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Friday, November 2, 2012

SOUNDARYA SIDDHI PRAYOG



Beauty is definitely an amazing part of life which cannot be ignored from any point of view. May it be any field of life, beauty of life is an important part of daily chores of person’s life. As it has been said multiple numbers of times that beauty is the basic form of life, real form of life. Beauty takes one person to state of absolute purity where there is no impurity. This procedure is called Soundarya (Beauty) attainment procedure. There may be many world-views of various people regarding the parameters of beauty in today’s era. But our sages and saints did not confine definition of beauty to body only rather they gave equal importance to both outer and inner beauty. Inner beauty means cleansing of our inner elements which is our subtle/astral creation. The one which is visible is in external form, is in physical form but it is also necessary to have beauty in inner form. And when there will be purity inside then it also starts exhibiting external transformation. Often, our sages and saints have devised various types of prayogs related to Soundarya sadhnas so as to reorient sadhaks towards this view and emotional platform and let them understand this novel definition of beauty. Prayog presented here also belongs to the same category which works so as to enhance the inner and outer beauty of sadhak. It cleanses the inner astral creation of sadhak and enables the flow of happiness in mind. Besides this, physically it develops glow and radiance on the face of the person. In this manner, person can enhance both external and internal beauty at the same time. There is increase in self-confidence of sadhak and he starts getting results in both spiritual and materialistic life.
Sadhak should do this prayog on any Friday.
Sadhak should do this prayog after 10:00 P.M in night.
First of all sadhak should take bath and with happy mind wear the well-decorated clothes  .Sadhak can use any type of and any colored clothes. If possible, sadhak should apply Itr (perfume).Sadhak should sit on yellow colored woolen aasan and sadhaks should keep drinking water in any container in front of him. First of all sadhak should do Guru Poojan and Guru Mantra. After that sadhak should chant 21 rounds of the below mantra. Sadhak should use sfatik and Rudraksh rosary for mantra Jap.

Om shreem sham hreem saundarya siddhim dehi dehi Namah

After mantra Jap, sadhak should drink the water kept in container. After that, sadhak should chant 1 round of Guru Mantra. In this way, this prayog is completed.
Sadhak should immerse the rosary in river, pond or ocean.


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निश्चय ही सौंदर्य जीवन का एक अद्भुत अंग है जिसे किसी भी द्रष्टि से नकारना असंभव ही है. चाहे वह जीवन का कोई भी क्षेत्र हो, व्यक्ति का सौंदर्य उसके जीवन की रोजिंदा क्रियाकलाप में एक महत्त्वपूर्ण भाग है. जेसे की कई कई बार कहा गया है की सौंदर्य जीवन का मूल स्वरुप है, वास्तविक स्वरुप है. सौंदर्य व्यक्ति को विशुद्धता की तरफ ले कर जाता है, जहां पर कोई अशुद्धि न हो. इसी प्रक्रिया को सौंदर्य प्राप्ति की प्रक्रिया कहा जाता है. सौंदर्य के मापदंड आज के युग में क्या है, इस पर कई प्रकार के द्रष्टिकोण विभिन्न लोगो के हो सकते है. लेकिन हमारे ऋषिमुनियों ने सौंदर्य की परिभाषा मात्र दैहिक ही नहीं वरन सौंदर्य की पूर्णता में जितना महत्त्व बाह्य सौंदर्य को दिया है, उतना ही आतंरिक सौंदर्य को भी दिया है. आतंरिक सौंदर्य का अर्थ है, हमारे अंतर तत्वों की शुद्धि जो की हमारी अपनी सूक्ष्म रचना है. जो भी द्रश्यमान है वह बाह्य रूप से है, स्थूल रूप से है लेकिन आतंरिक रूप से भी तो सौंदर्य होना अनिवार्य है ही. और जब अंदर विशुद्धता होगी तो वह बाह्य रूप से भी रूपांतरण को प्रदर्शित करने ही लगती है. प्रायः सौंदर्य साधनाओ से सबंधित विविध प्रकार के प्रयोग साधक की इसी द्रष्टि तथा भावभूमि की और ले जा कर उसको सौंदर्य की एक नूतन ही परिभाषा समजाने के उद्देश्य से हमारे ऋषि मुनियों ने किया था. प्रस्तुत प्रयोग भी उसी क्रम में है, जो की साधक के आतंरिक तथा बाह्य दोनों ही सौंदर्य को निखारने के कार्य करता है. साधक की आतंरिक सूक्ष्म रचना का शुद्धिकरण कर के उसको चित में प्रशन्नता का संचार करता है, साथ ही साथ शारीरिक रूप से भी व्यक्ति के चहरे की रोनक, दीप्ती तथा उज्जवलता का विकास करता है. इस प्रकार व्यक्ति एक ही साथ अपने बाह्य तथा आतंरिक सौंदर्य को निखार सकता है. साधक के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है तथा उसे जीवन के आध्यात्मिक तथा भौतिक दोनों ही क्षेत्र में अनुकूलता की प्राप्ति होने लगती है.   
यह प्रयोग साधक किसी भी शुक्रवार को करे.
साधक को यह प्रयोग रात्री काल में १० बजे के बाद करना चाहिए.
सर्व प्रथम साधक को स्नान आदि से निवृत हो कर प्रसन्न मन से सुसज्जित वस्त्र धारण करने चाहिए. इसमें साधक किसी भी प्रकार के तथा किसी भी रंग के वस्त्रों का प्रयोग कर सकता है. अगर संभव हो, साधक को इत्र लगाना चाहिए. इसके बाद साधक पीले रंग के उनी आसन पर बैठ जाए. तथा साधक अपने सामने किसी पात्र में थोडा पीने का पानी रख दे.
साधक सर्व प्रथम गुरु पूजन तथा गुरु मंत्र का जाप करे. उसके बाद साधक निम्न मंत्र की २१ माला मंत्र जाप करे. मंत्र जाप के लिए साधक स्फटिक या रुद्राक्ष माला का प्रयोग करे.

ॐ श्रीं शं ह्रीं सौन्दर्य सिद्धिं देहि देहि नमः

(om shreem sham hreem saundarya siddhim dehi dehi namah)

मंत्र जाप के बाद साधक पात्र में रखे हुवे पानी को पी जाए. इसके बाद साधक को गुरु मंत्र की एक माला मंत्र जाप करना चाहिए. इस प्रकार यह प्रयोग पूर्ण होता है.
साधक को माला का विसर्जन नदी, तालाब या समुद्र में करना चाहिए. 

****NPRU****

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