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Monday, February 11, 2013

BHAGVATI NEEL SARASWATI SADHNA


 
 ‘Sarvageeshwaro martyoo Lokvashyo Dhaneshwarah Rane Dhoote Vivaade Ch Sarvyoshitaam Shatrvo Daastam Yaanti Sarveshaam Vallabhah Sada Tasy Gehe Sthira Lakshmirvaani Vaktre Vaseddhruvam Tasya Sarvarthasiddhih syaadhydadhmanaai Vartete’ ||
Shri Tara is famous as second Mahavidya. Through her sadhna, sadhak becomes aware of the realities of the world and sadhak attains the disinterest element (means away from infatuations of world) and attains the accomplishment of ucchatan from all.
Shri Tara Mahavidya is also worshipped in the form of Shri Vidya and best medium for accomplishing worship of Shri Vidya is Shri Yantra.
Name Shri Yantra does not mean that only Shri sadhna or Tripura sadhna can be done on it rather it is king of yantra and many sadhnas can be accomplished on it.And definitely, all sadhnas related to Mahavidyas can be done on it.
Ruler of Shri Tara Yantra is also Maa Tara and it is capable of giving all fruits in yantra form i.e. Dharma, Artha, Kaam and Moksha. Tara Mahavidya is known by various names of Taarini, Neel Saraswati, and Ugra Tara in scriptures.
And it is better if sadhna of her special form is done in any auspicious Muhurat and if Muhurat is on fifth day of spring season and that too the fifth day of Navratri, it is best.
Brother and sisters, as you know there is custom of worshipping Maa Saraswati on Basant Panchami. Do you know the fact that one of the forms of Maa Tara is provider of knowledge too, which is known by the name of Neel Saraswati. There is no match of this sadhna for developing minds of students and children, for enhancement in knowledge and for progress in each and every field…..
So on this auspicious Muhurat of Basant Panchami here is Neel Saraswati sadhna for all of you…..
Sadgurudev has told in his book Tara Sadhna that person who does sadhna of Bhagwati Tara attains the power to impress others. Besides this, he keeps on attaining success in each field, may be it is related to knowledge; it is court case or affliction from enemy.
From Vedic times till now, all sages and saints have accepted in unison that Mahavidya sadhna is best among best sadhnas of world and they have appreciated Tara sadhna a lot. This sadhna is important and fortune-providing one.
From five letters Mantra of Maa Tara, person becomes competent in speaking fluently and becomes unparalleled in field of education. And what to talk about amazingness of Neel Saraswati sadhna, it is said that after birth of child, if after making him bath , beej alphabet of this mantra is written on its tongue by Doorva, then he is able to learn all the scriptures by heart, he attains victory in entire world and attains the complete accomplishment in field of knowledge.(
But it is necessary that the person writing the mantra should have accomplished that mantra)
Though this mantra is accomplished after chanting it 1 lakh times and that too following complete procedure. But when it is done in special Muhurat through special procedure, it also provides success. Since it has been given by Sadgurudev and it has been said by him then it is boon for us and we should do it definitely.
When there is auspicious day of Basant Panchami and sadhna Vidhaan of Neel Saraswati, then I know that my brothers and sisters can’t resist themselves not doing this sadhna….
Sadhna Articles….
Asthgandh, yellow or red flowers, rice, sindoor, Rudraksh or yellow Agate rosary. If it is possible, then Tara Yantra or Shri Yantra or Tara idol and if nothing is available, just write
“AING” beej on yellow cloth with asthgandh and do its poojan…
Sadhna Procedure….
On day of Basant Panchami, between 4:00 a.m. to 6:00 a.m. wear yellow dress and sit on yellow aasan facing north/ east direction…
Do Guru Poojan, chant 4 rounds of Guru Mantra and then perform Ganesh and Bhairav poojan and attain the blessings from Gurudev for success in sadhna and take resolution…
Start the sadhna…..


Meditation:-
Attaatthaasintramatighorroopaam |
Vyaaghraambraam Shashidhraam Ghanneelvarnaam,
Katreerkpaalkamlaasikraam Trinetraam----
Maaleedhpaadshvagaam pranmaami Taaraam ||



Viniyog: - Om Asya Mahavidya Mantrasya Brahma Rishi Anushtup Chhand, Saraswati Devta, Mamaabheesht Siddhyarthe Jape Viniyogaay.

KAR NYAS
AING ANGUSHTHAABHYAAM NAMAH
AING TARJANIBHYAAM NAMAH
AING SARVANANDMAYI MADHYMABHYAAM NAMAH
AING ANAAMIKAABHYAAM NAMAH
AING KANISHTKABHYAAM NAMAH
AING KARTAL KARPRISHTHAABHYAAM NAMAH

HRIDYAADI NYAS
AING HRIDYAAY NAMAH
AING SHIRSE SWAHA
AING SHIKHAYAI VASHAT
AING KAVACHHAAY HUM
AING NAITRTRYAAY VAUSHAT
AING ASTRAAY PHAT

Neel Saraswati Mantra-----
aing hreem shreem kleem aing bloom streem neeltare sarswati draam dreem kleem bloom sah. aing hreem shreem kleem sauh sauh (सौ: सौ: ) hreem swaha
Chant 11 rounds of above mantra. Then wear the rosary in neck and while taking asthgandh from Doorva, write “AING” mantra on your tongue. Again chant 4 rounds of Guru Mantra. Dedicate the mantra to Gurudev and again attain the blessings of Gurudev for success in sadhna.
“Nikhil Pranaam”
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
'सर्व्व्वागीश्वरो मर्त्यो लोक़वश्यो धनेश्वरः रणे धूते विवादे च सर्वयोशिताम शत्रवो दासतां यान्ति सर्व्वेशाम वल्लभः सदा तस्य गेहे स्थिरा लक्ष्मीर्व्वानी वक्त्रे वसेद्ध्रुवं तस्य सर्वर्थासिद्दी: स्याध्यद्ध्न्मनासी वर्तते' ||

  श्री तारा द्वितीय महाविद्या के रूप में प्रसिद्ध हैं इनकी साधना से साधक को संसार की वास्तविकता का बोध होता है तथा साधक अनाशक्ति तत्व को प्राप्त कर सर्वोच्चाटन की सिद्धि प्राप्त करता है.
श्री तारा महाविद्या की उपासना श्री विद्या के रूप में भी जाती है, और श्री विद्या की उपासना का सर्वश्रेष्ठ साधन है श्री यंत्र .
अब श्री यंत्र से मतलब ये नहीं की इस पर इस पर सिर्फ श्री साधना या त्रिपुरा साधना ही संपन्न की जाये, ये तो यंत्रराज हैं और इन पर तो अनेकों साधनाएं संपन्न की जा सकती है और महा विद्या की तो सारी साधनाएं इस पर कर सकते हैं .
श्री तारा यन्त्र की अधिष्ठात्री पीठशक्ति के देवता भी मा तारा हैं और ये यंत्रात्मक रूप में सभी फलों को देने में समर्थ हैं यानि धर्म, अर्थ, काम,मोक्ष . तारा महाविद्या ही शास्त्रों में तारिणी, नील सरस्वती, उग्रतारा आदि नामों से जानी जाती हैं
और यदि किसी शुभ मुहूर्त में और इनके विशिष्ट रूप की साधना की जाये तो उत्तम और यदि वो मुहूर्त बसंत ऋतु की पंचमी हो और साथ गुप्त नवरात्री की पंचमी तो अति उत्तम.
बहनों भाइयों वैसे भी बसंत पंचमी पर माँ सरस्वती की पूजा का विधान है,और क्या आप जानते हैं कि माँ तारा का एक रूप विद्या दायिनी का भी है, और जिन्हें हम नीलसरस्वती के नाम से जानते है. छात्रों और बच्चों के बुद्धि कि प्रखरता के लिए, विद्या के विकास के लिए और प्रत्येक क्षेत्र में उन्नति के लिए इनकी साधना का कोई जोड़ नहीं-----
तो बसंत पंचमी जैसा शुभ मुहूर्त आप और नील सरस्वती साधना............. :)
 
    सदगुरुदेव ने अपनी किताब तारा साधना में बता है कि भगवती तारा कि साधना से व्यक्ति दूसरों को प्रभावित करने वाली शक्ति प्राप्त करता ही है साथ में प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता चला जाता है चाहे वो विद्या का हो कोर्ट कचहरी का मामला हो या किसी भी शत्रु से पीड़ित हो हर उसे सफलता ही मिलती है.
वैदिक काल से आज तक सभी ऋषि-मुनियों ने एक ही स्वर में ये स्वीकार किया है कि संसार की सर्वोत्कृष्ट साधनाओं में महाविद्या साधना सर्वश्रेष्ट हैं. और तारा साधना की तो भूरी-भूरी प्रशंसा की है. ये साधना महत्वपूर्ण एवं पूर्ण सौभाग्यदायक हैं.
माँ तारा का पंचाक्षर मन्त्र से व्यक्ति धारा-प्रवाह बोलने में सिद्धहस्त होता है और शिक्षा के क्षेत्र में अद्वितीय बनता है और नील सरस्वती साधना की तो बात ही कुछ ओर है कहा जाता है की जब बच्चा जन्म ले तो उसे स्नान करवाके दूर्वा से उसकी जिव्हा पर इस मंत्र के बीजाक्षर को लिख दिया जाये तो उसे समस्त शास्त्र कंठस्थ हो जाते हैं और समस्त संसार में उसे विजय प्राप्त होती है और विद्या के क्षेत्र में पूर्ण सिद्धि प्राप्त होती है (
किन्तु लिखने वाले ने पहले इस मंत्र को विधिवत सिद्ध किया हो ये अनिवार्य है)
वैसे इस मंत्र की सिद्धि एक लाख जप और वो भी पूर्ण विधान से करने पर मिलती है किन्तु एक विशिष्ट मुहूर्त में एक विशिष्ट विधि से की जाये तो भी सफलता मिलती ही है चूँकि सदगुरुदेव द्वारा प्रदत्त और उनका ही कथन है तो हमारे लिए तो ये ब्रह्मवाक्य और वरदान है तो हमे निश्चित ही इस साधना को करनाही चाहिए.
बसंत पंचमी का शुभ दिन और नील सरस्वती जैसी साधना विधान होगा तो मै जानती हूं मेरे प्रिय भाई और बहन बिना साधना किये रह ही नहीं सकते........
साधना सामग्री----
अष्ट गंध, पीले या लाल पुष्प, अक्षत, सिन्दूर रुद्राक्ष या पीले पीले हकीक की माला, यदि हो सके तो तारा यन्त्र या श्री यंत्र या तारा विग्रह और यदि ये कुछ भी न हो तो एक पीले वस्त्र पर अष्ट गंध से
"ऐं " बीज लिख कर उसका पूजन कर लीजिए........
साधना विधान---
बसंत पंचमी के दिन प्रातः ४ से ६ बजे के मध्य पीले वस्त्र धारण कर पीला ही आसन उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएँ.....
गुरु पूजन कर चार माला गुरुमंत्र की करके गणेश पूजन और भैरव पूजन संपन्न करके गुरुदेव से साधना में सफलता का आशीर्वाद प्राप्त करें, तथा संकल्प लें....
साधना प्रारम्भ करें----

ध्यान-----
अटटाटटहास्निर्तामतिघोररूपाम् |
व्याघ्राम्बराम शशिधरां घननीलवर्नाम,
कर्त्रीकपालकमलासिकराम त्रिनेत्रां--
मालीढपादशवगां प्रणमामि ताराम ||


विनियोग:- ॐ अस्य महाविद्या मन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषि अनुष्टुप छंद, सरस्वती देवता, ममाभीष्ट सिध्यर्थे जपे विनियोगाय.

करन्यास
ऐं अङ्गुष्ठाभ्यां नमः
ऐं तर्जनीभ्यां नमः
ऐं सर्वानन्दमयि मध्यमाभ्यां नमः
ऐं अनामिकाभ्यां नमः
ऐं कनिष्टकाभ्यां नमः
ऐं करतल करपृष्ठाभ्यां नमः

हृदयादिन्यास
ऐं हृदयाय नमः
ऐं शिरसे स्वाहा
ऐं  शिखायै वषट्
ऐं कवचाय हूं
ऐं नेत्रत्रयाय वौषट्
ऐं अस्त्राय फट्

नील सरस्वती मंत्र---
 
ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं ह्रीं ऐं ब्लूं स्त्रीं  
नीलतारे सरस्वती द्रां द्रीं क्लीं ब्लूं स: |
ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौं: सौं: ह्रीं स्वाहा
|






aing hreem shreem kleem HREEM aing bloom streem neeltare sarswati draam dreem kleem bloom sah. aing hreem shreem kleem sauh sauh (सौ: सौ: ) hreem swaha

उपरोक्त मंत्र की ११ माला मंत्र करें. फिर माला गले धारण करले तथा दूर्वा से अष्टगंध लेकर अपनी जिव्हा पर "ऐं" मन्त्र का अंकन करें---- तथा गुरुमंत्र की चार माला पुनः करे. फिर मंत्र गुरुदेव को समर्पित कर साधना की सफलता का पुनः आशीर्वाद प्राप्त करें------
अब यदि संभव हो तो ११ दिन तक १-१ माला इस मंत्र की करेंगे तो अति उत्तम.....

“निखिल प्रणाम”

****RAJNI NIKHIL****
****NPRU****

6 comments:

sanjay sharma said...

kindly give this sadhana in english, so that we could read right pronounciation of this mantra.thanks

Shivenndra Mishra said...

excellent work you people are doing. thank you very much to share your knowledge.

Shivenndra Mishra said...

excellent work you people are doing. thank you very much to share your knowledge.

Shivenndra Mishra said...

thank you very much to share your knowledge.

Dr Amit said...

Pranam,
In hindi version of the mantra there is an extra Hreem.
Kindly guide which one is correct Hindi / English.
Pls help as I will be doing this sadhna today.
Regards

Amit

Dr Amit said...

Pranam,
I did the sadhana using the Hindi version of the Mantra.
few queries:-
1. Rudraksha mala used in this sadhana to be worn or to be immersed in water?
2. I wrote the beej mantra on cloth. after sadhana the cloth has to be submersed in water?
Jai Gurudev
regards

Amit