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Friday, January 27, 2012

भैरवी कल्पुद्धरित त्रैलोक्य विजय काली साधना (BHAIRAVI KALPUDDHRIT TRAILOKYA VIJAY KAALI SADHNA)


गुप्त तंत्र ग्रंथो मे हमारे ऋषियो ने जो विधान दिये थे वह अपने आप मे रहस्यों से परिपूर्ण थे. तंत्र जगत का साहित्य कई रूप से गुढ़ रहा है तथा उसमे जो विधान दिये है वह भी अत्यधिक गुप्त रूप से लिखे गए थे ताकि अनाधिकारी व्यक्ति उसका दुरूपयोग ना कर सके. इस प्रकार जब यह साहित्य को समजने वाले लोग ही नहीं रहे तब तंत्र साधनाओ की अवलेहना हुई और इस प्रकार तंत्र साहित्य का एक बहोत ही बड़ा भाग लुप्त हो गया. और इन सब साहित्य को मिथ्या नाम दे दिया गया. ज़रा तटस्थ भाव से सोचे की जब नोट या कलम नहीं थि, उस समय ताड़पत्री, विविध पदार्थो के पर्ण, चर्म, धातु जेसे विविध पदार्थो पर अत्यधिक कष्ट और श्रमसाध्य लेखन कई प्रकार की स्याही बना कर हमारे ऋषियो ने लिखा. उसके पीछे उन लोगो का क्या व्यक्तिगत चिंतन हो सकता है? लेकिन पाश्चात्य संस्कृति से चकाचौंध हो कर हमने खुद का पतन करना शुरू कर दिया. खेर, लेकिन कई ग्रन्थ काल के थपेडो से भी सुरक्षित बचाए गए जो की कई तांत्रिक मठो और तंत्र ज्ञाताओ के पास सुरक्षित रहे. ऐसे अप्रकाशित ग्रंथो मे से एक है “भैरवी तंत्र” कई हज़ार श्लोको का यह ग्रन्थ अपने आप मे देवी साधनाओ के लिए बेजोड है. इसके कई पटल अपने आप मे पूर्ण तंत्र है जिसमे से एक पटल या भाग है “काली कल्प”. यह कल्प देवी काली की उपासना के लिए बेजोड है. जिसमे देवी सबंधित साधन एवं कवच दिया गया है. लेकिन यह कवच भी अपने आप मे अत्यधिक रहस्यों से परिपूर्ण है. यह कवच मात्र कवच नहीं लेकिन विविध ध्यान मंत्र तथा साधन मंत्रो का समूह है. जिसमे एक से एक बेजोड मंत्र है. उसी मे से एक मंत्र पद्धति है त्रैलोक्य विजय काली मंत्र. ग्रन्थ के अनुसार इस का उपयोग करने वाले व्यक्ति का देवता भी अहित करने की सोचते नहीं. फिर सामान्य शत्रु की तो बात ही क्या है. साधक शत्रुओ के ऊपर हावी हो जाता है तथा समस्त षड्यंत्रो से पार उतर कर सर्वत्र विजयी होता है. इस साधना को करने के बाद साधक मे एक अत्यधिक तीव्र मोहन शक्ति का भी विकास होता है जिससे सभी व्यक्ति उसके अनुकूल रहना ही योग्य समजते है. इस कल्याण प्रदाता गुढ़ साधना को साधक करे तो देवी काली का आशीर्वाद सदैव साधक पर बना रहता है.
साधक को चाहिए की वह यह साधना कृष्ण पक्ष की अष्टमी से शुरू करे. सुबह उठ कर देवी महाकाली की पूजा करे तथा देवी दक्षिण काली का ध्यान करे. अगर साधक अपने सामने काली यन्त्र तथा चित्र रखे तो उत्तम है. इसके पश्च्यात साधक निम्न मन्त्र की १० माला सुबह, १० माला दोपहर तथा १० माला शाम को (सूर्यास्त के बाद रात्री काल मे सोने से पहले) मंत्र जाप करे. यह २१ दिन की साधना है. रोज ३ समय मंत्र जाप होना चाहिए. इसमें दिशा पूर्व रहे. वस्त्र आसान सफ़ेद रहे तथा माला काले हकीक या रुद्राक्ष की हो. जाप से पहले विनियोग निम्न मंत्र से करे. हाथ मे जल ले कर विनियोग बोलने के बाद जल को भूमि पर छोड़ दे.
विनियोग : अस्य श्री काली कल्पे जगमंगला कवच गुढ़ मन्त्रान त्रैलोक्य विजय मन्त्रस्य शिव ऋषि अनुष्टुप् छन्दः दक्षिण कालिका देवता मम त्रैलोक्य विजय त्रैलोक्य मोहन सर्व शत्रु बाधा निवारार्थाय जपे विनियोग
उसके बाद दक्षिण कालिका का ध्यान कर निम्न मंत्र का जाप करे.
हूं ह्रीं दक्षिण कालिके खड्गमुण्ड धारिणी नमः
साधक पूजा और विनियोग सुबह करे, दोपहर और शाम को विनियोग या पूजन की ज़रूरत नहीं है ध्यान के बाद सीधे मंत्र जाप शुरू कर सकते है.
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The procedures given in the secret tantra scriptures by our sages were filled of varieties of mysteries. Literature of tantra world had remained secret in many form and the procedures mentioned in the same had also been very much secret code language thus to pretend it from the unwanted use by unauthorised person. This way, when there remained very least people to understand such secret literature tantra sadhana was neglected and this way a big part of tantric literature went extinct. And all these literature was given name of fable only. Think once being neutral that there were no pen papers that time palm leaf, various leaves of plants, even skins of animals, metals were prepared with lots of trouble and hard work was put to write something on it by preparing in of various things.  Did they have personal benefit with this? But by being hypnotised in west culture we started finishing our self. Anyway, but many scriptures were saved from this time slaps and remained safe with various tantra scholars and matha. From such unpublished scripture there is one named “Bheiravi tantra” with several thousand verses; this scripture is incomparable for sadhana of goddesses. Many part of this tantra are counted as complete separate tantras in which on part or patal is “kaali kalpa”. This kalp is great for the devotion of goddess kaali in which procedures and kavach related to kaali has been given. This kavacha is also filled with various mysterious. This kavacha is not only kavacha but a bunch of various dhyan mantras and sadhan mantra in which there remains various incomparable mantras. From the same, there is one process called “treilokya vijay kaali mantra”. Says the scripture, that the one does this mantra; even gods too can’t think to harm the sadhak, well normal enemies would do what then. Sadhak remains completely winner on their enemies and destroys all the conspiracies. After completing this sadhana, development of the hypnotic power starts inside sadhak through which all the people think better to remain in favour of the sadhak. This boon giving sadhana if done by sadhaka then blessings of goddess Kaali stays on the head of the sadhak.
Sadhak should start this sadhana on 8th day of dark moon. In the morning, sadhak should do poojan of mahakaali and meditation of devi dakshina kaali. It is better if sadhak is comfortable putting mahakaali yantra and picture infront. After that sadhak should chant 10 rosaries in the morning, 10 rosaries in the afternoon and 10 rosaries in evening (between sunset and time before sleeping in night) of the mantra. This is 21 days sadhana. Every day 3 times mantra should be done. Direction should be east. Cloth and aasan should be white and rosary could be black hakeek or rudraksha. Before mantra chanting one should do viniyog. Chant viniyog by taking water in palm and then leave it on the floor.
Viniyoga : asy shri kaali kalpe jagmangalaa kavach gudh mantraan treiloky vijay mantrasy shiv rishi anustup chandah dakshin kaalikaa devtaa mam treiloky vijay treiloky mohan sarv shatru baadhaa nivaaraarthaay jape viniyog
After this sadhak should meditate dakshin kaalika and chant the following mantra
Hum  hreem  dakshin  kaalike  khadgmund  dhaarinee  namah
Sadhak should do poojan and viyoga in morning. In afternoon and evening time poojan and viniyoga is not require after meditation one can start mantra chanting.
   


                                                                                               
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1 comment:

अनिल said...

बहुत बहुत साधुवाद. आपका प्रयास अद्भुत और सराहनीय है. निखिल कृपा आप पर बनी रहे ऐसी मेरी हार्दिक शुभकामना है...