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Monday, January 21, 2013

ITAR YONI RAHASYA AUR KARN PISHACHINI VARG SADHNA RAHASYA SEMANAAR - 8



It is reality of our times that sadhak face scarcities of time ….due to which they want to do such a type of hard-work which can deliver instant results….Time do affect us and it has also been said that ecology and environment enormously affects mental level of sadhak. This fact carries a lot of deep meaning. Sadhak of today is inclined towards miracles and wherever someone tells him to provide quick success……he runs there in order to resolve daily problems. Now who has got the time to be patient and dedicate his own self for examination? There are hundreds of them expressing their dedication towards Sadgurudev in words. But where are the ones…who really….
But it has to be kept in mind that if dedication is being made the eligibility criterion, how many will pass this test? For this purpose, Sadgurudev Ji gave all the knowledge with open heart throughout his life. Even he did not put forward any harsh condition for getting rarest Diksha which can make person eligible. Essence was to produce capable sadhaks rather than person who simply take Diksha…..who only boosts of qualities of Sadgurudev but does not know anything himself.  Sadgurudev used to make sadhak do sadhna in his own presence. There was always used to be order from his side that whenever he come back in evening for discourse, sadhak should at least chant 200-300 rounds of Mantra Jap. Those who could not do it, Sadgurudev used to do remaining portion of each of them by himself. Who can be more generous than him? And none of sadhak was lazy…all of them used to do sadhna wholeheartedly , nobody wanted that Sadgurudev , whose each and every moment is so precious have to pay the price for their laziness. And it was but natural that number of successful sadhaks increased during that time because Sadgurudev himself was present who can provide accomplishment within one second.
But in today’s circumstances, saying anything will be like fuelling a new controversy….Here one point is worth understanding that should it be the case that when sadhak reads the sadhna, it seems easy. But whenever he makes up mind to do it then sadhna become cumbersome….In such a case, it will be difficult for amateur sadhak to believe them. It is true that it is not necessary that sadhak gets sadhna or success in it just by demanding sadhna or asking for its Vidhaan.
But we are trying our best that some such sadhnas should also be given in this seminar which are very easy and through it some success in possible…and sadhak should feel that they have attained something out of it. Here we are not talking about how important that sadhna is rather it is about the fact that whether this sadhna can make us trust sadhna life, success in it, inspire us, convince us that we are on right path, can establish our trust that we can attain success in sadhna given by Sadgurudev if we follow all the rules and sub-rules. His blessings and Nikhil sentence are immortal that any of my disciple will not have to look to someone’s else for knowledge if he really aspires for that knowledge and he is really willing to do everything for it rather than being just curious only.
Friends, I would like to make it clear here that here “Everything” does not mean any amount of money or any immoral or anti-social or illegal activity rather it is about imbibing attitude necessary to live a sadhna life. If it is present in you, if you have will power, if you have intensity, if you have feeling to imbibe the knowledge, it may take some time but success will definitely come after you…… But keep in mind that under the cover of such an attitude, one should not think of doing any wrong or immoral act or do any character-degrading act…because it has never been order of Sadgurudev. Never misinterpret those divine discourses in other way when someone else tells so. Whenever you get a feeling that you need a direction then trust me, Sadgurudev lies in your heart. He will definitely provide you a hint because he is present inside us each and every moment.
Friends, we have sought permission from our elders brothers and sisters that they should provide some sadhna on this subject which are easy and less time-consuming which can be done by any normal or new sadhak too so that his trust can be strengthened. Whenever we gets permission, these sadhnas will definitely come in front of you.
This seminar can be a landmark moment of your life. Seeking participation in it and getting approval is golden opportunity in itself. This is not to show ourselves important or exceptional rather it should be interpreted as an elder brother providing guidance to younger one and nothing more than that….
We pretty well know the importance of your hard-work and wealth. Therefore we are trying our level best to make it invaluable. Certainly, it will prove to be an amazing opportunity for those who get the permission to participate in it.
This time, we are giving permission to persons for entry into seminar after careful thinking because we are not in favor of crowds. May be they are less in number but if we get those who can really do sadhna , they can ensure their success with grace of Sadgurudev and those who can only talk or those who have got lot of money, they will become one more critic……Therefore, entry will be allotted to only those….who truly aspire for this knowledge..
  

Only for those dear ones
To Be Continued.


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   निश्चय ही आज,जब साधना के लिए साधको के पास बहुत कम समय हैं,न.. साधको की ऐसी प्रकृति की वे श्रम  करना चाहते  हैं. उन्हें  तो बस बैठे बिठाए ..पर युग का भी तो असर हैं और कहा भी गया हैं की वातावरण का साधक के  मानसिक स्तर पर बहुत  असर पड़ता  हैं .इस बात का तो गहन अर्थ हैं.भले  ही आज का साधक  चमत्कार को नमस्कार  वाली अवस्था मे रहता हैं और उसे जहाँ पर जल्दी सफलता मिलने का कोई भी कहें ...,अपने दैनिक जीवन की समस्यायों की तो वह, वहीँ पर पहले जायेगा.अब किस के पास समय हैं की वह  तिल तिल करके परीक्षा हेतु अपने आप को दे  सके. सदगुरुदेव ...तेरा तुझ को अर्पण कहने  वाले तो सैकड़ों  हैं पर ..हैं कहाँ हैं? वह... एक ....जो सच मे ..
पर इस बात को भी तो ध्यान मे रखना  होगा की अब अगर  यही एक कसौटी बना ली जाए तो  इस पर कितने  खरे उतरेंगे?.सदगुरुदेव जी ने इस लिए मुक्त ह्रदय से दोनों हाथों से  सारे जीवन भर दिया ही दिया. यहाँ तक उन्होंने पात्रता के निर्माण के लिए भी देव दुर्लभ दीक्षाओ के लिए  भी कोई कठिन शर्त    रखी, पर उनके मूल मे यही  था की योग्य साधक  तो बने,  न की केबल एक दीक्षार्थी ..बस एक दीक्षार्थी ...जो सिर्फ  जयगुरुदेव के अलावा  सिर्फ इतना जानता  हो की मेरे गुरुदेव तो ये हैं और वो हैं, पर खुद उसे  एक भी चीज    आये.सदगुरुदेव स्वयं खड़े  हो कर साधको  को साधना करवाते,शिविर मे  एक निश्चित आज्ञा  होती ही की संध्या कालीन जब वह पुनःअमृत वचन के लिए आये तो कम से कम २०० से  ३००  माला. इस मंत्र के जप की हो ही जाना चाहिये और जो नही कर पाये  तो उनके  लिए  सदगुरुदेव खुद साधनारत हो कर उनके हिस्से की माला खुद करते .भला किसमे हैं ऐसी उदारता .और साधक  कोई भी आलसी नही..... सभी  अपने मन प्राण  लगाकर साधना करते,कोई भी नही चाहता की जहाँ सदगुरुदेव जी का एक एक क्षण इतना कीमती हैं,तो   उसके आलस्य की कीमत सदगुरुदेव पर पड़े.और उस काल मे सफल होने  वाले साधक की संख्या  तो बढती  ही गयी क्योंकि सामने स्वयं समस्त सिद्धियों को  एक क्षण मे प्रदान  करने वाले सदगुरुदेव जो हैं .
पर अब आज की परिस्थिति मे  कुछ  भी कहना एक नए विवाद  को जन्म देना  होगा .तो ..यहाँ यह सोचने की  बात  है कि क्या एक साधक  सिर्फ और सिर्फ  जब पढ़े तो साधना  सरल सी लगे.  पर जब वह करने का मानस बनाये  तो  वही साधना  कठिन से कठिन  हो जाए ...  तब तो  नए साधको का  बिस्वास होना कुछ  कठिन सा  होगा .यह सत्य  बात हैं की केबल नाम लेने से  की मुझे यह साधना करनी हैं या मुझे इसका विधान बताएं से साधक  को साधना मिल  ही जाए  या उसमे सफलता मिल ही  जाए यह कोई अनिवार्यता  नही .
पर हम पूरी कोशिश कर रहे हैं की कुछ साधनाए, ऐसी भी इस सेमीनार मे आपके सामने रखी जाए. जिसका परिणाम...मेरा मतलब हैं की सरलतम साधना, जिससे की कुछ तो सफलता संभव हो ..कुछ  लगे की हाँ, हमने भी कुछ  पाया  हैं ऐसी साधना देने की  कोशिश हो रही हैं  यहाँ बात इस  पर नही की, वह साधना कितनी महत्वपूर्व  बल्कि इस बात की क्या  वह साधना आपका साधना जीवन पे, उसकी सफलता मे  बिस्वास  बना सकती हैं. आपको प्रेरणा दे सकती हैं  की आप  सही रास्ते  पर हैं,  आपको  यह बिस्वास दे सकती हैं की आप  अभी भी सदगुरुदेव के प्रदत्त  दी हुयी साधनाओ  को यदि  सारे नियम उपनियम मान कर करें तो सफलता आज भी पायी जा सकती हैं.उनका आशीर्वाद  और निखिल वाक्य तो एक ब्रह्म वाक्य हैं कि एक भी मेरे शिष्य को ज्ञान के लिए किसी ओर के सामने  नही देखना पड़ेगा अगर वह सच मे उस ज्ञान का अभिलाषी हैं और कौतुहल नही बल्कि सच मे उसके लिए सब कुछ करने  तैयार   हो .
मित्रो यहाँ  पर मैं यह  स्पस्ट  करना चाहूँगा  की “सब कुछ” से मतलब कोई धन राशि या  कोई अनैतिक या असामाजिक या क़ानूनी रूप से  कोई विपरीत बात नही बल्कि साधना  जीवन को जीने के लिए आवश्यक एक सिर्फ “मनोभाव”  की बात  हैं.अगर वह हैं ,अगर वह इच्छा शक्ति हैं..अगर वह प्रबलता तीव्रता हैं. अगर वह ज्ञान को आत्मसात करने की भावना तो हैं  तो सफलता आपके पास आयगी ही भले ही  कुछ देर अवश्य लग जाए ..पर ध्यान रहे  इस भावना की आड़ मे कोई भी गलत या अनैतिक कार्य को बढ़ावा नही देना. न ही किसी भी चारित्रिक पतन का कोई भी कार्य कभी भी न करना ..क्योंकि ऐसा कभी भी सदगुरुदेव का कोई भी आदेश नही  रहा.न ही किसी के कहने पर उन दिव्य वचनो का यह अर्थ मानना.अगर आप को जहाँ भी लगे की यहाँ आपको दिशा की जरुरत  हैं तो यकीन मानिए,सदगुरुदेव आपके ह्रदय मे ही हैं. आपको वे कोई न कोई संकेत दे ही देंगे क्योंकि वह तो क्षण  प्रतिक्षण आपके अंदर ही हैं .
मित्रो, हमने अपने वरिष्ठ  भाई बहिनों से यह अनुमति  मांगी हैं की वे कुछ ऐसी साधना  जो सरल और कम सेकम  समय  की हो  इस विषय  पर   हो कि एक साधक,एक सामान्य सा साधक, एक नया साधक भी कर सकें और उसका  विश्वास और भी दृढ  हो सकें इसके लिए हम सभी प्रार्थनारत हैं  और निश्चय  ही अनुमति मिलते ही आपके सामने यह भी आएगा  ही .
यह सेमीनार  अपने आप मे जीवन की एक धरोहर हो सकता हैं,इसमें भाग लेना या मिलना  दोनों के लिए या यह दोनों हो जाए इस बात का अवसर भी मिलना अपने आप मे  एक स्वर्णिम मौका हैं यह  कोई अपने आप को महत्वपूर्ण दिखाने के लिए नही बल्कि  इसे सिर्फ ऐसा समझे की एक बड़े भाई  द्वारा अपने  अनुजो का  मार्गदर्शन हैं और इसके अलावा कुछ भी नही ..
हम आपके श्रम और  धन का महत्त्व  भली भांती समझते हैं इसलिए इस सेमीनार को ज्ञान की दृष्टी से जितना भी बहुमूल्य  बनाया जा सकें हम तत्पर  हैं ही और निश्चय ही जिनको भाग लेने का अवसर मिलेगा  उनके लिए भी  यह  एक  अद्भुत अवसर  होगा ही.
इस बार  हम बहुत ही कठोरता से व्यक्तियों के प्रवेश के बारे मे  सोच विचार कर अनुमति दे रहे हैं क्योंकि .भीड़ अब स्वीकार नही. भले  ही कम लोग  हो पर यही अगर सच मे साधना करने वाले  हुये तो सदगुरुदेव की आशीर्वाद से  अपनी सफलता  सुनिश्चित कर ही लेंगे  और जो सिर्फ वाचाल हुये  या जिनके पास  कुछ  धन की कृपा जयादा हैं वे  सिर्फ  कहीं एक ओर आलोचक.....  कुछ दवे मूंदे  तो कुछ सामने बन जायेंगे  ही ..अतः प्रवेश  उन्ही को...... जो सच मे इस ज्ञान के लिए ..
        

केबल उन्ही अपनों के लिए  
क्रमशः
****NPRU****

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