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Friday, June 8, 2012

Divya Guru Kalp Sadhna - दिव्य गुरु कल्प साधना


सदगुरुदेव ने इस साधना के रहस्यों की विवेचना करते हुए कहा था की “यदि साधक अपने जीवन में पूर्णत्व प्राप्त करना चाहता है तो उसे इस साधना को अपने जीवन में संपन्न करना ही होगा.ये साधना सिद्धाश्रम के महायोगियों के मध्य प्रचलित है. जब भी किसी साधक को सद्गुरु अपने निर्देशन में उस परमपावन भूमि पर स्थायित्व देना चाहते हैं तो ,उसके पहले वो साधक के शरीर को जरा और व्याधि से मुक्त करने की क्रिया करते हैं,साधक के शरीर को दिव्य बना देते हैं जिसके फलस्वरूप वो सभी आपदाओं से ना सिर्फ बचा रहता है बल्कि पूर्ण निर्मलता के साथ यौवन को अपने में समेटे हुए निरंतर साधनात्मक ऊचाइयों की और अग्रसर रहता है.” जहा अन्य साधनाओं में बाह्य उपादान की भी आवशयकता होती है,वही इस साधना में जो निर्धारित क्रम है यदि साधक मात्र उसी को मर्यादित रूप से संपन्न कर ले तो.वो खुद अभूतपूर्व आश्चर्य में डूब जाता है. सभी प्रकार के रोगों से तो वो मुक्त होता ही है,साथ ही साथ पूर्ण कुण्डलिनी चक्रों के जागरण के साथ उसका कायाकल्प होता हुआ सिद्धाश्रम जाने का भी उसका मार्ग प्रशस्त हो जाता है.ये साधना पढ़ने मात्र के लिए नहीं अपितु प्रयोग करके देखने हेतु यहाँ दी गयी है.
इस साधना को किसी भी रविवार से प्रारंभ किया जा सकता है. ब्रह्म मुहूर्त में उठ कर स्नान आदि संपन्न कर श्वेत वस्त्र धारण कर ले और साधना कक्ष में श्वेत आसन पर बैठ जाये.सामने बाजोट पर सफ़ेद वस्त्र बिछा दे और उस पर सदगुरुदेव का चित्र स्थापित कर दे. चित्र के सामने निम्न यंत्र बनाकर उस पर अक्षत की एक बड़ी ढेरी बना ले और उस पर घृत का दीपक स्थापित कर दे. शुद्धिकरण के पश्चात गुरु ध्यान करे –

अज्ञान तिमिरान्धस्य ज्ञानांजन शलाकया
चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्री गुरूवै नमः.

फिर निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए गुरु चित्र को गंगा जल से स्नान करवाएं –
ॐनिं निखिलेश्वराय स्नानं समर्पयामी
फिर उन्हें साफ़ वस्त्र से पोछ कर उन्हें आसन रूप में पुष्प समर्पित करे. 
ॐनिं निखिलेश्वराय पुष्पं समर्पयामी 
फिर सुगन्धित धूप जलाये.
ॐनिं निखिलेश्वराय धूपं आघ्रापयामि 
तत्पश्चात गुरुचित्र के सामने ढेरी पर स्थापित गौघृत का दीप प्रज्वातिल करें .
ॐनिं निखिलेश्वराय दीपम्  दर्शयामी 
आखिर में खीर का नैवेद्य श्री सदगुरुदेव के चरणों में अर्पित करे.
ॐनिं निखिलेश्वराय नैवेद्यं निवेदयामी
 प्रयोग के लिए पूर्ण सिद्धासन या पद्मासन में बैठकर १२० माला १ दिन में अथवा २१-२१ माला ७ दिनों तक संपन्न करे. ये मंत्र जप स्फटिक माला से होना चाहिए और ये माला पहले कही प्रयोग न की हुयी हो. परन्तु यदि इसे अनुष्ठान रूप में संपन्न करना हो तो सवा लाख मंत्र जप होना चाहिए और मूल दीपक के बायीं और तिल के तेल का दीपक अखंड होना चाहिए. दृष्टि दीपक की लौ पर होनी चाहिए,बीच बीच में आप पलके झपका सकते हैं.मन्त्र के मध्य में ऐसा लगता है जैसे की आपकी रीढ़ की हड्डी में तीव्र जलन हो रही है.और ये दहकता लंबे समय तक होती है.आपकी नाभि और मूलाधार में स्पंदन प्रारंभ हो जाता है. और ये सब साधना काल में ही होता है.स्वप्न में आपको विचित्र से दृश्य दिखाई पड़ने लगते हैं,किसी गुफा,किसी वन,हिमालय आदि के दृश्य आपको दिखाई देते हैं.अष्टगंध की भीनी खुशबु आपके चंहु और आपको सुवासित करने लगती है. स्वतः ही ध्यान लगने लगता है और चेहरे के चारों और आभामंडल तीव्र होते जाता है.और पूर्ण अनुष्ठान के बाद तो जो प्राप्ति होती है उसे यहाँ नहीं लिखा जा सकता,वो तो स्वयं अनुभूत करने वाली उपलब्धि है.
मंत्र- ॐऐं ह्रीं श्रीं कुल कुण्डलिनी जाग्रय स्फोटय श्रीं ह्रीं ऐं फट्.
 OM AING HREENG SHREENG KUL KUNDALINI JAAGRAY SFOTAY SHREENG HREENG AING PHAT
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Sadgurudev told us while discernment of sadhna secrets “If sadhak wants to have  completeness in life then he must do this sadhna…This sadhna is very much famous among Sidhhashram Mahayogis. Whenever Sadguru is intended to keep any sadhak under instruction at this ultimate holy place, so they first make his/her body free from the old age and diseases. Actually they convert his normal body into divine body in resultant sadhak not only becomes more efficient to tackle all the issues but also maintain his youth with purity and step forward continuously towards sadhnatmak heights.” Where in other sadhnas so many external equipment are also required, but in this sadhna if sadhak finish all the given guidelines as in mentioned way, he himself will fall in great surprise. Its not only vanishes the diseases but also activates the each chakra of Kundalini along with rejuvenation and ultimately opens the path towards Siddhashram. Well I want to say something here i.e. this sadhna is not just for sake of reading but to do it practically also… (Share d experiences too) 

You can start this sadhna on any Sunday. In Brahma muhurt  (4 to 6 am) one should take shower and wear white clean cloths, should sit on a white asana. Then place a white cloth on small table for worship and establish Sadgurudev’s Picture on it. In front of it draw a following yantra and make a small heap of akshat (rice) and light a clarified butter (ghee) lamp. After purification proceed Guru dhyan --

Agyan timirandhasya gyananjan shalakaya
Chakshurunmilitam yen tasmai shri guruvai namah

Then chant the above mantra and slowing spinkle Ganga water on picture and

Om nim nikhileshvaraya snanam samarpayami
Then wipe it with clean cloth and offer fresh flowers on it.

Om nim nikhileshvaraya pushpam samarpayami
Then flame a fragrance aroma resin.

Om nim nikhileshvaraya dhupam aaghrapyami
Then after burn the lamp place on the heap

Om nim nikhileshvaraya deepam darshyami
At last offers Kheer (made up of milk, sugar and wheat flakes) sweet and sacrifice onto the holy feets of Sadgurudev.
Om nim nikhileshvaraya naivedyam nivedyami

For this one must sit in Padmasan or Siddhasan and should complete 120 roasaries in one day or 21-21 roasaries in 7 consecutive days. This mantra jap should be done only by crystal beads roasary. Importantly it should be fresh not to be used before. But if any one wants it to be done in Anushthan form (inception) then 125000 jap must have to complete in one go. And near original lamp, the sesame oil lamp should also be flame for whole the time till it’s get over. Your eye sight should be on the flame of lamp in between you can blink your eyes. While chanting you will feel damn irritation in spinal backbone and it will last long. Vibrations will start at ur navel point and Muladhar chakra. This will happen only during sadhna time. You will see strange dreams like, any caves, jungle, Himalaya etc scenes. You will feel a mesmerasing aroma (Ashtagandh) everywere around. Meditation would happen by your own and facial glow would increase day by day. And after completion what you will get can putforth in words..All that only you can experience it.

 OM AING HREENG SHREENG KUL KUNDALINI JAAGRAY SFOTAY SHREENG HREENG AING PHAT
 
   

                                                                                               
 ****NPRU****   
                                                           
 PLZ  CHECK   : -    http://www.nikhil-alchemy2.com/       

1 comment:

MUKESH SAXENA said...

divya nahin ye to divyatam sadhna di hai aapne bhaiyya.hum zarur ise sampann karenge,bas thoda sa sadhna ka sahi vatavaran ban jaaye......