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Tuesday, January 24, 2012

MALA ME PRANPRATISHTHA


यंत्रो  की  सामान्य प्राण  प्रतिष्ठा   विधि तो हमने  तन्त्र कौमुदी के  विगत के अंक में  दे हो चुके ही हैं , पर आपके सन्दर्भ में अनेको  पत्र और इ मेल  हमें  मिले जिसमे  हमसे  पूछ गया था की क्या  सामान्य   से सामान्य  से प्रयोग में  संस्कारित माला की जरुरत  होती हैं  ??तो  उत्तर  यह हैं की हाँ  बिना   संस्कार  की माला  का प्रयोग करने से सम्बंधित देवता  क्रुद्ध  हो जाते हैं  तो हर प्रयोग के लिए  यह माला  कहां से लाये  तो आप सभी के लाभार्थ  यह माला  को संस्कारित करने  की  विधिया  इस लेख में आप सभी  के लिए

 आप जानते हैं  की विभिन्न  प्रयोग  के लिए विभिन्न  मनको  की माला  का  उपयोग  होता हैं , कभी 51 तो कभी 31    पर  अधिकांश  प्रयोग और  साधना में 108मनको से युक्त  माला   का प्रयोग होता हैं. 

पर  १०८ ही  क्यों  यूं तो सभी का एक विशेष अर्थ हैं   हैं पर सदगुरुदेव भगवान् ने कहा  हैं की मानव शरीर में 7चक्र  नहीं बल्कि 108 चक्र होते हैं , और उन्होंने इस संदर्भ में  विभिन्न उदाहरण भी दिए हैं  साथ ही साथ  इस  हेतु एक बार  एक विशिष्ठ  दीक्षा १०८ चक्र  जागरण दीक्षा   भी उन्होंने प्रदान  की थी,  तो जब भी हम  108 मनको  की माला  से मंत्र  जप करते हैं तब हर मनके  के माध्यम से  एक  विशेष चक्र  पर  स्पंदन होता  ही हैं   फिर उसे हम महसूस  चाहे  या न  चाहे   करे .यही एक  गोपनीय  तथ्य हैं  इन मनको का 108 होने  का  तभी तो  108 मनको वाली माला सर्वार्थ सिद्धि प्रदायक  कही जाती हैं
 और यह माला ही  तो इस  साधना की एक विशेष उपकरण हैं , सदगुरुदेव  भगवान् कहते हैं की   की क्यों एक छोटी छोटी से बात पर  अपने सदगुरुदेव  पर भी निर्भर रहना , उन्होंने ही  तो अनेक बार   माला  और यंत्रो  को प्राण  प्रतिष्ठित  करने  की विधिया  बताई , उ ससमय  के अनेक  साधक  इस बात  के प्रमाण हैं ,  


 और जब हम  आगे  बढ़ कर सिद्धाश्रम   तक जाने की बात करते  हैं और  हम खुद एक सामान्य  सी माला  प्राण प्रतिष्ठित   न कर पाए  तो  आप  ही सोच सकते हैं  हम हैं कहाँ  ,  अतः  इस तथ्य  को ध्यान  में रखते  हुए  इस प्रक्रिया  को आपके सामने  रहा   जा रहा हैं .
यह लेख आरिफ खान जी के द्वारा अनेको वर्ष पहले   भी एक  पत्रिका  में प्रकाशित  हो चूका  हैं उसी का संक्षिप्त  रूप आपके सामने  हैं .
ध्यान रहे यहाँ  हम माला निर्माण की प्रक्रिया नहीं बता  रहे हैं  वह एक  और  ही  अलग  विषय हैं .

 प्रथम  तरीका :सर्वाधिक सरल तरीका  तो यह  हैं की आप किसी भी माला /मालाओं   को  किसी भी ज्योतिर्लिंग   या शक्ति पीठ में मुख्य विग्रह से  स्पर्श करा  ले,  उनकी प्राण उर्जा से माला  स्वतः  हो प्राण प्रतिष्ठित  हो जाती हैं .
द्वितीय तरीका : यह हैं की  यदि आप से  रुद्राभिषेक  करते  बनता हैं या आप के  घर में किसी से  या  कोई पंडित द्वारा आपके  घर में  रुद्राभिषेक  किया  जा रहा  हो  उस समय  काल  में किसी भी पात्र में यह माला जिसे  प्राण प्रतिष्ठित किया जाना  हैं उसे रख  दे , यह स्वत  ही  परं प्रतिष्ठित  हो जाती हैं , रुद्राभिषेक  की विधि आप  गीता प्रेस  की किताबों मेंपा  सकते हैं .
तृतीय  तरीका :आप के जो भी गुरु हो उनके हाथो के स्पर्श मात्र  से  भी यह प्रक्रिया  सुगमता  पूर्वक संपन्न हो जाती हैं .
  चतुर्थ  तरीका :माला  को गंगा जल से स्नान कराये  और  निम्न मन्त्र  उसी माला से  १०८ बार जप कर ले , यह भी एक सुगम तरीका  हैं .

माले माले  महामाले सर्व तत्त्व स्वरूपिणी |
चतुर्वर्गस्त्वयि  न्यस्त स्तस्मंमे  सिद्धिदा भव ||
पंचम तरीका  : शास्त्रीय प्रक्रिया :
पीपल के  नौ पत्ते  को इस तरह से  रखे  की एक पत्ता   बीच में और और अन्य पत्ते उसे केंद्र मानते  हुए इस प्रकार  रखे मानो एक अष्ट   दल कमल सा बन  जाये , बीच के पत्ते  पर  आप अपनी माला  रख दे  और हिंदी वर्ण माला से वर्ण ॐ अं से लेकर  क्षं तक सभी का  उच्चारण  करते हुए  उस माला  को  पंचगव्य से स्नान  कराये. फिर सद्योजात  मंत्र का  उच्चारण करते हुए

ॐ सद्योजातं प्रपद्यामि सद्योजाताय  वै नमो नमः |
भवे भवे नाति भवे भवस्य  माँ  भवो द्वावाय नमः ||
निम्न  वामदेव मन्त्र से चन्दन माला  पर लगा यें
बलाय नमो बल प्रमथ नाय  नमः सर्व भूतदहनाय  नमो  मनो न्मथाय नमः ||
धुप बत्ती  अघोरमंत्र से   दिखाए  
  अघोरेभ्योS  घोरेभ्यो  घोर घोर तरेभ्य: सर्वेभ्य : सर्व सर्वेभ्यो  नमस्ते अस्तु रुद्ररूपेभ्य :
फिर तत्पुरुष मंत्र से लेपन करे
ॐ तत्पुरुषाय  विद्म्ह्ये  महादेवी  धीमहि तन्नो रुद्रः  प्रचोदयात |
फिर इसके एक एक दाने पर एक बार या  सौ सौ बार  इशान  मंत्र का जप करे

 ॐ ईशान: सर्व विद्यानामिश्वर : सर्व भूतानां  ब्रह्मा धिपति र  ब्रह्मणो s धिपतिर्ब्रह्मा  शिवो में अस्तु सदाशिवो s |
अब बात आती हैं  कि कैसे देवता  की स्थापना  की  जाए  तो यदि आप इस माला    को शक्ति कार्यों में  उपयोग करना चाहते हैं तो  "ह्रीं " इस मंत्र के  पहले लगा कर और लाल  रंग के पुष्पों  से इसका पूजन करें.
और वैष्णवों को निम्न मन्त्र  का उपयोग करें
ॐ ऐं श्रीं अक्षमाला  यै  नमः ||
 फिर हर वर्ण मतलब अं  से लेकर क्षं  तक लेकर इनसे संपुटित करके  १०८  /१०८  बार अपने इष्ट मन्त्र का  उच्चारण करे .
  फिर यह प्रार्थना  करे
   त्वं माले सर्वदेवानां  सर्व सिद्धिप्र्दा मता |
तें सत्येन में सिद्धिं  देहि  मातर्नामो s स्तू  ते ||
अब इस माला  को हर के सामने  दिखाए नहीं , आपको जो भी विधि  उचित लगे उसका उपयोग करके एक प्राण प्रतिष्ठित  माला का निर्माण  आप कर  सकते हैं उसे साधना में  प्रयोग करसकते हैं .   
पर यह  तो प्रकिया  मणि माला  को संस्कारित  करने की हैं  पर  विशेष शक्ति युक्त  तांत्रिक  माला  का निर्माण कैसे किया जाए ,   यह विधान पहली बार ही सामने आ  रहा हैं ,  तो इसमें आपको
ॐ सर्व  माला  मणि माला  सिद्धि प्रदात्रयि शक्ति रुपिंयै     नमः
sarv  mala  mani mala  siddhi pradatrayi   shakti rupinyai     namah 
१०८ बार  उच्चारण  करना हैं इस दौरान माला  हाथ में  घुमती यां  उसे घुमाते  रहे गी /रहे 

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 We have already given  the process  how to  make  praan pratisthha of yantra can be  done , but we have  been continuous getting e mails  regarding the  one question is there any necessity  of using sanskarit mala in any and every  sadhana,??  Than answer is yes ,, if one is using the  mala without having Sanskar  than the related deity of that sadhana often get  angry but where and how   you can purchase  separate  mala for each and every prayog .
 so  for the benefit of you all here is the process  by  which you can  also  praan pratisthhit the mala  or sanskarit  mala.
 As  you are already aware that  that  there  are many type  of mala used  in sadhana  prayog some has 31 beeds  some 51  and some 108 beeds , why it is  so . but in majority of the  cases beeds  quantity of 108  haapens  why??.

as each mala has  his  own value and  these beeds quantity  has a  purpose ,  as Sadgurudev Bhagvaan has many  times says that   there are not 7 chakra  but 108  chakra lies in  human body and  for that 108 chakra  energization  he gave  a special  Diksha  names “108 chkra  jagran Diksha” . so when  we  do jap with mala  with 108 beeds than  through each beeds   than chakra related to that  beeds get energize . this is one  of  the reason behind  using 108 beeds mala  and  this  mala  has been called sarvarth  siddhi pradayak means  all  siddhi provider .
 And  this mala   is a  special  instrument  in any sadhana,   Sadgurudev Bhagvaan used to say that why  you have to depends  each times even  for small problem to your Sadgurudev., he has given many times the process for how to energize   the yantra and rosary  process.  many  of the sadhak of that era clearly knew this  and a self evidence of that.
When we are talking about  going to siddhashram  and not able to  do/know  how to energize a simple rosary than think about it where we are standing., taking care theses fact here are  the  process  in  front of  you .
 This  articles is based on the  arif  ji, already written  articles that has been appeared many years  before in a magazine.
Please keep it in mind  here we are  not discussing the process how  to make mala   that is a different  subject.
First way :one of the most easiest  process is that  have  a opportunity to visit any shiv jyotirling or shakti peeth hand   touch your rosary / rosaries to the main vigrah , automatically  that  mala/rosary  has been sanskarit.
 Second way:  if you how to do rudrabhishek  or any person of your home knew about that or through any pandit this rudrabhishek is  going on  than during that period place the required mala/rosary in any pot in front of that , so that mala automatically get sanskarit.

You can get the complete  rudrabhishek  process  through gita prèss Gorakhpur books.
Third  way: who so ever is your guru , and you have  a faith in him than  as the rosary get touch of his body or hand that automatically Sanskrit.
  Fourth ways:wash  rosary with ganga  jal and  during that  period chant this mantra for 108  times  this is also a easy  process,
Maale maale mahamaale sarvtatvswrupini |
Chturvargstvyi nyast stsmanme  siddihida bhav ||
 Fifthways:                         shashtriy ways:
Place  nine leaves of pipal tree  in this way  that place one leave in middle and remaining eight place in circular of that,  so a asht dal lotus  type fig  formed. And place the rosary in middle
  leave and  wash that rosary  with panchgavy  and chant the complete  varn mala like am, aam,   to ksham ,  than chant
sandyojaat mantra:
Om sandyojaat prpadyaami sadyojaataay vai namo namah |
Bhave bhave naati bhave bhavsy maan bhavo dwavaay namh||
Then apply chandan   to rosary  and chant
 vaamdev mantra:
Blaay namo bal pramthnaay namh sarv bhutdahnaay namo manomnmathaay namah|

Offer  dhoop stick with this

aghor mantra:
Om aghorebhyoath  ghorebhyo  ghor ghor  tarebhyah  sarvebhyah  sarv  sarvebhyo namste astu  rudrarupebhy
And  againwith 
tatpurusha mantra :
Om tatpurushay  vidmahye  mahadevi  dhimahi  tanno  rudrah prachodyat  | 
 Than  chant  ishan mantra either one times or100 times on each beeds of rosary .

Om   ishanah   sarv   vidyaanamishwarah   sarv   bhutanaam bramha dhipatir brmhnoo dhipatir bramha shivo me astu sadhashivoaham||
 Now the question rises how  to make  this  mala energize of any deity, if you are using this mala  for shakti  sadhana, than add “HREEM” before this mantra a and offer red color flower to it.
Maale maale mahamaale sarvtatvswrupini |
Chturvargstvyi nyast stsmanme  siddihida bhav ||
  And vaishnav can use this mantra
 Om ayem   shreem   akshmala yai    namah||
Than use every varn means am  to ksham means add thses varn to your isht mantra and chant108 /108 times, than  do this prayer.
Om tvam   maale    sarvdevaanam   sarv   siddhipradamata |
Ten  satyen   men   siddhim   dehi   maatarnaamostu   te ||

Than not toshow this mala  toevery one, than follow any one mothod whichever one you like most, and  after  that mala  you can use  in your sadhana.
  Butthis sis the simplest process  but how we canmake  special shakti  tantrak mala   so  for that just 108  times this mantra,  while chantingthe mantra the rosary  should  be  moving in your hand
Mantra   :
sarv  mala  mani mala  siddhi pradatrayi   shakti rupinyai     namah 
 
   


                                                                                               
 ****NPRU****   
                                                           
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