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Thursday, May 31, 2012

Surya Tatva (Sun Element) - सूर्य तत्व


As per Sarv Swartmkan rules all the substances found in nature contains everything, it means if an iron is there it is not just the iron, it contains iron and glass but also the rose properties, but more of iron due to the preponderance of the iron element, we see it as an Iron…and if with the help of right practice, the expansion of the main element is being studied, the same element will start showing the other properties also whether it is a flower or some other mass whose properties have been expanded…But, this is not so much easy, because only having knowledge of the subject is not essential and perfection cannot be accomplished just by the knowledge but it can be accomplished only when the knowledge is being converted into the Science…

And the Tantra part only where (the intuitive science theory into action is observed experimentally), we can use the secrets that can explode like that are beyond normal human imagination.

In Vamaniki Shastra, there are many more holy books in which the conversion of the Knowledge into Science rule has been described…Which Means, by performing on the base element of Sun, one can easily gets full-fill his desires…Till the element conversion, all is Ok but, along with this one can perform “Vayu Gaman”, Jal Gaman”process also…One can acquire the most powerful and the vast form and can also make himself very heavy…
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The general principles of these five elements create a substance always be so prevalent, which means earth, water, fire, air and sky and if only air element should be expanded and other elements to be invisible if it is possible to have extremely low. If the fire element, the element of air and space elements should be more detail and other elements can often be lost to So we can get those materials that are currently hidden in the womb of the future which is expressed before us. And if the fission and fusion power's out there then no process will be impossible for us to perform.But, this knowledge can be gained only through the Sun and that too with the help of devotion…

For us offerings to the Sun (Surya Ardhya) or Greeting the Sun (Surya Namaskar) is something very general, but we are unaware of the fact that these all these activities contains the base mantras (Beej Mantra) and when these base mantras are being used then all the processes gets full-filled in special body forms and conditions and performs a special process which results in the special powers and energy distribution and accomplishment in the different energy Chakras present in our body….  And if the devotee along with this Surya Sadhna performs “Gupn Mantra” then he not only come to know the Hidden Secrets of the Sun Elements but he becomes expert in the practical performances also…He gets knowledge right from the beginning till all the hidden secrets of that element…

We all very know that we remains fit and fine by doing Surya Namaskar and by Offering Sun (Surya Ardhya) one gets healthy body and sharp eye visibility but still having all the facts, one because of his laziness, no one thinks on this point…Just give a thought that by performing all these activities what is the effect of the Sun on our body and we remains healthy and gets the enlightenment and that too when we are getting all these benefits without our knowledge, and once when gets aware with all the facts and performs the practice with full knowledge and determination and devotion, what next will be remain Impossible for us…

THINK….!!!!!

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सर्व सर्वात्मकं के नियम अनुसार सृष्टि में पाए जाने वाले सभी पदार्थों में सब कुछ व्याप्त है,इसका अर्थ ये हुआ की  लोहा लोहा मात्र नहीं है बल्कि उसमे कांच के भी गुण है और गुलाब के भी,परन्तु लोह तत्व की अधिक प्रधानता होने के कारण वो हमें लोह धातु के रूप में दृष्टिगोचर होता है.यदि किसी भी क्रिया का सहयोग लेकर उसके अन्य किसी तात्विक गुण का विस्तार किया जाये तो ऐसे में वो उस धातु,पुष्प या पदार्थ का ही रूप दिखाने लगेगा जिसके गुणों का विस्तार किया गया है. परन्तु ये इतना सहज नहीं है,क्यूंकि मात्र किसी विषय का ज्ञान होने से आप उसमे निपुणता नहीं पा सकते,बल्कि ज्ञान को विज्ञानं में परिवर्तित कर प्रयोग करने पर ही सफलता संभव है.
   और तंत्र के इसी भाग का(जिसमे ज्ञान युक्त सिद्धांत को विज्ञानं रुपी प्रयोगात्मक क्रिया में परिवर्तित किया जाता है)प्रयोग करने से हम ऐसे ऐसे रहस्यों का विस्फोट कर सकते हैं जो सामान्य मानवीय कल्पनाओं से परे हैं.
    वैमानिकी शास्त्र के रूप में सैकड़ों ग्रन्थ हैं जिनमे इस ज्ञान को विज्ञानं के रूप में परिवर्तित करने का विधान बताया गया है,अर्थात सूर्य के मूल तत्व को लेकर कैसे सरलता से अपने मनोरथ को साकार किया जा सकता है.पदार्थ परिवर्तन तो ठीक है उसके साथ ही वायुगमन किया जा सकता है,जल गमन किया जा सकता है, विराट अकार धारण किया जा सकता है अपने आपको बहुत भारी किया जा सकता है आदि आदि.... इसका सामान्य सिद्धांता ये है की सृजित पदार्थों में हमेशा पञ्च तत्व तो व्याप्त होंगे ही,मतलब पृथ्वी,जल,अग्नि,वायु और आकाश. अब यदि किसी भी पदार्थ के भीतर अणुओं का परिवर्तन कर पृथ्वी और जल तत्व को विरल(कम) कर दिया जाये और आकाश तथा वायु तत्व को ज्यादा कर दिया जाये तो उस पदार्थ विशेष के सहयोग से सहजता से वायु गमन या शून्यता की प्राप्ति की जा सकती है.और यदि मात्र आकाश तत्व का विस्तार किया जाये तथा अन्य तत्वो को अत्यधिक न्यून कर दिया जाये तो अदृश्य होना संभव है.यदि अग्नि तत्व,वायु तत्व और आकाश तत्व को ज्यादा विस्तार दिया जाये और अन्य तत्वो का लुप्त प्रायः कर दिया जाये तो ऐसे में हम उन पदार्थों को भी प्राप्त कर सकते हैं जो भविष्य के गर्भ में छुपे हुए हैं और वर्तमान में जिसका प्राकट्य हमारे सामने नहीं है. आप खुद ही सोचिये की यदि सूर्य विज्ञानं का प्रामाणिक और प्रायोगिक ज्ञान हमें हो सके तो कोई भी क्रिया असम्भव नहीं रह जायेगी.परन्तु इस ज्ञान को सीधे सूर्य से ही प्राप्त किया जा सकता है वो भी साधना के द्वारा,हमारे लिए सूर्य को अर्घ्य देना या सूर्य नमस्कार करना सामान्य सी बात होगी परन्तु हमें ये तथ्य ज्ञात नहीं है की इन क्रियाओं के साथ साथ जिन बीज मन्त्रों और मन्त्रों का प्रयोग होता है वे उस विशेष शारीरिक मुद्रा और अवस्था के साथ एक विशेष क्रिया करते हैं जिसे शरीरस्थ चक्रों में विशेष उर्जा और शक्ति का विखंडन और संलयन होता ही है.और यदि साधक इसके साथ सूर्य साधना के गुप्न मंत्र का भी जप करे तो उसे सूर्य विज्ञानं के गूढ़ तत्वो का ना सिर्फ ज्ञान होता है अपितु वो इसमें प्रायोगिक कुशलता भी प्राप्त कर लेता है.उत्पत्ति से लेकर ले तक के सभी गूढ़ रहस्यों से उसका साक्षात् हो जाता है. ये हम सभी जानते हैं की सूर्य नमस्कार करने से शरीर स्वस्थ रहता है या सूर्य को अर्घ्य देने से निरोगी देह और तीव्र नेत्र ज्योति की प्राप्ति होती है,परन्तु फिर भी आलस्य और प्रमाद के कारण इसे करने में कोई ध्यान नहीं देता,अरे थोडा सोचो की इन क्रियाओं को करने से आखिर हमारे शरीर पर सूर्य का क्या प्रभाव पड़ता है जो हमें आरोग्य और प्रकाश की प्राप्ति होती है.और वो भी तब जब हम अज्ञानवश इन क्रियाओं को कर ये लाभ पा रहे हैं,यदि पूरी जानकारी और एकाग्रता के साथ इन क्रियाओं को पूरे विधान के साथ किया जाये,तब भला क्या असंभव रह जायेगा......... जरा सोचिये......

****NPRU****

4 comments:

Radhe said...

Bahut hi achi baat kahi aap ne dhnaye hai ap...

Radhe said...

bahut hi achi baat kahi ...aapne ...dhanye h aap ..

Radhe said...

Bahut hi achi baat kahi aap ne dhnaye hai ap...

Radhe said...

Bahut hi achi baat kahi aap ne dhnaye hai ap...