही तबाह हो जाएगा.

अधिकाश लोग ऐसा मानते है की आर्थिक पक्ष या आर्थिक बचत “तंत्र प्रयोग” से नष्ट किया जा सकता है. इसमें कोई दो मत नहीं की ऐसा हो सकता है. परन्तु यह पूर्ण सत्य नहीं... क्युकी जब तक आप सदगुरुदेव की छत्रछाया में है तब तक आपका विनाश असंभव है, हाँ ये अलग विषय है की हम इस् तथ्य कों स्वीकार नहीं कर पाते क्युकी हमारा ज्ञान भण्डार इतना विशाल या विस्तृत होने के बावजूद हम अपनी उत्कंठा कों अपने तक ही रखते है...

आवश्यकता है तो सत्य कों समझने की... मित्रों, सदगुरुदेव (डा. नारायण दत्त श्रीमाली जी)  ने इस् भ्रम कों जड़ से मिटाने का अथक प्रयास किया है यहाँ तक की उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन अध्यात्म का ज्ञान और उसके अनंत गुढ़ रहस्यो कों देने में व्यतीत कर दिया...पर हम कितना मोल समझ पाये है इस बात का ये तो हम ही जानते है...है ना...

मैंने सदगुरुदेव के विचारों कों समझने का तुच्छ प्रयास किया है और जो सफलता मुझे मेरे जीवन में मिली है वह सदगुरुदेव जी के ज्ञान और आशीर्वाद से मिली है और जो उन्होंने उनके शिष्यों में भी निस्वार्थ वितरित कीया है.

अक्सर लोग सोचते है की “तंत्र बाधा”– जिससे अर्थ का मार्ग बिलकुल शुन्य हो जाता है –ये कथन सर्वथा गलत है...अगर आप धन का अर्जन करते है जो दैवी शक्ति से बंधित है या जो देवी लक्ष्मी से कीलित है तो उसके खोने के संयोग एकदम शुन्य समान है. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की आप किसी “तंत्र बाधा” से गुजरे हो पहले परन्तु आप पुनः लक्ष्मी कीलन विधान करे जिसके बाद आपकी सम्रद्धि और संपत्ति कों किसी भी प्रकार की हानि या ‘तंत्र बाधा’ हो ही नहीं सकती.

जरा एक बार सदगुरुदेव जी के उन सुनहरे शब्दों कों याद करिये - “कोई भी तांत्रिक आपको किसी भी प्रकार की क्षति नहीं पंहुचा सकता क्युकी मै आपको इस् तरह तैयार कर रहा हू की आप हर दुष्प्रभाव डालने वाली शक्तियो से डट कर लड़ सकते है. मै एसी शक्तिया आपकों दे रहा हू जिनसे किसी भी प्रकार का तंत्र प्रयोग आप पर निष्फल हो जाएगा क्युकी आप निखिलेश्वरानंद के शिष्य है.” और मैंने अपने व्यक्तिगत जीवन में इसे अक्षरशः पाया है अनुभव किया है. और जितनी भी सफलता मुझे मिली है वह केवल उनके आशिर्वादा और ज्ञान के कारण मिली है. और यही कारण रहा है क्यों मैंने कई बार पारद प्रयोगों कों आपके सामने उजागर किया...

चलिए तो अब जानते है की ऐसे कौन से प्रयोग है और
क्या है पारद का उपयोग ????

क्या उससे स्वर्ण या चांदी बनाया जा सकता है ? 

क्या वायुगमन क्रिया संभव है या नहीं ? परन्तु आज के लेख में ये विचारणीय बिंदु नहीं इसलिए इस् पर कभी और बात करेंगे. मै यहां केवल इतना बताना चाहता हू की अगर पारद पर अचूक तांत्रिक क्रिया सेकी जाए,वो भी निश्चित समय में और समस्त संस्कारो के साथ, दिव्य मंत्रो के सही उच्चारण और “अभिषिक्त और प्राण प्रतिष्ठित विग्रह” की स्थापना कर जो क्रिया संपन्न की जाती है ऐसे पारद के आपके घर में होने से आपके किसी भी स्वप्न या इच्छाओं कों पूर्ण होने से कोई रोक नहीं सकता.  परन्तु हाँ, पारद से विग्रह बनाने की क्रिया बिलकुल पृथक है और वैसे ही पारद विग्रह पर भिन्न मंत्रो के उच्चारणों से कार्य पूर्ति फल भी उसी दिशा में प्राप्त होंगे.

जब बात आर्थिक पक्ष की  आती है – फिर “पारद लक्ष्मी” की स्थापना अत्यंत ही आवश्यक है. क्युकी उनकी स्थापना पूजा घर में हो जाने पर असंभव सि देखने वाली परिस्थिया देखते ही देखते  बदलते नजर आने लगती है.

सदगुरुदेव जी ने इसका रहस्य “सिद्देश्वरी नवरात्रि” पर –‘श्री सूक्त’ पढकर उद्घाटित किया था की अगर हम इसे ध्यान से पढ़े तो इसमें बताया है की भले ही हमें संपत्ति ना मिले पर हमें ये समझना होगा की अगर इसके मर्म कों समझ लिया जाए तो सफलता सम्भव है. क्युकी सूक्त के १६ श्लोक में पारद लक्ष्मी साधना की सम्पूर्ण विधि प्रक्रिया वर्णित है. और अगर वर्णन के अनुसार पारद लक्ष्मी कों निर्मित किया जाए तो ४ पुरुषार्थ के लाभ हमें मिल सकते है. और अगर जब भी कोई क्रिया असफल रहे तो भी “पारदेश्वरी” हमें जीवन भर सहायक रहती है. इसका अर्थ सिर्फ धन संपत्ति के रूप ही नहीं बल्कि समस्त प्रकार की संपत्ति अर्थात महा लक्ष्मी के १००८ रूप की प्राप्ति होती है. और हम अपने नसीब पर रोते रहते है क्युकी हमने “श्री सूक्त” और “लक्ष्मी सूक्त” के गुप्त अर्थो कों समझा ही नहीं.
पारद लक्ष्मी का निर्माण विशुद्ध संस्कारित पारद और राजस मंत्र से किया जाता है. और इस मंत्र का प्रत्येक अक्षर “भगवती महालक्ष्मी” की दिव्य काया में समाहित है. और इसी के पश्चात देवी हमें वह दिव्यता, वैभव और यशस्वीता प्रदान करती है.

इस् प्रकार के विग्रह कों आप सोमवार या बुधवार कों स्थापित कर सकते है.. फिर एसी कोई मुश्किल चाहे वह व्यापार से संबंधित हो या परिवार, आर्थिक, सामाजिक सभी प्रकार की बाधाओं कों मिटाने में सक्षम है.परन्तु दुःख इस् बात का है की हम अब भी सदगुरुदेव के ज्ञान कों समझ नहीं पाए है और नही उन पर पूर्ण विशवास. हमारा विशवास तो हिलता डुलता रहता है. हम उन नकली ज्योतिषो पर या ढोंगियों पर विश्वास करना ज्यादा उचित समझ लेते है और परिणाम ना मिलने पर अपने नसीब कों कोसते हे या रोते रहते है..

क्या मिलेगा इस एक ही बात कों दौहरा कर केवल धन, समय और उर्जा की हानि...और क्या ?
सो मेरे मित्रों अगर समस्या है तो उसका समाधान भी मौजूद है.. हर प्रश्न का उत्तर होता है. है ना ???            

बहुत से लोग पारद विग्रह क्रय कर लेते है और कहते है की उन्हें योथोचित परिणाम ही नहीं मिला.. तो इसका बड़ा ही सीधा सधा उत्तर है की अगर पारद पूर्ण संस्कारित, अभीमंत्रित, “स्वर्ण ग्रास” दिए हुए हो तो कोई शंका ही नहीं उत्पन्न हो सकती. याद रहे, अगर घर में पूजा स्थान पर अगर प्राण प्रतिष्ठित यन्त्र एवं विग्रह स्थापित किया हुआ हो तो असफलता की कोई गुंजाईश ही नहीं बचती और नाही इस् बात का कोई फर्क पड़ता है की किन ग्रहों की स्थिति क्या है या वे आप पर विपरीत परिणाम कर रहे हो.. अगर पूर्ण संस्कारित “पारद शिवलिंग” या “पारद लक्ष्मी” घर में स्थापित हो तो अकाल मृत्यु, भय, रोग या दरिद्रता व्याप्त ही नहीं हो सकती और नाही कीसि प्रकार की कोई हानि हो सकती है.

मै सफल हुआ हू इस ज्ञान से.. इस क्रिया से.. और इसका लाभ आप भी उठा सकते है.

अंत में इतना ही कह सकता हू की आदर करिये अपने सदगुरुदेव प्रदत्त ज्ञान का और एक बार पूर्ण समर्पण और विशवास करके देखिये और फिर देखिये जिंदगी कैसे नहीं बदलती... और कब तक आप अपनी समस्याओं कों लेकर जूझते रहेंगे, रोते रहेंगे या कोसते रहेंगे अपने नसीब कों ????

****NPRU****

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