There was an error in this gadget

Saturday, July 23, 2011

MAHAVIDYA RAHASYAM-BAGLAMUKHI RAHASYAM-4


 अथर्वासूत्र  आधार है माँ बगलामुखी की साधना का .इस सूत्र को समझना अनिवार्य है साधक के लिए तभी वो बगलामुखी साधना के विविध आयामों को समझते हुए उन रहस्यों को आत्मसात कर पाता है जो की इस महाविद्या से सम्बंधित हैं.वास्तव में जो हमारे शरीर के चहुँ और आभा मंडल दृष्टिगोचर होता है,उसका मूल उद्गम शरीर के बाहर नहीं अपितु अन्तः शरीर में व्याप्त यही अथर्वा सूत्र ही होता है. इसके परिमार्जन कर हम इसे जितना स्वच्छ करते जायेंगे ,हमारा आभामंडल उतना पीतवर्णीय और सुनहरा होता जायेगा,जो की परिचायक होता है हमारी विशुद्धता का.
    पर कहा होता है......ये अथर्वा सूत्र......?? कहाँ है इसका उद्गम स्थल????
सदगुरुदेव ने बताया था की लोग बरसों बरस इस महा साधना को सिद्ध करने का प्रयास करते रहते हैं परन्तु कदाचित ही कोई सफल हो पाता है. साधक इस साधना के द्वारा असंभव को भी संभव कर सकता है ,परन्तु वो मात्र कुछ अनुभूतियों और अपने कार्य में आ रही बाधाओं को समाप्त होते देख कर ही प्रसन्न हो जाता है ,अपने आप को बगलामुखी सिद्ध मान लेता है ....परन्तु ये मात्र उसकी भ्रान्ति है. बगलामुखी सिद्ध विद्याओं में प्रथम और महाविद्याओं में अष्ठमी विद्या कहलाती हैं,जीवन की सर्वोंनती का आधार हैं ये.अन्य सभी महाविद्याएं सहज रूप से सिद्ध हो जाती हैं इनके सिद्ध होने के बाद.
परन्तु कुछ विशेष तथ्य अवश्य ही ध्यान रखने चाहिए इनको सम्पूर्णता के साथ सिद्ध करने के लिए.
१. साधक को ये भली भांति ध्यान रखना चाहिए की वो इनके किस ध्यान मन्त्र का प्रयोग साधना को सिद्ध करने के लिए कर रहा है.वास्तव में हम्मे में से अधिकांश साधक इन्हें मात्र स्तम्भन करने वाली या कोर्ट में विजय दिलाने वाली शक्ति ही समझते हैं.पर ऐसा है नहीं,वास्तव में हम जब उनके स्तम्भन शक्ति को ही प्रेरित करने वाले ध्यान मंत्र से उनका आवाहन करेंगे तो वे अपनी स्तम्भिनी शक्ति के साथ ही साकार हो पाएंगी.इसमें उनका दोष नहीं है.क्यूंकि हमारा चिंतन ही स्तम्भन पर आधारित था.हम सभी ने तथाकथित पोंगा पंथियों के कहने पर ये मान लिया है की सभी महाशक्तियां मात्र किसी शक्ति विशेष की ही स्वामिनी हैं.पर ऐसा है नहीं क्यूंकि वे सभी ये नहीं जानते हैं की किसी कारण वश सिद्धों ने उन शक्तियों के मात्र उन रहस्यों को ही इसलिए प्रकाश में रखा है क्यूंकि इन सभी महाविद्याओं में से प्रत्येक भौतिक और अध्यात्मिक जीवन की सर्वोच्च उपलब्धि देने में समर्थ हैं.परन्तु  वे रहस्य हमारे सामने तभी गुरु शक्ति उजागर करती हैं जब सच में हम उन्हें पाने के लिए लालायित हो. जैसे लोगो ने बगलामुखी को वाद विवाद में विजयी बनाने वाली देवी ही मन है,परन्तु वे पीताम्बरा रूप में भौतिक व अध्यात्मिक ऐश्वर्य प्रदान करती हैं.ज्वालामुखी रूप में समस्त शत्रुओं से सुरक्षा चक्र प्रदान करती है.धवलामुखी रूप में सौंदर्य के उन रहस्यों को उजागर करती हैं जो की कल्पनातीत ही हैं,सर्व सिद्धिदात्री रूप में ध्यान का प्रयोग करने पर सभी अभीष्टों को प्रदान करती हैं.यदि विवाह ना हो रहा हो या जीवन में प्रेम का आभाव हो या व्यक्ति जीवन में काम भाव की तृप्ति चाहता है तो ये सभी भी इन्ही की साधना से संभव हो जाता है.
२. साधक के शरीर में नाभि चक्र में मूल उत्स होता है जिसमे माँ बगलामुखी का वास होता है और मूलउत्स के जागरण के साथ ही इनका व्यप्तिकरण साधक में होने लगता है,और माँ अपने सर्व गुणों के साथ साधक के सामने साकार हो जाती हैं. ये क्रिया सद्गुरु ही समझा सकते हैं.क्यूंकि आकाश तत्व के योग से ही इस का जागरण हो पाता है .और ये अत्यधिक गुह्य क्रिया है.इसी मूल उत्स के जागरण के साथ ही इसमें सुप्त अवस्था में स्थित अथर्वासूत्र भी चैतन्य हो जाता है.और इस सूत्र के चैतन्य होते ही असंभव भी संभव होने लगता है. सूक्ष्म शरीर की समस्त शक्तियां चैतन्य हो जाती है. विभिन्न लोको में साधक सहजता से गमन करने लगता है.
३.पीले रंग की प्रधानता का अत्यधिक महत्वपूर्ण कारण है ,ये प्रतीक है तीव्र उर्जा का,उस शक्ति के प्राकट्य का जिसके द्वारा ये सम्पूर्ण विश्व चलायमान और स्थिर दोनों ही स्थिति में इस ब्रह्माण्ड और शून्य में स्थित है.और उसी तीव्र उर्जा से इस ब्रह्माण्ड में जीवन उत्पत्ति की संभावनाएं निर्मित होती हैं.और इस उर्जा की प्राप्ति साधक को किस मन्त्र से प्राप्त होती है....ये तो मात्र सदगुरुदेव ही बता सकते हैं,परन्तु साधक को किस प्रकार से उनसे ये मन्त्र प्राप्त करना चाहिए,इसका शास्त्रीय विधान क्या है???  इसकी विवेचना अगले लेख में...                  
                                                                             क्रमशः........
================================                                  
  The Atharva Sutra is basic of Maa Baglamukhi Sadhna.It is quiet necessary for sadhak to understand this sutra then only he will be able to understand all dimensions and can embibe it thoroughly which is related to Mahvidya. In Actual sense it reflects aorund our body and creates a spherical splendour. Infact the starting point lies nowhere outside rather inside in our body only were the Atharva Sutra is placed. By purifying it we can make it crystal clear and clean, so that our spherical splendour will become yellowish and then goldenish in color which recognised our purity.

Sadgurudev told me once that many peaple tries this sadhna for years n years but merely one of them get success. Sadhak can make impossible things possible by this sadhna, but he gets in comfort zone or happy just by getting relief when his day today problems been solved... Thats his illusion.. In Baglamukhi Siddh Vidyas it ranks at first postion where as in Mahavidyas its position is 8th i.e. Ashtami Vidya. It is the source of complete progress in life. Rest all Mahavidyas can easily be accomplshed after accomplishing Baglamukhi Sadhna.

But where do it lies? This atharva Sutra hnn?? And whats it starting point????

1. sadhak should well aware that which Dhyan Mantra he is chanting infront of her. Actually maximum of us recognise her for Stabhan Shakti and one who conquers u in court cases. But its not the whole truth. Actually if we call her with Stambhini Shakti mantra the she will appear with the same form only. As you are calling her in that form so. Thats not her fault. Because our intensions are for doing stambhan. Isnt it? You know what, Actually we have agreed with sayings of some foolish (ponga) pandits that Mahavidyas are meant for only some special shaktis. But again it not true.. Beacause all of them are not aware due some specific reason siddhas are not aware about their whole facts as each one of her are completely capable of bowing us whole success in materialistic and spiritual life path.
      But some special Fact should keep in mind for accomplishing it in complete way.But these secrets are then only opened when we are dead curious for it. Likewise when people have worshipped her for achieving success in law and law related cases, but in her Peetambara form, she can give us materialistic and spiritual supremacy. In volcanic form, she gives us a safety wall from all our enimies. In Dazzling white beauty form, she opens that secrets which are just beyond our imagination. In Sarva Siddhidatri form, she fulfil our all kind of wishes. In marriage problems or in love related issues like marriage is not happening or if their is lacking of love in life or wants sexual pleasure then all these things are possible by this sadhna only.

2. In sadhak's body thier is navel sphere and in depth MOOL UTS is there, thier only the Maa Baglamukhi lies. And the awakening of that original spring considered as the pervasion or spreading of Maa in our body. And this is how Maa appears with her all features in front of sadhak. This typical process can be understand by Guru only. because only with sky element this awakening can be happen which is very secret process.Along with this spring the Atharva sutra which is in asleep state also gets active. And activation of this sutra make impossble things possbile. All Astral powers get activated. He then can travel various lokas easily.


3. Their is valid reason of pre eminance of yellow color, this is sign of solid energy. the appearence of Power via which the whole universe is activated and stable both the states, she resides in universe and space. Due to this solid energy the possiblities of life is produced. And the same energy can be acheived with which mantra, can be explained only by sadgurudev. But how sadhak should demand for this mantra to sadgurudev?, what its scripturical process? So this explanation in next article...
                                                                                                                                                                                                  continued...

****NPRU****

No comments: