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Wednesday, May 16, 2012

बीजोक्त तंत्रम – माँ राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी, माँ महाकाली समन्वित भगवती छिन्नमस्ता प्रयोग (MAA RAAJRAJESHWARI TRIPUR SUNDARI,MAA MAHAKAALI SAMANVIT BHAGVATI CHHINNMASTA PRAYOG)


नोट-

     बीजोक्त श्रंखला के विगत लेख से इतर  से आज इस प्रयोग को देने के पीछे एक विशेष प्रयोजन हैं- २१ तारीख को ग्रहण है तो ग्रहण के समय इस साधना को करके आप माँ राजराजेश्वरी, माँ महाकाली और माँ छिन्नमस्ता का एक साथ आशीर्वाद प्राप्त कर लाभ उठा सकते हैं और दूसरा यह प्रयोग इतना जटिल नहीं है इसलिए हर कोई आसानी से इसे सम्पन्न कर सकता है......अन्य प्रयोगों की तरह मैंने इस प्रयोग को ज्यादा विस्तृत ना करके केवल मुख्य तथ्य ही आप सब के सन्मुख रखें हैं क्योंकि विस्तार की भूमिका से बंधा हुआ ये लेख नहीं है,ये तो मात्र स्वभाग्य को हीरक कलम से लिखने की क्रिया है,यदि विस्तार को पढकर हम इस साधना को करते तो शायद हम उस परिवर्तन और अनुभूति को सही तरीके से ना तो समझ पायेंगे और ना ही आत्मसात कर पाएंगे जो की इस अद्भुत प्रयोग से होती है.हर साधना से संबंधित हर साधक की अपनी अनुभूतियाँ होती हैं और हो सकता है साधना के दौरान जो अनुभूतियाँ मुझे अनुभव हुई वो आपके साथ ना हो बल्कि आपको कुछ और महसूस हो पर मन में इस विचार के आ जाने से भी की जैसा लिखा था या बताया गया था मेरे  साथ वैसा क्यों नहीं हो रहा हमारे विश्वास और समर्पण में कहीं कमी को दर्शाता है जो एक साधक का सबसे बड़ा दुश्मन है.....और मैं यही चाहूंगी की इस साधना को करें और अपने अनुभव हमारे साथ बांटे,मैंने अपने जीवन में आमूलचूल परिवर्तन पाया है इसे संपन्न करने के बाद फिर वो चाहे आर्थिकता का क्षेत्र हो,या फिर साधनात्मक या मानसिक.

 

“दिव्योर्वताम सः मनस्विता: संकलनाम |
त्रयी शक्ति ते त्रिपुरे घोरा छिन्न्मस्तिके च ||”

समस्त ब्रह्मांड का चल अचल कार्य व्यवहार काल के गर्भ में अपनी एक तय व्यवस्था के अनुसार अनंत कल्पों से चलता आ रहा है और बिना किसी रोक टोक के चलता रहेगा. परा शक्तियां इस ब्रह्मांडीय संरचना के कण कण में विद्ममान हैं और यही शक्तियां हमारे इस पंच-भूतक शरीर में भी कार्यरत हैं, अंतर सिर्फ इतना है की हमे हमारे बाह्य रूप का ज्ञान तो है, किन्तु हमारे अंदर जो एक पूरा ब्रह्मांड समाया हुआ है हम उसकी कार्य प्रणाली से अनभिज्ञ हैं..... ना केवल अनभिज्ञ हैं बल्कि हमारी अन्तश्चेतना में ऐसी कितनी ही दैवी शक्तियाँ चुप-चाप अपना काम करती जा रही है इस अटल परम सत्य से संबंधित हमारी चेतना पूरी तरह से सुप्त ही है.
 हम सब जब मास्टर के साथ कामाख्या गए थे तो आपको याद होगा कि दूसरे दिन की मीटिंग में उन्होंने माँ कामाख्या के विभिन्-विभिन् कुलों में विभिन्-विभिन् स्वरूपों के बारे में बताया था.....जिनमें एक कुल की अधिष्ठात्री माँ काली भी हैं. उसी दिन रात को उनसे फिर से मैंने माँ काली से संबंधित अपने प्रश्न पूछे तो उन्होंने ना केवल मुझे मेरे प्रश्नों के उत्तर दिए बल्कि मुझे साथ ही साथ एक ऐसी साधना करवाई जो माँ काली, माँ छिन्नमस्ता और त्रिपुर सुंदरी माँ राजराजेश्वरी के आशीर्वाद को एक साथ प्राप्त करने में उपयोगी है. आज वही साधना मैं आपके लिए यहाँ दे रही हूँ जो ना केवल उपयोगी है बल्कि बेहद सरल भी है.
 माँ काली सृष्टि के अनादिकाल से इस ब्रहमांड में शक्ति के तीन रूपों में स्थिर है-
१- अघोर शक्ति- जिनका बाहरी रूप बहुत विराट और भयंकर है....
२- महा अघोर शक्ति- माँ का यह स्वारूप हमें सांसारिक मोह-माया में बांध के रखता है.....
३- और इस क्रम में फिर से माँ का अघोर रूप अपने आप को दोहराता है पर इस बार वो भयावह ना होकर साधक को साधना पथ पर अग्रसर करता है....
 और इन्ही रूपों को अगर समूह में बांटा जाए तो माँ काली के दो रूप हैं- एक वो जो गहरे नीले रंग का है और दूसरा वो जो गहरे लाल रंग का है जिसे अगर आकृति के रूप में समझा जाए तो इसे मैथुन चक्र से समझा जा सकता है अर्थात दो त्रिकोण एक दुसरे को काटते हुए ......
 
इस आकृति में त्रिकोण का ऊपरी शीर्ष माँ काली की जीह्वा का प्रतीक है जो साधक को वाक् सिद्धि प्रदान करता है और वही दूसरी तरफ त्रिकोण का अंतिम बिंदु माँ के गर्भ का प्रतीक है जिसे विश्व गर्भ या काल गर्भ भी कहा जाता है और यही वो बिंदु है जो साधक को काल चक्र से मुक्त करता हुआ उसे अमर्त्व प्रदान करता है. माँ का यही रूप माँ चंडी का प्रातीक है जिसे हम प्रचंड चण्डिका या माँ छिन्नमस्ता के नाम से जानते हैं.
मेरे चेहरे पर संतुष्टि के भाव ना देखते हुए मास्टर ने इस विषय को और सरल करते हुए समझाया कि हमारे मूलाधार में प्रज्वलित जठराग्नि माँ काली के भैरवी रूप को दर्शाती है और माँ का यही स्वरुप कुंडलिनी के नाम से हमारी सुष्मना में सुप्त अवस्था में रहता है और कुंडलिनी पर ध्यान केंद्रित करके यदि साधना की जाए तो मूलाधार में स्पंदन होने लगता है.
इसी जठराग्नि को जब कुंडलिनी शक्ति मूलाधार से ऊपर उठाकर हमारे अनाहत चक्र पर लाती है तो यहाँ माँ काली भद्र काली के रूप में उपस्थित रहती है जो हमें निरंतर प्राण उर्जा देती है और साधना पथ पर आने वाली समस्याओं का समाधान करती हैं. इसी क्रम में जब कुंडलिनी थोड़ी ओर जागृत होती है तो पहुंचती है हमारे तीसरे नेत्र पर जहां कमल के रूप में हाथ में खड़ग लिए माँ छिन्नमस्ता विराजमान हैं ओर हजारों करोड़ों पत्तियों वाला जब यह कमल खिलता है तो उसमें स्थापित होती हैं त्रिपुर सुंदरी माँ राजराजेश्वरी जो ऐश्वर्या की देवी हैं. 
 अब इन तीनों देवियों का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त करने के लिए एवं कुंडलिनी को जाग्रत करने के लिए साधना कुछ इस प्रकार है. यदि ग्रहण के वार को छोड़कर आप अन्य दिवसों में प्रयोग कर रहे हैं तो आपको केवल ओर केवल किसी भी रविवार से अगले रविवार तक नित्य अर्ध रात्री से पीले वस्त्र धारण कर पीले आसन पर बैठ कर निम्न मंत्र का केवल १५ माला मंत्र जाप करना है, माला काला हकीक या मूंगा की ले सकते हैं....याद रहे आपकी दिशा पूर्व होगी.

यदि आप ग्रहण के दिन इस साधना को करते हैं तो आपको माला का प्रयोग करते हुए कम से कम ५१ माला करना है बाकी क्रम में कोई बदलाव नहीं होगा.....याद रहे कम से कम ५१... अधिकतम आप चाहें तो पूरे ग्रहण काल में इस मंत्र का जप कर सकते हैं.
              
मंत्र-
                         
              श्रीं क्लीं वज्रवैरोचनिये क्लीं श्रीं स्वाहा

SHREEM KLEEM VAJRAVAIROCHNIYE KLEEM SHREEM SWAHA

और आप मात्र कुछ दिनों में ही अपने जीवन में बदलाव देखने लगेंगे. इसके साथ आपको कुछ अन्य बातों का ध्यान भी रखना है जैसे-
१- जहाँ भी आपको गीदड़, सियाह कौआ, बाज, या काली बिल्ली दिखाई दे उसको माँ काली का प्रतीक मान कर नमन करें.
२- इसी क्रम में यदि आपकी दृष्टि गहरे लाल फूल या कपड़े पर पड़े तो उसे माँ राजराजेश्वरी का प्रतिनिधि मानते हुए प्रणाम करें.
३- यदि आपको गहरा नीला या जामुनी फूल, हाथी, रथ या भैंस आदि दिखने पर उसे माँ छिन्नमस्ता के चिन्ह के रूप में नमस्कार करें.

 साधना के दिनों में हो सकता है इनमें से आपको कुछ भी दिखाई ना दे मगर फिर भी कुछ दिनों के अंतराल से आपको अपने कारोबार, दैनिक दिनचर्या और साधनात्मक चिंतन में इस साधना के सकारात्मक प्रभाव मिलने शुरू हो जायेंगे... एक बार स्वंय करके इससे लाभ जरूर ले.



Note:
There is special purpose behind giving this prayog today, which is different from the previous article of beejokt series- there is grahan (eclipse) on 21st, so you can do this sadhna during the eclipse time and get the blessings of Maa RaajRajeshwari, Maa Mahakaali and Maa Chinmasta together and secondly this prayog is not that much difficult so everyone can do it easily….Like other prayogs, I have put forward only the important facts in front of you all, instead of giving you the extensive details because this article is not a detailed one, this is simply a procedure to write your own fate with the diamond pen. If we would have done this sadhna going into its extensive details, then probably we wouldneitherbe able to understandthe change and experience in a right mannernor imbibe it, which happens due to this amazing prayog. Relating to every sadhna, every sadhak has got its own experiences and it may happen that experiences which I had during my sadhna, they may not happen with you. You may experience something else. But the arising of thought in our mind that it did not happen the same way as was written or told, reflects our lack of trust and dedication which is the biggest enemy of sadhak……and I wish that do this sadhna and share your experience with us. I have witnessed radical changes in my life after doing this sadhna, it may be in the field of finance or spiritual or mental.
 “DivyorvtaamSahManswitahSankalnaam|
Treeyi Shakti TeTripureGhoraChinmastikech||”

Every static and dynamic behaviour of entire universe has been going on in fixed order from infinite aeons in the womb of time and it will go on without any restraint. Para Powers are present in each and every article of this universe composition and these powers are also active in our body made up of five elements. Only difference is that  we have the knowledge about our outer world but we are unaware of the modus-operandi of universe embedded inside us……not only unaware but how many such god-goddesses are doing their own work silently in our inner consciousness, our awareness is totally dormant regarding this universal truth.

When we all went with Master to Kamakhya then you all will remember that during the second day’s meeting he told about the various forms in various kuls (family) of Maa Kamakhya……in which Maa Kaali was the supreme deity/ruler of one Kula. That night, I again asked the questions related to Maa Kaali. He not only answered my questions but also made me do one such sadhna which is beneficial in getting blessings of Maa Kaali, Maa Chinmasta and Tripur Sundari Maa RaajRajeshwari together. Today I am giving that sadhna to you all which is not only useful but also very easy.

Maa Kaali is present in three forms of Shakti in this universe from time immemorial.

1)     Aghor Shakti –whose outer form is very gigantic and dreadful,.
2)     Maha Aghor Shakti –This form of Maa keeps us bonded to worldly delusions.
3)     And in the same order again, Aghor form of Maa repeats itself but this time instead of being dreadful, it paves the sadhna path for the sadhak.
And if we divide these forms into groups then there are two forms of Maa Kaali-One which is of dark blue colour and the other which is of dark red colour, if we understand it in form of shape then it can be understood through Maithun Chakra i.e. two triangles intersecting each other.

In this shape, upper most portion of the triangle is indicator of tongue of Maa Kaali which provides Vaak Siddhi to the sadhak and on the other hand the last point of triangle indicates womb of Maa which is also called Vishwa Garbh (womb of the world) or Kaal Garbh (womb of time) and this is the same bindu which frees sadhak from this cycle of time and provides immortality. This form of Maa is also the indicator of Maa Chandi which is known by the name of Prachand Chandika or Maa Chinmasta.

Not seeing me satisfied, Master explained this topic in more simplifying manner that Jathra Agni ignited in our Muladhaar shows the Bhairavi form of Maa Kaali and this form of Maa is present in dormant state in our Sushamana by the name of Kundalini. If sadhna is done while concentrating on kundalini, vibration in Muladhaar starts. When Kundalini power (serpent power) upon elevating this Jathra Agni, brings it to Anahat Chakra then here Maa Kaali is present in form of Bhadra Kaali which continuously provides us power of praan and provides solution to the problem coming in the sadhna path. In the same sequence, when serpent power is activated more, it reaches third eye where Maa Chinmasta is present in form of lotus, having sword in her hand and when this lotus having thousand crores of petals blossoms, then Tripur Sundari Maa RaajRajeshwari is established with in it which is the goddess of aishwarya.To get the blessing of these three goddesses together and to activate the kundalini, sadhna is like this. If you are doing this prayog on any other day except the Grahan day, then you have to chant 15 rounds of rosary of the below mantra, starting from any Sunday till the next Sunday. Mantra Jap should be done at midnight. Dress and aasan will be yellow. Rosary can be of black Hakeek or Munga…..Direction will be east.

If you do sadhna on grahan day, then you have to do minimum 51 rounds of rosary of this mantra. There will be no change in sequence…..remember at least 51…..maximum if you want, you can make use of entire grahan duration.

Mantra:

SHREEM KLEEM VAJRAVAIROCHNIYE KLEEM SHREEM SWAHA

And you will start witnessing the change in your life in matter of few days .Along with this; you have to keep few other things in mind like….

1)     Wherever you see jackal, crow, falcon or black cat, bow down considering them as symbol of Maa Kaali.
2)     In the same sequence, if you see any dark red flower or cloth, pray to it considering it as the representative of Maa RaajRajeshwari.
3)     Upon seeing dark blue or jaamuni (blackish blue) flower,elephant, chariot or buffalo pray to them as the symbol of Maa Chinmasta.

During the sadhna days, it may happen that you are not able to see any of them but still in interval of few days you will start getting positive results of this sadhna in your business, daily life and spiritual thoughts…….Do it once yourself and get the benefits.

****ROZY NIKHIL****

**** NPRU****

5 comments:

Jyotishmoy Boruah said...

Bhaiya, yeh Sadhana kitne din karna hei?

Jyotishmoy Boruah said...

Bhaiya, yeh Sadhna kitne din karna hei?

ashu said...

is sadhna me maa ki photo ya yantra rakhna h kya.

ashu said...

is sadhna me maa ka yantra samne rakhna h ya phir koi photo

MUKESH SAXENA said...

bahut adbhut sadhna di hai aapne,AMEZING..............
HUM SOCH BHI NAHIN SAKTE THEI KE ITNI ADBHUT SADHNA KA VIDHAAN ITNA SARAL BHI HO SAKTA HAI.ISKO AGAR NAVRATRI MEIN SIDDH KAREIN TO KAISA RAHEGA?KYA YE SADHNA CHANDRA GRAHAN PAR KI JA SAKTI HAI?YA KEWAL SURYA GRAHAN PAR HI SAMPANN HOTI HAI.AAPNE LIKHA HAI KE EK SUNDAY SE LEKAR DOOSRE SUNDAY TAK BHI YE SADHNA SAMPANN KI JA SAKTI HAI,TO KISI BHI SHUKL PAKSH KA SUNDAY ISS SADHNA KE LIYE CHUN SAKTE HAINKYA?
JAI SADGURUDEV.