Thursday, May 9, 2013


Jai Sadgurudev,

NityamShudhamNirabhaasamNirakaaramNirjanam |
NitybodhamChidanandamGurum Brahm Namaamyham ||

Dear brothers and sisters, Guru has got an important place in life since without Guru, life is like a boat without boatman, like a horse without control. In other words, life loses its meaning.              
Happiness and sufferings are part and parcel of life. Common person does not know why suddenly we are confronted with all these troubles, why happy life has suddenly transformed to hell?  
So many such questions arise in our mind and we get entangled in whirlpool of such thoughts. It is due to absence of life in Guru who could have taken us out of problems, could have told what is Tantra? And what is Tantra obstacle? 
I have seen many families which were destroyed due to Tantra obstacles.     

Tantra obstacle is very troublesome in anyone’s life since life after it become very problematic. Just think life after Tantra procedure.       

Just think a scenario where head of family who is sole bread earner for family suddenly falls ill and is unable to get up from bed, engagement of daughter is broken again and again, questions marks are raised on competence of son to do job, inflow of money stops, social respect is on stake .Then what can be done.

Doing Tantric procedure is very easy. But consequences thereafter are very disastrous. Life of suffering person become hell-like and unbearable……..
Certain situations are created sometimes- For example, creation of deadly environment in home, children feel terrified and fell ill, quarrelsome environment is created in house. And an amazing fear surrounds us, then it should be understood that Tantra obstacle has occurred.    
But is there any solution available to us?   
Though you all read it too like Tantra Baadha Nivaran Diksha, Tantra Baadha Nivaran Procedure…etc.      

Tantra procedure can be done by anyone, but its consequences are to be borne by person very terribly. Seen in one manner, the whole life is disturbed and gets out of order. For a person to do Tantra procedure and attack someone, it does not require lot of sadhna or hard-work. But in order to eradicate Tantra procedure, it requires a cumbersome sadhna or accomplished and experienced person….:)      

Though very special time is approaching us in which we not only can get riddance from such problem but can also secure our future life against such problems.         

And that time is solar eclipse…..Isn’t it….:)      

Solar eclipse i.e. time to get rid of darkness from our life and enlighten it. Any sadhna done during eclipse time is fructified very quickly.             

So brothers and sisters, if you are facing such problem and even if you are not, we should do this procedure so as to secure our future life against such procedures………It is opportunity too and our tradition too. According to Nikhil Tradition, we do not let go any sadhna opportunity…….:)         

 Sadhna Procedure: 
Since during eclipse time, special poojan is not done. Therefore, do not touch any idol/yantra by hand. 

Articles required in this sadhna is one coconut, vermillion, Kajal (Collyrium) ,  Black agate rosary or coral rosary . Three mustard-oil lamps are also required. In absence of mustard oil, any other oil can be used too.    

Take bath and sit in black or Yellow aasan facing south. Dress will be black or Yellow. Perform Guru Poojan mentally and chant 4, 11 or 16 rounds of Guru Mantra. Offer Guru Mantra and seeks blessings from Gurudev and take Sankalp.        

Now, mix vermillion with water and with it,make a downward-facing triangle on floor in front of you. On all three vertex of triangle, light lamp of mustard oil.
After that, establish coconut inside triangle in such a manner that its tail is facing upward. Apply seven marks of Collyrium on coconut while chanting below mantra


Now chant 11 rounds of this mantra using black agate/ Rudraksh/ coral rosary.  
And thereafter, chant 4 rounds of Guru Mantra and pray to Gurudev for success in sadhna, our life is free from Tantra obstacles and we always remain safe…

After completion of sadhna or on next day, leave coconut on any uninhabited place…..:)          
“Nikhil Pranaam”

जय सदगुरुदेव,
          नित्यं शुद्धं निराभासं निराकारं निर्जनम् |
        नित्यबोधं चिदानंदम गुरूम ब्रहम नमाम्यहम ||
                स्नेही भाइयों-बहनों गुरु का जीवन मे एक महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि बिना गुरु के जीवन बिन मांझी के नाव बिना और बिन लगाम के घोड़े बिना है . अर्थात फिर जीवन सिर्फ खींचने के अलावा और कुछ नहीं.
   क्योंकि यदि जीवन है तो सुख भी और दुःख भी, साधारण जीवन जिन्हें कुछ नहीं पता कि आखिर ये दुःख क्यों अचानक हमारे जीवन में आ रहे हैं क्यों अचानक अच्छी सुखमय जिंदगी नर्क बनती चली जा रही है ?
         भाइयो फिर ऐसे अनेक प्रश्न उभरते हैं दिमाग में, और हम उलझते जाते हैं ऐंसे अनेक झंझावातों में, क्योंकि गुरु नहीं है ना जीवन में जो उबार सके ऐंसे कष्टों से, बता सके कि तंत्र क्या होता ? और क्या होती है तंत्र बाधा ?
      मैंने ऐंसे अनेक परिवार देखे हैं जो बेचारे तंत्रबाधा के चलते मिटते चले गए बर्बाद होते चले गए .
        तंत्र बाधा अत्यंत ही दुखदायी है किसी के भी जीवन में क्योंकि उसके बाद की जिंदगी बड़ी कष्टदायी और नारकीय हो जाती है . जरा सोचिये की एक तंत्र प्रयोग के बाद का जीवन कैसा होता है .
     जब अचानक गृह का मुखिया जिसके सहारे पूरा परिवार पल रहा हो, अचानक रोगग्रस्त होकर बिस्तर से लग जाये, घर में बेटी की शादी बार-बार टूट जाये, नौकरी योग्य पुत्र की योग्यता पर प्रश्नचिन्ह लग जाये, रूपये पैसे की आवक रुक जाये, सामाजिक प्रतिष्ठा दांव पर लगी हो तो ?
    भाइयों बहनों तंत्र प्रयोग करना एक अत्यंत सरल प्रक्रिया है. किन्तु इसके बाद के जो परिणाम होते हैं वे अत्यंत भयानक होते हैं क्योंकि इससे गुजरने वाला व्यक्ति या परिवार का जीवन नर्क की भांति होता है जो असहनीय होता है ....
     कुछ ऐंसी स्तिथियाँ बन जाती हैं कभी-कभी -- जैसे अचानक घर मे भयावह वातावरण बन जाये, बच्चे अचानक डर कर बीमार रहने लगें, घर में कलह की स्तिथी रहने लगे . और एक अजीब सा डर रहने लगे , तब समझना चाहिए कि निश्चित ही तंत्र बाधा हुई है,
    किन्तु क्या इसका कोई उपाय है ?
        वैसे आप लोग अक्सर पड़ते भी हैं की तंत्र बाधा निवारण  दीक्षा, तंत्र बाधा निवारण प्रयोग.... आदि

           तांत्रिक प्रयोग कोई भी कर सकता है , परन्तु उसके परिणाम व्यक्ति को गहराई से और पीड़ादायक भोगने पड़ते हैं, एक प्रकार से देखा जाये तो पूरी जिंदगी अस्त-व्यस्त हो जाती है . हमला करने या तांत्रिक प्रयोग करने कि विद्या सीखने बहुत साधना या मेहनत नहीं करना पड़ता परन्तु तांत्रिक प्रयोग यदि हो गया तो उसे दूर करने के लिए कठिन साधना या सिद्ध और अनुभवी व्यक्ति की जरुरत पड़ती ही है...... :)

          चूँकि अभी हमारे समक्ष अत्यंत विशिष्ट समय का आगमन हो रहा है जब की हम ऐंसी ही किसी भी समस्या से ना केवल मुक्ति पा सकते हैं, अपितु अपने जीवन को ऐसी आने वाली समस्या से सुरक्षित भी कर सकते हैं .

       और भाइयो बहनों वह समय है सूर्य ग्रहण का ... हैं ना :)

              सूर्य ग्रहण अर्थात जीवन से किसी भी ग्रहण को दूर कर प्रकाशित करने का समय . ग्रहण काल मे की गयी कोई भी साधना अत्यंत तीव्रता से फलित होती है .

          तो भाइयों बहनों यदि ऐंसी स्थिति है तो भी और नहीं हैं तो भी ताकि भविष्य को भी सुरक्षित कर सकें, कि ऐसा प्रयोग हो न सके या ऐसी स्तिथी ही बन पाए तो भी हमें इस प्रयोग को करना ही चाहिए  हैं ना ..... क्योंकि मौका भी है और हमारी परंपरा भी . क्योंकि निखिल परंपरा के अनुसार हम कोई भी साधनात्मक अवसर को छोड़ते ही नहीं हैं..... :)

  साधना विधि :-  भाइयो चूँकि  ग्रहण कल में विशेष पूजा नहीं की जाती  अतः ग्रहण काल में किसी भी विगृह, यंत्र या मूर्ति का हाथ से स्पर्श ना करें .

       इसके आवश्यक सामग्री हैं एक नारियल, कुंकुम, काजल और काली  हकीक माला या मूंगा माला और तीन दिए जो कि सरसों के तेल के हों तो अति उत्तम या किसी भी प्रकार का तेल हो सकता है.......

         स्नान कर  दक्षिण मुख होकर आसन पर बैठ जाएँ और मानसिक गुरु पूजन कर ४,११,या १६ माला गुरु मन्त्र की करें तथा गुरु मन्त्र समर्पित कर गुरुदेव से आशीर्वाद प्राप्त करें औए संकल्प लें ...            

अब अपने सामने भूमि पर कुंकुम को जल से गीला कर अधोमुखी त्रिकोण का निर्माण करें.औरत्रिकोण के तीनो कोने पर सरसों तेल का दीपक प्रज्वलित कर लें. 
उसके बाद नारियल को उस पर ऐसे स्थापित करें कि उसके पूंछ ऊपर की ओर हो.
   काजल से निम्न मन्त्र बोलते हुए सात बिंदियाँ नारियल पर लगावें......
 "ॐ ऐं ह्रीं मम समस्त तंत्र दोष निवृत्त्ये ह्रीं ऐं फट्"


   अब काली हकीक माला अथवा रुद्राक्ष या मूंगे की माला से इस मन्त्र की ११ माला जप करें.
 और इसके पश्चात गुरु मन्त्र कि चार माला जप कर गुरुदेव से प्रार्थना करें कि ये साधना सफल हो और हमारे जीवन से तंत्र बाधा दूर हो और हम सदैव सुरक्षित रहें......
            साधना समाप्ति के बाद या दूसरे दिन नारियल को किसी सुनसान स्थान पर विसर्जित कर दें ..... :)
"निखिल प्रणाम"



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