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Saturday, January 5, 2013


In previous article on our discussion on astral body, we discussed over various subjects. In pursuit of understanding any subject, we get to know about so many other subjects and this becomes reason for discovering about new subject. One subject has not even ended but our subconscious mind has already prepared itself with preparation of new one.
Firstly we discussed about physical, astral, imaginary and unimaginable world. While studying it, I tried to know about depth of molecule and atoms. Conclusion was that physical body has been made up from Panch Mahabhoots (five great elements viz. earth, water, fire, air and ether) and on the other hand astral body has been made form electrical energy of electrical atoms. What is the composition of various types of astral body like Pret body, Bhaav body etc.? In previous articles we saw that with Bindu boundary of Sookshmatisookshm Renu and from it boundary of energy of atoms is decided.

Astral body is formed from atomic energy but how atoms and molecules are formed? What is the difference between two? Let us remember our school day when we studied Physics and Chemistry. You all will know the formula of water (H2O). One atom of hydrogen and 2 atoms of oxygen make up water molecule. Thus it is clear that molecules are made up of atoms. Force which binds these atoms together is electromagnetic force. As these atoms come near each other, they get attracted and are pulled towards each other. But both have got their own identity and own existence. They get bound to only few and remain unbounded to some. Science calls it as Power Connectivity.

This natural attraction of atom is interesting and amazing in itself. Such accumulation of power is compact…we will discuss on this abstruse subject any other time. The Shakti binding these atoms are notional waves of electrical energy. It means that atoms bind with each other in abstract state and creates units of visible world which we call by the name of Molecule.

Now I would like to draw your attention toward one special fact. One question arises in our mind that what is the difference between Pret Body and Astral body? Pret body is formed from ether particles, astral body is formed from astral particles and similarly physical body is formed from physical particles.

Physical Atoms
Ether Atoms
Astral Atoms

In above diagram, three circles are contained within each other. First layer is of physical atoms, second layer is of ether atoms and third layer is of astral atoms. Imaginary picture of any molecule will be similar to it. In spite of being contained within each other, they have their own independent existence.

The manner in which this principle of atoms applies in outer universe, in the same manner these atoms accumulates to form various types of bodies and have got their own independent existence in inner universe. These particles of each body are subtler than subtle and all of them in addition to being different have different character. This fact can be understood very easily through Dhoomra Vigyan. It can also be said that they are connected to each other. And this is the reason why identity of Pret soul is different from astral soul. In Universe, such particles do not exist in combination, they are scattered. And till the time they are scattered, neither we can see them nor can we take their photograph. But as we collect these scattered particles through resolute willpower, Sankalp Shakti and our concentration, their shape becomes clear and they are manifested in front of us. But this does not happen according to our will……remember that it only depends on their will. Such state can be attained only for special purpose or we create it using Tantra.

Here I would like to present titillating example of the fact that various particles are scattered in universe. We have listened so many incidents of manifestation of Pret soul in childhood that all of sudden wind starts blowing, doors start making various sound, water placed in jug is spilled over etc. What happens actually is that atoms are Omni-present and whenever these ether atoms starts accumulating and if at that place , atoms of any of five elements are present then due to their opposite character , they will strike with each other and give birth to specific characteristics of that particular element. For example, fire due to fire particles, formation of state of violent storm due to air particles or rain due to water particles and all this will happen till the time they will strike each other.

In Tantra, Shakti of infinite atoms present in Universe is with their ruler gods and goddesses. Therefore, by directly pleasing them, connection of our consciousness can be established with their consciousness and a tie-up can be established. And through this connection, all benefits coming under them can be attained. In last article we imbibed this fact that Bindu – when all the atoms accumulate at one place.

In tantra, synchronization between sadhna and principle can make subject much easier. Knowledge of above-said technical portion increases chances of success in sadhna. Because when connection is established between Tantric power and force of Yog, then a special kind of Manomayi (mental) Praan energy is established. But this energy gets transformed in universe into electro-magnetic energy and compels ether atoms of Pret body to accumulate and take shape.

Vats knowledge of Pret souls, we will see in any series on Pret Vigyan.  In terms of introduction, these preliminary points are enough to know about mutual differences….
Will meet us in next article with many more secretive facts….very soon…
Nikhil Pranaam

विगत लेख में हमने सूक्ष्म शरीर पर चर्चा करते हुए विविध विषयो का चिंतन मनन किया. किसी एक विषय कों समझने की यात्रा में हम नजाने कितने और विषयो से परिचित होते चले जाता है और जो कारण बनता है हमारी नये विषय की खोज का, एक विषय अंत हुआ नहीं की दूसरे की तयारी का बिगुल हम पहले ही बजा चुके होते है अंतर्मन में..
पहले हमने स्थूल  सूक्ष्म, काल्पनिक अकाल्पनिक जगत के बारे में चर्चा की. अध्ययन करते समय मैंने अणु परमाणु की गेहेनता जाननी चाही. निष्कर्ष रूपी बिंदु यह रहा की स्थूल देह का निर्माण पञ्चमहाभुतो से हुआ है उसी प्रकार सूक्ष्म देह का निर्माण विद्युदणूओ की विद्युत उर्जा से हुआ उसकी प्रकार प्रेत शरीर, भाव शरीर या अन्य शरीरों का समीकरण क्या है? विगत लेख में हमने देखा की बिंदु के संयोग से सुक्ष्मतिसुक्ष्म रेणु और इस से अणुओ के उर्जा कोण की परिसीमाएं तैयार हुई.

 सूक्ष्म देह परमाणु उर्जा से निर्मित है पर कैसे निर्माण होता है अणु परमाणु का? क्या भेद है इनमे ? आईये थोडा स्मरण करे स्कुल डेस जब हम भौतिकी या रसायन शास्त्र का पठन किया करते थे. अब जल (H2O)का सूत्र तो सभी कों याद होगा. एक उदजन एवं दो ओक्सिजन परमाणुओ से जलजन की निर्मिति होती है. अर्थात स्पष्ट हुआ की अणु परमाणुओं से बने है. परमाणुओ के आपस में भींचने वाली शक्ति विद्युत चुम्किय शक्ति है. ये जैसे ही एके दूसरे के करीब आते है आकर्षित हो कर भींच जाते है. परन्तु प्रत्येक की अपनी एक अलग सत्ता और अपना एक अलग अस्तित्व है. क्युकी ये कुछ ही के साथ लिपटते है तो कुछ से नहीं. इसे विज्ञान Power connectivity कहता है.

परमाणुओ का ये नैसर्गिक आकर्षण अपने आप में चकित करने वाला और रोचक है. इनका ये शक्ति संचय निविड है..इस गुढ़ विषय पर कभी और चर्चा करेंगे. परमाणुओ कों एक दूसरे से भींचने वाली ये शक्ति विद्युत उर्जा की भाववाचक तरंगे है. इसका मतलब परमाणु एक दूसरे से भाववाचक स्थिति में भींच कर मूर्त जगत की इकाइयों का निर्माण कर देते है जिन्हें हम अणु संबोधित करते है.
अब मै एक विशिष्ट तथ्य की ओर आप सब का ध्यान केंद्रित करना चाहूंगी. हम सभी के मन में ये प्रश्न जरुर आता है की प्रेत शरीर और सूक्ष्म शरीर में क्या भेद है ? प्रेत देह ईथर के कणों से, सूक्ष्म देह की एस्ट्रल के कणों से रचित हुए है ठीक जेसे स्थूल देह भौतिक कणों से निर्मित हुए है.
भौतिक परमाणु                               
इर्थर परमाणु                         
सूक्ष्म परमाणु 

उपरोक्त आकृति में आप देखेंगे की तीन गोले एक के अंदर एक बने हुए है. पहली परत भौतिक परमाणु की है, दूसरी परत इर्थर परमाणु की, और तीसरी परत सूक्ष्म परमाणु कों दर्शाती है. इस प्रकार एक अणु का काल्पनिक चित्र कुछ इसी प्रकार से होगा. एक के अंदर एक होने के बावजूद इनकी अपनी अलग सत्ता और अस्तित्व है.

जिस प्रकार अणु का ये सिद्धांत बाह्य ब्रम्हांड में लागू है उसी प्रकार हमारी देह में ये अणु घनीभूत होकर विभिन्न प्रकार की देह धारण कर अंतर ब्रम्हांड में अपनी सत्ता बनाए हुए है. प्रत्येक देह के ये कण अति सूक्ष्म से सूक्ष्म होते है और सवर्था भिन्न होने के साथ साथ विपरीत धर्म के होते है. इसे धूम्र विज्ञानं के माध्यम से और आसानी से समझा जा सकता है. एक तरह से ये आपस में जुड़े हुए है यु भि कहा जा सकता है. और यही वजह है की प्रेत आत्मा और सुक्षात्मा का अस्तित्व प्रथक होता है. ब्रम्हांड में ऐसे कणों का अस्तित्व हमेशा  संकलित रूप में नहीं रहता ये बिखरे हुए होते है. और जब तक ऐसे कण बिखरे रहेंगे तब तक हम ना उसे देख पाते है और ना इसकी तस्वीर उतार सकते है. पर ज्यो ही ये अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति, संकल्प शक्ति एवं एक्रग्रता से अपने अपने बिखरे हुए कणों कों एकत्रित करते है अपने अकार कों स्पष्ट कर देते है. और उनका अस्तित्व हमारे सामने प्रकट हो उठता है. पर ये कोई हमारी आपकी मर्जी अनुसार नहीं होता... याद रहे ये केवल उनकी इच्छा पर निर्भर है. एसी स्थिति किसी विशेष उद्देश्य पर ही बनती है या हम तंत्र के माध्यम से निर्माण करते है.
इसका एक रोमांचक उदाहरण मै प्रस्तुत करना चाहूंगी की विभिन्न कण ब्रम्हांड में बिखरे हुए रहते है यद्यपि हम प्रेत आत्माओ के प्रकटीकरण के विभिन्न किस्से हमने बचपन से सुन रखे है की अचानक जोर्रो से हवा चलने लगती है, दरवाजे खड खड की ध्वनि करने लागते है, जग में रखा पानी छलक जाता है इत्यादि, तो होता यु है की अणु सर्व व्याप्त है. जब इर्थर परमाणु निविड होने लगते है और अगर उसी स्थान पर पञ्च तत्वों में से कोई भि तत्व के परमाणु वहां विद्यमान होंगे तो वे आपस में विपरीत धर्म के होने के कारण टकरा कर तत्व विशेष के कारकत्व पैदा कर देंगे. जेसे अग्नि कणों से आग लग जाना, वायु कणों से जोरो से तूफान सि स्थिति निर्मित होना या जल कणों से वर्षा होना पर ये तभी तक होंगे जब तक इनका आपस में टकराते रहंगे.

तंत्र के माध्यम से ब्रम्हांड में विद्यमान अनंत परमाणुओ की शक्ति इनके अधिष्ठात्री देवी देवताओ के पास होती है. इसीलिए सीधे इन्हें प्रसन्न कर ब्रम्हांड में अपनी चेतना कों उनकी चेतना से जोड़ कर एक सूत्र स्थापित किया जा सकता है. और उस सूत्र से वे सारे लाभ प्राप्त किये जा सकते है जो इनके अंतर्गत आते है. हमने विगत लेख में ही इस् तथ्य कों आत्मसात किया था की बिंदु – जब परमाणु एक स्थान पर निविड हो जाते है

तंत्र में साधना और सिद्धांत का समन्वय विषय कों अत्यंत सरल कर देता है. उपरोक्त तकनिकी भाग का ज्ञान होने से किसी भि साधना में सफलताए दुगनी हो जाती है. क्युकी तांत्रिक शक्ति के साथ योग बल का तादात्म्य स्थापित होने पर एक विशेष प्रकार की मनोमयी प्राण ऊर्जा निर्मित होती है. पर ये उर्जा ब्रम्हांड में परावर्तित होकर एक विद्युत चुम्बकीय उर्जा से प्रेत देह के अर्थात इर्थरी परमाणुओ कों आकर्षित कर आकार लेने के लिए बाध्य कर देती है.

प्रेत आत्माओं का विस्तृत  ज्ञान हम प्रेत विज्ञानं की किसी श्रृंखला में देखेंगे. परिचय के स्तर पर ये आरंभिक बिंदु पर्याप्त है इनके आपसी भेद जानने के लिए..
अगले लेख में और नवीन रहस्य भरे तथ्यों के साथ... जल्द ही...
निखिल प्रणाम

सुवर्णा निखिल...   

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