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Tuesday, June 28, 2011

AAVAHAN-11



सन्याशी के कदम तेज़ी से आगे बढ़ रहे थे. शाम घिरने को थी और तब तक सन्याशी पहोच चूका था अपनी मंजिल तक. एक छोटासा क़स्बा था, जिसमे कुछ कच्चे और कुच्छ पक्के मकान बने हुए थे. कोई आम छोटे गांव की तरह ही वह था, नगर से थोड़े दूर सन्याशी के कदम रुके और उसने देखा उस जगह को जिसके बारे मे उसने न सिर्फ अघोरी से बल्कि कई और लोगो से भी सुना था..सालो से होती आ रही तीक्ष साधनाओ का गढ़, जिसे एक समय चिरकूट कस्बा भी कहा जाता था, लेकिन आज ये बहोत बदल चूका है, यहाँ तक की नाम भी. जोपडियो की जगह ले ली है नए मकानोंने, इंसानों को इस वसाहत की पहले के विवरणों से जैसी भयंकर कल्पना मन मे होती थी अब ऐसा नहीं है. सब बदल सा गया है. यही सब देखा के सन्याशी ने सोचा की  सायद लुप्त हो गयी है यहाँ की योगिनिया और साथ ही साथ अब सायद नहीं रह गयी यहाँ पे उनकी मायावी साधनाऐ...डर के मारे कई सालो तक यहाँ पे कोई नहीं आया और किसीको पता भी नहीं चला की ये तो अब एक आम गांव की तरह ही बन गया है. मुस्कान के साथ वो आगे बढ़ा, गांव के बहार ही उसने रात बिताने का निर्णय किया लेकिन फिर कुछ सोचता हुआ सा गांव के अंदर जाने लगा. रस्ते मे ही एक व्यक्ति ने उसे रोक कर प्रणाम किया और बैठने का आदर्श किया. कुछ देर बैठने के बाद सन्याशी ने रुकने की जगह की चिंता जताई. साथ के व्यक्ति ने कहा यहाँ पे कई परिवार सन्यासी को अपने घर मे आसरा देना अपना सौभाग्य समजते है. आप चलिए, मे आपकी व्यवस्था कर देता हू...इसी के साथ वह व्यक्ति उठा और एक तरफ आगे बढ़ गया... सन्याशी भी उसके पीछे पीछे चल पड़े. थोड़ी दूर पर ही एक कच्चा मकान बना हुआ था, व्यवस्था कुछ एसी थी की एक कमरा थोड़ी ऊंचाई पर बना हुआ था जो की घर से थोडा अलग था और वहाँ जानेका रास्ता भी अलग ही था. जो व्यक्ति उन्हें यहाँ लाया था, वह उसी कमरे के दरवाज़े के पास रुका और थोडा सा किवाड़ खोल के सन्याशी को कहा की आपकी व्यवस्था यही हो जाएगी. सन्याशी ने अभिवादन मे एक स्नेह युक्त मुस्कान उस व्यक्ति की और देखा. वह व्यक्ति किवाड़ से दूर हो गया और सन्याशी अब दरवाज़े के बिलकुल पास आ गए. दरवाज़े पे हाथ लगते ही एक तेज़ हवा ने उनको कमरे मे धकेल दिया और दरवाज़ा अपने आप ही बंद हो गया...सन्याशी इसके लिए तैयार नहीं था हडबडाहट मे वह दरवाज़े की और भागे लेकिन वापस उन्हें किसीने खिंच लिया...सन्याशी ने कमरे मे पीछे मुडके देखा...दिए की पतली सी रोशनी मे जो कुछ भी दिखाई दिया उससे सन्याशीके दिल की धडकन थम सी गई. छोटा सा हवनकुंड, उसके पास नुकीला त्रिशूल गड़ाया हुआ. आस पास कुमकुम हल्दी और न जाने क्या क्या पदार्थ बिखरे से, शराब की खाली पड़ी बोतल, नरमुंड, उफ़ और इस सब के बिच मे एक आसान पर वीरासन मे बैठी हुई २५-२६ वर्ष की अत्यधिक सुन्दर योगिनी, उसने एक लाल रंग का चौगा लपेटा हुआ था जिसमे से उसके कमनीय बदन का अत्यधिक गौरा रंग साफ़ नज़र आ रहा था, खूबसूरती को वह मुट्ठी मे बंधे हुई थी, कपाल पर अत्यधिक लंबा सिन्दूर का लाल तिलक. ध्यानस्थ मुद्रा मे बैठी हुई उस कोई काल्पनिक मूरत सी उस रूपसी ने अपनी आँखे धीरे से खोली और संयाशी को देख के मुस्कुरादी...सन्याशी अभी भी सदमे मे ही थे, निश्चय ही वह व्यक्ति जिसने उसे यहाँ छोड़ा था, इस योगिनी से परिचित है और मुझे षड़यंत्र मे फसा कर यहाँ लाया गया था, मगर किस लिए ? तभी उस रूपसी ने अट्टाहास्य किया जैसे के वह सन्याशी की मूर्खता पे व्यंग कर रही हो. सन्याशी को काटो तो खून नहीं सी स्थिति हो गयी यही सोचके की पता नहीं अब आगे उसका क्या होगा..
Steps of sanyshi were going really fast. It was about to be sun set and sanyashi were reached to his destination. It was just Small Township, in which there were some mud and some concrete houses. It was just like other common villages, the step of Sanyashi stopped at a very small distance of village. He looked at the place about which he heard not only from aghori but from many other people to… center of years long Tikshna Sadhana which was called as Chirkoot Kasbaa at some time, but today it was changed, the name too. Huts were replaced by new houses, the description of the early humans living here were causing a horrible imagination about this place in mind but no more. Everything is changed. After observing all these, Sanyashi thought that it is extinct the Yoginis now and here, there is no more cause of their mysterious Sadhanas...no one have visited this place from years with reason of fear and nobody get to know that this now has become just an another village only.
With a smile he went ahead, He decided to stay outside of village for the same night but with wondering something, he stared getting in village. In middle of the way a person stop him and bowed & requested him sincerely to sit. After sitting a while sanyashi explained his worry to stay in village. The person accompanying him told ‘here, there are so many families which find it blessings if some guest monk stay at their house. You come; I just arrange it for you.’ With this the person stood up and started walking to particular direction...sanyshi too started walking on that person’s steps. At a small distance only there was a small house, it was built in such a way that one room was at a bit height then others which was a bit far from house and the way to that room was even separate.The person, who took sanyshi here, went to the door of the same room and while opening a bit he told sanyashi that your stay is arranged. For the appreciation, sanyashi looked at the person with an emotional smile. The person backed from the door and sanyashi came very close to the door. With a process of placing hand on the door,  wind throw him in and door closed by its own, sanyashi was not ready for this. He ran towards door in frustration but something again drawn him...sanyashi went back and started looking..whatever he looked in the thin light of the Ghee lamp, that cause a break in Sanyashi’s heart..Small Hawan Kund near buried edgy Trishul, there were Scattered Turmeric and vermillion nearby and other unidentifiable, empty bottle of wine, Human head skull, and in between all these sitting on aasan in viraasan position 25-26 years a very beautiful Yogini, she was in a long single red cloth which was showing a bright glowing colour of her beautiful body. She was holding beauty in her hand...a long mark of vermillion on forehead. In meditation posture like a image idol that beautiful yogini slowly opened her eyes and looking at sanyashi she smiled. Sanyashi was still in shock, definitely, the person, and the one who left him here was familiar with this Yogini that person brought him here with planned trap, but why? And at the same time that Yogini laughed loudly like she was kidding on the foolishness of the Sanyashi. Sanyashi went senseless in his mind with fear of unknown with wondering that what was about to happen with him now…

****NPRU****

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