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Wednesday, May 22, 2013

RASESHVAR GUHYATAM VIDHAAN - ATOOT AISHVARYA PRADAAYAK "KUBER VARAD PRAYOG"



चन्दनागुरुकर्पुर कुंकुमान्तर्गतोरसः
मूर्छितः शिवपूजा सा शिवसानिध्यसिद्धये

उपरोक्त पंक्तियाँ रस साधको के मध्य प्रचलित पंक्तियाँ है जो की रस एवं दुर्लभ रस लिंग अर्थात पारद शिवलिंग की महत्ता को स्पष्ट करता है. निश्चय ही रस एक अति दिव्य धातु है पदार्थ है जिसको हम तांत्रिक पद्धति से साध ले तो हम ज़रा मृत्यु के बंधन से मुक्त हो सकते है, रस सिद्ध श्री नागार्जुन ने तो यहाँ तक कहा है की इस दिव्य धातु के माध्यम से पुरे विश्व की दरिद्रता एवं सभी प्रकार के कष्ट के साथ साथ मृत्यु को भी मिटाया जा सकता है

उपरोक्त श्लोक का विश्लेषण कुछ इस प्रकार है की रस चन्दन, कुमकुम इत्यादि पदार्थो से की जाने वाली पूजा का फल पारद के स्पर्शमात्र से ही साधक को शिवलिंग का पूर्ण पूजन का फल प्राप्त हो सकता है, मूर्छित अर्थात अचंचल पारद अर्थात शिवलिंग की पूजा करने वाले सौभाग्यशाली साधक भगवान सदाशिवसे एकाकार होने की उनके सानिध्य को प्राप्त करने की सिद्धि भी प्राप्त कर सकता है.

जो भी व्यक्ति पारद एवं रस तंत्र के क्षेत्र में रूचि एवं जानकारी रखता है वे निश्चय ही पूर्ण चैतन्य विशुद्ध पारद शिवलिंग के महत्त्व के बारे में समझ सकते है. इसी लिंग के लिए तो ग्रंथो में कहा है की पारद से निर्मित शिवलिंग के दर्शन मात्र से ही ज्योतिर्लिंग एवं कोटि कोटि लिंग के दर्शन लाभ के जितना पुण्य प्राप्त होता है. यह विशेष लिंग अपने आप में अनंत गुण भाव से युक्त धातु से निर्मित होता है इसी लिए उसमे किसी भी व्यक्ति को प्रदान करने की क्षमता अनंत गुना होती है. और तंत्र के सभी मार्ग में चाहे वह लिंगायत हो, सिद्ध हो, क्रम हो या कश्मीरी शैव मार्ग हो या फिर अघोर जैसा श्रेष्ठतम साधना मार्ग हो, सभी साधना मत्त में पारदशिवलिंग की एक विशेष महत्ता है तथा निश्चय ही कई प्रकार के विशेष प्रयोग गुप्त रूप से सभी मत्त एवं मार्ग में होती आई है.  इसी क्रम में सदगुरुदेव ने कई विशेष प्रयोगों को साधको के मध्य रखा था जिसमे पारदशिवलिंग के माध्यम से पूर्व जीवन दर्शन, शून्य आसन एवं वायुगमन आदि प्रयोग के बारे में समझाया एवं प्रायोगिक रूप से संपन्न भी करवाए थे. निश्चय ही अगर पूर्ण चैतन्य विशुद्द पारद शिवलिंग अगर व्यक्ति के पास हो तो साधक निश्चय ही कई प्रकार से अपने भौतिक एवं आध्यात्मिक जीवन को उर्ध्वगामी कर पूर्ण सुख एवं आनंद की प्राप्ति कर सकता है.


रसलिंग के माध्यम से संपन्न होने वाले कई विशेष एवं दुर्लभ प्रयोग को हमने समय समय पर आप सब के मध्य प्रस्तुत किया है इसी क्रम में इससे संपन्न होने वाले दो विशेष गोपनीय प्रयोगों को आप के सामने रखे जा रहे है.

१.अटूट धन सौभाग्य प्राप्ति कुबेर वरद प्रयोग -


महोदरं महाकायं द्विदंष्ट्रसमन्वितं
शङ्खपद्मगदाहस्तो कुबेराय नमाम्यहम्

बात जब दैव शक्तियों की सहायता से धन की प्राप्ति करना हो या अपने जीवन में पूर्ण सुख भोग की प्राप्ति करना हो तो निश्चय ही कुबेर का स्थान अपने आप में अन्यतम है. कुबेर यक्ष के आधिपति है तथा देवताओं के कोष के अध्यक्ष है. श्री कुबेर की साधना उपासना आदि काल से ऐश्वय की सिद्धि के लिए होती आई है. दक्षिण एवं वाम पक्ष में कुबेर सिद्धि के कई गुढ़ विधान है लेकिन इनकी उपासना एवं साधना सहज नहीं है क्यों की इनके विशेष विधान गुढ़ है तथा श्रमसाध्य है जिनको आज के युग में सभी साधको को संपन्न करना मुश्किल है. तथा श्री कुबेर से सबंध में जो विशेष लघु प्रयोग विधान है वह विविध सिद्धो के पास सुरक्षित है तथा जनसामान्य के मध्य इनका प्रचार नहीं है. इन सब विधानों में सब से दुर्लभ विधान पारद शिवलिंग के माध्यम से होने वाले विधान है. क्यों की कुबेर स्थापन आदि विधान रस लिंग के माध्यम से पूर्ण चैतन्य रूप से संपन्न होते है तथा जिनकी उपासना स्वयं कुबेर ही करते है ऐसे सदाशिव के विविध रूप मृत्युंजय अभिषेक तथा रूद्र स्थापन आदि क्रिया पारद शिवलिंग के निर्माण के बाद उसमे चैतन्यकरण क्रिया एवं प्राण प्रतिष्ठा करते वक्त ही किया जाता है. अब ऐसे पारद शिवलिंग पर विशेष प्रयोग कुबेर से सबंधित हो तो फिर सफलता दूर कहाँ.
इस विधान में लगभग ३ घंटे लगते हैं और ये मात्र ३ दिन का ही क्रम है.आप सम्पूर्ण परिवार की उन्नति और भाग्योदय के संकल्प के साथ इस विधान को संपन्न कर सकते हैं. किसी भी सोमवार की प्रातः या मध्यान्ह रात्रि में स्नान आदि से निवृत्त होकर श्वेत वस्त्र या पीले वस्त्र पहन कर आसन पर उत्तर मुख करके बैठ जाएँ और बाजोट पर उसी रंग के वस्त्र को बिछाएं,जिस रंग के वस्त्र आपने धारण किये हैं. अब आप हमेशा की तरह सदगुरुदेव और भगवान् गजानन गणपति का पूजन और सामर्थ्यानुसार मंत्र जप संपन्न कर पारदेश्वर को स्नान कराकर एक ताम्र पात्र में स्थापित कर दें. शाक्त परंपरा के अनुसार उस पात्र में एक मैथुन चक्र का कुमकुम से निर्माण कर तब उस पर रसेश्वर को स्थापित करे. और उनसे समस्त दुर्भाग्य को दूर कर पूर्ण सौभाग्य और ऐश्वर्य प्राप्ति की प्रार्थना करें.
 इसके बाद सामने दो अलग अलग पात्रों में सफ़ेद चन्दन और कुमकुम को घोलकर रख लें. सर्वप्रथम भगवान का निम्न ध्यान कर पंचोपचार पूजन करें और पूजन में खीर का भोग अवश्य लगावें.
ध्यान मंत्र-

ध्यायेन्नित्यंमहेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं  
रत्नाकल्पोज्ज्वलांग परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम।
पद्मासीनं समंतात् स्तुतममरगर्णै व्याघ्रकृत्तिंवसानं 
विश्वाद्यं विश्ववद्यं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम॥

    पंचोपचार पूजन के बाद निम्न कनकधारा स्तोत्र के २ पाठ करें. रस सिद्ध समाज में इस महा स्तोत्र को सुवर्णधारा स्तोत्र के नाम से भी जाना जाता है,वानस्पतिक संकेतों से भरा हुआ ये स्तोत्र विविध वनस्पतियों के सहयोग स्वर्ण निर्माण की क्रियाओं के रहस्य को स्वयं में समेटे हुए है और इसमें शब्दों का संयोजन ऐसा है की पारदेश्वर से इनका योग दरिद्रता और दैन्यता को दूर करता ही है. रस सिद्धि और कायाकल्प रहस्यों के अन्वेषण काल में आदरणीय स्वामी प्रज्ञानंद जी ने मुझे इस रहस्य से अवगत कराया था( मैंने उन्ही से प्राप्त अन्य रस तंत्र के कुछ रहस्यों का वर्णन ब्लॉग की लेखमाला रक्त बिंदु श्वेत बिंदु रहस्य में भी दिया है). और यदि सदगुरुदेव का आशीर्वाद रहा तो कालानुसार मैं इन सुवर्णधारा स्तोत्र श्लोको के उस अनुवाद को आपके समक्ष अवश्य रखूँगा.
  
अङ्गं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती
भृङ्गाङ्गनेव मुकुलाभरणं तमालम् ।
अङ्गीकृताखिल विभूतिरपाङ्गलीला
माङ्गल्यदास्तु मम मङ्गलदेवतायाः ॥ १ ॥

मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारेः
प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि ।
मालादृशोर्मधुकरीव महोत्पले या
सा मे श्रियं दिशतु सागर सम्भवा याः ॥ २ ॥

आमीलिताक्षमधिग्यम मुदा मुकुन्दम्
आनन्दकन्दमनिमेषमनङ्ग तन्त्रम् ।
आकेकरस्थितकनीनिकपक्ष्मनेत्रं
भूत्यै भवन्मम भुजङ्ग शयाङ्गना याः ॥ ३ ॥

बाह्वन्तरे मधुजितः श्रितकौस्तुभे या
हारावलीव हरिनीलमयी विभाति ।
कामप्रदा भगवतो‌ऽपि कटाक्षमाला
कल्याणमावहतु मे कमलालया याः ॥ ४ ॥

कालाम्बुदालि ललितोरसि कैटभारेः
धाराधरे स्फुरति या तटिदङ्गनेव ।
मातुस्समस्तजगतां महनीयमूर्तिः
भद्राणि मे दिशतु भार्गवनन्दना याः ॥ ५ ॥

प्राप्तं पदं प्रथमतः खलु यत्प्रभावात्
माङ्गल्यभाजि मधुमाथिनि मन्मथेन ।
मय्यापतेत्तदिह मन्थरमीक्षणार्थं
मन्दालसं च मकरालय कन्यका याः ॥ ६॥

विश्वामरेन्द्र पद विभ्रम दानदक्षम्
आनन्दहेतुरधिकं मुरविद्विषो‌ऽपि ।
ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणार्थं
इन्दीवरोदर सहोदरमिन्दिरा याः ॥ ७ ॥

इष्टा विशिष्टमतयोपि यया दयार्द्र
दृष्ट्या त्रिविष्टपपदं सुलभं लभन्ते ।
दृष्टिः प्रहृष्ट कमलोदर दीप्तिरिष्टां
पुष्टिं कृषीष्ट मम पुष्कर विष्टरा याः ॥ ८ ॥

दद्याद्दयानु पवनो द्रविणाम्बुधारां
अस्मिन्नकिञ्चन विहङ्ग शिशौ विषण्णे ।
दुष्कर्मघर्ममपनीय चिराय दूरं
नारायण प्रणयिनी नयनाम्बुवाहः ॥ ९ ॥

गीर्देवतेति गरुडध्वज सुन्दरीति
शाकम्बरीति शशिशेखर वल्लभेति ।
सृष्टि स्थिति प्रलय केलिषु संस्थितायै
तस्यै नमस्त्रिभुवनैक गुरोस्तरुण्यै ॥ १० ॥

श्रुत्यै नमो‌ऽस्तु शुभकर्म फलप्रसूत्यै
रत्यै नमो‌ऽस्तु रमणीय गुणार्णवायै ।
शक्त्यै नमो‌ऽस्तु शतपत्र निकेतनायै
पुष्ट्यै नमो‌ऽस्तु पुरुषोत्तम वल्लभायै ॥ ११ ॥

नमो‌ऽस्तु नालीक निभाननायै
नमो‌ऽस्तु दुग्धोदधि जन्मभूम्यै ।
नमो‌ऽस्तु सोमामृत सोदरायै
नमो‌ऽस्तु नारायण वल्लभायै ॥ १२ ॥

नमो‌ऽस्तु हेमाम्बुज पीठिकायै
नमो‌ऽस्तु भूमण्डल नायिकायै ।
नमो‌ऽस्तु देवादि दयापरायै
नमो‌ऽस्तु शार्ङ्गायुध वल्लभायै ॥ १३ ॥

नमो‌ऽस्तु देव्यै भृगुनन्दनायै
नमो‌ऽस्तु विष्णोरुरसि स्थितायै ।
नमो‌ऽस्तु लक्ष्म्यै कमलालयायै
नमो‌ऽस्तु दामोदर वल्लभायै ॥ १४ ॥

नमो‌ऽस्तु कान्त्यै कमलेक्षणायै
नमो‌ऽस्तु भूत्यै भुवनप्रसूत्यै ।
नमो‌ऽस्तु देवादिभिरर्चितायै
नमो‌ऽस्तु नन्दात्मज वल्लभायै ॥ १५ ॥

सम्पत्कराणि सकलेन्द्रिय नन्दनानि
साम्राज्य दानविभवानि सरोरुहाक्षि ।
त्वद्वन्दनानि दुरिता हरणोद्यतानि
मामेव मातरनिशं कलयन्तु मान्ये ॥ १६ ॥

यत्कटाक्ष समुपासना विधिः
सेवकस्य सकलार्थ सम्पदः ।
सन्तनोति वचनाङ्ग मानसैः
त्वां मुरारिहृदयेश्वरीं भजे ॥ १७ ॥

सरसिजनिलये सरोजहस्ते
धवलतमांशुक गन्धमाल्यशोभे ।
भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे
त्रिभुवनभूतिकरी प्रसीदमह्यम् ॥ १८ ॥

दिग्घस्तिभिः कनक कुम्भमुखावसृष्ट
स्वर्वाहिनी विमलचारुजलाप्लुताङ्गीम् ।
प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष
लोकधिनाथ गृहिणीममृताब्धिपुत्रीम् ॥ १९ ॥

कमले कमलाक्ष वल्लभे त्वं
करुणापूर तरङ्गितैरपाङ्गैः ।
अवलोकय मामकिञ्चनानां
प्रथमं पात्रमकृतिमं दयायाः ॥ २०॥

देवि प्रसीद जगदीश्वरि लोकमातः
कल्याणगात्रि कमलेक्षण जीवनाथे ।
दारिद्र्यभीतिहृदयं शरणागतं मां
आलोकय प्रतिदिनं सदयैरपाङ्गैः ॥ २२ ॥

स्तुवन्ति ये स्तुतिभिरमीभिरन्वहं
त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम् ।
गुणाधिका गुरुतुर भाग्य भागिनः
भवन्ति ते भुवि बुध भाविताशयाः ॥ २२ ॥

सुवर्णधारा स्तोत्रं यत् शङ्कराचार्य निर्मितं
त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नित्यं स कुबेरसमो भवेत् ॥
 स्तोत्र पाठ के उपरान्त (ॐ वैश्रवणाय स्वाहा) मंत्र की १ माला संपन्न करें,इस हेतु गुरु माला या रुद्राक्ष माला का प्रयोग किया जा सकता है. इसके बाद निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए रसेश्वर पर चन्दन की बिंदी लगाइए.

ॐ सदाशिवाय नमः
फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ रुद्राय नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ कालाग्नि नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ चिंतनाय नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ विरूपाय नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ वैद्रवाय नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ लक्ष्मी रूपाय नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ कृष्ण रूपाय नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ मुक्ति रूपाय नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ चिंत्य रूपये नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ भवेश्वर्याय नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ आबद्धरूपाय नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ पूर्णत्वरूपाय नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ चैतन्यरूपाय नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ क्रियमाणाय नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ कालं तरायै नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ पूर्णस्यायै नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ सभामभैरवाय नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ सचिन्त्य रूपाय नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ पारदेर्श्वर्यै नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ आबद्ध लक्ष्मी नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ अन्नपूर्णायै नमः
फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ दीर्घ रूपायै नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ कालमुक्तायै नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ मृत्युरूपायै नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ गणेश रूपायै नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ सरस्वतेश्वर्यायै नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ पूर्णेश्वरायै नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ कल्याण रूपायै नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ पूर्णआबद्ध रूपाय नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ दीर्घ रूपाय नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ कल्याणार्थ सदां पूर्वश्याम सः दीर्घ रूपाय नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ अमृत्यु रूपाय नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ अमृताय रूपाय नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ कल्याण रूपाय नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.
     बिंदी लगाने के बाद पुनः निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन से रसेश्वर पर बिंदी लगायें.

ॐ पूर्ण कुबेर वैश्रवणाय नमः

फिर ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः (OM AING SHREEM HREENG KUBERAAY DHAN DHAANYA SAMRIDDHIM DEHI DAAPAY NAMAH)मंत्र को ११ बार बोलते हुए ११ बिंदी जल मिश्रित कुमकुम (जो की हल्दी से बना हुआ हो अथवा अष्टगंध का प्रयोग करें)के द्वारा बिंदी के द्वारा भगवान् रसेश्वर पर लगायें.

    इसके बाद पुनः (ॐ वैश्रवणाय स्वाहा) मंत्र की १ माला संपन्न करें. और कनकधारा स्तोत्र के ३ पाठ करे.
अङ्गं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती
भृङ्गाङ्गनेव मुकुलाभरणं तमालम् ।
अङ्गीकृताखिल विभूतिरपाङ्गलीला
माङ्गल्यदास्तु मम मङ्गलदेवतायाः ॥ १ ॥

मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारेः
प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि ।
मालादृशोर्मधुकरीव महोत्पले या
सा मे श्रियं दिशतु सागर सम्भवा याः ॥ २ ॥

आमीलिताक्षमधिग्यम मुदा मुकुन्दम्
आनन्दकन्दमनिमेषमनङ्ग तन्त्रम् ।
आकेकरस्थितकनीनिकपक्ष्मनेत्रं
भूत्यै भवन्मम भुजङ्ग शयाङ्गना याः ॥ ३ ॥

बाह्वन्तरे मधुजितः श्रितकौस्तुभे या
हारावलीव हरिनीलमयी विभाति ।
कामप्रदा भगवतो‌ऽपि कटाक्षमाला
कल्याणमावहतु मे कमलालया याः ॥ ४ ॥

कालाम्बुदालि ललितोरसि कैटभारेः
धाराधरे स्फुरति या तटिदङ्गनेव ।
मातुस्समस्तजगतां महनीयमूर्तिः
भद्राणि मे दिशतु भार्गवनन्दना याः ॥ ५ ॥

प्राप्तं पदं प्रथमतः खलु यत्प्रभावात्
माङ्गल्यभाजि मधुमाथिनि मन्मथेन ।
मय्यापतेत्तदिह मन्थरमीक्षणार्थं
मन्दालसं च मकरालय कन्यका याः ॥ ६॥

विश्वामरेन्द्र पद विभ्रम दानदक्षम्
आनन्दहेतुरधिकं मुरविद्विषो‌ऽपि ।
ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणार्थं
इन्दीवरोदर सहोदरमिन्दिरा याः ॥ ७ ॥

इष्टा विशिष्टमतयोपि यया दयार्द्र
दृष्ट्या त्रिविष्टपपदं सुलभं लभन्ते ।
दृष्टिः प्रहृष्ट कमलोदर दीप्तिरिष्टां
पुष्टिं कृषीष्ट मम पुष्कर विष्टरा याः ॥ ८ ॥

दद्याद्दयानु पवनो द्रविणाम्बुधारां
अस्मिन्नकिञ्चन विहङ्ग शिशौ विषण्णे ।
दुष्कर्मघर्ममपनीय चिराय दूरं
नारायण प्रणयिनी नयनाम्बुवाहः ॥ ९ ॥

गीर्देवतेति गरुडध्वज सुन्दरीति
शाकम्बरीति शशिशेखर वल्लभेति ।
सृष्टि स्थिति प्रलय केलिषु संस्थितायै
तस्यै नमस्त्रिभुवनैक गुरोस्तरुण्यै ॥ १० ॥

श्रुत्यै नमो‌ऽस्तु शुभकर्म फलप्रसूत्यै
रत्यै नमो‌ऽस्तु रमणीय गुणार्णवायै ।
शक्त्यै नमो‌ऽस्तु शतपत्र निकेतनायै
पुष्ट्यै नमो‌ऽस्तु पुरुषोत्तम वल्लभायै ॥ ११ ॥

नमो‌ऽस्तु नालीक निभाननायै
नमो‌ऽस्तु दुग्धोदधि जन्मभूम्यै ।
नमो‌ऽस्तु सोमामृत सोदरायै
नमो‌ऽस्तु नारायण वल्लभायै ॥ १२ ॥

नमो‌ऽस्तु हेमाम्बुज पीठिकायै
नमो‌ऽस्तु भूमण्डल नायिकायै ।
नमो‌ऽस्तु देवादि दयापरायै
नमो‌ऽस्तु शार्ङ्गायुध वल्लभायै ॥ १३ ॥

नमो‌ऽस्तु देव्यै भृगुनन्दनायै
नमो‌ऽस्तु विष्णोरुरसि स्थितायै ।
नमो‌ऽस्तु लक्ष्म्यै कमलालयायै
नमो‌ऽस्तु दामोदर वल्लभायै ॥ १४ ॥

नमो‌ऽस्तु कान्त्यै कमलेक्षणायै
नमो‌ऽस्तु भूत्यै भुवनप्रसूत्यै ।
नमो‌ऽस्तु देवादिभिरर्चितायै
नमो‌ऽस्तु नन्दात्मज वल्लभायै ॥ १५ ॥

सम्पत्कराणि सकलेन्द्रिय नन्दनानि
साम्राज्य दानविभवानि सरोरुहाक्षि ।
त्वद्वन्दनानि दुरिता हरणोद्यतानि
मामेव मातरनिशं कलयन्तु मान्ये ॥ १६ ॥

यत्कटाक्ष समुपासना विधिः
सेवकस्य सकलार्थ सम्पदः ।
सन्तनोति वचनाङ्ग मानसैः
त्वां मुरारिहृदयेश्वरीं भजे ॥ १७ ॥

सरसिजनिलये सरोजहस्ते
धवलतमांशुक गन्धमाल्यशोभे ।
भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे
त्रिभुवनभूतिकरी प्रसीदमह्यम् ॥ १८ ॥

दिग्घस्तिभिः कनक कुम्भमुखावसृष्ट
स्वर्वाहिनी विमलचारुजलाप्लुताङ्गीम् ।
प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष
लोकधिनाथ गृहिणीममृताब्धिपुत्रीम् ॥ १९ ॥

कमले कमलाक्ष वल्लभे त्वं
करुणापूर तरङ्गितैरपाङ्गैः ।
अवलोकय मामकिञ्चनानां
प्रथमं पात्रमकृतिमं दयायाः ॥ २०॥

देवि प्रसीद जगदीश्वरि लोकमातः
कल्याणगात्रि कमलेक्षण जीवनाथे ।
दारिद्र्यभीतिहृदयं शरणागतं मां
आलोकय प्रतिदिनं सदयैरपाङ्गैः ॥ २२ ॥

स्तुवन्ति ये स्तुतिभिरमीभिरन्वहं
त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम् ।
गुणाधिका गुरुतुर भाग्य भागिनः
भवन्ति ते भुवि बुध भाविताशयाः ॥ २२ ॥

सुवर्णधारा स्तोत्रं यत् शङ्कराचार्य निर्मितं
त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नित्यं स कुबेरसमो भवेत् ॥

 इस प्रकार ये विधान पूर्ण होता है,विधान के बाद अपना जप भगवान् सदाशिव अथवा सदगुरुदेव के श्री चरणों में अपित कर सफलता के लिए प्रार्थना करें,इस प्रकार ये क्रिया तीन दिन तक करनी है. इसके बाद आप चाहें तो प्रतिदिन मात्र २१ बार ॐ ऐं श्रीं ह्रीं कुबेराय धन धान्य समृद्धिं देहि दापय नमः मंत्र जप कर लें. प्रतिदिन विधान के बाद खीर का भोग स्वयं ही ग्रहण कर लें.
  आशा करता हूँ की आप इस विधान को संपन्न कर अपना जीवन खुशियों से परिपूर्ण कर लेंगे.आइये इस अद्विय्तीय विधान को संपन्न कर हम सदगुरुदेव के श्री चरणों में अपने श्रद्धा ज्ञापित करें,और अपने शिष्यत्व को सार्थक करें.
     दूसरा प्रयोग कल के लेख में........(क्रमशः)


****npru****

1 comment:

MEGHA PANDEY said...

Please continue post on your blog it is really knowledge providing for us.