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Monday, June 13, 2011

SABAR TANTRA MAHAVISHESHANK-मनोमय जगत की साधनाए जो सदगुरुदेव से प्राप्त हुयी


सृष्टि अपने आपमें अनंत रहस्यों को अपने आपमें समाये हुए हे. जो भाग हम अपनी आँखों से देख रहे हे वह तो मात्र एक बूँद ही हे जो इस महासागर का एक अत्यधिक न्यून हिस्सा हे. जिस प्रकार दूध में धृत होता तो हे लेकिन वह सामान्य अवस्था में दिखाई नहीं देता ठीक उसी तरह इसी स्थूल जगत में समाहित हे कई जगत और यु कहा जाए की अनंत जगत और अनगिनत रहस्य. यु तो सूक्ष्म जगत साधको के मध्य प्रचलित रहा हे लेकिन जब साधक सूक्ष्म जगत में निर्गद द्वार से प्रवेश करता हे और जेसे जेसे अभ्यास बढाता जाता हे, आगे की जटिल क्रियाओ के माध्यम से वह जगत भेदन में सफलता प्राप्त कर लेता हे. यु मेने भी परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी से सूक्ष्म जगत से आगे के कई रहस्य समजे. जिसमेसे एक था मनोमय जगत 
मनोमय जगत का आधार सूक्ष्म जगत की अंतिम अवस्था दिव्यतम जगत और माया जगत के मध्य स्थित हे. इस प्रकार यह जगत अपने आपमें कई कारणवश अत्यधिक महत्वपूर्ण हे. इस जगत में प्रवेश के बाद साधक को अत्यधिक महत्वपूर्ण साधनाओ का ज्ञान दिया जाता हे जो की अत्यधिक सहज ही होती हे लेकिन उसका प्रभाव अचूक होता हे. दूसरी ओर ये साधनाए इस प्रकार से निर्मित होती हे की वह सहज प्रयास में ही साधक को सफलता प्रदान करने में समर्थ होती हे.
यह जगत की सबसे बड़ी विशेषता यह हे की मनोमय जगत अनंत मन से जुड़ा हुआ होता हे तथा मन ही केन्द्रीभूत होने से इस जगत की गति मनोमय ही होती हे. यु इस जगत में साधना करने पर साधक अपने मन की गति से साधना समाप्त कर सकता हे यु एक क्षण में वह चाहे तो सेकडो साधनाए भी सम्प्पन कर सकते हे. इस लिए अत्यधिक कम लौकिक समय में ही व्यक्ति साधना सम्प्पन हो सकता हे. यह क्रियाए इतनी सहजभी नहीं हे. इस क्रियाओ को मात्र सदगुरुदेव के चरणों में बैठ कर ही समजा जा सकता हे.
मनोमय जगत की अलौकिक और विचित्र साधनाओ में सभी प्रकार की साधनाए समाहित होती हे. चारो तरफ बिखरा हुआ शुभ्र स्वच्छ प्रकाश, मन में जिस भाव या जिस विचार को उत्प्पन किया जाता हे वह तुरंत स्थूल रूप धारण कर लेता हे. इस प्रकार के दिव्य जगत की साधनाए कितनी महत्वपूर्ण होती हे वह तो सिर्फ अनुमान ही लगाया जा सकता हे. सदगुरुदेव निखिलेश्वरानंदजी की कृपा से उस दिव्य जगत में साबर साधनाओ का भी अभ्यास उनके शिष्यों द्वारा होता आया हे. कुछ एसी ही अलौकिक व् दिव्य साबर साधनाए आगे में प्रस्तुत कर रहा हू जो मुझे सदगुरुदेव निखिलेश्वरानंदजी की कृपा से वह दिव्य मनोमय जगत में प्राप्त हुयी थी


ध्यान प्राप्ति साधना:
यु तो ध्यान मात्र अभ्यास का विषय हे और जेसे की सदगुरुदेव ने कहा हे की तुरंत ही ध्यान लग जाए एसी कोई साधना नहीं हे, यह एक अभ्यास हे जो निरंतर करते रहने से ही सिद्धि प्रदान करता हे, लेकिन मुझे सदगुरुदेव से यह साधना प्राप्त हुयी थी जिसके विषय में उन्होंने कहा था की यह साधना करने पर साधक की ध्यान में आगे बढ़ाने की गति अत्यधिक तीव्र हो जाती हे और साधक कुछ दिनों तक इसका अभ्यास करता रहे तो उसे पूर्ण ध्यान की प्राप्ति इस साधना के सहयोग से अत्यधिक कम समय में हो जाती हे

यह साधना ब्रम्ह मुहूर्त में ही की जाती हे. दिशा उत्तर रहे. वस्त्र और आसान सफ़ेद हो. साधक को इसमे किसी भी प्रकार की माला का उपयोग नहीं करना हे. पद्मासन लगाने के बाद साधक आँखे बांध कर निम्न मंत्र का उच्चारण मन ही मन तब करना हे जब वायु कुम्भक अवस्था में हो. कहने का मतलब ये हे की साँस अंदर लेने के बाद इस मंत्र का मन ही मन उच्चारण कर के बहार निकले

ओम कृष्णाय ध्यान प्रदाय कर जगत पतये नमः
मंत्र का उच्चारण करते वक्त आँखे बंद रहे और आतंरिक त्राटक भृकुटी के मध्य रहे. रोज नियमित रूप से इस मंत्र का ब्रम्ह मुहूर्त में मात्र १ घंटे जाप करना हे. यह प्रयोग २१ दिन का हे. जिसे किसी भी वार से शुरू किया जा सकता हे.
विचारशून्य मस्तिस्क के लिए:
कई बार अत्यधिक विचारों से मन बोजिल हो जाता हे और मानसिक संतुलन बिगडने लग जाता हे. यु कई बार साधक साधना के दौरान कई प्रकार के विचारों से त्रस्त रहता हे व् मानसिक उर्जा का क्षय यथा योग्य न हो कर के विभिन्न दिशाओ में मन भटक जाता हे जिससे हताशा और निराशा जेसी गंभीर मानसिक बीमारी स्वाभाविक हे. साबर साधना की उच्च कोटि की साधनाओ में से एक गुप्त साधना हे जो विचारशून्य मानस के लिए अचूक हे और जो सिर्फ मनोमय जगत के साधको के मध्य प्रचलित रही हे
यह साधना को गुरुवार से शुरू करे. यु यह साधना या तो मध्य रात्रि में १२ बजे के बाद की जाती हे लेकीन अगर यह संभव न हो तो साधक इसे ब्रम्ह मुहूर्त में करे.
अपने सामने लोबान धुप को जला ले, साधना के दौरान साधना कक्ष में साधक के अलावा और कोई न हो. वस्त्र इसमे श्वेत रहे दिशा दक्षिण. फिर साधक श्वेत आसान पर बैठ कर एक हरा कपड़ा या हरा धागा अपनी दाहिनी बांह पर बांध ले और उसके बाद निम्न मंत्र का जाप २ घंटे तक करे. इस साधना में जप काल के दौरान पसीना आना स्वाभाविक हे
उलेउल्लाही उलेउल्लाही उलेउल्लाही
यह साधना ७ दिन तक करनी हे. ७ दिन तक दरगाह या मजार पर जा कर साधना सफलता के लिए दुआ करनी चाहिए. ८ वे दिन वह धागा या कपडा अपने हाथ से अलग कर के माजर या दरगाह पर चडा दे.
तंत्र शक्ति जागरण साधना:
हर एक तत्र साधक चाहता हे की वह अपनी तांत्रिक साधनाओ में आगे बढे और बढाता ही जाए लेकिन यु होता नहीं हे, इसका कारण यह होता हे की शरीर में निहित स्व तंत्र शक्ति सुषुप्त अवस्था में होती हे, यु मनुष्य खुद ही तंत्र स्वरुप हे क्यूँ की वह जिस ब्रम्ह की खोज कर रहा होता हे, मनुष्य उसका ही तो अंश हे. यु यह शक्ति की प्राथमिक साधना हे जिसे करने पर साधक के अंदर शौर्य व् निडरता का आभास होने लगता हे तथा उसका मन पहले की अपेक्षा ज्यादा लक्ष्य केंद्रित होता हे
यह साधना मंगलवार से शुरू होती हे. जिसमे दिशा उत्तर रहे. वस्त्र काले हो. भूमि पर ही आसान रहे, अगर साधक चाहे तो स्मशान भस्म का आसान भी बना सकता हे लेकिन और कोई आसान न रहे. यह साधना रात्रि में १.३० बजे के बाद शुरू करे.  अपने सामने शिव का कोई चित्र स्थापित करे और अगरबत्ती जलाए. उसके बाद निम्न मंत्र की रुद्राक्ष माला से ११ माला जाप करना हे
ओम शंकर जटा खोले शक्ति जरे स्वाहा
यह क्रम ७ दिन तक बना रहे. साधक इन ७ दिनों में अपने आप में वह बदलाव अनुभव करने लगेगा जो की हर एक तांत्रिक साधना की भावभूमि हे.
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The world lays infinite secrets in itself.  The part of the world we are watching is just as small as drop of an ocean. The way milk owns butter in itself but it is invisible in its normal state, exactly the same way the sthool jagat or world contains so many worlds or we can say infinite worlds and innumerable secrets. Well, the Sukshm Jagat had remained famous among sadhak but when Sadhak enters into Sukshm Jagat from Nirgad dwar and when step by step the exercise increases, he may get success through some difficult processes of Jagat bhedan. This way, I even understood some secrets beyond Sukshm Jagat from Swami Nikhileshwaranandji. Among which one was Manomay Jagat.
The base of the Manomay Jagat is in-between last state of Sukshm Jagat which is divyatam Jagat and Mayajagat. This way, Manomay Jagat is very important in many ways. After entering into this world Sadhak is granted many important sadhanas which are easy in nature but the results are completely accurate. On other hand the sadhanas are meant this way which can give success in Spontaneous efforts.
The biggest specialty of this Jagat is that it is connected to infinite mind and the mind is center of this world so the continuity of this world is speed of mind. This way, a sadhak can complete sadhana with speed of mind in this world and thus in a single moment hundreds of sadhana can be done. So, in very short span of material world’s time, one can complete sadhana. The process is not so simple. Such processes can only be learned under guidance of component sadguru.
The divine and mysterious sadhanas of this Manomay Jagat lays every aspect. White moonlight like light spread on every direction, any thought brought into mind get instant tangible form. How important could be sadhanas of such Divine place could only be imagined. With grace of Sadgurudev Nikhileshwaranandji, Sabar sadhanas are also being understood by his disciples in that divine world. Some of such divine sadhanas I am presenting here which I received in manomay jagat with divine grace and blessings of Sadgurudev Nikhileshwaranandji
Dhyan Prapti Sadhana
Though Meditation is a subject of practice and as Sadgurudev said that there is no sadhana which can give u instant meditation, this is practice which is applied into routine practice, can give accomplishments but I received this sadhana from sadgurudev in which regards he told that by completing this sadhana, the speed of success in meditation process gains boost and if sadhak keeps on practicing thus the complete meditation can be gain through collaboration of the sadhana in very short span of time.
This sadhana can only be done in Bramh Muhurt. Direction should be north. Cloth and Asan should be white. No need of any rosary. After being in padmasana, sadhak should recite the mantra in mind when air is in kumbhak position. It means after breathe in, chant mantra in mind and then only breathe out.
Om Krishnaay dhyaan pradaay kar jagat pataye namah
While mantra chanting, eyes should be closed and the concentration should be on third eye. Regularly the mantra chanting should be done for 1 hour in Bramh muhurt. This Prayog is for 21 days and could be start on any day.
For thoughtless mind:
Sometimes mind becomes dull with many thoughts and mental balance gets spoiled. This way during sadhana even, sadhak remains Stricken with thoughts and use of mental energy get spoiled with mind getiing into various directions. Through which mental diseases like stress and depression take place naturally. In sabar sadhana there is an accurate secret  sadhana   which can provide thoughtless mind and which remained famous among sadhak of Manomay jagat.
This sadhana should be started on Thursday. This sadhana is generally done after 12 in midnight but if that is not possible, the sadhana can be done in Bramh Muhurt.
Light Loban dhoop infront of you; there should be no one in sadhana room except sadhak during sadhana. Cloth should be white and direction, south. Then sadhak should sit on white asan and tie q green cloth or thread on his right hand and then chant mantra for 2 hours. Sweating is natural during this sadhana.
Uleullahi uleullahi uleullahi
The sadhana should continue for 7 days. For 7 days visit Majar or mosque and pray for success in sadhana. On 8th day day, remove that cloth or thread from your hand and place it in Majar or mosque.
Tantra Shakti activation Sadhana:
Every tantra sadhak wish to go ahead in his sadhanas but often this doesn’t happen. The reason behind this situation is the power of Swa tantra remains in dormant state. Human himself is tantra because the bramh he is looking for, they are part of the same.  This way, this sadhana is primary sadhana of shakti when performed can fill gallantry and fearlessness in sadhak and his mind even stays concentrate on his targets.
The sadhana should be started on Tuesday. Direction should be North. Cloths should be black. Aasan should be on land, if sadhak wishes, asan can also be prepare from smashan bhasm but other asans are prohibited. This sadhana should be started after 1:30 in midnight. Place a photograph of lord shiva infront of you and light Incense sticks. After that chant 11 rosary of mantra with rudraksh rosary.
Om Shankar Jataa Khole Shakti jare Swaha

The sadhana should be continuing till 7 days. In these 7 days, sadhak himself will start experiencing the change which is preliminary requirement for tantric sadhana.
****NPRU****

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