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Sunday, June 12, 2011

MAHAKALI SADHNA- ULTIMATE SADHANA FOR KNOWING SECRET/HIDDEN DIVINE YOG


काल की गति सूक्ष्म से अति सूक्ष्म हैं . काल  केबल कोई समय मात्र नहीं हैं , काल सजीव व् निर्जीव की गतिशीलता की पृष्ठभूमि हैं . काल गति के हरेक बिंदु में असंख्य घटनाए समाहित हैं . इन्ही को हम काल योग या काल खंड कहते हैं . काल खंड में एक साथ हजारो प्रक्रियाए चलती रहती हैं , पर जिस भी प्रक्रिया का प्रभुत्व ज्यादा होता हे उसका असर हम पर प्रभाव  ज्यादा रहता हे. इसी तरह अगर हम घटनाओ का अनावरण करे तो हरेक प्रक्रिया के लिए हमारे शास्त्रों में देवी एवं देवता निर्धारित हैं . आप ब्रम्हा, विष्णु, महेश, वरुण, इन्द्र, लक्ष्मी, सरस्वती, महाविद्या या किसी भी देवी देवता को देख लीजिए, प्रकृति में उनके कार्य निश्चित रूप से होते ही हैं .
 b        अगर हम इसी बात को आगे लेकर  बढे तो यह एक निष्कर्ष हैं  कि  पृथ्वी में जो भी गतिशीलता  हैं  या, काल खंड में समाहित जो भी घटनाए  हैं उन हरएक घटना के स्वामी देव या देवी होते ही हैं.
हर एक क्षण में हमारे जीवन पर कोई न कई देवी देवता का प्रभाव पड़ता ही हैं . इसी को कहा गया हैं कि हरेक क्षण में कोई न कोई देवी या देवता शरीर में चैतन्य होते ही हैं . साधनाओ के द्वारा किसीभी देवी एवं देवताओ को सिद्ध कर के उनके द्वारा हमारी मनोकामना पूर्ति  ,कार्य पूर्ति व इच्छा पूर्ति करवा सकते हैं . मगर हम ये नहीं जानते की किस क्षण में कौन देव / देवी  चैतन्य हैं , और अगर हैं  भी तो हम ये नहीं जानते कि  प्रकृति आखिर कौन सा कार्य उस क्षण में करेगी और उसका हम पर क्या प्रभाव पड़ेगा.
अत्यंत उच्चकोटि के योगी, इस प्रकार का कालज्ञान रखते हैं , उन्हें मालूम रहता हैं कि  कौन से क्षण में क्या होगा और उसका परिणाम किसके ऊपर क्या असर करेगा. कौनसे देवी या देवता उस क्षण में जागृत होंगे और कौन से देवी देवता उस क्षण अलग अलग मनुष्य में चैतन्य रहते हैं . इसी के आधार पर वे भविष्य में कौन से क्षण में किसके साथ क्या होगा और उसे अलग अलग व्यक्तियों  के लिए कैसे  अनुकूल या प्रतिकूल बनाना हैं  इस प्रकार से अति सूक्ष्म ज्ञान रहता हैं .
जैसे कि  पहले कहा गया  हैं , कि काल खंड में घटित असंख्य घटनाओ में से किसी एक घटना का प्रभाव सब से ज्यादा रहता हैं  हर एक व्यक्ति के लिए वो अलग अलग हो सकता हैं . और हम उसी को एक डोर में बांधते हुए  "जीवन" नाम देते हैं . दरअसल हमारे साथ एक ही वक़्त में सेकड़ो घटनाए घटित होती हैं  पर उनके न्यून प्रभाव के कारण हम उसे समझ नहीं पाते. अब जिस घटनाका प्रभाव सबसे ज्यादा होगा उसके देवता को अगर हम साधना के माध्यम से अनुकूल करले तो उस समय में होने वाले किसी भी घटना क्रम को हम आसानी से हमारे अनुकूल बना सकते हैं . पर हम इतने कम समय में कैसे समझ  ले की क्या घटना  हैं  देवता कौन हैं  प्रभाव कैसा रहेगा आदि आदि ...उच्चकोटि के योगियों के लिए ये भले ही संभव हो लेकिन सामान्य मनुष्यों के लिए ये किसी भी हिसाब से संभव नहीं हैं . और इसी को ध्यान में रखते हुए , एक ऐसी  साधना का निर्माण हुआ जिससे अपने आप ही हर एक क्षण में रहा देव योग अपने आप में सिद्ध हो जाता हैं  और देव योग का ज्ञान होता रहता हे जिससे कि ये पता चलेगा कि कौन से क्षण में क्या कार्य करना चाहिए. अपने आपही क्षमता आ जाती हैं  की उसे कार्य के अनुकूल या प्रतिकूल होने का आभाष पहले से ही मिल जाता हैं  और देवता उसके वश में रहते हैं  
काल की देवी महाकाली को कहा गया हैं  और काल उनके नियंत्रण में रहता हैं . इस साधना के इच्छुक लोगो को साधना के साथ साथ शक्ति चक्र पर त्राटक का भी अभ्यास करना चाहिए

ये साधना रविवार या फिर किसी भी दिन शुरू की जा सकती हैं  इस साधना में साधक को काले वस्त्र ही धारण करने चाहिए.
इस साधना में महाकाली यन्त्र व काले हकीक  माला की जरुरत रहती हैं  साधना काल के  के सभी नियम इस साधना में पालन करने चाहिए .

रात्रि में ११ बजे के बाद साधक स्नान कर के, काले वस्त्र धारण कर के काले उनी आसन पर बेठे. अपने सामने महाकाली का चित्र स्थापित  हो. यन्त्र की सामान्य पूजा करे. दीपक और लोबान धूप जरुर लगाए.
फिर निम्न लिखित ध्यान करे

मुंड माला धारिणी दिगम्बरा
शत्रुसम्हारिणी विचित्ररूपा
महादेवी कालमुख स्तंभिनी
नमामितुभ्यम मात्रुस्वरूपा

इसके बाद साधना में सफलता के लिए महाकाली से प्राथना करे एवं निम्न लिखित मन्त्र का २१ माला जाप करे.

क्लीं क्लीं क्रीं महाकाली  काल सिद्धिं     क्लीं क्लीं क्रीं  फट  .

११ दिन तक प्रति  दिन साधना निर्देशित जप  करे  . इसके बाद माला को १ महीने तक धारण करे फिर इसे नदी में विसर्जित करदे. यन्त्र को पूजा स्थान में रखा जा सकता हैं  
    the continuity of the Kaal is very micro micro. Kaal is not just a time only, it is a platform of mobility for living and non livings. there are myriad events are there in a single dot of kaal. we term this as Kaal yog or Kaal Khand.  in Kaal khanad, there goes thousands processes altogether running, but the one event which is most heavier on others, those effect us. same way if we analyse those events, we find there are god and goddess mentioned in our scriptures for every task. you can take bramha, vishnu, mahesh, varuna, indra, laxmi, saraswati, mahavidhya or any god or goddess, they are adjoined with nature for particular task.
                 this way we find a particular effect of any god-goddess in every moment of the life. and this has also been said that in every moment one or another god will be active in the body. with the help of sadhana we can take favour of the god or goddess and can fulfill our wishes. but we do not know that which god or goddess will be active in which moment. and if we know, then we do not have knowledge that what nature is going to do in very next moment and what the effect of the same would be.

very high accomplished yogis, do have this type of knowledge of kaal, they do know that in which moment what will happen and what and on whom would be effect of that. which god or goddess would be active in that moment and which god or goddess will be active in individuals body. on the base of this only, they get to know that in which moment what is going to happen and on whom it will give positive or negative effect, such a micro knowledge they do have.
As it has been told earlier, that in every moment one event out of every event would be having a biggest effect. it differs for every individual. and we term it as a life when we bind them altogether. actually, there would be hundreds of event happening with us in a single moment but the effect of those are so less that we do not understand it. now, the incident which is going to be affect most, if we please the god or goddess of that event, then we will be able to make that incident in our favour for sure. but in such less time how we can understand that what is event, who is controlling god, what is result etc.for very high accomplished yogi, this would be possible. but for a common men, it is not.  and to take this thing into mind, our sages made one such sadhana, that every devyoga of every moment becomes positive it self and the knowledge is possible of dev yog, through which we can understand that in which moment what work should be done. we get the ability to understand that the work in particular moment is going to be positive or negative and god gives comfort.

the goddess of Kaal is said to be Kali and Kaal stays in her total control. the people who wish to do this sadhana should also practice tratak on shakti chakra.

This sadhana could be started on Sunday or else any day of the week. one should wear black cloths only during sadhana. This sadhana requires Mahakali yantra and black Hakeek rosary. All the rules of the sadhana are applied.

after 11pm in the night, sadhak should take bath and wear black cloths. should then sit on black Uni Aaasan. the picture of mahakali should be in-front. worship the yantra. light a lamp and Loban dhoop. then meditate through following lines.



Mundmala dharini Digambara
Shatrusamharini Vichitraroopa
Mahadevi Kaal mukh Stambhinim
Namami tubhyam matru swaroopa

After this pray for success to Mahakali and pray for success and chant 21 rosary of following mantra


Kleem Kleem Kreem Mahakali kaal siddhim
Kleem Kleem Kreem Phat.


Repeat this for 11 days. after that the rosary should be worn for 1 month and then dropped in river and Yantra could be worshiped by placing it in pooja sthan.
****NPRU****

1 comment:

KRISHAN said...

Respected Arifji,

Very usefyul sadhna u've given. Tnks for sadhnas by such easy methods.