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Sunday, July 10, 2011

AAVAHAN-16

लाल साडी मे सुसज्जित वह योगिनी का रूप और सौंदर्य गज़ब का था, ऐसा लग रहा था मनो जैसे कोई अप्सरा ही आके बैठ गयी हो सामने...ओर उसी सौंदर्य की आभा हज़ार गुना बढ़ा रही थि उसकी मनमोहक मुस्कान. सज्जन और सन्याशी ने कमरे मे तुरंत ही प्रवेश किया और साथ ही साथ मेने भी अंदर प्रवेश किया. योगिनी ज़रा भी विचलित नही हुई और हौले से उसने पहले सन्यासी को देखा फिर साथ आए सज्जन को और अंत मे मुझे..जैसे ही उसकी नज़रे मुझसे मिली मुझे लगा की धीरे धीरे जैसे मुझे मेरा बोध ही नही है, जो भी है सो वही मात्र है...जैसे उसकी नज़रे मुझे खिंच के कही दूर ले जा रही है..और तभी सज्जन की आवाज़ आई की संभालो वह सम्मोहन प्रयोग कर रही है...मेने अपने आपको तुरंत संयत किया..योगिनी ये देख के हिंसक शेरनी की तरह तन गयी और किसी विशेष मुद्रा बना कर उसने आँखे बांध कर ली...सज्जन ने भी कुछ मंत्रोचार किया....और तभी पुरे कमरे मे अंधकार छा गया...कुछ भी सुजने की स्थिति मे नहीं था...कुछ ही क्षणों मे एक प्रकाशपुंज फूटा और सन्याशी का कारण शरीर एक जटके से खिंच के स्थूल शरीर की और जा रहा था, इसी के साथ सज्जन कमरे से बहार निकल गए...योगिनी ने अपनी आँखे खोल दी, जैसे की संभावना थि, उसका विचार सन्याशी पर तुरंत ही प्रहार करना था जब वह अपने स्थूल शरीर मे प्रवेश कर ले...योगिनी अपने आसान से उठी और कड़ी हो कर के उसने अपना प्रयोग चालू किया...लेकिन अब मेरी बारी थि...वही पर पड़े कुछ सरसों के दानो को उठाके मेने सदगुरुदेव निखिलेश्वरानंद को याद किया और जैसा की सज्जन ने पहले ही मुजे कहा था मेने भूतनाथ को स्मरण कर दिग्बन्धन किया, योगिनी की यह पराजय हुई और सन्याशी वापस अपने स्थूल शरीर मे आ गए थे...वायुगमन के माध्यम से वे तुरंत ही उठे और अद्रश्य हो गए...मुझे भी जैसे कोई खिंच रहा हो ऐसा अनुभव हुआ...हवा मे गज़ब की गति से मे अपने सूक्ष्म शरीर तक पहोचा और उसमे प्रवेश किया...
उसके बाद क्या क्या हुआ ये भी एक अलग ही कहानि है, लेकिन ये ज़रूर बताना चाहूँगा की क्या हुआ उस योगिनी का...साधना खंडित होने से वह योगिनी को अपने मृत्यु का वरन करना पड़ा, जिसके बाद वह आत्मा मिली थि मुझे लेकिन क्या सब कुछ खतम हो गया? नही. उसकी आत्मा आज भी घूम रही है, सूक्ष्म शरीर के साथ वह अभीभी गतिशील है और बेताब है सन्याशी से बदला लेने के लिए...काल के गर्भ मे आगे क्या होगा, कुछ नही कहा जा सकता.
In red sari, yogini was having a blissful beauty. it was looking like some fairy has come and sat in front of me. And her beauty was multiplied by her hypnotising smile. Gentleman and sanyashi quickly entered in the room and with them I too took an entry.
Yogini not even a bit became tensed and slowly she looked at sanyashi followed by gentleman and at least me...At the time her eyes met mine, I felt like losing consciousness and whatever is there, that is she...Her eyes were taking me far away...at the same moment I heard a sound of gentleman ‘She is doing Sammohan Prayog, Save’. I quickly regain myself. By looking at this Yogini became like cruel lioness and with some specific mudra she closed her eyes.
Gentleman too started some Mantra process...and complete darkness fall in the whole room.  Nothing was in condition to be visible. In few moments a light fell and Sanyashi’s Kaaran body started drawn to his main body, with this, gentleman went out of the room. Yogini opened her eyes, like there was a possibility, yogini’s thought was to quickly apply some tantra prayog on sanyshi when he enters in his main body...Yogini stood up from her aasan and started her tantra prayog.
But now, it was my turn...by picking up some mustard placed there I memorised Sadgurudev Nikhileshwaranand and as I discussed earlier with gentleman I did digbandhan process of Bhootnath. And there she was lost, the Yogini. Sanyashi was now back in his Sthool sharer...with the help of Vayu Gaman, he quickly went and became invisible...I too felt like someone is drawing me..very quickly I reeqached at the place where My sukshm sharer was and entered in that.
What happened after that too is a different long story...but would surely like to tell you what happened with that yogini? As her sadhana was broken, she went to death after which that aatma even came to meet me to inform about her feeling for revenge...but was it an end? No. Her soul is still wandering, she is still continuing with her sukshm sharer and she is curious for the revenge with sanyashi...what will happen next in the circle of time, surely, nothing could be said.
****NPRU****

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