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Tuesday, November 20, 2012

IKSHAPOORTI TEEVRA SHAMSAAN PRAYOG



It is an interesting fact to ponder over that what would happen if there is no desire left in humans? Then he will not remain a human being. Definitely, desire forms the prime base of dynamics of human. It makes them operational. In life, person can have different types of desires and there is no fault in it till the time they are morally right. Desire of person is the deciding factor in fixing his aim and path to achieve it.While walking on that path he fulfils his desire and gets satisfaction. But sometimes fructification of desire is not easily possible for person. As a result person gets anxious towards his desire/wish. Actually there are some desires and wishes whose fulfilment is not only essential but it is also desired that they are fulfilled with in fixed time fame. In such a case, if the person’s desires are not fulfilled then happiness of person translates into sorrow/misery and entire life is spent under dark cloud of unfulfilled desire.
In human life, we have got various types of desires and we try our best to fulfil them too but sometimes effort does not yield any results, we in spite of putting our best effort are not able to get desired results. Considering this fact in mind, our ancestors took the help of tantra for fulfilment of desires/wishes and attained complete happiness and prosperity in their lives. Tantra is one Vigyan, one arrangement in which accurate procedure leads to success in one definite work. And this fact has been experienced by our ancient sages and saints. And to fulfil this aspect in better way, they gave desire/wish fulfilment prayogs to society.
In today’s busy world, person, though willing, are not able to do various types of anushthaans and long sadhnas and get disappointed. But there are so many gems in field of Tantra doing which sadhak can fulfil his desire. These are very much hidden prayogs which consume very less time.

Prayog presented here is one such Shamshaanik Vidhaan. Despite of it being Shamshaanik Vidhaan neither fearsome situation is created for sadhak nor it requires special Vidhaan. Those sadhaks who do not have time or who are not able to do long anushthan or sadhna procedures, this prayog is blessing for them. If there is any such work which is not getting accomplished despite your trying again and again or there is any obstacle in it or it gets stopped due to one reason or the other then this prayog should be done by sadak.If sadhak has some special desire which is not getting fulfilled then also he can do this prayog.
This prayog is easy in many respects. There are no necessary rules for dress, aasan, rosary, sadhna articles etc.
Sadhak can do this prayog on any day of Krishn paksha.
Sadhak should select some appropriate cremation ground which remains generally uninhabited.
It should be done after 10 in the night.
Sadhak should bring one wine bottle to cremation ground. Remember that sadhak should not enter cremation ground. Sadhak should stand outside on the gate or nearby, keep the bottle in his hand and chant below mantra mentally 108 times.

om hoom shamshaanaadhipataye vighnanivaaran kuru kuru siddhim siddhim namah

After reciting mantra, sadhak should speak out his desire or work in which he is facing problem. After saying it 3 times mentally, sadhak should go inside and keep the bottle or throw it from outside.
As far as possible sadhak should try that no one sees him while keeping the bottle or throwing it.
After that Sadhak should go home. While going home, sadhak should not look behind.

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यह भी एक सोचने वाला तथ्य है की अगर मनुष्य में इच्छा ही ना रह जाए तो? फिर तो वह मनुष्य ही नहीं रह जायेगा. निश्चय ही इच्छा ही मनुष्य की गतिशीलता का मुख्य आधार है. जीवन में एक व्यक्ति की अनेको अनेक इच्छाएं हो सकती है, और इसमें किसी भी प्रकार का कोई दोष नहीं जब तक की व्यक्ति की इच्छाएं नैतिक है. मनुष्य की इच्छाएं ही उसका लक्ष्य निर्धारण करती है तथा उसका मार्ग भी. उसी मार्ग पर चलते हुवे वह अपनी इच्छा की पूर्ति करता है तथा संतोष भाव को प्राप्त होता है. लेकिन कई बार व्यक्ति के लिए यह सहज ही संभव नहीं हो पता है, अपनी इच्छा को ले कर या मनोकामना को ले कर व्यक्ति कई बार गंभीर चिंतनमय होता है तथा वास्तव में कई इच्छाएं तथा मनोकामना एसी होती है जिसका पूर्ण होना आवश्यक होता है, और उससे भी आवश्यक यह भी होता है की वह एक निश्चित समय के दायरे में भी पूर्ण हो जाये. एसी स्थिति में अगर व्यक्ति की इच्छा की पूर्ति नहीं होती तो उसके जीवन की खुशियाँ दुःख में परावर्तित हो जाती है तथा सारा जीवन एक अभिलाषा के अंतर्गत ही व्यतीत होने लगता है जो की अपूर्ण है.
खेर, मनुष्य जीवन में हम कई प्रकार की इच्छाओं से ग्रस्त रहते है तथा हम अपनी इच्छाओ की पूर्ति के लिए यथासंभव प्रयत्न भी करते है लेकिन कई बार परिणाम शून्य आता है, हम चाह कर भी अथाक प्रयत्न करने पर भी इच्छित परिणाम को प्राप्त कर नहीं पाते है. इसी चिंतन के साथ हमारे पूर्वजो ने अपनी इच्छा पूर्ति के लिए तथा मनोकामना पूर्ति के लिए तंत्र का सहारा लिया था तथा अपने जीवन में पूर्ण सुख भोग और ऐश्वर्य को प्राप्त किया था. तंत्र एक विज्ञान है, एक प्रबंध है जिसमे उपयुक्त क्रिया करने पर एक निश्चित कार्य के लिए सफलता मिलती ही है. और यह अनुभव हमारे प्राचीन ऋषि मुनियों का भी रहा है. तथा इसी पक्ष को और भी उत्तम रूप से निखारने के लिए उन्होंने मनोकामना पूर्ति एवं इच्छा पूर्ति के लिए विविध प्रकार के प्रयोग समाज में प्रदान किये.
आज के व्यस्त युग में विविध प्रकार के अनुष्ठान तथा लंबी साधनाओ को व्यक्ति चाह कर भी सम्प्पन नहीं कर पाते है तथा निराश हो कर बैठ जाते है लेकिन तंत्र के क्षेत्र में एक से एक रत्न है जिसको सम्प्पन करने पर साधक अपनी अभिलाषा को पूर्ण कर सकता है. साथ ही साथ यह अत्यधिक कम समय में सम्प्पन होने वाले अति गुप्त प्रयोग भी है.
प्रस्तुत प्रयोग भी ऐसा ही एक स्मशानिक विधान है. स्मशानिक विधान होते हुवे भी साधक को इसमें भय खाने वाली कोई स्थिति नहीं बनती, ना ही इसमें कोई ज्यादा विशेष विधि विधान की अनिवार्यता है. जिन साधको के पास समय नहीं बचता या जो व्यक्ति लंबे अनुष्ठान और साधना क्रम नहीं कर सकते है ऐसे व्यक्तियों के लिए यह प्रयोग एक वरदान स्वरुप प्रयोग ही है. अगर कोई ऐसा कार्य है जिसे बार बार करने पर भी हो नहीं पता हो या विघ्न आ जाता हो या किसी न किसी वजह से कार्य रुक जाता हो तो तब यह प्रयोग साधक को करना चाहिए. या फिर साधक की कोई विशेष गंभीर इच्छा हो जो की पूरी नहीं हो रही हो तब साधक इस प्रयोग को कर सकता है.
 यह प्रयोग कई द्रष्टि से सहज है. इस प्रयोग में वस्त्र, आसान, माला, उपकरण आदि की कोई अनिवार्य नियम नहीं है.
साधक इस प्रयोग को कृष्ण पक्ष में किसी भी दिन कर सकता है.
साधक को इसके लिए कोई उपयुक्त मरघट या स्मशान का चुनाव करना चाहिए जो सामान्यतः निर्जन रहता हो.
इसके लिए समय रात्री में १० बजे के बाद का ही रहे.
साधक रात्री में स्मशान पे एक दारु की बोतल ले कर जाये. साधक को स्मशान में अंदर नहीं जाना है यह याद रहे. साधक स्मशान के बाहर ही दरवाज़े पे या पास में ही खड़े हो कर बोतल को हाथ में रख कर निम्न मंत्र का मन ही मन १०८ बार उच्चारण करे.
ॐ हूं शमशानाधिपतये विघ्ननिवारण कुरु कुरु सिद्धिं सिद्धिं नमः
(om hoom shamshaanaadhipataye vighnanivaaran kuru kuru siddhim siddhim namah)
मंत्र का उच्चारण कर लेने के पश्च्यात साधक को अपनी मनोकामना या काम बोलना चाहिए जो की साधक को करने में परेशानी आ रही है. ३ बार मन ही मन यह बोल कर साधक उस बोतल को स्मशान अंदर जा कर रख दे या बाहर से ही फेंक दे.
यथा संभव यह कोशिश करनी चाहिए की साधक को बोतल रखते समय या फेंकते समय कोई व्यक्ति देखे नहीं.
साधक इसके बाद घर वापस आजाये, घर आते वक्त साधक को पीछे मुड कर नहीं देखना चाहिए.

****NPRU****

4 comments:

shaurabh mishra said...

bhai,
bahut hi aasaan sadhna hai....
mai kar ke aapko result bataugaa

thx
shaurabh mishra

Saurabh said...

Sir agar bottle fekenge to bottle toot sakti hai....??? us se koi pareshani to nahi....

gagan said...

bhai ji aaj mai apse kuch puchna chahta ho kyu ki mai bhout parshan ho or mai IKSHAPOORTI TEEVRA SHAMSAAN PRAYOG karna chahta ho ........ muje bataiye ki mai es prayog ke bare mai apne ghar mai to bata sakta ho na or agar ye paryog karte time muje toke ya kuch bole ki ye kya kar rahe ho to mai kya karo kyu ki i am live in delhi or delhi mai police and other persons is very stick hote hai es liye or krishan paksh kab hota hai or es prayog ka koi sidefact to nahi hai na............or ek bat es mai likha hai ki one bottle wisky bt mai samja nahi ek bottle choti, medium,big please jald se jald reply kijeye pls bhai mai apke reply ka wait kar raha ho ...............my mail id is gaganmadaan01@sify.com

ravi said...

nagender bhai ji aaj mai apse kuch puchna chahta ho kyu ki mai bhout parshan ho or mai IKSHAPOORTI TEEVRA SHAMSAAN PRAYOG karna chahta ho ........ muje bataiye ki mai es prayog ke bare mai apne ghar mai to bata sakta ho na or agar ye paryog karte time muje toke ya kuch bole ki ye kya kar rahe ho to mai kya karo kyu ki i am live in delhi or delhi mai police and other persons is very stick hote hai es liye or krishan paksh kab hota hai or es prayog ka koi sidefact to nahi hai na............or ek bat es mai likha hai ki one bottle wisky bt mai samja nahi ek bottle choti, medium,big please jald se jald reply kijeye pls bhai mai apke reply ka wait kar raha ho ...............my mail id is saibellstone@gmail.com