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Tuesday, November 6, 2012

AATMVISHVAS VRIDDHI PRAYOG




Human life has many diverse aspects and every aspect in itself is full of specialities. Whatsoever field the person is working in, he gets various success according to his spiritual qualities and abilities.

May it be any person; in any field having some preliminary abilities is very essential element for fulfilment of desire or success in his work. Out of these essential elements one is “Self-Confidence”. Importance of self-confidence has been considered indisputably in modern era irrespective of the field. Self-confidence is the base for any work of person and it is ultimate factor in deciding the intensity of work or the amount of hard-work the person will put in for accomplishing the work. Self-confidence works as path for attaining any type of success for person. Trusting oneself and one’s own working ability, attaining complete dynamism is attaining Self-confidence. But how attainment of this type of self-reliant trust is possible? Presented prayog is one such prayog by which person can develop his self-confidence and beautify one important part of his life, by which sadhak can increase chances of his success in his field of work multiple times.
Though it is one day prayog but if sadhak wants to successively increase self-confidence, he can do this prayog more than one times. This prayog is easy and it does not involve any cumbersome procedures. Therefore any new entrant into sadhna field can also do this sadhna very easily. Sadhak can do this sadhna on any day. Sadhak can select any time in day or night for this sadhna.
After taking bath, sadhak should wear white dress. Sadhak should sit on white aasan facing north or east direction.




First of all sadhak should do Guru Poojan, chant Guru Mantra and pray to Sadgurudev for success in sadhna.
After this, sadhak should chant below mantra. Sadhak should chant 51 rounds of this below mantra. Sadhak can take rest after 21 rounds. Sadhak can use sfatik or Rudraksh rosary for chanting this mantra.

om shreem ham sham Namah

After completing Mantra Jap, sadhak should again chant one round of Guru Mantra. In this way prayog is completed. Sadhak should not immerse the rosary. It can be used by sadhak again for this prayog.



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मनुष्य के जीवन के विविध पक्ष है तथा सभी पक्ष अपने आप में विशेषताओं से परिपूर्ण है. व्यक्ति चाहे किसी भी क्षेत्र में हो अपने आत्मिक गुणों तथा योग्यता के अनुरूप वह विविध सफलताओ की प्राप्ति करता है.

चाहे वह कोई भी व्यक्ति हो, किसी भी क्षेत्र की कुछ प्रारंभिक योग्यताओं का होना निश्चय ही आवश्यक अंग है कोई भी मनोकामना की पूर्ति के लिए या अपने कार्यों की सफलता के लिए. इसी आवश्यक अंगों में से एक है ‘आत्मविश्वास’. आधुनिक युग में आत्मविश्वास की महत्ता को निर्विवादित रूप से स्वीकार किया गया है. चाहे वह कोई भी क्षेत्र क्यों न हो. आत्म विश्वास व्यक्ति के किसी भी कार्य के लिए एक आधार होता है की वह कार्य कितनी तीव्रता से हो सकता है या उस कार्य के लिए व्यक्ति अपने कितने प्रयास को देना पसंद करेगा. आत्म विश्वास व्यक्ति को किसी भी प्रकार की सफलता के लिए एक पथ का कार्य करता है. यूँ खुद के ऊपर तथा कार्य क्षमता के ऊपर विश्वास पूर्ण गतिशीलता को प्राप्त करना ही आत्मविश्वास को प्राप्त करना है. लेकिन इस प्रकार का आत्म केंद्रित विश्वास की प्राप्ति किस प्रकार से संभव है? प्रस्तुत प्रयोग एक ऐसा ही प्रयोग है जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने आत्मविकास का विकास कर सकता है तथा अपने जीवन के एक महत्वपूर्ण अंग को निखार सकता है, जिसके माध्यम से साधक अपने कार्य के क्षेत्र में सफलता प्राप्ति की संभावना को कई गुना बाधा सकता है.
वैसे तो यह एक दिवसीय प्रयोग है लेकिन साधक अगर चाहे तथा अपने आत्मिक विश्वास का उत्तरोत्तर और भी विकास करते रहना चाहे तो इस प्रयोग को वो एक से ज्यादा बार भी कर सकता है. यह प्रयोग सहज है तथा इसमें ज्यादा विधि विधान आदि नहीं है, अतः कोई भी साधना क्षेत्र में प्रविष्ट नया व्यक्ति भी इस साधना को सहजता से सम्प्पन कर सकता है.
यह साधना साधक किसी भी दिन को कर सकता है. इस साधना में साधक दिन या रात्रि का कोई भी समय का चुनाव कर सकता है.
साधक स्नान आदि से निवृत हो कर सफ़ेद वस्त्र को धारण करे. साधक को अपना मुख उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ कर के सफ़ेद आसन पर बैठना चाहिए.
साधक सर्व प्रथम गुरुपूजन करे तथा गुरु मंत्र का जाप कर सदगुरुदेव से साधना में सफलता के लिए प्रार्थना करे.
इसके बाद साधक निम्न मंत्र का जाप करे. साधक को निम्न मंत्र की ५१ माला जाप करना है. साधक २१ माला के बाद कुछ देर विश्राम ले सकता है . इस मंत्र के जाप के लिए साधक स्फटिक या रुद्राक्ष माला का प्रयोग कर सकता है.

ॐ श्रीं हं शं नमः
(om shreem ham sham namah)

मंत्र जाप पूर्ण होने पर साधक को फिर से एक माला गुरु मंत्र की करनी चाहिए. इस प्रकार यह प्रयोग पूर्ण होता है. साधक माला का विसर्जन न करे तथा भविष्य में भी अगर कभी यह प्रयोग करना हो तो व्यक्ति इस माला का प्रयोग कर सकता है.

****NPRU****

2 comments:

kamal tanwar said...

agar diksha na li ho to fir gurumantra ka jap kse kre

Taiyakes said...

jai guru dev,

after 21 rounds when take rest was it ok to stand and walk before continue again remaining mala