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Friday, January 13, 2012

VIGYAN VA TANTRA BHED-5(RAS VIGYAN VA TANTRA 3)


पिछले लेखो मे हमने जाना की पारद विज्ञान किस प्रकार पुरातन विज्ञान सिद्धांतों पर आधारित है तथा वह कौनसे मुख्य सिद्धांत है जो की पारद की प्रक्रियाओ को एक विज्ञान के रूप मे पदर्शित करती है. शुद्धिकरण, वेधन तथा गुणाधान पर यह विज्ञान आधारित है. श्रीमदगोविन्दपादाचार्य जो की आदि शंकराचार्य के गुरुदेव थे, वे पारद विज्ञान मे सिद्धहस्त थे. पारद के क्षेत्र मे उनका नाम अत्यधिक आदर से लिया जाता है. उनकी पद्दतिया मुख्य रूप से वैज्ञानिक सिद्धांत पर आधारित रही है तथा उन्होंने पारद के विविध प्राकृतिक तत्वों के संयोग से शुद्धिकरण तथा गुणाधान की पद्धतियाँ विकसित की थि. लेकिन पारद का जितना वैज्ञानिक पक्ष है उतना ही उसका तांत्रिक पक्ष भी है. तन्त्र के क्षेत्र मे सिद्ध नागार्जुन का नाम अत्यधिक आदर से लिया जाता है तथा उनकी गणना रससिद्धो मे होती है. उन्होंने तंत्र पक्ष को रसायन के साथ जोड़ कर जो कार्य किया है वह अपने आप मे ही बेजोड है. पार्वती पुत्र नित्यानाथ, लंकेश तथा नाग्बुद्ध जेसे रस सिद्धोने ने भी इस पक्ष मे अपना बहोत बड़ा योगदान दिया है. तंत्र के माध्यम से सिद्धांतिक प्रक्रियाओ को प्रकृति शक्ति के साथ साथ देव शक्ति को भी जोड़ा गया और उसके माध्यम से वैज्ञानिक प्रक्रियाओ को तीव्रता प्रदान की गई. यहाँ हम कुछ उदाहरणों के साथ इसे समजेंगे जेसे तांत्रिक मंत्रो के साथ खरल की प्रक्रिया. मंत्र के माध्यम से चित शुद्धिकरण होता है तथा विभ्भिन्न मंत्रो से अलग अलग भाव किसी भी चेतन मे उत्तपन किये जा सकते है. पारद शिव वीर्य है इस लिए वह चेतना से युक्त है, इस लिए तंत्र प्रक्रियाओ का इस पर असर होना स्वाभाविक है. एक विशेष प्रक्रिया के साथ मंत्र का उच्चारण करना ही तंत्र प्रक्रिया है. इस प्रकार खरल करते वक़्त कई बीजाक्षरो का जाप करने पर वह एक तांत्रिक प्रक्रिया बन जाती है निश्चित रूप से जिसका असर पारद पर होता है. इसी प्रकार विविध पदार्थो का आकर्षण भी किया जाता है जिससे की वह पात्र मे प्रस्तुत हो सके. पृथ्वी पर निहित हर एक तत्व पर किसी न किसी देवी देवता का प्रभाव रहता है, अगर उन देवी देवता से सबंधित तांत्रिक प्रक्रियाओ को किया जाऐ तो वह तत्व के ऊपर आधीपत्य स्थापित करना सरल हो जाता है. जेसे की अग्नि देव की साधना की गई है तो किसी भी प्रकार के अग्नि क्रम मे निश्चित रूप से अनुकूलता मिलना स्वाभाविक है. आगे के लेख मे हम जानेंगे कुछ गुढ़ सिद्ध पारद तन्त्र की प्रक्रियाओ के बारे मे.
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In previous articles we went through how paarad vigyan is related to the concepts of ancient science and which are the basic conceptions which represent processes of paarad as a complete science. Shrimad Govindpadacharya were Gurudev of Adi sankaracharya, He was component in Parad Vigyan. His name is history in the Paarad field. His processes were basically based on scientific concepts and he developed processes of paarad by connecting various natural materials for purification and multiplication of the power. But whatever we have paarad as science, we have the same way tantra side of paarad. In tantra field name of the siddha Nagarjuna is famous and he is counted in Ras-Siddha. The work he did by adjoining tantra and rasayana is incomparable. Other big contributions were made by many siddh like Nityanatha the son of paarvati, Lankesh and Nagabuddha in this field. With the medium of the tantra concept processes were merged with divine powers which previously was natural power and with this, intensity of the scientific processes were increased. Here we will understand this with some example like triturating process (kharal prakriya) with tantric mantras. Mantra can give internal purity to anyone and with various mantras; different humors could be developed in any conscious thing. Paarad is semen of lord Shiva thus it is conscious, this way it is natural to have effect of any tantra process on the same. With a specific process mantra chanting is tantra itself. This way while doing kharal process, chanting of various beej mantra acts as tantra process which definitely has effect on paarad. This way attraction of various materials is also done through which it can come in the vessel. On every material of the earth, there is control of specific god and goddess, if tantra process related to that god or goddess is done, then it is easier to control that specific material. For example if sadhana of God agni has been done then it is obviously natural to have comfort in every type of fire related process. In further articles we will get to know about some siddha secret processes of paarad tantra.
 
                                                                                               ****NPRU****   
                                                           
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1 comment:

GAURAV said...

आरिफ़ भाई , आपके इस सराहनीय कार्य के लिए आपको बहुत बहुत बधाई । क्रुपया हो सके तो पारे के सोलह संस्कारों के बारे मे भी समझाये तो आपकी बहुत बहुत कृपा होगी ।