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Tuesday, May 10, 2011

Parad Swarna Anu siddhi Golak



पारद तो जीवन का सौभाग्य हैं मानव  के जीवन को दिव्यता से भरने  में जितना इस तत्व का हाथ हैं उतना तो शायद किसी भी तत्व में  सामर्थ्य नहीं हैं . अपने स्वरुप को कितनी धातुओ ओर  दिव्य जड़ी ओर  दिव्य  ही नहीं बल्कि मानव मात्र के लिए अकल्पनीय पदार्थ से  भी यह अमृत वर्षा कर  देता हैं इस लिए कालातीत से यह  दिव्यता  का परिचायक रहा हैं . जैसा की आप सभी जानते हैं की हमारे द्वारा तीसरी कार्यशाला का आयोजन  किया गया था , सदगुरुदेव ओर पूज्य गुरुदेव त्रिमूर्ति जी के आशीर्वाद से एक बार पुनः हम सफलता के  पथ पर ओरसदगुरुदेव जी के दिव्य चरण कमलों की ओर एक कदम आगे बढे हैं,   विगत  कार्यशालाओं  की भांति  इस बार भी हमारे साथ हमारे गुरु भाइयो  का जो  जो सहयोग रहा वह तो केबल ओर केबल मात्र  सदगुरुदेव जी ओर गुरुदेव त्रिमूर्ति जी के आशीर्वाद  का ही परिणाम हैंहम  तो मात्र  आपके केबल आपके गुरु भाइयों  के रूप में  ही हैं ओर आजन्म  रहेंगे भी .उन श्री चरणों काआशीर्वाद  हमारे सर पर रहे ओर इससे ज्यादा क्या चाहिए  भी हमें. 
    हमारे आशाओं के  अनुमान से भी अधिक गुरु भाइयों  हमारे साथ इस कामख्या कार्यशाला मैं सम्मलित हुए लगभग  हमसभी  ३० लोग   एक बार पुनः साथ थे एक शिष्य के जीवन का सबसे पवित्रतम  दिन यदि कोई हो सकता हैं तो वह हैं  हमारे सर्व प्रिय सदगुरुदेव जी का जन्म दिवस इस महा पुण्य  वान दिवस पर हमारी यह कार्यशाला प्रारंभ हुए  २१  अप्रैल २०११ को,  प्रातः काल से ही सभी  इस दिव्यतम क्षणों को मनाने में जुट गए इसकी के साथ बहु प्रतीक्षित   पारद स्वर्ण अणु सिद्धि गोलक  को  सिद्ध करने का ओर प्रत्येक  साधक के  लिए   उससे सम्पर्कित करने का कार्य प्रारंभ हुआ 

 इससे पहले की हम आगे बढे यह जानना जरूरी  हैं की क्या हैं ये दिव्य गोलक ओर कैसे  इसका निर्माण किया जाता हैं . यु तो इससे संबंधित लेख में कुछ तो में परिचय  दे ही चूका ही हूँ पर  फिर भी यह गोलक पारद के दिव्य संस्कारो से युक्त ही अपने आप में ही दिव्यतम  हैं  फिर यदि इसे  इसे स्वर्ण  ग्रास रजत ग्रास  के साथ कितनी ही दिव्य जड़ी बूटियों से सहयोग से इसका निर्माण किया गया अब क्या शेष रह जाता हैं
लगभग १६ दिन  इस कार्य में प्रति दिन के ६ घंटे के हिसाब से  लगे   घंटे दिन में तो दो घंटे रात में शास्त्रीय इस गोलक के निर्माण में ऐसा ही  नियम हैं .  फिर  जितने भी भाई  इस में भाग ले रहे थे उस सभी के नाम से  व्यक्तिगत  रूप से इस की चैतन्य करण   , अभिसिंचितिकरण , ओर विशिष्ट  क्रियाओं को कर के इसका प्राथमिक  चरण पूरा  किया गया  ,  इतना अधिक श्रम के बाद  तो यह  गोलक पहली बार हम सभीके सामने आया . तो अन्य प्रक्रियों के  बाद अन्य प्रक्रियों के लिए इसे ओर  अग्रसर करने के लिए भला सदगुरुदेव जी के जन्म  दिवस से  अधिक महत्वपूर्ण कोई दिन हो सकता हैं.  
पर अब ओर क्या इसमें  क्या करना शेष होगा हम सभी सोच रहे थे प्रातः कालिन पूर्ण सद्गुरु पूजन प्रारंभ  हुआ लगभग ४ घंटे चला  इसमें सदगुरुदेव के पूर्ण पूजन उपरात , स्वर्णाकर्षण भैरव स्थापन हुए जो की पारद  साधना के पूर्ण आधाढ़ेंनाथ  ही नहीं नव नाथ ओर भगवान् दत्तात्रेय  का स्थापन प्रयोग इस गुटिका पर क्योंकि  नाथ संप्रदाय के आदि गुरु ने ही  ही तो इस पारद  संस्कार  को प्रसारित किया  फिर नव नाथ तो शिव पुत्र हैं  पारद  जो शिव वीर्य हैं  तो शिव तत्व को कैसे भुला सकते हैं . जीवन में नव ग्रहों के महत्त्व को कैसे टाल सकते हैं पर  इनके साथ नवग्रहों की माता मुन्था कोकैसे भूल सकते हैं इन नव ग्रहों की  की कृपा साधक को  मिले ही पारद  के माध्यम से.
 पर इसके बाद  अष्ट  लक्ष्मी स्थापन क्रम आया  तो न  केबल अष्ट लक्ष्मी बल्कि इनमें से प्रत्येक लक्ष्मी  के १०८ स्वरूपों का भी स्थापन  इस गोलक में किया गया जिस से  यह पारद गोलक वास्तव में ही साधक के लिए  सौभाग्य के रास्ते खोल दे. अब समय था वाराही देवी स्थापन का  तो यह गोलक  स्तम्भन  के लिए भी साधक के लिय उपयोगित  हो सके  पर स्तम्भन का क्यों की साधक किसी भी प्रकार  के तंत्र वाधा से मुक्त रह सके तब इसी महा शक्ति  कीस्थापन  अनिवार्य हैं ही .जब पारद व्यक्ति को कालातीत कर सकने की क्षमता  देता हैं तब  भगवान् महाकाल का स्थापन  तो इस गोलक मैं ही होना ही हैं अन्यथा  कैसे कुछ भी उपलब्धिया स्थायी  रह पायेगी.   महाकाल का स्थापन  तो  कर लिया पर  काल की अधिस्ठार्थी माँ महाकालीके दिव्यतम स्वरुप  माँ दक्षिण काली , माँ काम कलाकाली , गुह्य काली , सिद्धिप्रदा काली के स्वरुप को तो भूला कैसे जा सकता हैं  इन सभी माँ जगदम्बा के स्वरुप की स्थापन अगर ऐसे महा शक्ति पीठ जो साक्षात्   माँ पराम्बा का स्थान हैं वह  भी सदगुरुदेव जीके जन्म दिवस पर तो आप ही सोचे की क्या सदगुरुदेव जी ओरगुरुदेव त्रिमुर्तिजी के आशीर्वाद के बिना किसी  मैं भी ऐसी सामर्थ्य हैं की वह जो यह संभव करपाता संभव ही नहीं हैं .
यह सब  स्थापन पूरा हुआ हमारी सम्पूर्ण  गुरुशाक्तिके दिव्य आशीवाद से  जिनकी  छत्र छाया ,  कृपा  तलेवरद हस्त तले,  हमारे ऊपर    हम सभी आगे बढ़ ही रहे हैं .
शास्त्रों में इस दिव्य गोलक  के बारेमें जो वर्णित हैं वह मैं आपके सामने  सामने  अपनी  ओर से कोशिश कर रहा हूँ . यह गोलक तो जीवन का दिव्यतम वरदान हैं मात्र इसे  प्राप्त कर लेना    से  ज्यादा जरुरी  हैं की जिन क्रियाओं  की बात से में  कुछ का उल्लेख किया हैं   वह सम्पूर्णता  से पूरी की गयी हो तभी तो  यह ,इस परहोने वाली क्रियाओं का  यह आधार भुत   आधार बनेगी . 
पारद के इस  स्वर्ण अणु सिद्धि गोलक को यदि सामने रख कर दस  महाविद्या  मेंसे  हर के के  सिद्ध पीठ पर जा कर पहले  दस तत्व से सम्बंधित  एक विशेष मन्त्र का  यदि १०८ बार जप  करके उस महाशक्ति के दर्शन करें जाये तो सम्बंधित  महाविद्या की कृपा तो प्राप्त होती हैं वे स्वयं  अंपने वरदायक  स्वरुप  से साधक के कार्यों में सहयोगी रहती हैं यही तो निश्चित काय  रूपेण साधना  हैं . उसके बाद  शास्त्र कहते हैं की  इस दिव्य  गोलक  पर षट  कर्म भी सफलता पूर्वक संपन्न हो पाते हैं  जिनमें  मोहन उच्चाटन मारण विद्वेषण  भी शामिल हैं इन प्रयोगों को हेय दृष्टी से न देखें जीवन की आपधापी में जब व्यक्ति बुरी तरह  फस जाता हैं  अनेको के पास जाकर  अपनी समस्यों के लिए गिड़ गिडाता  हैं तब उसे पता चलता  हैं की इन क्या क्या अर्थ  हैं ,
इस दिव्य पारद गुटिका पर  तो भगवान दत्तात्रेय  का स्थापन हुआ हैं तो उनके परम पावन दर्शन का सदेह  अधिकारी बनाना  तो देव दुर्लभ हैं ही वह भी इस पारद गुटिका के माद्यम से  संभव हैं ओर जहाँ  महाकाली हैं वहां पर उनके स्वरुप से सम्बंधित गण वीर बैताल  भी इसके माध्यम से आसानी से सिद्ध किये जा सकते हैं ,  शमशान में होने वाले प्रयोगों के लिए तोमानो   तो वरदान हैं ही यदि आपके पास यह गुटिका आपके गले में हैं ,तो क्या कहाँ जाये  , क्योंकि  जहाँ भगवान् महाकाल ओर  माँ पराम्बा स्वरूपी महाकाली हो वहां कौन सी स्थिति आपको भय भीत कर सकती हैं  हैं फिर आप हैं किनके शिष्य एक बार  अपन ह्रदय टटोले  तो सही आप खुद ही जान जायेंगे,
 पारद तो शिव बिंदु हैं ओर हमारा वीर्य  हमारा  बिंदु हैं अब हमने  शिव वीर्य तो शुद्ध करलिया  पर जब हमारा स्वयं का ही बिंदु अशुद्ध हैं तब क्या कहेउच्चतर साधनों के अमृत को कैसे कैसे   कोई अशुद्ध पात्र में शुद्ध वस्तु डालने तैयार होगा , कैसे मानेगा कोई  की उसके बिंदु का अभी तक शोधन नहीं हुआ,पर जब तक आपका बिंदु  शुद्ध  न हो जाये उच्चतर क्रियाओ  के लिए कैसे व्यक्ति को योग्य माना  जाय .पर बिंदु शोधन की अद्भुत विधि तो  शास्त्रों  में  भी  वर्णित  नहीं  हैं  पर यह भी संभव  हो जाता हैं इस पारद गुटिका /गोलक के माध्यम से एक विशेष  प्रयोग  के द्वारा. ओर जब बिंदु शोधित होता हैं  तो व्यक्ति के चेहरे  पर एक आभा  एक प्रकाश दिखाई  देता हैं.  

क्या आप मान पाएंगे की शास्त्र तो कहते हैं की एक विशेष प्रयोग के माध्यम से व्यक्ति अद्रश्य भी ही सकता हैं क्यों नहीं हैं संभव क्या सदगुरुदेव जी ने इस विषय पर सम्बंधित कितनी ही साधना  नहीं दी हैं . अब हम ही कमजोर ओर आलसी बने तो उनका क्या दोष .

पर इसके साथ शास्त्र  यह  भी कह ते हैं की दिव्य मुद्राओं का ज्ञान भी  तो हो ,हमें हो इसका प्रयोग करने के लिए  शमशान  में होने वाली क्रियाओं का ये गोलक दिव्य आधार हैं जो न केबल किसी भी अप्रिय स्थिति में साधक की रक्षा करेगा बल्कि वह साधक  को उच्चतम  क्रियाओं का अधिकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ता हैं ही . शास्त्र तो यह भी कहते हैं की जैसे ही एक व्यक्ति इसे अपने हाँथ में लेता हैं यह उस व्यक्ति के हिसाब से उसके तत्वानुसार  अपने स्वरूपमें परिवर्तित कर लेता हैं . ओर यह साधक की  की ऋ णात्मक  उर्जा  उससे लेकर उसे धनात्मक उर्जा  देकर अपना  स्वरुप तत्काल परिवर्तन करना प्रारंभ करदेता हैं
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parad is the fortune of the life , for to fulfill or enriching the divinity to th e person life there is no more element has the power as like this mercurial science. This mercury not only through divine herbs but through various metal and notonly that type of the things but things in imaginable things he worked with them and provide the final out come to us which is just amazing, common person never ever believe that ,this parad provide a person a infiniteness. and this science is not for common also. as you all fully aware that there was the third workshop has been organized by us through the blessing poojya sadgurudev ji and poojya gurudev trimurti ji once again we have got successful and liuke this way we all moved one more step towards sadgurudev divine holy lotus feet. like previous organized workshop in this time also our gurubrother showed a higher degree of co operation among other. and why this so much co operation has been possible this is only and only the result of blessing of sadgurudev ji and gurudev trimurtiji and nothing else , we are just your guru brother and always will be , we will have the blessing of sadgurudev ji divine lotus feet what more we or any onecan asked.(is there any need to ask?)
more than our expectation nearly 30 person took part in this kamakhya workshop, for any shishy , no other day is more holier than his beloved sadgurudev ji, and on this this great holiest day we have started our workshop, in the earlymorning hour we all are worked hard to celebrate this holy daus and in addition to that the process of siddhita to parad swaran anu siddhi golak had also been started and its special process through which this get contacted with individual sadhak is started.
before that we move forward , this is necessary to know that what is this golak, and how /what is the process of creation or making this divine golak, as I have already given a little bit introduction in mine previous post, but again... this highly divine material is in itself a divinity , since this is made of highly sanskarised parad which is itself a great divine material. but in addition to that if swarna grass, silver grass (special process through which gold and silver induces in that means as a eating.) and various divine herbs is also used , when all theses process successfully happened on that now the divine golak becomes a unique and on elf it s kind. i s there anything still remaining.
every day 6 hour required for to make this golak in that four hours in days and two house in night is the schedule and this is for continuation for next 16 days in continuous, this is unshakable rule the process and after that for each our brother who was taking part in this workshop individually chaitainyikaran and abhisinchitikaran and other confidential process had been completed for aiming individual. And this is the just basic step of preparation when after that hard work , this Parad An siddhi golak come in front of us. and for inducing other divinity through various process is there would be any more valuable days for us.
but what more is needed for this parad golak we all are thinking., inth emorning hours sadgurudevji complete poojanm had been completed and and thatalone took about 4 hours.after that swarankarshan bhairav had been sthapit onthis parad gutika . since he is the basese of parad sadhana. not only a nath but all the 9 nath and ain addition to that bhagvaan dattatrey also been stahpit on this golak, since nath sect fore most guru dattatrey is the one ,behind that this science spread all over world.and other reason is that nav nath is consider as the son of shiv tatav and parad is the veery tatav of lord shiva, than how one can forget shiv tatav. No one deny the importance of nine planet popularly known as nav graha, and also we could not forget the mother ofnav grah i.e muntha, sadhak will receive the blessing of all the nine planet thorough this golak is at he aim.
after that the stapan of asht lakshami had been started, not only the eight lakshmi but in each lakshmi’s 108 form also get induces in this parad golak. and only for that the sadhak will have all type of richness. now to protect the sadhak from any tantra avadhan there is only a devi varahi whom is the goddess ofstambhann, has also been stahpit. when parad gives a person a stage called kalatit than how can we forget lord mahakaal and after that goddess of kaal means time mother mahakali poojan had been started other wise how can the achievement of any sadhak can be maintained. andmothe mahakali forms like kamkalakali, guhy kali, sarva siddhida kali has also induces, and if all the process had been goingto complte the divine mother area and that too onthe sadgurudev ji birth days than think about a minit without sadggurudev ji and gurudev timurtijis blessing can any one do that, no one....
and allthis sthapan sankar process had been successfuly complted only under the divine umberela of sadgurudev ji and gurudev trimurtiji, and we are moning ahead under this divine shadow.
what has been already diescribed bythe holy books in this regards I am just giving the details to have this golak is itself a great siddhita and only to get is not enough untill you thoroughly understand the situation. only than higher level of sadhana has been completed. successfully on that. and for coming workshop this has been a great foundation steps.

parad is consider as shiv veery and our veery is our bindu , through various sanskar we have purified shiv veery but what about our own bindu. how can the purest essence of higher sadhana , any one fill in our impure dirty pot. without bindu shodhan person is not entiled or eligibilty to go for higher sadhana. but how that can be possible even the scripture have silence over that , but that also possible though this golak through a special process. when bindu shodhan happened a true aura surround the person body.


first place this golak in your hand do chant 108 times a special mantra that has been called das tatv mantra . and visit each 10 peeth of mother divine and before taking darshan one must get notice that each one had to chant a pratical maha mantra . and after completing that mantra sadhak can have darshan that is most important, so that all the ten mahavidya very helpful to you all. and this is the nishchit kay rupen sadhana. and so after that all the six type of tantra basic karam like maran mohan uchchatan, kindly do not see all theses prayog with as low class one.when any person get stuck in this wheel of modern life than only he has the chance to get rid of that he continously visit to various one than he know that is the arth or meaning of that.”shat karam ”
bhagvaan dattatrey sthapan also had been been completely on this parad gutika and having the eligibility to have the darshan of such a great holiest one is itself a sign of fgreat fortune. and that too has been easily possible on a side when mahakali also sthapan on this gutika/golak than her gan like vaitaal can also controlled through sadhana, and this golak is like boon for prayog that will be happened in shamshan sadhana. since where bhagvaan mahakaal and goddess mahakali is there , than tell me which incident can make you fearful or create problem orfear. and for a sec just have a time and think whose shsishy you are, just search this question in your heart you will get the result.
Can you believe that Sadgurudev ji has provide so many sadhana related to a person completely get invisible for a duration he like , in patrika old issue and in books too, if we will not want that type of sadhana or having the doubt than whose fault is this. Surely this is not this fault.
But in addition to that our holy books also said that one should know the divya mudraye to get full result. And this golak is the main protecting armour and base of the various prayog happened on the shamshan, and provide the way to proceed the higher path. Holy scripture also said that when any one take this golak in his hand this golak as per the person tatav ,start changing its appearance.
****NPRU****
 
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